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Griha Pravesh Muhurat 2026: जानें साल 2026 के शुभ गृह प्रवेश मुहूर्तIt takes 13 minutes... to read this article !

अपना खुद का घर होना हर इंसान का सबसे बड़ा सपना होता है। जीवनभर की जमा-पूंजी और अथक प्रयासों के बाद जब एक सपनों का आशियाना बनकर तैयार होता है, तो उसमें कदम रखने का एहसास बेहद खास होता है। सनातन हिंदू धर्म और वास्तु शास्त्र के अनुसार, नए घर में प्रवेश करने से पहले ‘गृह प्रवेश’ (House Warming Ceremony) की पूजा और शुभ मुहूर्त का पालन करना अत्यंत आवश्यक माना गया है।

गृह प्रवेश केवल एक पूजा नहीं है, बल्कि यह घर के भीतर मौजूद नकारात्मक ऊर्जा को दूर करके सकारात्मक ऊर्जा (Positive Energy), सुख, शांति और समृद्धि को आमंत्रित करने की एक वैज्ञानिक और आध्यात्मिक प्रक्रिया है। सही नक्षत्र, तिथि और वार को ध्यान में रखकर किया गया गृह प्रवेश परिवार के सदस्यों के लिए उत्तम स्वास्थ्य और सौभाग्य लेकर आता है।

यदि आपका नया घर वर्ष 2026 में बनकर तैयार हो रहा है या आप किसी नए फ्लैट/मकान में शिफ्ट होने की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए शुभ तिथियों की जानकारी होना बहुत जरूरी है। इस अत्यंत विस्तृत और प्रामाणिक लेख में हम आपको Griha Pravesh Muhurat 2026 की पूरी सूची, महीनेवार तिथियां, शुभ नक्षत्र, पूजा विधि और वास्तु से जुड़े कड़े नियमों के बारे में गहराई से बताएंगे।

1. गृह प्रवेश मुहूर्त का ज्योतिषीय आधार (Astrological Rules for Griha Pravesh)

किसी भी शुभ कार्य के लिए मुहूर्त निकालते समय हिंदू पंचांग के पांच अंगों— तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण का अध्ययन किया जाता है। गृह प्रवेश के लिए कुछ विशेष महीनों और नक्षत्रों को ही उत्तम माना गया है।

शुभ महीने (Auspicious Months)

वास्तु शास्त्र और ज्योतिष के अनुसार गृह प्रवेश के लिए माघ, फाल्गुन, वैशाख और ज्येष्ठ के महीने सबसे सर्वश्रेष्ठ माने जाते हैं।

  • माघ (जनवरी-फरवरी): इस महीने में गृह प्रवेश करने से धन और संपत्ति में अपार वृद्धि होती है।

  • फाल्गुन (फरवरी-मार्च): यह महीना परिवार में सुख, शांति और आपसी प्रेम बढ़ाता है।

  • वैशाख (अप्रैल-मई): वैशाख मास में नए घर में जाने से करियर और व्यापार में सफलता मिलती है।

  • ज्येष्ठ (मई-जून): इस महीने का मुहूर्त स्वास्थ्य और आयु में वृद्धि करता है।

वर्जित महीने (Inauspicious Months)

आषाढ़, श्रावण (सावन), भाद्रपद, आश्विन और पौष (खरमास) के महीनों में गृह प्रवेश पूरी तरह से वर्जित माना गया है। चातुर्मास के दौरान (जब भगवान विष्णु योग निद्रा में होते हैं) नया घर नहीं बसाया जाता है।

शुभ नक्षत्र और वार (Nakashtras & Days)

  • शुभ वार (Days): सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार गृह प्रवेश के लिए सबसे उत्तम दिन हैं। मंगलवार और रविवार को गृह प्रवेश करने से बचना चाहिए। शनिवार के दिन भी कुछ विशेष परिस्थितियों में ही गृह प्रवेश किया जाता है।

  • शुभ नक्षत्र: रोहिणी, मृगशिरा, उत्तरा फाल्गुनी, अनुराधा, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद, रेवती और स्वाती नक्षत्र नए घर में प्रवेश के लिए सबसे शुभ माने जाते हैं।

2. Griha Pravesh Muhurat 2026: महीनेवार शुभ तिथियों की सूची

वर्ष 2026 में नए घर में प्रवेश करने के लिए कई उत्तम मुहूर्त उपलब्ध हैं। पाठकों की सुविधा के लिए यहाँ जनवरी से लेकर दिसंबर 2026 तक के सभी शुभ गृह प्रवेश मुहूर्तों की महीनेवार (Month-wise) विस्तृत तालिका (Table) दी गई है:

जनवरी 2026 में गृह प्रवेश मुहूर्त

जनवरी के मध्य तक ‘खरमास’ (Kharmas) लगा रहता है, जिसमें कोई भी शुभ कार्य नहीं होता। 14 जनवरी (मकर संक्रांति) के बाद सूर्य के उत्तरायण होने पर शुभ मुहूर्तों की शुरुआत होती है।

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तारीख (Date) दिन (Day) शुभ नक्षत्र पंचांग तिथि
24 जनवरी 2026 शनिवार रेवती / अश्विनी वसंत पंचमी (अबूझ मुहूर्त)
26 जनवरी 2026 सोमवार मृगशिरा माघ शुक्ल सप्तमी
29 जनवरी 2026 गुरुवार रोहिणी माघ शुक्ल दशमी
31 जनवरी 2026 शनिवार मृगशिरा माघ शुक्ल द्वादशी

फरवरी 2026 में गृह प्रवेश मुहूर्त

फरवरी का महीना फाल्गुन मास के अंतर्गत आता है। मौसम के सुहावनेपन और ग्रहों की उत्तम स्थिति के कारण यह गृह प्रवेश के लिए सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला महीना है।

तारीख (Date) दिन (Day) शुभ नक्षत्र पंचांग तिथि
5 फरवरी 2026 गुरुवार उत्तरा फाल्गुनी फाल्गुन कृष्ण पञ्चमी
6 फरवरी 2026 शुक्रवार हस्त फाल्गुन कृष्ण षष्ठी
12 फरवरी 2026 गुरुवार अनुराधा फाल्गुन कृष्ण द्वादशी
14 फरवरी 2026 शनिवार उत्तराषाढ़ा फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी
19 फरवरी 2026 गुरुवार उत्तरा भाद्रपद फुलेरा दूज (अबूझ मुहूर्त)
25 फरवरी 2026 बुधवार रोहिणी फाल्गुन शुक्ल अष्टमी
26 फरवरी 2026 गुरुवार मृगशिरा फाल्गुन शुक्ल नवमी
27 फरवरी 2026 शुक्रवार मृगशिरा फाल्गुन शुक्ल दशमी

मार्च 2026 में गृह प्रवेश मुहूर्त

मार्च के महीने में चैत्र नवरात्रि का भी आरंभ होता है। नवरात्रों के दिनों को गृह प्रवेश के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है।

तारीख (Date) दिन (Day) शुभ नक्षत्र पंचांग तिथि
2 मार्च 2026 सोमवार उत्तरा फाल्गुनी फाल्गुन शुक्ल त्रयोदशी
4 मार्च 2026 बुधवार हस्त चैत्र कृष्ण प्रतिपदा
9 मार्च 2026 सोमवार अनुराधा चैत्र कृष्ण षष्ठी
12 मार्च 2026 गुरुवार उत्तराषाढ़ा चैत्र कृष्ण नवमी
14 मार्च 2026 शनिवार उत्तराषाढ़ा चैत्र कृष्ण एकादशी
23 मार्च 2026 सोमवार रेवती चैत्र शुक्ल पञ्चमी (नवरात्रि)

अप्रैल 2026 में गृह प्रवेश मुहूर्त

अप्रैल में वैशाख का पवित्र महीना शुरू होता है। अक्षय तृतीया जैसा महा-मुहूर्त भी इसी महीने में आता है, जो नए घर में प्रवेश के लिए स्वयंसिद्ध मुहूर्त है।

तारीख (Date) दिन (Day) शुभ नक्षत्र पंचांग तिथि
6 अप्रैल 2026 सोमवार स्वाती वैशाख कृष्ण तृतीया
8 अप्रैल 2026 बुधवार अनुराधा वैशाख कृष्ण पञ्चमी
10 अप्रैल 2026 शुक्रवार उत्तराषाढ़ा वैशाख कृष्ण सप्तमी
15 अप्रैल 2026 बुधवार उत्तरा भाद्रपद वैशाख कृष्ण द्वादशी
20 अप्रैल 2026 सोमवार रोहिणी अक्षय तृतीया (अबूझ मुहूर्त)
25 अप्रैल 2026 शनिवार मघा / पूर्वा फाल्गुनी वैशाख शुक्ल अष्टमी

मई 2026 में गृह प्रवेश मुहूर्त

मई का महीना भी गृह प्रवेश और शिफ्टिंग के लिए बहुत अनुकूल होता है क्योंकि इस समय बच्चों की गर्मियों की छुट्टियां होती हैं, जिससे घर शिफ्ट करना आसान हो जाता है।

तारीख (Date) दिन (Day) शुभ नक्षत्र पंचांग तिथि
1 मई 2026 शुक्रवार स्वाती ज्येष्ठ कृष्ण प्रतिपदा
2 मई 2026 शनिवार विशाखा ज्येष्ठ कृष्ण द्वितीया
6 मई 2026 बुधवार उत्तराषाढ़ा ज्येष्ठ कृष्ण षष्ठी
8 मई 2026 शुक्रवार श्रवण ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमी
13 मई 2026 बुधवार उत्तरा भाद्रपद ज्येष्ठ कृष्ण त्रयोदशी
20 मई 2026 बुधवार रोहिणी ज्येष्ठ शुक्ल पञ्चमी

जून 2026 में गृह प्रवेश मुहूर्त

जून के अंतिम दिनों से मानसून की शुरुआत होने लगती है और चातुर्मास करीब आ जाता है। चातुर्मास से पहले गृह प्रवेश का यह आखिरी मौका होता है।

तारीख (Date) दिन (Day) शुभ नक्षत्र पंचांग तिथि
4 जून 2026 गुरुवार अनुराधा आषाढ़ कृष्ण चतुर्थी
5 जून 2026 शुक्रवार ज्येष्ठा आषाढ़ कृष्ण पञ्चमी
10 जून 2026 बुधवार उत्तरा भाद्रपद आषाढ़ कृष्ण दशमी
12 जून 2026 शुक्रवार रेवती आषाढ़ कृष्ण द्वादशी
19 जून 2026 शुक्रवार मघा आषाढ़ शुक्ल पञ्चमी

जुलाई, अगस्त, सितंबर और अक्टूबर 2026

ध्यान दें: हिंदू पंचांग के अनुसार, 25 जुलाई 2026 (देवशयनी एकादशी) से लेकर 21 नवंबर 2026 (देवउठनी एकादशी) तक ‘चातुर्मास’ (Chaturmas) रहेगा। इन चार महीनों में भगवान विष्णु योग निद्रा में रहते हैं। इसके साथ ही पितृ पक्ष (श्राद्ध) भी इन्हीं महीनों में आता है। वास्तु और ज्योतिष शास्त्रों में चातुर्मास और पितृ पक्ष के दौरान नए घर में प्रवेश करना पूरी तरह से वर्जित माना गया है। इसलिए इन चार महीनों में गृह प्रवेश का कोई भी शुभ मुहूर्त नहीं है।

नवंबर 2026 में गृह प्रवेश मुहूर्त

21 नवंबर को देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के जागने के बाद पुनः शुभ कार्य शुरू हो जाते हैं। नवंबर के अंतिम सप्ताह में आपको गृह प्रवेश के उत्तम मुहूर्त मिलेंगे।

तारीख (Date) दिन (Day) शुभ नक्षत्र पंचांग तिथि
25 नवंबर 2026 बुधवार रोहिणी मार्गशीर्ष शुक्ल पञ्चमी
26 नवंबर 2026 गुरुवार मृगशिरा मार्गशीर्ष शुक्ल षष्ठी
30 नवंबर 2026 सोमवार उत्तरा फाल्गुनी मार्गशीर्ष शुक्ल दशमी

दिसंबर 2026 में गृह प्रवेश मुहूर्त

दिसंबर के मध्य में सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करते ही ‘खरमास’ (Kharmas) फिर से लग जाता है। इसलिए खरमास शुरू होने से पहले ही गृह प्रवेश की पूजा संपन्न कर लेनी चाहिए।

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तारीख (Date) दिन (Day) शुभ नक्षत्र पंचांग तिथि
2 दिसंबर 2026 बुधवार हस्त पौष कृष्ण द्वितीया
3 दिसंबर 2026 गुरुवार चित्रा पौष कृष्ण तृतीया
5 दिसंबर 2026 शनिवार स्वाती पौष कृष्ण पञ्चमी
11 दिसंबर 2026 शुक्रवार अनुराधा पौष कृष्ण एकादशी
12 दिसंबर 2026 शनिवार उत्तराषाढ़ा पौष कृष्ण द्वादशी

(नोट: ऊपर दी गई तिथियां सामान्य पंचांग पर आधारित हैं। गृह प्रवेश के लिए अपने परिवार की नाम राशि और व्यक्तिगत जन्म कुंडली (Kundali) के अनुसार किसी विद्वान ज्योतिषी या पंडित से अष्टवर्ग और दिशा शूल का विचार अवश्य कराएं।)

3. गृह प्रवेश के प्रकार (Types of Griha Pravesh)

हिंदू वास्तु शास्त्र और परंपराओं के अनुसार गृह प्रवेश केवल एक प्रकार का नहीं होता। आप किस तरह के घर में जा रहे हैं, इसके आधार पर गृह प्रवेश को तीन श्रेणियों में बांटा गया है:

  1. अपूर्व गृह प्रवेश (Apoorva Griha Pravesh): जब आप किसी नई ज़मीन पर अपना नया मकान बनाकर पहली बार उसमें प्रवेश करते हैं, तो उसे ‘अपूर्व गृह प्रवेश’ कहा जाता है। इसके लिए पंचांग के सभी कड़े नियमों और शुभ मुहूर्तों का पालन करना सबसे अधिक अनिवार्य होता है।

  2. सपूर्व गृह प्रवेश (Sapoorva Griha Pravesh): यदि आप किसी ऐसे घर में शिफ्ट हो रहे हैं जो पहले से बना हुआ है (जैसे Resale House या किराये का मकान), या आप अपने ही घर में किसी कारणवश कुछ महीनों के लिए बाहर जाकर वापस लौट रहे हैं, तो उसे ‘सपूर्व गृह प्रवेश’ कहते हैं। इसमें पूजा थोड़ी संक्षिप्त होती है।

  3. द्वंद्व गृह प्रवेश (Dwandwah Griha Pravesh): यदि कोई पुराना घर प्राकृतिक आपदा (भूकंप, बाढ़) के कारण क्षतिग्रस्त हो गया हो और आप उसका पुनर्निर्माण (Reconstruction) करवाकर उसमें दोबारा रहने जा रहे हों, तो उसे द्वंद्व गृह प्रवेश कहा जाता है।

4. गृह प्रवेश पूजा की संपूर्ण विधि (Step-by-Step Puja Vidhi)

नए घर में सकारात्मक ऊर्जा के संचार के लिए वास्तु शांति और गृह प्रवेश की पूजा पूरे विधि-विधान से की जानी चाहिए। यहाँ पूजा की शास्त्र-सम्मत विधि दी गई है:

  • तोरण और रंगोली: सबसे पहले घर के मुख्य द्वार (Main Door) को गेंदे के फूलों और आम के पत्तों के तोरण (बंदनवार) से सजाएं। दहलीज पर चावल के आटे और कुमकुम से सुंदर रंगोली बनाएं।

  • मंगल कलश की तैयारी: तांबे या पीतल के एक कलश में शुद्ध जल (या गंगाजल) भरें। उसमें एक सिक्का, सुपारी, और दूर्वा (घास) डालें। कलश के मुख पर आम या अशोक के 5 पत्ते रखकर उस पर एक जटा वाला नारियल (Coconut) लाल कपड़े में लपेटकर रखें। इस कलश पर कुमकुम से स्वास्तिक बनाएं।

  • दाहिना पैर आगे: घर के स्वामी और स्वामिनी (पति-पत्नी) को यह मंगल कलश हाथों में लेकर घर में प्रवेश करना चाहिए। प्रवेश करते समय भगवान गणेश का स्मरण करें और हमेशा अपना दाहिना पैर (Right Foot) ही सबसे पहले घर के अंदर रखें।

  • गौ माता का प्रवेश: प्राचीन परंपराओं के अनुसार, नए घर में इंसानों से पहले एक बछड़े वाली गाय (Gau Mata) को प्रवेश कराया जाता है। मान्यता है कि गाय के खुरों की धूल से घर के सभी वास्तु दोष स्वतः ही नष्ट हो जाते हैं।

  • गणेश पूजा और वास्तु शांति हवन: घर के ईशान कोण (North-East direction) में वेदी बनाकर सबसे पहले भगवान गणेश, नवग्रह और वास्तु देवता की पूजा की जाती है। घर की नकारात्मकता को भस्म करने के लिए हवन (Yagya) किया जाता है, जिसके धुएं से पूरा घर शुद्ध हो जाता है।

  • दूध उबालना (Boiling Milk): रसोई घर (Kitchen) में सबसे पहले दूध उबाला जाता है। दूध को इतना उबाला जाता है कि वह बर्तन से बाहर छलक जाए। दूध का बाहर छलकना घर में धन, अन्न और समृद्धि के छलकने (भरपूर होने) का प्रतीक माना जाता है।

  • ब्राह्मण और कन्या भोज: पूजा संपन्न होने के बाद पंडितों (ब्राह्मणों) और छोटी कन्याओं को सम्मानपूर्वक भोजन कराएं और उन्हें क्षमता अनुसार दक्षिणा देकर आशीर्वाद प्राप्त करें।

5. नए घर के लिए महत्वपूर्ण वास्तु टिप्स (Essential Vastu Tips)

“Griha Pravesh Muhurat 2026” की तारीख तय करने के साथ-साथ आपको वास्तु के कुछ बुनियादी नियमों का भी ध्यान रखना चाहिए, ताकि घर में हमेशा बरकत बनी रहे:

  • मुख्य द्वार (Main Entrance): घर का मुख्य दरवाजा हमेशा अच्छी तरह से रोशनीदार (Well-lit) होना चाहिए। मुख्य द्वार खोलते या बंद करते समय उसमें से चरमराहट की आवाज़ (Creaking sound) नहीं आनी चाहिए; यह अशुभ माना जाता है।

  • घर को खाली न छोड़ें: वास्तु शास्त्र का यह सबसे कड़ा नियम है कि गृह प्रवेश की पूजा संपन्न होने के बाद, घर को कम से कम 3 दिन और 3 रातों तक खाली (Locked) नहीं छोड़ना चाहिए। घर में किसी न किसी सदस्य का रुकना और रात के समय दीपक जलते रहना अनिवार्य है।

  • गर्भवती महिलाएं: यदि घर की स्वामिनी या परिवार की कोई मुख्य महिला गर्भवती (Pregnant) है, तो उस समय गृह प्रवेश टाल देना चाहिए। शास्त्रों में इसे मां और गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं माना गया है।

  • दक्षिण दिशा: नए घर में सोते समय यह सुनिश्चित करें कि परिवार के मुखिया का सिर हमेशा दक्षिण (South) या पूर्व (East) दिशा की ओर हो। उत्तर दिशा में सिर करके सोना वास्तु में निषेध है।

  • टूटा सामान: नए घर में शिफ्ट होते समय कभी भी टूटा हुआ कांच, बंद घड़ियां, जंग लगा हुआ लोहा या पुराने फटे कपड़े साथ न ले जाएं। ये चीज़ें पुरानी नकारात्मक ऊर्जा को नए घर में ले आती हैं।

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अपना घर बनाना मनुष्य के जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। एक घर केवल चार दीवारों का ढांचा नहीं होता, बल्कि यह वह जगह होती है जहाँ आप हंसते हैं, रोते हैं, सपने देखते हैं और अपनी पीढ़ियों को बड़ा होते हुए देखते हैं।

इस विस्तृत लेख “Griha Pravesh Muhurat 2026” के माध्यम से हमने आपको वर्ष 2026 के सभी शुभ मुहूर्तों, महीनों और पूजा विधानों की सटीक जानकारी दी है। आप अपनी सुविधा और घर के निर्माण कार्य के पूरा होने के अनुसार ऊपर दी गई तालिकाओं में से कोई भी उपयुक्त तारीख चुन सकते हैं।

बस यह याद रखें कि मुहूर्त चाहे कितना भी शुभ क्यों न हो, घर को असली घर उसमें रहने वाले लोगों का आपसी प्रेम, सम्मान और हंसी-खुशी ही बनाती है। पूरी श्रद्धा और पवित्र मन से अपने नए आशियाने में प्रवेश करें। वास्तु देवता और भगवान गणेश आपके नए घर को सुख, शांति, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य से भर दें, यही हमारी मंगल कामना है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: क्या किराये के मकान (Rented House) में जाने के लिए भी गृह प्रवेश मुहूर्त देखना चाहिए?

उत्तर: जी हाँ, किराये के मकान में शिफ्ट होते समय भी मुहूर्त का ध्यान रखना चाहिए। हालांकि, इसके लिए अपूर्व गृह प्रवेश जितनी विस्तृत पूजा की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन शुभ दिन देखकर ‘सपूर्व गृह प्रवेश’ की छोटी पूजा (कलश स्थापना और गणेश पूजा) अवश्य करनी चाहिए ताकि वहां की ऊर्जा आपके अनुकूल हो सके।

प्रश्न 2: वर्ष 2026 में जुलाई से अक्टूबर के बीच कोई शुभ मुहूर्त क्यों नहीं है?

उत्तर: हिंदू पंचांग के अनुसार 25 जुलाई 2026 को देवशयनी एकादशी है, जिसके बाद चातुर्मास शुरू हो जाता है। चातुर्मास के 4 महीनों में भगवान विष्णु योग निद्रा में रहते हैं। इसके अलावा इसी दौरान श्राद्ध (पितृ पक्ष) भी आते हैं। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इन महीनों में नए घर में प्रवेश करना या कोई भी मांगलिक कार्य करना पूरी तरह से वर्जित है।

प्रश्न 3: गृह प्रवेश के समय कलश में क्या-क्या डालना चाहिए?

उत्तर: मंगल कलश को पूर्णता का प्रतीक माना जाता है। तांबे या पीतल के कलश में शुद्ध जल, एक सिक्का (Coin), साबुत सुपारी, थोड़ी सी हल्दी, कुमकुम और दूर्वा (घास) डालनी चाहिए। इसके ऊपर आम या अशोक के 5 या 7 पत्ते रखकर, लाल मौली से बंधा हुआ एक जटा वाला नारियल स्थापित किया जाता है।

प्रश्न 4: क्या बिना दरवाज़े या खिड़की लगे अधूरे घर में गृह प्रवेश किया जा सकता है?

उत्तर: वास्तु शास्त्र के अनुसार यह बिल्कुल गलत है। जब तक घर का निर्माण कार्य पूरी तरह से संपन्न न हो जाए, मुख्य द्वार (Main door), खिड़कियां और छत ठीक से न लग जाएं, तब तक गृह प्रवेश नहीं करना चाहिए। अधूरे घर में प्रवेश करने से वास्तु दोष उत्पन्न होता है और मानसिक तनाव बढ़ता है।

प्रश्न 5: गृह प्रवेश वाले दिन घर में प्रवेश करते समय कौन सा पैर पहले अंदर रखना चाहिए?

उत्तर: शास्त्रों के अनुसार, घर के मालिक और मालकिन (दंपति) को घर के मुख्य द्वार से अंदर प्रवेश करते समय हमेशा अपना दाहिना पैर (Right Foot) ही सबसे पहले अंदर रखना चाहिए। यह प्रगति, शुभता और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है।

"नमस्कार! मैं अमित तिवारी हूँ, और आप मुझे एक 'साधक' के रूप में जान सकते हैं। बचपन से ही सनातन धर्म, तंत्र-मंत्र और आध्यात्मिक साधनाओं ने मुझे अपनी ओर गहराई से आकर्षित किया है। वर्षों के निरंतर अध्ययन, गुरु-कृपा और अपने व्यक्तिगत साधना-अनुभवों से मैंने जो कुछ भी सीखा है, उसे मैं sadhnas.in के माध्यम से आपके साथ साझा कर रहा हूँ। मेरा मुख्य उद्देश्य इंटरनेट पर फैले भ्रम को दूर करके प्रामाणिक, सत्य और शास्त्र-सम्मत जानकारी को बेहद सरल भाषा में आप तक पहुँचाना है। मैं कोई गुरु या उपदेशक नहीं हूँ, बल्कि आप ही की तरह ईश्वर की खोज में निकला एक राही हूँ। मेरी यही कोशिश है कि मेरे अनुभवों और लेखनी से आपकी आध्यात्मिक यात्रा और भी सुगम व सफल हो सके।"

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