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Lakshmi Aabadh Mantra Sadhana: कैसे करें? जानें साधना विधि, नियम, लाभ, महत्व और सावधानियांIt takes 14 minutes... to read this article !

सनातन धर्म और तंत्र-मंत्र शास्त्र में धन, वैभव, और ऐश्वर्य की अधिष्ठात्री देवी माता महालक्ष्मी को माना गया है। शास्त्रों में माता लक्ष्मी का एक नाम ‘चंचला’ भी है। इसका अर्थ है कि वे कभी एक स्थान पर टिक कर नहीं रहतीं। आधुनिक जीवन में हम सभी यह अनुभव करते हैं कि धन कमाना उतना कठिन नहीं है, जितना उस कमाए हुए धन को संचित करना (बचाना) और उसे स्थिर रखना है। कई बार व्यक्ति लाखों रुपये कमाता है, लेकिन धन पानी की तरह व्यर्थ के कार्यों, बीमारियों या नुकसान में बह जाता है। ऐसी स्थिति में तंत्र शास्त्र और मंत्र विज्ञान में “लक्ष्मी आबद्ध मंत्र साधना” (Lakshmi Aabadh Mantra Sadhana) का विधान बताया गया है।

‘आबद्ध’ (Aabadh) का शाब्दिक अर्थ है— ‘बांधना’, ‘स्थिर करना’ या ‘रोक कर रखना’। जब माता लक्ष्मी के चलायमान (चंचल) स्वरूप को मंत्रों की दिव्य ऊर्जा से किसी घर, तिजोरी या व्यापारिक प्रतिष्ठान में स्थिर कर दिया जाता है, तो उसे ‘आबद्ध लक्ष्मी’ कहते हैं। यह साधना विशेष रूप से उन लोगों के लिए है जिनके पास पैसा तो आता है, लेकिन टिकता नहीं है।

आज के इस अत्यंत विस्तृत और ज्ञानवर्धक लेख में हम ‘लक्ष्मी आबद्ध मंत्र साधना’ की संपूर्ण विधि, इसमें पालन किए जाने वाले कठोर नियम, इसके अचूक लाभ, आध्यात्मिक महत्व और उन महत्वपूर्ण सावधानियों पर गहन चर्चा करेंगे, जिन्हें अपनाकर आप माता लक्ष्मी को अपने घर में स्थायी रूप से आबद्ध कर सकते हैं।

लक्ष्मी आबद्ध मंत्र साधना का अर्थ और महत्व (Meaning & Significance)

इससे पहले कि हम साधना की विधि में प्रवेश करें, यह समझना आवश्यक है कि आखिर ‘आबद्ध लक्ष्मी’ का सिद्धांत क्या है और कलियुग में इसका इतना अधिक महत्व क्यों है।

आबद्ध लक्ष्मी क्या है?

शास्त्रों के अनुसार, माता लक्ष्मी के आठ मुख्य स्वरूप हैं (अष्टलक्ष्मी)। इनमें से जब हम ‘स्थिर लक्ष्मी’ की साधना करते हैं, तो हम एक प्रकार से लक्ष्मी को आबद्ध कर रहे होते हैं। तंत्र शास्त्र में कुछ विशेष बीजाक्षरों (Seed Mantras) का उपयोग करके एक ऐसा ऊर्जा चक्र (Aura) तैयार किया जाता है, जिसे भेदकर धन बाहर नहीं जा पाता। इसे ही धन का ‘बंधन’ या लक्ष्मी का ‘आबद्ध’ होना कहते हैं।

इसका महत्व क्यों है?

  1. अनावश्यक खर्चों पर लगाम: आज के युग में देखा जाता है कि आय (Income) से अधिक व्यय (Expenses) के रास्ते खुले रहते हैं। यह साधना उन छिपे हुए खर्चों (जैसे— अचानक बीमारी, दुर्घटना, कोर्ट-कचहरी, या चोरी) को रोकती है।

  2. पीढ़ियों तक धन का ठहराव: लक्ष्मी आबद्ध साधना केवल एक व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि पूरे कुल (वंश) के लिए कार्य करती है। जब लक्ष्मी घर में आबद्ध हो जाती हैं, तो आने वाली पीढ़ियां भी दरिद्रता का मुख नहीं देखतीं।

  3. कर्ज के दुष्चक्र से मुक्ति: जो लोग बार-बार कर्ज के जाल में फंस जाते हैं (क्रेडिट कार्ड, लोन आदि), उनके लिए यह साधना संजीवनी बूटी का कार्य करती है, क्योंकि यह धन के प्रवाह को सकारात्मक दिशा में मोड़ती है।

  4. आध्यात्मिक और भौतिक संतुलन: यह साधना व्यक्ति को केवल भौतिक रूप से ही धनी नहीं बनाती, बल्कि उसे मानसिक शांति और आध्यात्मिक संतोष भी प्रदान करती है, क्योंकि स्थिर धन हमेशा सुख लाता है, जबकि चंचल धन चिंताएं लेकर आता है।

लक्ष्मी आबद्ध महामंत्र (The Powerful Aabadh Mantra)

तंत्र और मंत्र शास्त्र में लक्ष्मी को आबद्ध करने के कई मंत्र वर्णित हैं। गुरु परंपरा और शास्त्रों के अनुसार, आबद्ध लक्ष्मी का एक अत्यंत सिद्ध और शक्तिशाली मंत्र इस प्रकार है:

लक्ष्मी सर्व मंगल मंत्र:

ॐ श्रीं श्रीं श्रीं महालक्ष्मी आबद्ध आबद्ध ऐं ऐं श्रीं श्रीं फट्

(Om Shreem Aing Aing Shreem Shreem Mahalakshmi Aabadh Aabadh Aing Aing Shreem Shreem Phat)

मूल लक्ष्मी आबद्ध मंत्र:

“ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं कमलवासिन्यै, स्वाहा आगच्छ आगच्छ, मम गृहे आबद्ध तिष्ठ तिष्ठ नमः” (Om Shreem Hreem Kleem Aim Kamalvasinyai, Swaha Aagachha Aagachha, Mam Gruhe Aabadh Tishtha Tishtha Namah)

मंत्र का अर्थ और रहस्य:

  • ॐ (Om): ब्रह्मांडीय ऊर्जा और परम चेतना का प्रतीक।

  • श्रीं (Shreem): महालक्ष्मी का मूल बीज मंत्र।

  • ह्रीं (Hreem): माया बीज, जो आकर्षण और सम्मोहन पैदा करता है।

  • क्लीं (Kleem): कामराज बीज, जो इच्छाओं की पूर्ति करता है।

  • ऐं (Aim): सरस्वती बीज, जो ज्ञान और सद्बुद्धि देता है (ताकि धन का सही उपयोग हो)।

  • कमलवासिन्यै: कमल पर निवास करने वाली माता।

  • आगच्छ आगच्छ: आइए, आइए (आवाहन)।

  • मम गृहे आबद्ध तिष्ठ तिष्ठ नमः: मेरे घर में बंधकर स्थिर रूप से निवास करें, आपको नमन है।

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(नोट: इस मंत्र का जाप पूर्ण शुद्धता और एकाग्रता के साथ किया जाना चाहिए।)

लक्ष्मी आबद्ध मंत्र साधना: संपूर्ण विधि (Detailed Step-by-Step Sadhana Vidhi)

मंत्र साधना कोई सामान्य पूजा नहीं है; यह एक विशिष्ट तांत्रिक/वैदिक प्रक्रिया है। यदि आप इसे सही विधि-विधान से करते हैं, तभी यह ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ जुड़कर परिणाम देती है।

चरण 1: साधना का उचित समय और मुहूर्त (Auspicious Time)

  • सर्वश्रेष्ठ दिन: इस साधना को आरंभ करने के लिए शुक्रवार, पूर्णिमा, दीपावली की महानिशा, धनतेरस, अक्षय तृतीया, या रवि पुष्य योग सबसे उत्तम माने जाते हैं।

  • समय: लक्ष्मी आबद्ध साधना हमेशा रात्रि काल में की जाती है। रात्रि 9 बजे से लेकर मध्यरात्रि 1 बजे (महानिशा काल) के बीच का समय इस साधना के लिए सबसे फलदायी होता है, क्योंकि इस समय ब्रह्मांड में शांति होती है और मंत्रों की ध्वनि तरंगें बिना किसी बाधा के यात्रा करती हैं।

चरण 2: पूजा सामग्री का संकलन (Puja Samagri)

साधना शुरू करने से पूर्व निम्नलिखित सामग्री एकत्रित कर लें:

  • लकड़ी की एक साफ चौकी और उस पर बिछाने के लिए लाल या पीले रंग का रेशमी कपड़ा।

  • माता लक्ष्मी और भगवान श्री हरि विष्णु का चित्र या मूर्ति (लक्ष्मी जी बैठी हुई मुद्रा में हों, खड़ी मुद्रा में नहीं)।

  • श्रीयंत्र या कनकधारा यंत्र (तांबे, चांदी या स्फटिक का)।

  • गाय का शुद्ध घी, रुई की बत्ती (कलावा युक्त लाल बत्ती उत्तम है)।

  • लाल पुष्प (गुलाब या कमल), अक्षत (साबुत चावल), कुमकुम, हल्दी, अष्टगंध।

  • 11 कमलगट्टे, 11 पीली कौड़ियां, और 11 गोमती चक्र (इन्हें आबद्ध करने के लिए)।

  • नैवेद्य (खीर, मखाने, या दूध से बनी कोई सफेद/पीली मिठाई), इत्र।

  • जाप के लिए कमलगट्टे की माला या स्फटिक की माला

चरण 3: शारीरिक और मानसिक शुद्धि (Purification)

  • रात्रि में स्नान करें। स्वच्छ और धुले हुए लाल, पीले या गुलाबी रंग के वस्त्र धारण करें। काले या नीले वस्त्र पहनकर यह साधना न करें।

  • मन से सभी प्रकार के नकारात्मक विचारों, क्रोध और तनाव को निकाल दें।

  • उत्तर (North) या पूर्व (East) दिशा की ओर मुख करके लाल रंग के ऊनी आसन (कंबल) या कुशा के आसन पर बैठें।

चरण 4: चौकी की स्थापना और पवित्रीकरण

  • अपने सामने चौकी स्थापित करें। उस पर लाल वस्त्र बिछाएं।

  • माता लक्ष्मी, भगवान विष्णु और श्रीयंत्र को स्थापित करें।

  • थोड़ा सा गंगाजल हाथ में लेकर अपने ऊपर और पूजा सामग्री पर छिड़कें। (मंत्र: ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥)

  • इसके बाद तीन बार जल पीकर आचमन करें।

चरण 5: संकल्प लेना (The Most Important Step)

किसी भी साधना की सफलता उसके ‘संकल्प’ पर निर्भर करती है।

  • दाहिने हाथ में थोड़ा सा जल, अक्षत, एक लाल पुष्प और एक सिक्का लें।

  • अपना नाम, अपने गोत्र का नाम, अपने स्थान का नाम और दिन/तिथि बोलें।

  • माता लक्ष्मी से कहें: “हे धनदात्री महालक्ष्मी, मैं (अपना नाम) अपने घर और व्यापार में धन के स्थायित्व और अनावश्यक खर्चों की रोक-थाम के लिए आपके इस ‘आबद्ध मंत्र’ की 11 दिन (या 21 दिन) तक नित्य 11 माला जाप करने का संकल्प ले रहा/रही हूं। आप मेरे घर में स्थायी रूप से आबद्ध हों और मेरी साधना सफल करें।”

  • यह जल भूमि पर छोड़ दें।

चरण 6: पंचोपचार पूजा और दीप प्रज्ज्वलन

  • गाय के घी का एक अखंड दीपक जलाएं, जो पूरी साधना के दौरान (जाप पूरा होने तक) बुझना नहीं चाहिए।

  • भगवान गणेश और विष्णु जी का ध्यान करें।

  • माता लक्ष्मी और श्रीयंत्र को जल से स्नान कराएं (भाव रूप में), उन्हें वस्त्र/मौली अर्पित करें, कुमकुम का तिलक लगाएं, लाल पुष्प चढ़ाएं और इत्र लगाएं।

  • चौकी पर एक कटोरी में 11 पीली कौड़ियां, 11 कमलगट्टे और 11 गोमती चक्र रखें। साधना काल में इनकी भी पूजा होगी।

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चरण 7: मंत्र जाप की प्रक्रिया (Mantra Japa)

  • पूर्ण एकाग्रता के साथ माता लक्ष्मी के शांत और स्थिर स्वरूप का अपने हृदय या आज्ञा चक्र में ध्यान करें।

  • कमलगट्टे या स्फटिक की माला हाथ में लें (माला को गौमुखी/झोली के अंदर रखें)।

  • “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं कमलवासिन्यै, स्वाहा आगच्छ आगच्छ, मम गृहे आबद्ध तिष्ठ तिष्ठ नमः” मंत्र का उपांशु जाप (जिसमें केवल होंठ हिलें, आवाज बाहर न जाए) शुरू करें।

  • प्रतिदिन संकल्प के अनुसार (कम से कम 5, 11 या 21 माला) जाप करें।

चरण 8: साधना का समापन और बंधन

  • अंतिम दिन जाप पूरा होने के बाद, माता लक्ष्मी की आरती करें।

  • उन 11 कौड़ियों, 11 कमलगट्टों और 11 गोमती चक्रों को लाल रेशमी कपड़े में बांधकर एक पोटली बना लें।

  • इस पोटली को अपने घर की तिजोरी, कैश बॉक्स, या उस स्थान पर रखें जहाँ आप धन रखते हैं। यही ‘आबद्ध लक्ष्मी’ की पोटली है, जो धन को घर से बाहर बेवजह जाने से रोकेगी।

  • अंत में माता से अपनी गलतियों के लिए क्षमा प्रार्थना अवश्य करें।

लक्ष्मी आबद्ध साधना के कड़े नियम (Strict Rules for Sadhana)

तंत्र-मंत्र की किसी भी साधना में यदि नियमों की अनदेखी की जाए, तो ऊर्जा का क्षय हो जाता है और वांच्छित परिणाम नहीं मिलते। इस साधना के कुछ विशिष्ट नियम हैं:

  1. पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन: साधना के दिनों (चाहे वह 11 दिन हों या 21 दिन) में साधक को मन, वचन और कर्म से पूर्ण ब्रह्मचर्य का कड़ाई से पालन करना चाहिए।

  2. सात्विक जीवनशैली: इन दिनों में मांस, मदिरा, अंडा, प्याज, लहसुन और किसी भी प्रकार के तामसिक भोजन का पूर्ण रूप से त्याग कर देना चाहिए। घर में भी सात्विक माहौल होना चाहिए।

  3. भूमि शयन: माता के प्रति समर्पण भाव दिखाने के लिए साधना काल में गद्देदार बिस्तर का त्याग करके जमीन पर चटाई या कंबल बिछाकर सोना चाहिए।

  4. स्थान और समय की स्थिरता: जिस स्थान (कमरे के जिस कोने) पर आपने पहले दिन बैठकर जाप किया है और जो समय तय किया है, अंतिम दिन तक उसमें कोई बदलाव नहीं होना चाहिए। इसे ‘आसन शुद्धि’ और ‘काल शुद्धि’ कहते हैं।

  5. स्त्रियों का सर्वोच्च सम्मान: माता लक्ष्मी उसी घर में वास करती हैं, जहाँ स्त्रियों का सम्मान होता है। साधना काल में (और उसके बाद भी) घर की किसी भी महिला (पत्नी, माता, बहन, पुत्री) का अपमान न करें, न ही उन पर क्रोध करें।

  6. गोपनीयता बनाए रखना: अपनी साधना, उसके अनुभवों और अपने संकल्प के बारे में किसी बाहरी व्यक्ति (गुरु को छोड़कर) को न बताएं। साधना का ढिंढोरा पीटने से उसका प्रभाव नष्ट हो जाता है।

  7. क्रोध और अपशब्दों से बचाव: साधना काल में आपके अंदर असीम ऊर्जा का संचार होता है। यदि आप क्रोध करते हैं या किसी को गाली देते हैं, तो वह सारी संचित सकारात्मक ऊर्जा उसी क्षण नष्ट हो जाती है।

साधना के अचूक और चमत्कारी लाभ (Miraculous Benefits)

जो भी साधक पूर्ण निष्ठा, विश्वास और विधि-विधान के साथ लक्ष्मी आबद्ध मंत्र की साधना संपन्न कर लेता है, उसके जीवन में निम्नलिखित चमत्कारी बदलाव आते हैं:

1. धन के रिसाव (Leakage) का रुकना

इस साधना का सबसे बड़ा और तुरंत दिखने वाला लाभ यह है कि घर में होने वाले व्यर्थ के खर्च अचानक बंद हो जाते हैं। बीमारियों पर पैसा खर्च होना, वाहन का बार-बार खराब होना, या किसी को दिया गया उधार जो डूब रहा था, वह सब रुक जाता है।

2. स्थिर संपदा का निर्माण (Creation of Assets)

व्यक्ति जो पैसा कमाता है, वह अब केवल ‘खर्च’ नहीं होता, बल्कि उसका निवेश ‘संपत्ति’ (Assets) में होने लगता है। साधक जमीन, मकान, स्वर्ण (सोना) या फिक्स्ड डिपॉजिट जैसे स्थायी धन का संचय करने में सफल होता है।

3. व्यापार में अप्रत्याशित स्थिरता

व्यापारियों के लिए यह साधना किसी वरदान से कम नहीं है। व्यापार में आने वाले उतार-चढ़ाव (Fluctuations) कम हो जाते हैं। ग्राहकों का एक स्थायी वर्ग (Loyal customers) जुड़ता है और व्यापार मंदी के दौर में भी सुरक्षित रहता है।

4. कर्ज से पूर्ण मुक्ति

जब खर्च रुकते हैं और आय के स्रोत बढ़ते हैं, तो व्यक्ति पुराने से पुराने और भारी कर्ज को भी आसानी से चुकाने में सक्षम हो जाता है। यह साधना कर्ज के मानसिक तनाव से बाहर निकालती है।

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5. आकर्षण प्रभाव और मान-सम्मान

इस मंत्र में मौजूद ‘ह्रीं’ और ‘क्लीं’ बीज मंत्र साधक के व्यक्तित्व में एक गजब का आकर्षण और तेज पैदा करते हैं। समाज में, रिश्तेदारों में और कार्यस्थल पर साधक का मान-सम्मान और प्रभाव बढ़ता है।

6. पारिवारिक शांति और सामंजस्य

धन की कमी अक्सर घर में कलह का कारण बनती है। लक्ष्मी के आबद्ध होने से जब आर्थिक सुरक्षा की भावना आती है, तो परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम, समझ और शांति का वातावरण स्वतः ही स्थापित हो जाता है।

ध्यान रखने योग्य महत्वपूर्ण सावधानियां (Crucial Precautions)

तंत्र साधनाएं दोधारी तलवार की तरह होती हैं। यदि लाभ प्रचंड है, तो सावधानी भी उतनी ही रखनी पड़ती है:

  • अहंकार से बचें: जब साधना के प्रभाव से आपके पास धन संचित होने लगे, तो भूलकर भी अपने धन का घमंड न करें। जो व्यक्ति लक्ष्मी का अहंकार करता है, आबद्ध लक्ष्मी भी बंधन तोड़कर चली जाती हैं।

  • मंत्र का सही उच्चारण: संस्कृत के बीज मंत्रों (श्रीं, ह्रीं आदि) का उच्चारण एकदम सटीक होना चाहिए। गलत उच्चारण से मंत्र की ध्वनि तरंगें विकृत हो सकती हैं। यदि आप स्वयं नहीं बोल पाते, तो पहले किसी ऑडियो को सुनकर अभ्यास कर लें।

  • स्वार्थ और लालच न लाएं: इस साधना को किसी को नीचा दिखाने, जुआ (Gambling), सट्टा या शेयर मार्केट में रातों-रात करोड़पति बनने की नीयत से न करें। यह आपकी मेहनत की कमाई को बरकत देने का माध्यम है, शॉर्टकट नहीं।

  • स्वच्छता का चरम ध्यान: माता लक्ष्मी अत्यंत पवित्र देवी हैं। साधना स्थल, आपके वस्त्र, आपका शरीर और आपका पूरा घर एकदम साफ होना चाहिए। जाले, धूल और कबाड़ घर से तुरंत हटा दें।

  • साधना बीच में न छोड़ें: एक बार संकल्प लेने के बाद, चाहे कितनी भी बड़ी बाधा क्यों न आए, अनुष्ठान के दिनों को बीच में अधूरा न छोड़ें। यदि बहुत अधिक आपातकालीन स्थिति आ जाए, तो माता से क्षमा मांगकर ही उठें।

धन का होना और धन का टिकना, दोनों अलग-अलग बातें हैं। लक्ष्मी आबद्ध मंत्र साधना वह आध्यात्मिक सेतु है जो आपकी कड़ी मेहनत से कमाए गए धन को आपके घर में एक सुरक्षा कवच प्रदान करती है। देवों के देव महादेव और तंत्र शास्त्र के आचार्यों ने मनुष्य के कल्याण के लिए इन बीजाक्षरों की रचना की है।

इस साधना की सफलता पूरी तरह से साधक की ‘भावना’, ‘श्रद्धा’ और ‘नियमों के पालन’ पर निर्भर करती है। यदि आप पूर्ण समर्पण भाव से माता महालक्ष्मी को अपने घर में आमंत्रित करते हैं और उपयुक्त विधि से इस मंत्र का अनुष्ठान करते हैं, तो निश्चित मानिए, दरिद्रता हमेशा के लिए आपके घर का रास्ता भूल जाएगी और सुख-समृद्धि की स्थायी गंगा आपके घर में प्रवाहित होने लगेगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. क्या इस साधना को सामान्य गृहस्थ व्यक्ति कर सकता है?

जी हाँ, बिल्कुल। यह साधना विशेष रूप से गृहस्थों के लिए ही बताई गई है, क्योंकि गृहस्थ जीवन में ही आर्थिक स्थिरता की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। इसे कोई भी सामान्य व्यक्ति नियमों का पालन करते हुए कर सकता है; इसके लिए सन्यासी होना आवश्यक नहीं है।

2. महिलाएं लक्ष्मी आबद्ध साधना कैसे कर सकती हैं?

महिलाएं भी इस साधना को पूर्ण विधि-विधान से कर सकती हैं। वे माता लक्ष्मी का स्वरूप मानी जाती हैं, इसलिए उनकी साधना और भी जल्दी फलित होती है। बस ध्यान रहे कि मासिक धर्म (Periods) के 4-5 दिनों के दौरान यह साधना न करें। यदि अनुष्ठान के बीच में मासिक धर्म आ जाए, तो उतने दिन रुक जाएं और शुद्ध होने के बाद वहीं से (आगे की माला) अपनी साधना पुनः प्रारंभ करें।

3. आबद्ध की गई पोटली (कौड़ी, गोमती चक्र आदि) का बाद में क्या करना चाहिए?

साधना पूर्ण होने के बाद जिस लाल रेशमी कपड़े की पोटली में आपने सिद्ध कौड़ियां, कमलगट्टे और गोमती चक्र बांधे हैं, उसे अपनी तिजोरी या पैसे रखने की अलमारी में रख दें। इसे हर साल दीपावली की रात को निकालें, पुनः धूप-दीप दिखाएं (रिचार्ज करें) और वापस रख दें। इसे फेंकना या विसर्जित नहीं करना है।

4. यदि मंत्र जाप करते समय कोई गलती हो जाए या ध्यान भटक जाए तो क्या करें?

मानव मन चंचल है, इसलिए शुरुआत में ध्यान भटकना स्वाभाविक है। यदि ऐसा हो, तो घबराएं नहीं। माता लक्ष्मी भाव की भूखी हैं। जाप पूर्ण होने के बाद अंत में ‘ॐ नमः शिवाय’ या ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का 11 बार जाप कर लें और माता से अपनी भूल-चूक के लिए क्षमा मांग लें। इससे त्रुटि का दोष समाप्त हो जाता है।

5. लक्ष्मी आबद्ध मंत्र साधना के साथ क्या हम अपने दैनिक कार्य/नौकरी पर जा सकते हैं?

हाँ, बिल्कुल जा सकते हैं। आपको केवल रात्रि के समय अपने साधना के घंटे (1-2 घंटे) नियत रखने हैं। दिन के समय आप अपना सामान्य काम, नौकरी या व्यापार कर सकते हैं। बस ध्यान रहे कि कार्यस्थल पर भी आप ईमानदारी रखें और साधना के नियमों (जैसे- सात्विक आहार, झूठ न बोलना) का दिनचर्या में भी पालन करें।

(अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी विभिन्न धार्मिक ग्रंथों, तंत्र-मंत्र शास्त्र और मान्यताओं पर आधारित है। किसी भी गूढ़ तांत्रिक साधना को शुरू करने से पहले किसी योग्य गुरु या आध्यात्मिक मार्गदर्शक से व्यक्तिगत परामर्श लेना सदैव उचित रहता है।)

"नमस्कार! मैं अमित तिवारी हूँ, और आप मुझे एक 'साधक' के रूप में जान सकते हैं। बचपन से ही सनातन धर्म, तंत्र-मंत्र और आध्यात्मिक साधनाओं ने मुझे अपनी ओर गहराई से आकर्षित किया है। वर्षों के निरंतर अध्ययन, गुरु-कृपा और अपने व्यक्तिगत साधना-अनुभवों से मैंने जो कुछ भी सीखा है, उसे मैं sadhnas.in के माध्यम से आपके साथ साझा कर रहा हूँ। मेरा मुख्य उद्देश्य इंटरनेट पर फैले भ्रम को दूर करके प्रामाणिक, सत्य और शास्त्र-सम्मत जानकारी को बेहद सरल भाषा में आप तक पहुँचाना है। मैं कोई गुरु या उपदेशक नहीं हूँ, बल्कि आप ही की तरह ईश्वर की खोज में निकला एक राही हूँ। मेरी यही कोशिश है कि मेरे अनुभवों और लेखनी से आपकी आध्यात्मिक यात्रा और भी सुगम व सफल हो सके।"

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