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Ashadha Gupt Navratri 2026: 10 महाविद्या साधना के क्या नियम हैं? (Complete Detail)It takes 14 minutes... to read this article !

सनातन हिंदू धर्म में शक्ति की उपासना को परम कल्याणकारी और त्वरित फलदायी माना गया है। ब्रह्मांड के समस्त रहस्यों, सिद्धियों और ऊर्जा का मूल स्रोत ‘आदिशक्ति’ ही हैं। मां जगदम्बा की आराधना के लिए वर्ष में चार बार नवरात्रि का पावन अवसर आता है। इनमें से चैत्र और आश्विन (शारदीय) नवरात्रि को ‘प्रकट नवरात्रि’ कहा जाता है, जिसमें माता के 9 सात्विक स्वरूपों (नवदुर्गा) की पूजा अत्यंत उत्सव और धूमधाम से की जाती है। लेकिन माघ और आषाढ़ के महीने में आने वाली नवरात्रियों को ‘गुप्त नवरात्रि’ (Gupt Navratri) कहा जाता है।

गुप्त नवरात्रि दिखावे, सामाजिक उत्सव या पंडालों की तड़क-भड़क का समय नहीं है। यह समय है— पूर्ण एकांत, घोर मौन, इंद्रिय निग्रह, कुण्डलिनी जागरण और माता के 10 परम शक्तिशाली तांत्रिक स्वरूपों यानी ‘दस महाविद्याओं’ (काली, तारा, छिन्नमस्ता, बगलामुखी आदि) की गुप्त साधना का।

साल 2026 में आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि का महापर्व 15 जुलाई 2026 (बुधवार) से आरंभ होकर 23 जुलाई 2026 (गुरुवार) तक चलेगा।

मंत्र विज्ञान और तंत्र शास्त्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि महाविद्याओं की साधना साधारण पूजा-पाठ जैसी नहीं होती। ये ब्रह्मांड की सर्वोच्च और अत्यंत उग्र शक्तियां हैं। यदि इनकी साधना सही नियमों और पूर्ण प्रामाणिकता के साथ की जाए, तो रंक भी राजा बन सकता है, असाध्य से असाध्य रोग ठीक हो सकते हैं और बड़े से बड़े शत्रुओं का समूल नाश हो सकता है। परंतु, यदि नियमों में थोड़ी सी भी चूक या लापरवाही हो जाए, तो इसके भयंकर दुष्परिणाम (Side-effects) साधक को झेलने पड़ सकते हैं।

इसलिए, यदि आप इस साल इन 9 पावन रात्रियों का लाभ उठाना चाहते हैं, तो आपके मन में यह स्पष्टता होनी चाहिए कि “Ashadha Gupt Navratri 2026: 10 महाविद्या साधना के क्या नियम हैं?”

इस बेहद विस्तृत, प्रामाणिक और शोध-परक लेख में हम एक गृहस्थ और उच्च कोटि के साधक दोनों के दृष्टिकोण से महाविद्या साधना के सभी कड़े नियमों, सावधानियों, दिशाओं के महत्व, माला के विज्ञान और निषेध (वर्जित कार्यों) पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

1. आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026: महत्वपूर्ण तिथियां और कलश स्थापना मुहूर्त

साधना के नियमों में सबसे पहला नियम है— ‘काल शुद्धि’ यानी सही समय का चयन। किसी भी तांत्रिक या सात्विक अनुष्ठान का संकल्प हमेशा शुभ मुहूर्त में ही लिया जाना चाहिए। साल 2026 का पंचांग कैलेंडर इस प्रकार है:

  • गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ (कलश स्थापना): 15 जुलाई 2026 (बुधवार)

  • महाअष्टमी तिथि (विशेष साधना रात्रि): 22 जुलाई 2026 (बुधवार)

  • महानवमी तिथि (हवन और पारण): 23 जुलाई 2026 (गुरुवार)

कलश स्थापना (घटस्थापना) के शुभ मुहूर्त:

15 जुलाई 2026 को दो अत्यंत श्रेष्ठ मुहूर्त मिल रहे हैं, जिनमें साधक को अपनी चौकी सजानी चाहिए और संकल्प लेना चाहिए:

  • प्रातःकाल का मुहूर्त: सुबह 05:40 बजे से लेकर 10:30 बजे तक।

  • अभिजित मुहूर्त (सर्वश्रेष्ठ): दोपहर 11:58 बजे से दोपहर 12:50 बजे तक।

2. महाविद्या साधना का मूल दर्शन: नियम क्यों आवश्यक हैं?

कई बार आधुनिक विचारधारा के लोग सोचते हैं कि जब भगवान हमारे भीतर हैं, तो पूजा के इतने कड़े नियमों की क्या आवश्यकता है? तंत्र शास्त्र के अनुसार, 10 महाविद्याएं ब्रह्मांड की ‘हाई-वोल्टेज’ एनर्जी ग्रिड (High-voltage Energy Grid) की तरह हैं।

जैसे एक शक्तिशाली बिजली के तार को छूने के लिए आपको इंसुलेटेड ग्लव्स (Insulated Gloves) और सही सुरक्षा उपकरणों की आवश्यकता होती है, ठीक वैसे ही महाविद्याओं की प्रचंड तांत्रिक ऊर्जा को अपने शरीर और मस्तिष्क (Nervous System) में सुरक्षित रूप से उतारने के लिए ‘नियमों’ का पालन करना अनिवार्य है। नियम साधक के चारों ओर एक सुरक्षा कवच (Aura) बनाते हैं, ताकि मंत्रों की तीव्र ऊर्जा से उसके शरीर को कोई नुकसान न पहुंचे।

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3. Ashadha Gupt Navratri 2026: 10 महाविद्या साधना के क्या नियम हैं? (The Complete Rules)

आइए, तंत्र ग्रंथों (जैसे मन्त्र महोदधि, कुलार्णव तन्त्र और शारदा तिलक) में वर्णित दस महाविद्या साधना के सभी आवश्यक नियमों को चरण-दर-चरण (Step-by-Step) विस्तार से समझते हैं:

I. गोपनीयता का नियम (The Law of Absolute Secrecy)

यह महाविद्या साधना का सबसे पहला, सबसे कड़ा और अटल नियम है। ‘गुप्त’ शब्द का अर्थ ही यही है कि आपकी साधना पूरी दुनिया से छिपी होनी चाहिए।

  • क्या है नियम: आप कौन सी महाविद्या की साधना कर रहे हैं, आपका उद्देश्य क्या है, आप रोज रात को कितने घंटे बैठते हैं, और आपको साधना के दौरान क्या अनुभव या सपने आ रहे हैं— यह बात आपके माता-पिता, जीवनसाथी या बच्चों को भी पता नहीं होनी चाहिए।

  • विज्ञान: जब हम अपनी साधना की चर्चा दूसरों से करते हैं, तो हमारी आध्यात्मिक ऊर्जा बाहरी दुनिया में बिखर जाती है और हमारा ‘अहंकार’ (Ego) जाग्रत हो जाता है। गोपनीयता बनाए रखने से ऊर्जा भीतर ही भीतर संचित होती है और कुण्डलिनी को जाग्रत करती है। यदि आपने अपनी साधना का ढिंढोरा पीटा, तो उसका फल तुरंत शून्य (Zero) हो जाएगा।

II. समय शुद्धि: ‘निशिता काल’ (Midnight Sadhana) का नियम

प्रकट नवरात्रि में सुबह की पूजा मुख्य होती है, लेकिन गुप्त नवरात्रि पूरी तरह से ‘रात्रियों का पर्व’ है।

  • क्या है नियम: 10 महाविद्याओं के मंत्रों का जाप हमेशा रात के समय किया जाना चाहिए। इसके लिए सबसे सिद्ध समय रात 10:00 बजे से लेकर मध्य रात्रि 01:30 बजे के बीच का माना जाता है, जिसे शास्त्रों में ‘निशिता काल’ या ‘महानिशा काल’ कहा जाता है।

  • विज्ञान: रात के समय सांसारिक कोलाहल शांत होता है, मनुष्य के मस्तिष्क की तरंगें (Brain waves) शांत होती हैं, और पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र तांत्रिक साधनाओं के लिए अनुकूल होता है। इस समय किया गया एक माला जाप, दिन के 100 माला जाप के बराबर शक्तिशाली होता है।

III. आसन शुद्धि और शारीरिक मुद्रा का नियम

साधना के दौरान साधक का पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण शक्ति से सीधे संपर्क नहीं होना चाहिए, अन्यथा मंत्रों की ऊर्जा जमीन में चली जाएगी (Earthing)।

  • क्या है नियम: साधना के लिए हमेशा ‘ऊन का आसन’ (Woolen Asan) या ‘कुश का आसन’ ही इस्तेमाल करें। उग्र देवियों (जैसे काली, बगलामुखी, छिन्नमस्ता) की साधना के लिए लाल या पीले रंग का ऊनी आसन सबसे उत्तम माना जाता है।

  • मुद्रा: रीढ़ की हड्डी (Spine) हमेशा बिल्कुल सीधी होनी चाहिए। गर्दन और पीठ में झुकाव नहीं होना चाहिए। रीढ़ की हड्डी सीधी रहने से ही मूलाधार चक्र से ऊर्जा का प्रवाह ऊपर की ओर (सहस्रार चक्र की तरफ) निर्बाध रूप से हो पाता है।

IV. दिशा शुद्धि का नियम (The Science of Directions)

मंत्र महोदधि के अनुसार, किस महाविद्या के लिए किस दिशा में मुख करके बैठना है, इसके कड़े नियम हैं:

  • पूर्व दिशा (East): सौम्य और ऐश्वर्य देने वाली देवियों जैसे मां त्रिपुर सुंदरी, मां भुवनेश्वरी और मां कमला की साधना के लिए मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए।

  • उत्तर दिशा (North): ज्ञान, वाक्-सिद्धि और शत्रुओं के स्तंभन के लिए उत्तर दिशा उत्तम है। मां तारा, मां मातंगी और मां बगलामुखी की साधना उत्तरमुखी होकर की जाती है।

  • दक्षिण दिशा (South): यह यम और काल की दिशा है। अत्यंत उग्र देवियों जैसे मां काली, मां छिन्नमस्ता, मां त्रिपुर भैरवी और मां धूमावती की साधना के लिए दक्षिण दिशा की ओर मुख करने का नियम है। (सामान्यतः गृहस्थों को दक्षिण दिशा की ओर मुख करने से पहले गुरु की आज्ञा लेनी चाहिए)।

V. वस्त्रों के रंग का नियम

साधना के दौरान पहने जाने वाले वस्त्रों के रंग का साधक के मनोविज्ञान और ऊर्जा पर सीधा प्रभाव पड़ता है।

  • क्या है नियम: 9 दिनों तक साधक को केवल सूती, रेशमी या ऊनी साफ-सुथरे वस्त्र ही पहनने चाहिए। मां बगलामुखी की साधना में पूर्ण रूप से पीले वस्त्र (धोती, कुर्ता या साड़ी) अनिवार्य हैं। मां काली, तारा और भैरवी की साधना में लाल वस्त्र पहने जाते हैं। मां धूमावती की साधना में सलेटी (Grey) या सफेद वस्त्र पहनने का नियम है।

  • वर्जित: गृहस्थ साधकों को भूलकर भी साधना के समय काले या गहरे नीले वस्त्र नहीं पहनने चाहिए।

VI. माला विज्ञान और मंत्र संख्या का नियम (The Science of Rosary)

मंत्रों को गिनने के लिए इस्तेमाल होने वाली माला का महाविद्या के स्वरूप से सीधा संबंध होता है:

  • रुद्राक्ष की माला: मां काली, मां तारा, मां छिन्नमस्ता, मां भैरवी और मां धूमावती के मंत्रों के लिए रुद्राक्ष की माला सर्वश्रेष्ठ है।

  • हल्दी की माला: मां बगलामुखी के मंत्रों का जाप केवल और केवल हल्दी की साबुत गांठों से बनी माला पर ही किया जाना चाहिए।

  • कमलगट्टे या स्फटिक की माला: मां कमला, मां भुवनेश्वरी और मां त्रिपुर सुंदरी की साधना के लिए स्फटिक या कमलगट्टे की माला का प्रयोग होता है।

  • नियम: माला फेरते समय कभी भी ‘सुमेरु’ (माला का मुख्य ऊपरी दाना) को पार नहीं किया जाता। सुमेरु पर पहुंचकर माला को घुमाकर वापस शुरू किया जाता है। जाप करते समय तर्जनी उंगली (Index finger) का स्पर्श माला से नहीं होना चाहिए।

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4. दो तांत्रिक पद्धतियां: वामाचार बनाम दक्षिणाचार (The Two Paths)

“Ashadha Gupt Navratri 2026: 10 महाविद्या साधना के क्या नियम हैं?” के अंतर्गत साधक को अपने मार्ग का चयन बहुत सावधानी से करना होता है। तंत्र शास्त्र में साधना के दो मुख्य मार्ग बताए गए हैं:

1. वामाचार (Left-Hand Path)

यह अघोरियों, कापालिकों और नागा साधुओं का मार्ग है। इसमें साधना श्मशान घाट में, जलती हुई चिता के पास, आधी रात को की जाती है। इसमें ‘पंच मकार’ (मांस, मदिरा, मीन, मुद्रा, मैथुन) का प्रयोग करके माता के उग्र स्वरूप को सिद्ध किया जाता है। यह मार्ग अत्यंत खतरनाक है। इसमें एक छोटी सी भी गलती मानसिक संतुलन बिगाड़ सकती है या अकाल मृत्यु का कारण बन सकती है। गृहस्थों के लिए यह मार्ग 100% प्रतिबंधित है।

2. दक्षिणाचार (Right-Hand Path)

यह पूरी तरह से सात्विक, वैदिक और सुरक्षित तांत्रिक मार्ग है। इसमें पंच मकार की जगह पंच गव्य (दूध, दही, घी आदि), फल, फूल, मिष्ठान्न, और सात्विक दीप-धूप का प्रयोग किया जाता है। साधक अपने घर के पूजा कक्ष में बैठकर पूर्ण पवित्रता के साथ मंत्रों का जाप करता है। सभी गृहस्थों को आषाढ़ गुप्त नवरात्रि में केवल और केवल इसी ‘दक्षिणाचार’ मार्ग के नियमों का पालन करना चाहिए।

5. मानसिक और शारीरिक शुद्धि के कड़े नियम (Do’s & Don’ts)

महाविद्या साधना में केवल बाहरी क्रियाएं महत्वपूर्ण नहीं हैं; आंतरिक शुद्धता सबसे बड़ी शर्त है:

  • पूर्ण ब्रह्मचर्य का नियम: 15 जुलाई से 23 जुलाई 2026 तक साधक को मन, वचन और कर्म से पूर्ण शारीरिक और मानसिक ब्रह्मचर्य (Celibacy) का पालन करना होगा। कामुक विचारों, अश्लील फिल्मों या ऐसी चर्चाओं से पूरी तरह दूर रहना होगा। हमारी जो काम ऊर्जा (Sexual Energy) होती है, वही मंत्रों के घर्षण से ‘ओज’ और ‘तेज’ (Spiritual Power) में बदलती है।

  • आहार शुद्धि का नियम: घर में तामसिक भोजन पूरी तरह वर्जित होना चाहिए। लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा (शराब), अंडा, और बासी भोजन का प्रयोग 9 दिनों तक भूलकर भी न करें। साधक को केवल एक समय सात्विक फलाहार या सेंधा नमक का भोजन ही ग्रहण करना चाहिए।

  • वाणी पर नियंत्रण (मौन व्रत): मंत्र जाप से शरीर और मन में असीम ऊर्जा पैदा होती है। यदि साधक दिन के समय किसी पर गुस्सा करता है, झूठ बोलता है, या किसी की चुगली करता है, तो वह ऊर्जा नकारात्मक रूप लेकर उसी साधक के जीवन में अशांति पैदा कर देती है। इसलिए इन 9 दिनों में जितना संभव हो कम बोलें (मौन का अभ्यास करें)।

  • जमीन पर शयन: साधक को इन 9 दिनों में आरामदायक गद्देदार पलंग का त्याग कर भूमि पर चटाई या कंबल बिछाकर सोना चाहिए।

  • क्षौर कर्म निषेध: पूरे 9 दिनों तक दाढ़ी बनाना, बाल कटवाना और नाखून काटना सख्त वर्जित माना गया है।

6. बिना गुरु के गृहस्थ साधक महाविद्या साधना कैसे करें? (The Golden Key)

यह तंत्र शास्त्र का एक बहुत बड़ा नियम है कि 10 महाविद्याओं के उग्र ‘बीज मंत्रों’ (जैसे मां छिन्नमस्ता या मां धूमावती के बीज मंत्र) का जाप बिना किसी योग्य और सिद्ध गुरु के मार्गदर्शन के कभी नहीं करना चाहिए। यदि आप बिना गुरु दीक्षा के उग्र बीज मंत्रों का जाप करते हैं, तो मानसिक तनाव, अत्यधिक गुस्सा, या पारिवारिक कलह जैसी समस्याएं खड़ी हो सकती हैं।

तब गृहस्थ साधक क्या करें?

यदि आपके पास गुरु नहीं हैं, लेकिन आप आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 का पूर्ण लाभ उठाना चाहते हैं, तो शास्त्रों ने इसका एक बहुत ही सुंदर और सुरक्षित उपाय बताया है:

  • नवार्ण मंत्र की साधना: माता दुर्गा का जाग्रत महामंत्र— “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” (Navarna Mantra) ही गृहस्थों के लिए सबसे बड़ी कुंजी है। इस एक मंत्र में तीनों महाशक्तियों (महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती) और सभी 10 महाविद्याओं की ऊर्जा समाहित है।

  • नियम: रात 10 बजे के बाद एकांत में बैठें। गाय के घी का दीपक जलाएं। रुद्राक्ष की माला से इस मंत्र की प्रतिदिन 11 माला जाप करें। यह मंत्र पूरी तरह से सुरक्षित है। इसका कोई भी साइड-इफेक्ट नहीं होता, और यह आपको महाविद्या साधना के समान ही असीम सुरक्षा, कर्ज से मुक्ति, शत्रुओं पर विजय और अपार धन-वैभव प्रदान करेगा।

  • सिद्ध कुंजिका स्तोत्र और दुर्गा सप्तशती: आप बिना गुरु के ‘दुर्गा सप्तशती’ का पाठ कर सकते हैं या केवल ‘सिद्ध कुंजिका स्तोत्र’ का प्रतिदिन 3 या 7 बार पाठ कर सकते हैं। यह भी महाविद्याओं को प्रसन्न करने का सात्विक तरीका है।

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7. अंतिम चरण: अष्टमी-नवमी हवन, कन्या पूजन और पारण के नियम

9 दिनों की साधना तब तक अधूरी मानी जाती है जब तक उसका विसर्जन और पारण सही नियमों से न किया जाए:

  • हवन का नियम (23 जुलाई 2026): नवमी तिथि की सुबह सात्विक सामग्रियों (जैसे आम की लकड़ी, कपूर, गाय का घी, तिल, जौ, कमलगट्टा, और शक्कर) से हवन कुंड तैयार करें। अपने जपे गए मंत्र का ध्यान करते हुए कम से कम 108 बार आहुति दें। अंत में आरती करें।

  • कन्या पूजन का नियम: हवन के पश्चात 9 छोटी कन्याओं (जिनकी आयु 2 से 10 वर्ष के बीच हो) को आदरपूर्वक घर बुलाएं। उनके चरणों को शुद्ध जल या दूध से धोएं। उन्हें सात्विक भोजन (सूजी का हलवा, काले चने, और पूड़ी) करवाएं। भोजन के बाद उन्हें लाल चुनरी, श्रृंगार की वस्तुएं, फल और सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा (पैसा) देकर उनके पैर छूकर आशीर्वाद लें। कन्याओं को साक्षात महाविद्याओं का स्वरूप माना जाता है।

  • व्रत पारण का नियम: कन्याओं के सम्मानपूर्वक विदा हो जाने के बाद, हवन की भस्म को अपने माथे पर लगाएं। इसके बाद ही साधक को स्वयं भोजन (अन्न) ग्रहण करके अपना 9 दिनों का महाव्रत खोलना (पारण करना) चाहिए।

“Ashadha Gupt Navratri 2026: 10 महाविद्या साधना के क्या नियम हैं?” — इस विस्तृत और गहन विवेचन से यह पूरी तरह स्पष्ट हो जाता है कि गुप्त नवरात्रि का समय कोई साधारण समय नहीं है। यह ब्रह्मांड के गुप्त रहस्यों को अनलॉक (Unlock) करने का एक दिव्य पोर्टल है।

10 महाविद्याएं केवल तांत्रिकों के लिए नहीं हैं; वे एक सच्चे, पवित्र और नियमबद्ध गृहस्थ साधक के लिए भी उतनी ही सुलभ हैं। तंत्र विज्ञान हमें डराता नहीं है, बल्कि हमें अनुशासन और मर्यादा सिखाता है।

आने वाली 15 जुलाई 2026 से जब इस महापर्व की शुरुआत हो, तो बिना किसी भय या लालच के, पूरी सात्विकता, दृढ़ ब्रह्मचर्य और अचूक गोपनीयता के साथ माता जगदम्बा की शरण में जाएं। यदि आप ऊपर बताए गए इन दैवीय नियमों का कड़ाई से पालन करते हैं, तो माता आपके जीवन के सभी कष्टों, कर्जों, बीमारियों और शत्रुओं का नाश कर आपके घर को सुख, शांति, समृद्धि और अखंड सौभाग्य के प्रकाश से आलोकित कर देंगी।

जय माता दी! जय दश महाविद्या!

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 की सही तारीख क्या है?

साल 2026 में आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई (बुधवार) को कलश स्थापना के साथ शुरू होगी और 23 जुलाई (गुरुवार) को महानवमी के साथ इसका समापन होगा।

2. क्या बिना गुरु के मां बगलामुखी या मां काली के बीज मंत्र का जाप कर सकते हैं?

बिल्कुल नहीं। मां बगलामुखी, काली, छिन्नमस्ता या धूमावती जैसी उग्र महाविद्याओं के विशिष्ट ‘बीज मंत्रों’ का जाप बिना किसी सिद्ध गुरु की दीक्षा और कड़े मार्गदर्शन के करना वर्जित और नुकसानदेह हो सकता है। बिना गुरु के केवल ‘नवार्ण मंत्र’ का जाप ही करना चाहिए।

3. ‘निशिता काल’ का क्या महत्व है और यह किस समय होता है?

निशिता काल मध्य रात्रि का वह समय है (आमतौर पर रात 11:30 से 01:30 बजे के बीच) जब ब्रह्मांडीय तांत्रिक ऊर्जा पृथ्वी पर सर्वाधिक सक्रिय होती है। महाविद्या साधना के नियम के अनुसार इसी समय मंत्र जाप करने से सिद्धियां तीव्र गति से प्राप्त होती हैं।

4. क्या महिलाएं मासिक धर्म (Periods) के दौरान महाविद्या साधना के नियमों का पालन कर सकती हैं?

मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को पूजा कक्ष में जाना, मूर्तियों या माला को स्पर्श करना और अखंड ज्योति के पास जाना वर्जित है। हालांकि, वे मानसिक रूप से (मन ही मन बिना माला के) नवार्ण मंत्र या माता के नाम का सुमिरन कर सकती हैं।

5. गुप्त नवरात्रि साधना में गोपनीयता क्यों जरूरी है?

गोपनीयता तंत्र का प्राण है। साधना को गुप्त रखने से साधक की आध्यात्मिक ऊर्जा (Spiritual Heat) उसके भीतर ही केंद्रित रहती है। दूसरों को बताने से अहंकार बढ़ता है और मंत्रों की शक्ति नष्ट हो जाती है।

6. मां बगलामुखी की साधना में पीले रंग का क्या नियम है?

मां बगलामुखी को ‘पीताम्बरा’ कहा जाता है, वे पीले रंग की अधिष्ठात्री हैं। उनकी साधना का कड़ा नियम है कि साधक को पीले वस्त्र पहनने चाहिए, पीले आसन पर बैठना चाहिए, पीले फूल चढ़ाने चाहिए और केवल हल्दी की गांठों से बनी माला पर ही मंत्र जाप करना चाहिए।

"नमस्कार! मैं अमित तिवारी हूँ, और आप मुझे एक 'साधक' के रूप में जान सकते हैं। बचपन से ही सनातन धर्म, तंत्र-मंत्र और आध्यात्मिक साधनाओं ने मुझे अपनी ओर गहराई से आकर्षित किया है। वर्षों के निरंतर अध्ययन, गुरु-कृपा और अपने व्यक्तिगत साधना-अनुभवों से मैंने जो कुछ भी सीखा है, उसे मैं sadhnas.in के माध्यम से आपके साथ साझा कर रहा हूँ। मेरा मुख्य उद्देश्य इंटरनेट पर फैले भ्रम को दूर करके प्रामाणिक, सत्य और शास्त्र-सम्मत जानकारी को बेहद सरल भाषा में आप तक पहुँचाना है। मैं कोई गुरु या उपदेशक नहीं हूँ, बल्कि आप ही की तरह ईश्वर की खोज में निकला एक राही हूँ। मेरी यही कोशिश है कि मेरे अनुभवों और लेखनी से आपकी आध्यात्मिक यात्रा और भी सुगम व सफल हो सके।"

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