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Maa Taapti Janmutsav 2026: सूर्यपुत्री माँ ताप्ती की जयंती, महत्व और पूजा विधिIt takes 15 minutes... to read this article !

भारत भू-भाग केवल एक भूमि का टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी पावन तपोभूमि है जहाँ नदियों को जल का एक साधारण स्रोत मात्र नहीं, बल्कि ‘साक्षात माता’ के रूप में पूजा जाता है। गंगा, यमुना, गोदावरी और नर्मदा की तरह ही भारत की एक अत्यंत पवित्र और पौराणिक नदी है— ताप्ती नदी (Tapti River)। भगवान सूर्य देव की पुत्री माँ ताप्ती के प्राकट्य (जन्म) दिवस को हर साल ‘ताप्ती जन्मोत्सव’ या ‘ताप्ती जयंती’ के रूप में बड़े ही हर्षोल्लास और भक्ति-भाव के साथ मनाया जाता है।

आगामी Maa Taapti Janmutsav 2026 को लेकर शिव और सूर्य भक्तों में अभी से भारी उत्साह है। विशेषकर मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में स्थित ताप्ती नदी के उद्गम स्थल ‘मुलताई’ (Multai) में यह दिन किसी महाकुंभ से कम नहीं होता। यहाँ पूरे देश से लाखों श्रद्धालु ताप्ती नदी में आस्था की डुबकी लगाने और माँ ताप्ती की विशेष चुनरी यात्रा में शामिल होने आते हैं।

इस विस्तृत और शोधपरक लेख में हम Maa Taapti Janmutsav 2026 की सटीक तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, माँ ताप्ती की पौराणिक कथा, मुलताई में होने वाले भव्य आयोजनों, चमत्कारिक मान्यताओं और इस नदी के भौगोलिक व आध्यात्मिक महत्व पर गहराई से चर्चा करेंगे। यह लेख न केवल श्रद्धालुओं के लिए, बल्कि उन सभी के लिए एक ज्ञानवर्धक मार्गदर्शिका है जो भारतीय नदियों की महान सांस्कृतिक विरासत को करीब से समझना चाहते हैं।

1. माँ ताप्ती कौन हैं? (पौराणिक और ऐतिहासिक परिचय)

हिंदू धर्मग्रंथों, विशेषकर स्कंद पुराण (Skanda Purana), भविष्य पुराण (Bhavishya Purana) और महाभारत (Mahabharata) के आदि पर्व में माँ ताप्ती की महिमा का बहुत ही विस्तृत और सुंदर वर्णन मिलता है। माँ ताप्ती साक्षात प्रत्यक्ष देवता भगवान सूर्य (Surya Dev) और उनकी पत्नी देवी छाया (Chhaya) की पुत्री हैं। यह बात बहुत कम लोग जानते हैं कि माँ ताप्ती कर्मफल दाता शनिदेव (Shani Dev), मृत्यु के देवता यमराज (Yamraj) और पवित्र नदी यमुना (Yamuna) की सगी बहन हैं।

पिता के ताप को शांत करने के लिए अवतरण:

कथाओं के अनुसार, आदिकाल में भगवान सूर्य का ताप और तेज इतना अधिक था कि पृथ्वी के जीवों और वनस्पतियों के लिए उसे सहना लगभग असंभव हो रहा था। अपने पिता के इस भयंकर ताप (गर्मी) को शांत करने, उसे हरने और पृथ्वी पर शीतलता व जीवन का संचार करने के उद्देश्य से ही माँ ताप्ती का अवतरण हुआ। ‘तप’ और ‘ताप’ को हरने वाली होने के कारण ही इनका नाम ‘ताप्ती’ (Tapti) पड़ा।

कुरु वंश की आदि-माता:

महाभारत काल की वंशावली के अनुसार, माँ ताप्ती का विवाह चंद्रवंशी राजा संवरण (King Samvarana) के साथ हुआ था। राजा संवरण एक बार शिकार खेलते हुए ताप्ती नदी के तट पर पहुंचे थे, जहाँ उन्होंने अत्यंत रूपवती सूर्यपुत्री ताप्ती को देखा और उन पर मोहित हो गए। महर्षि वशिष्ठ के विशेष आग्रह पर भगवान सूर्य ने ताप्ती का विवाह संवरण से कर दिया।

इन्हीं दोनों के मिलन से एक अत्यंत प्रतापी पुत्र का जन्म हुआ, जिसका नाम ‘कुरु’ (Kuru) रखा गया। इसी राजा कुरु के नाम पर प्राचीन भारत के सबसे प्रसिद्ध ‘कुरु वंश’ की स्थापना हुई, जिसमें आगे चलकर कौरवों और पांडवों का जन्म हुआ। अतः धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से माँ ताप्ती को कुरु वंश की आदि-माता (Founding Mother) भी कहा जाता है।

2. Maa Taapti Janmutsav 2026: सटीक तिथि और शुभ मुहूर्त (Date and Timings)

हिंदू पंचांग (Hindu Calendar) के अनुसार, माँ ताप्ती का जन्मोत्सव हर साल आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि (Ashadha Shukla Saptami) को मनाया जाता है। माना जाता है कि इसी पावन दिन माँ ताप्ती ने पृथ्वी पर जल रूप में अवतार लिया था।

Maa Taapti Janmutsav 2026 की तिथि:

वर्ष 2026 के वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल सप्तमी की यह पावन तिथि जुलाई माह में पड़ रही है।

  • सप्तमी तिथि का आरंभ: 20 जुलाई 2026 (सोमवार) को तड़के 03:30 AM पर।

  • सप्तमी तिथि का समापन: 21 जुलाई 2026 (मंगलवार) को सुबह 04:03 AM पर।

चूँकि हिंदू धर्म में उदया तिथि (सूर्योदय के समय व्याप्त तिथि) का ही विशेष महत्व होता है, इसलिए Maa Taapti Janmutsav 2026 का महापर्व 20 जुलाई 2026, सोमवार के दिन ही पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। सोमवार का दिन भगवान शिव का दिन होता है, जिससे इस वर्ष की ताप्ती जयंती का आध्यात्मिक महत्व और भी अधिक बढ़ गया है।

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3. एक त्वरित अवलोकन (Quick Overview Table)

पाठकों की सुविधा के लिए यहाँ Maa Taapti Janmutsav 2026 से जुड़ी मुख्य जानकारियों को एक तालिका (Table) के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है:

पर्व / विवरण (Description) सटीक जानकारी (Details)
पर्व का नाम Maa Taapti Janmutsav 2026 / ताप्ती जयंती
हिंदू पंचांग तिथि आषाढ़ शुक्ल सप्तमी
वर्ष 2026 में तारीख 20 जुलाई 2026 (सोमवार)
माँ ताप्ती के माता-पिता भगवान सूर्य देव और देवी छाया
भाई-बहन यमराज, शनिदेव, भद्रा, यमुना
मुख्य आयोजन स्थल मुलताई (बैतूल जिला, मध्य प्रदेश), बुरहानपुर, सूरत
नदी का प्रवाह पूर्व से पश्चिम की ओर (East to West)
धार्मिक मान्यता ताप्ती स्नान से यमराज (मृत्यु के देवता) का भय और शनि दोष समाप्त होता है।

4. ताप्ती नदी से जुड़े चमत्कार और पौराणिक मान्यताएं

नदियों के देश भारत में ताप्ती नदी अपनी कुछ अत्यंत रहस्यमयी और चमत्कारिक धार्मिक मान्यताओं के लिए जानी जाती है, जो इसे अन्य नदियों से अलग और विशिष्ट बनाती हैं:

I. हड्डियों को गलाने वाली एकमात्र नदी

हिंदू धर्म में गंगा नदी को अस्थि विसर्जन के लिए सबसे पवित्र माना जाता है, लेकिन ताप्ती नदी दुनिया की एकमात्र ऐसी नदी मानी जाती है, जिसके जल में हड्डियों को शीघ्र गलाने (Melting bones) की अद्भुत क्षमता है।

धार्मिक शास्त्रों और स्थानीय किंवदंतियों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति की अकाल मृत्यु (Unnatural Death) हो जाती है (जैसे दुर्घटना, आत्महत्या या किसी भयंकर बीमारी से), तो उसकी आत्मा को आसानी से मोक्ष नहीं मिलता। ऐसी स्थिति में उस अकाल मृत्यु के शिकार व्यक्ति के अस्थि कलश (हड्डियों) को यदि ताप्ती नदी के पवित्र जल में प्रवाहित किया जाए, तो उसकी आत्मा को न केवल तुरंत शांति मिल जाती है, बल्कि उसे यमलोक की यातनाएं भी नहीं सहनी पड़तीं।

II. भगवान राम द्वारा तर्पण

पौराणिक मान्यता है कि त्रेता युग में जब भगवान श्री राम माता सीता और अपने अनुज लक्ष्मण के साथ वनवास पर थे, तब उन्होंने ताप्ती नदी के तट पर ही अपने पिता राजा दशरथ की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध और तर्पण (Tarpan) का कार्य किया था। इसी कारण आज भी लोग अपने पितरों (पूर्वजों) के श्राद्ध और तर्पण के लिए ताप्ती नदी के घाटों पर भारी संख्या में आते हैं।

III. यमराज का वरदान

चूंकि मृत्यु के देवता यमराज माँ ताप्ती के सगे भाई हैं और वे अपनी बहन से अत्यधिक प्रेम करते हैं, इसलिए उन्होंने माँ ताप्ती को एक वरदान दिया था। यमराज के वरदान के अनुसार— “जो भी मनुष्य आषाढ़ शुक्ल सप्तमी (तुम्हारे जन्मोत्सव) के दिन या किसी भी शुभ अवसर पर तुम्हारे जल में स्नान करेगा, उस पर मैं कभी अपनी क्रूर दृष्टि नहीं डालूंगा।” यही कारण है कि Maa Taapti Janmutsav 2026 के दिन ताप्ती नदी में स्नान करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त हो जाता है।

5. मुलताई: ताप्ती नदी का पावन उद्गम स्थल और 7 रहस्यमयी कुंड

ताप्ती नदी का उद्गम मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में सतपुड़ा पर्वत श्रृंखलाओं की घाटियों में स्थित ‘मुलताई’ (Multai) नामक नगर से होता है। ‘मुलताई’ शब्द मूल रूप से संस्कृत के ‘मूलतापी’ (Mool Tapi) से बना है, जिसका शाब्दिक अर्थ है— ताप्ती का मूल (Origin) या उद्गम स्थल।

मुलताई में माँ ताप्ती के प्राकट्य स्थल पर एक अत्यंत प्राचीन, सुंदर और भव्य मंदिर स्थित है। इस मंदिर के प्रांगण में और ताप्ती सरोवर के आस-पास 7 पवित्र कुंड (7 Sacred Ponds) बने हुए हैं। हर कुंड का अपना एक विशेष पौराणिक इतिहास और महत्व है:

  1. सूर्य कुंड (Surya Kund): यह कुंड भगवान सूर्य देव को समर्पित है। मान्यता है कि इस कुंड में स्नान करने से त्वचा संबंधी रोग (Skin diseases) दूर होते हैं और शरीर में तेज बढ़ता है।

  2. ताप्ती कुंड (Tapti Kund): यही वह मुख्य कुंड है जहाँ से माँ ताप्ती का जल निरंतर एक जलधारा के रूप में निकलता है।

  3. धर्म कुंड (Dharma Kund): पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी स्थान पर यमराज (जिन्हें धर्मराज भी कहा जाता है) ने अपनी बहन के लिए तपस्या की थी। इस कुंड में स्नान करने से यमराज का भय समाप्त होता है।

  4. पाप कुंड (Paap Kund): मान्यता है कि इस कुंड में सच्चे मन से डुबकी लगाने से व्यक्ति के ज्ञात-अज्ञात सभी पाप धुल जाते हैं और अंतःकरण शुद्ध हो जाता है।

  5. नारद कुंड (Narad Kund): कहा जाता है कि देवर्षि नारद को एक भयंकर श्राप से मुक्ति इसी स्थान पर मिली थी। यह कुंड ज्ञान और भक्ति का प्रतीक है।

  6. शनि कुंड (Shani Kund): शनिदेव ने अपनी बहन ताप्ती से मिलने पर यहाँ स्नान किया था। जो व्यक्ति शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या से पीड़ित है, उसे इस कुंड में स्नान करने से भारी राहत मिलती है।

  7. भैरव कुंड (Bhairav Kund): यह कुंड भगवान शिव के उग्र रूप भैरवनाथ को समर्पित है, जो इस पवित्र क्षेत्र के रक्षक (Kotwal) माने जाते हैं।

Maa Taapti Janmutsav 2026 के पावन अवसर पर इन सातों कुंडों की विशेष सफाई की जाती है और इन्हें रंग-बिरंगे फूलों तथा सहस्रों दीपकों से सजाया जाता है। रात के समय यहाँ का दृश्य स्वर्ग के समान अलौकिक प्रतीत होता है।

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6. मुलताई में Maa Taapti Janmutsav 2026 का भव्य आयोजन

मुलताई नगर और इसके आस-पास के क्षेत्रों (जैसे बुरहानपुर) के लिए ताप्ती जयंती केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि उनके जीवन का सबसे बड़ा और भावनापूर्ण उत्सव है। Maa Taapti Janmutsav 2026 (20 जुलाई 2026) पर मुलताई में एक विशाल धार्मिक मेले का आयोजन किया जाएगा।

इस महोत्सव के मुख्य आकर्षण इस प्रकार होते हैं:

  • विशाल चुनरी यात्रा (Chunari Yatra): जन्मोत्सव के दिन सुबह से ही शहर में उत्साह का माहौल होता है। हजारों श्रद्धालु (विशेषकर महिलाएं) मिलकर माँ ताप्ती को कई किलोमीटर लंबी लाल रंग की चुनरी ओढ़ाते हैं। यह चुनरी यात्रा पूरे नगर से गाजे-बाजे, भजनों और ढोल-नगाड़ों के साथ निकलती है और ताप्ती सरोवर तक जाती है।

  • महा आरती और दीपदान (Maha Aarti & Deep Daan): आषाढ़ शुक्ल सप्तमी की संध्या बेला में ताप्ती सरोवर के तट पर हरिद्वार की हर-की-पौड़ी और बनारस के घाटों की तर्ज पर ‘महा-आरती’ की जाती है। हजारों भक्त अपने हाथों में दीप लेकर माँ की आरती उतारते हैं और नदी में दीप प्रवाहित (Deep Daan) करते हैं।

  • भंडारा (Community Feast): पूरे शहर में जगह-जगह श्रद्धालुओं के लिए निशुल्क भोजन (भंडारे) की व्यवस्था की जाती है। माना जाता है कि ताप्ती जयंती के दिन किसी भूखे को भोजन कराना 100 यज्ञों के बराबर पुण्य देता है।

विशेष नोट (Cultural Tapti Mahotsav): धार्मिक ताप्ती जन्मोत्सव (जुलाई) के अलावा, मध्य प्रदेश शासन के संस्कृति विभाग द्वारा जनवरी माह में भी मुलताई में 3 दिवसीय ‘ताप्ती महोत्सव’ का आयोजन किया जाता है। वर्ष 2026 में यह शासकीय सांस्कृतिक महोत्सव 14 से 16 जनवरी 2026 को मुलताई के हाई स्कूल मैदान में आयोजित किया जाएगा, जिसमें भक्ति संगीत, मालवी गायन और सुप्रसिद्ध कलाकारों (जैसे हिमानी शिवपुरी) की मनभावन प्रस्तुतियां देखने को मिलेंगी।

7. ताप्ती नदी का भौगोलिक महत्व और इसकी यात्रा

भौगोलिक दृष्टि से ताप्ती नदी भारत की सबसे महत्वपूर्ण नदियों में से एक है। नर्मदा और माही नदी की तरह ही ताप्ती नदी भी भारत की उन गिनी-चुनी प्रमुख नदियों में से एक है जो पूर्व से पश्चिम (East to West) की ओर बहती हैं, जबकि भारत की अधिकांश नदियां पश्चिम से पूर्व की ओर बहकर बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं।

ताप्ती का सफर (The Journey of Tapti):

  • ताप्ती नदी मध्य प्रदेश के मुलताई (बैतूल जिले) से निकलकर सतपुड़ा पर्वत श्रृंखलाओं की गहरी घाटियों के बीच से बहती है।

  • इसके बाद यह महाराष्ट्र के जलगांव, भुसावल, धुले और नंदुरबार जिलों में प्रवेश करती है, जहाँ यह कृषि के लिए एक वरदान साबित होती है।

  • अंत में यह गुजरात के प्रसिद्ध शहर सूरत (Surat) से होते हुए खंभात की खाड़ी (Gulf of Khambhat) के रास्ते अरब सागर (Arabian Sea) में समा जाती है।

ताप्ती नदी की कुल लंबाई लगभग 724 किलोमीटर है। यह नदी मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात— इन तीन राज्यों की जीवन रेखा (Lifeline) है। कृषि, सिंचाई, बिजली उत्पादन और पेयजल के लिए करोड़ों लोग प्रत्यक्ष रूप से माँ ताप्ती पर निर्भर हैं।

8. Maa Taapti Janmutsav 2026: पूजा विधि और नियम (Puja Vidhi)

यदि आप Maa Taapti Janmutsav 2026 (20 जुलाई) के दिन मुलताई या ताप्ती नदी के किसी अन्य घाट (जैसे बुरहानपुर या सूरत) पर नहीं जा पा रहे हैं, तो आप अपने घर पर ही माँ ताप्ती की उपासना करके उनका पूर्ण आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

घर पर पूजा की सरल विधि:

  1. प्रातः स्नान और संकल्प: 20 जुलाई 2026 (सोमवार) की सुबह सूर्योदय से पूर्व उठें। स्नान के पानी में यदि ताप्ती नदी का जल या गंगाजल उपलब्ध हो, तो उसे अवश्य मिला लें। स्नान करते समय “ॐ ताप्त्यै नमः” का मानसिक जाप करें।

  2. सूर्य देव को अर्घ्य: माँ ताप्ती सूर्य देव की लाडली पुत्री हैं, इसलिए सबसे पहले तांबे के लोटे में शुद्ध जल, लाल फूल, कुमकुम और थोड़े से अक्षत (चावल) डालकर उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दें और “ॐ सूर्याय नमः” का जाप करें। सूर्य देव को प्रसन्न किए बिना ताप्ती पूजा अधूरी मानी जाती है।

  3. माँ ताप्ती का ध्यान और श्रृंगार: घर के मंदिर में एक साफ लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। उस पर एक कलश स्थापित करें, जिसे ताप्ती नदी का स्वरूप माना जाएगा। माँ ताप्ती का मानसिक ध्यान करते हुए उन्हें लाल पुष्प, सिंदूर, हल्दी, कुमकुम, सुहाग की सामग्री और एक छोटी चुनरी अर्पित करें।

  4. यमराज और शनिदेव का स्मरण: पूजा के दौरान यमराज और शनिदेव का भी स्मरण करें। मान्यता है कि ताप्ती जयंती के दिन इन दोनों भाइयों की पूजा करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और शनि की साढ़ेसाती के कष्ट कम होते हैं।

  5. आरती और दान: माँ ताप्ती की कपूर से आरती करें। पूजा के उपरांत किसी गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति को अन्न, वस्त्र या छाते (Umbrella) का दान अवश्य करें (क्योंकि आषाढ़ का महीना वर्षा ऋतु का होता है)।

9. पर्यावरण संरक्षण और माँ ताप्ती का संदेश (Environmental Message)

Maa Taapti Janmutsav 2026 का अवसर केवल धार्मिक अनुष्ठानों, पूजा-पाठ और मेलों तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यह हमें एक बहुत बड़ा सामाजिक और पर्यावरणीय संदेश (Environmental Message) भी देता है।

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वर्तमान समय में अंधाधुंध औद्योगिकरण, शहरीकरण और लोगों की लापरवाही के कारण ताप्ती नदी का पवित्र जल कई स्थानों (विशेषकर बड़े शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों के पास) पर प्रदूषित हो रहा है। देवी के रूप में पूजी जाने वाली हमारी इन जीवनदायिनी नदियों को प्लास्टिक, जहरीले रसायनों और सीवेज के कचरे से बचाना हमारा पहला राष्ट्रीय और धार्मिक कर्तव्य है।

ताप्ती जयंती पर लें यह संकल्प:

ताप्ती जयंती के पावन अवसर पर हम सभी को यह दृढ़ संकल्प लेना चाहिए कि हम न तो नदी में कोई कचरा डालेंगे और न ही दूसरों को डालने देंगे। सरकार द्वारा चलाए जा रहे ‘स्वच्छ ताप्ती अभियान’ या ‘नमामि गंगे’ जैसे प्रोजेक्ट्स में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें। याद रखें, एक स्वच्छ और अविरल नदी ही हमारी आने वाली पीढ़ियों को जीवन दान दे सकती है।

भारतीय संस्कृति एक ऐसी महान संस्कृति है जो प्रकृति के हर कण में ईश्वर के दर्शन करती है और नदियों की पूजा माता के रूप में करती है। माँ ताप्ती इस संस्कृति का एक देदीप्यमान और अमूल्य रत्न हैं। Maa Taapti Janmutsav 2026 हमें यह स्वर्णिम अवसर देता है कि हम प्रकृति, जल और अपने गौरवशाली पौराणिक इतिहास के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करें।

मध्य प्रदेश के बैतूल (मुलताई) से लेकर गुजरात के सूरत तक, माँ ताप्ती चुपचाप बहते हुए करोड़ों लोगों की प्यास बुझाती हैं और उनके खेतों को हरा-भरा रखती हैं। 20 जुलाई 2026 को आषाढ़ शुक्ल सप्तमी के दिन आप चाहे मुलताई के ताप्ती सरोवर के किनारे खड़े हों, बुरहानपुर के ऐतिहासिक घाट पर हों, या अपने घर के भीतर हों— सच्चे मन से माँ ताप्ती और सूर्य देव का स्मरण अवश्य करें। सूर्यपुत्री माँ ताप्ती आपके जीवन के सभी कष्टों, रोगों और संतापों को हर लेंगी और आपको सुख-शांति तथा समृद्धि का आशीर्वाद देंगी।

जय माँ ताप्ती! जय सूर्य देव!

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: Maa Taapti Janmutsav 2026 की सही तारीख क्या है?

उत्तर: हिंदू पंचांग के अनुसार, माँ ताप्ती जन्मोत्सव (ताप्ती जयंती) प्रतिवर्ष आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह पावन तिथि 20 जुलाई 2026 (सोमवार) को पड़ेगी। इसी दिन देशभर में, विशेषकर मुलताई में, यह पर्व मनाया जाएगा।

प्रश्न 2: ताप्ती नदी का उद्गम स्थल कहाँ है और इसका क्या अर्थ है?

उत्तर: ताप्ती नदी का उद्गम मध्य प्रदेश राज्य के बैतूल जिले में स्थित ‘मुलताई’ (Multai) नगर से होता है। मुलताई का प्राचीन नाम ‘मूलतापी’ है, जिसका शाब्दिक अर्थ है— माँ ताप्ती का मूल (origin)। यहाँ नदी एक पवित्र कुंड (ताप्ती सरोवर) से निकलती है जिसके आस-पास 7 पौराणिक कुंड स्थित हैं।

प्रश्न 3: माँ ताप्ती के माता-पिता और प्रसिद्ध भाई-बहन कौन हैं?

उत्तर: पुराणों और महाभारत के अनुसार, माँ ताप्ती प्रत्यक्ष देवता भगवान सूर्य देव (Surya Dev) और उनकी पत्नी देवी छाया (Chhaya) की पुत्री हैं। कर्मफल दाता शनिदेव (Shani Dev) और मृत्यु के देवता यमराज (Yamraj) माँ ताप्ती के सगे भाई हैं, जबकि पवित्र यमुना नदी इनकी बहन हैं।

प्रश्न 4: ताप्ती नदी में अस्थि विसर्जन करने और स्नान करने का क्या विशेष महत्व है?

उत्तर: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ताप्ती नदी दुनिया की एकमात्र ऐसी नदी है जिसके जल में हड्डियों को गलाने की अद्भुत क्षमता है। यदि किसी व्यक्ति की अकाल मृत्यु हो जाए, तो ताप्ती में उसकी अस्थियां प्रवाहित करने से आत्मा को तुरंत मोक्ष मिल जाता है। इसके अलावा, यमराज के वरदान के कारण ताप्ती में स्नान करने वाले भक्तों पर मृत्यु के देवता की क्रूर दृष्टि नहीं पड़ती और अकाल मृत्यु का भय दूर होता है।

प्रश्न 5: मुलताई में 2026 में ताप्ती महोत्सव कब-कब मनाया जाएगा?

उत्तर: मुलताई में मुख्य रूप से दो बड़े आयोजन होते हैं। पहला, धार्मिक ‘Maa Taapti Janmutsav’ जो आषाढ़ शुक्ल सप्तमी (20 जुलाई 2026) को मनाया जाएगा, जिसमें चुनरी यात्रा और दीपदान होता है। दूसरा, मध्य प्रदेश शासन द्वारा आयोजित सांस्कृतिक ‘ताप्ती महोत्सव’, जो 14 से 16 जनवरी 2026 को मुलताई के हाई स्कूल मैदान में आयोजित किया जाएगा, जिसमें नामी कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे।

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