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Chausath Yogini Sadhana: कैसे करें? जानें साधना विधि, नियम, लाभ, महत्व और सावधानियांIt takes 13 minutes... to read this article !

सनातन धर्म और विशेषकर ‘तंत्र शास्त्र’ (Tantra Shastra) में ब्रह्मांड की अनंत शक्तियों को जाग्रत करने के कई रहस्यमयी मार्ग बताए गए हैं। इन्हीं गुप्त, रहस्यमयी और असीमित शक्तियों वाली साधनाओं में से एक है— ‘चौसठ योगिनी साधना’ (Chausath Yogini Sadhana)

तंत्र मार्ग में योगिनियों को माता काली और देवी दुर्गा का ही उग्र, शक्तिशाली और जाग्रत स्वरूप माना गया है। प्राचीन काल में महान तांत्रिक, ऋषि-मुनि और राजा-महाराजा अजेय होने, अलौकिक सिद्धियां प्राप्त करने और जीवन के हर क्षेत्र में विजय पाने के लिए 64 योगिनियों की साधना किया करते थे। भारत में आज भी चौसठ योगिनी के प्राचीन तांत्रिक मंदिर (जैसे मुरैना, जबलपुर और उड़ीसा में) मौजूद हैं, जो अपनी रहस्यमयी वास्तुकला और ऊर्जा के लिए पूरी दुनिया में विख्यात हैं।

वर्तमान समय में जहाँ मनुष्य चारों ओर से समस्याओं, शत्रुओं, आर्थिक संकटों और मानसिक तनाव से घिरा हुआ है, वहाँ योगिनी साधना एक ऐसा अमोघ अस्त्र है, जो साधक को रातों-रात रंक से राजा बनाने और असंभव को संभव करने की क्षमता रखती है। लेकिन, यह एक अत्यंत उच्च कोटि की तांत्रिक साधना है, जिसे बिना सही जानकारी, नियम और योग्य गुरु के करना विनाशकारी भी हो सकता है।

इस अत्यंत विस्तृत, शोधपरक और प्रामाणिक लेख में हम “Chausath Yogini Sadhana: कैसे करें? जानें साधना विधि, नियम, लाभ, महत्व और सावधानियां” विषय पर गहराई से चर्चा करेंगे। यहाँ आपको इस गुप्त साधना की संपूर्ण तांत्रिक विधि, मंत्र और कड़े नियमों की पूर्ण जानकारी मिलेगी।

1. चौसठ योगिनी कौन हैं? (Who are the 64 Yoginis?)

योगिनी साधना को समझने से पहले यह जानना आवश्यक है कि ये 64 योगिनियां कौन हैं और इनकी उत्पत्ति कैसे हुई।

पौराणिक कथा (Mythological Origin): मार्कण्डेय पुराण और शिव पुराण के अनुसार, जब महिषासुर, शुंभ-निशुंभ और विशेषकर ‘रक्तबीज’ नामक राक्षसों का आतंक तीनों लोकों में बढ़ गया था, तब माता दुर्गा ने रणभूमि में महाकाली का रूप धारण किया था। रक्तबीज को यह वरदान था कि उसके खून की एक बूंद भी धरती पर गिरेगी, तो उससे एक नया रक्तबीज पैदा हो जाएगा।

इस राक्षस का वध करने के लिए माता महाकाली और अष्ट मातृकाओं (ब्राह्मी, माहेश्वरी, कौमारी, वैष्णवी, वाराही, नारसिंही, इंद्राणी और चामुंडा) के शरीर से 64 अत्यंत उग्र, भयंकर और शक्तिशाली देवियों की उत्पत्ति हुई। इन 64 देवियों ने रक्तबीज का खून धरती पर गिरने से पहले ही पी लिया और राक्षसों का समूल नाश कर दिया। इन्हीं 64 देवियों को ‘चौसठ योगिनी’ कहा जाता है।

ये योगिनियां साक्षात शक्ति (Energy) का स्वरूप हैं। ये भगवान शिव (विशेषकर महाकाल और भैरव) की अनुचरी हैं। ये तंत्र, मंत्र, यंत्र, माया, इंद्रजाल और 64 कलाओं की अधिष्ठात्री देवियां हैं।

2. चौसठ योगिनी साधना का तांत्रिक महत्व (Tantric Significance)

तंत्र शास्त्र में योगिनी साधना को ‘सर्वकार्य साधिका’ कहा गया है। यह साधना मुख्य रूप से दो उद्देश्यों के लिए की जाती है:

  1. भौतिक उद्देश्य (Materialistic Desires): असीम धन, राजसत्ता, आकर्षण (सम्मोहन), शत्रुओं का नाश और सांसारिक सुखों की प्राप्ति के लिए।

  2. आध्यात्मिक और तांत्रिक उद्देश्य (Occult Powers): अष्ट सिद्धियां (अणिमा, महिमा, गरिमा आदि), भूत-भविष्य जानने की क्षमता (Clairvoyance), त्रिकालदर्शिता और कुंडलिनी जागरण के लिए।

योगिनियां अत्यंत चंचल और शीघ्र प्रसन्न होने वाली होती हैं। यदि वे किसी साधक से प्रसन्न हो जाएं, तो वे माता, बहन, या प्रेमिका के रूप में साधक की हर इच्छा पूरी करती हैं और जीवन भर एक साये की तरह उसकी रक्षा करती हैं।

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3. अष्ट मातृकाएं और 64 योगिनियों का वर्गीकरण (Classification Table)

64 योगिनियां मुख्य रूप से 8 प्रमुख मातृकाओं (अष्ट मातृका) के 8-8 स्वरूपों से मिलकर बनी हैं (8 x 8 = 64)। नीचे दी गई तालिका में अष्ट मातृकाओं का संक्षिप्त विवरण है:

अष्ट मातृका (Ashta Matrika) स्वरूप / ऊर्जा का प्रतीक (Symbol of Energy) कार्य और शक्ति (Power & Function)
1. ब्राह्मी (Brahmi) ब्रह्मा जी की शक्ति, हंस वाहिनी। ज्ञान, विद्या, कला और रचनात्मकता की अधिष्ठात्री।
2. माहेश्वरी (Maheshwari) भगवान शिव की शक्ति, वृषभ वाहिनी। मोक्ष, वैराग्य और तंत्र-मंत्र की विद्या देने वाली।
3. कौमारी (Kaumari) भगवान कार्तिकेय की शक्ति, मयूर वाहिनी। असीम साहस, बल और शत्रुओं का शमन करने वाली।
4. वैष्णवी (Vaishnavi) भगवान विष्णु की शक्ति, गरुड़ वाहिनी। धन, ऐश्वर्य, राजसत्ता और पालन करने वाली।
5. वाराही (Varahi) भगवान वराह की शक्ति, सूकर मुख। तंत्र बाधा नाश, अकाल मृत्यु से रक्षा और उग्र शक्ति।
6. नारसिंही (Narasimhi) भगवान नृसिंह की शक्ति, सिंह मुख। भय का नाश, घोर संकटों से मुक्ति और परम सुरक्षा।
7. इंद्राणी (Indrani) देवराज इंद्र की शक्ति, गज (हाथी) वाहिनी। भौतिक सुख, ऐश्वर्य, आकर्षण और नेतृत्व क्षमता।
8. चामुंडा (Chamunda) माता काली की शक्ति, मुंडमाला धारिणी। अज्ञान का नाश, तंत्र सिद्धियां और मोक्ष प्रदायिनी।

(इन्हीं 8 मातृकाओं से 64 योगिनियां उत्पन्न हुई हैं, जिनमें प्रमुख हैं— दिव्या, महायोगिनी, सिद्ध योगिनी, प्रेतासना, डाकिनी, शाकिनी, कालरात्रि, कंकाली, भैरवी आदि।)

4. Chausath Yogini Sadhana के चमत्कारिक लाभ (Benefits)

जो साधक योग्य गुरु के निर्देशन में और कड़े नियमों के साथ चौसठ योगिनी साधना सिद्ध कर लेता है, उसके जीवन में निम्नलिखित अलौकिक चमत्कार होते हैं:

I. अष्ट सिद्धियों और नव निधियों की प्राप्ति

यह साधना तांत्रिक सिद्धियों का खजाना है। साधक को भूत, वर्तमान और भविष्य देखने की क्षमता (त्रिकालदर्शिता) प्राप्त हो जाती है। वह किसी के भी मन की बात पढ़ सकता है (Telepathy) और प्रकृति की शक्तियों को नियंत्रित कर सकता है।

II. प्रचंड आकर्षण और वशीकरण (Power of Attraction)

योगिनी साधना सिद्ध होने पर साधक के चेहरे पर ऐसा अलौकिक तेज (Aura) आ जाता है कि जो भी व्यक्ति (चाहे वह राजा हो, अधिकारी हो या शत्रु हो) उसके संपर्क में आता है, वह सम्मोहित (Hypnotized) होकर साधक की आज्ञा का पालन करने लगता है।

III. असीम धन और ऐश्वर्य (Unlimited Wealth)

योगिनियां कुबेर और लक्ष्मी की भी नियंत्रक मानी जाती हैं। यदि साधक भौतिक सुखों की कामना से यह साधना करता है, तो योगिनियां उसे अचानक धन लाभ, गड़े हुए खजाने का ज्ञान, लॉटरी या व्यापार में असीमित वृद्धि प्रदान करती हैं।

IV. शत्रुओं का समूल नाश (Destruction of Enemies)

जिन शत्रुओं ने साधक का जीना मुश्किल कर दिया हो, वे योगिनियों के प्रभाव से स्वयं ही नष्ट हो जाते हैं या साधक के चरणों में आकर क्षमा मांगते हैं। कोई भी शत्रु साधक का बाल भी बांका नहीं कर सकता।

V. तंत्र बाधा और मारण प्रयोग से मुक्ति

यदि किसी ने साधक पर कोई भयंकर तांत्रिक प्रयोग (काले जादू, मूठ या मारण क्रिया) किया है, तो चौसठ योगिनियां उस तांत्रिक प्रयोग को तुरंत काटकर वापस उसी तांत्रिक पर भेज देती हैं।

5. Chausath Yogini Sadhana: संपूर्ण तांत्रिक साधना विधि (Step-by-Step Guide)

चेतावनी (Warning): चौसठ योगिनी साधना एक विशुद्ध तांत्रिक साधना है। इसे बिना ‘गुरु दीक्षा’ के और बिना गुरु के मार्गदर्शन के कभी नहीं करना चाहिए। यहाँ दी गई विधि केवल ज्ञान और जानकारी के उद्देश्य से है।

साधना की तैयारी और मुहूर्त (Preparations)

  • सर्वोत्तम दिन: यह साधना किसी भी नवरात्रि (विशेषकर गुप्त नवरात्रि), कृष्ण पक्ष की अष्टमी, चतुर्दशी, या अमावस्या की मध्यरात्रि से शुरू की जानी चाहिए।

  • समय: रात्रि 10:00 बजे से प्रातः 2:00 बजे के बीच (महानिशीथ काल)।

  • दिशा (Direction): उत्तर (North) या पश्चिम (West) दिशा की ओर मुख करके बैठें।

  • आसन (Asana): लाल या काले रंग का ऊनी आसन।

  • वस्त्र: लाल या काले रंग के बिना सिले हुए वस्त्र (जैसे धोती)।

  • माला: लाल हकीक, रुद्राक्ष या स्फटिक की प्राण-प्रतिष्ठित माला।

चरण 1: पवित्रता और रक्षा विधान

  • रात्रि में स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। आसन पर बैठें।

  • सर्वप्रथम आचमन और प्राणायाम करें।

  • रक्षा घेरा (Security Shield): तंत्र साधना में रक्षा घेरा बहुत आवश्यक है। अपने चारों ओर जल से या सरसों से एक घेरा बनाएं और भगवान भैरव से अपनी रक्षा की प्रार्थना करें।

चरण 2: गुरु और भैरव पूजन (Crucial Step)

  • चौसठ योगिनियां भगवान शिव (भैरव) की आज्ञा के बिना एक कदम भी नहीं उठातीं। इसलिए सबसे पहले अपने गुरु का ध्यान करें और 1 माला गुरु मंत्र का जाप करें।

  • उसके बाद भगवान बटुक भैरव या महाकाल भैरव का मानसिक पूजन करें और 1 माला “ॐ भं भैरवाय नमः” का जाप अवश्य करें। (बिना भैरव आज्ञा के योगिनी साधना प्राणघातक हो सकती है)।

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चरण 3: यंत्र और कलश स्थापना

  • अपने सामने एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं।

  • उस पर ‘चौसठ योगिनी यंत्र’ (तांबे या भोजपत्र पर बना हुआ) स्थापित करें। यदि यंत्र न हो, तो अक्षत (चावल) की 64 ढेरियाँ बनाकर उन्हें 64 योगिनियों का स्वरूप मान लें।

  • यंत्र के सामने सरसों के तेल या तिल के तेल का एक बड़ा चौमुखी दीपक जलाएं (जो साधना पूरी होने तक जलता रहे)।

चरण 4: योगिनियों का पंचोपचार पूजन

  • सभी 64 योगिनियों का आवाहन करें। उन्हें लाल सिंदूर, कुमकुम, इत्र (Perfume), लाल पुष्प (गुड़हल या गुलाब) अर्पित करें।

  • भोग (Prasad): योगिनियों को मीठा और विशेष भोग अत्यंत प्रिय है। उन्हें पेड़े, अनार, लौंग, इलायची, पान का बीड़ा और मदिरा (यदि गुरु की आज्ञा वाम मार्ग से हो, अन्यथा पंचामृत) का भोग लगाएं।

चरण 5: चौसठ योगिनी मूल मंत्र जाप (The Chanting)

पूजन के पश्चात पूर्ण एकाग्रता से रुद्राक्ष या लाल हकीक की माला से नीचे दिए गए सिद्ध मंत्र का जाप करें:

मंत्र: ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं श्रीं चौसठ योगिन्यै नमः ॥

(Om Aim Hreem Kleem Shreem Chausath Yoginyai Namah)

  • जाप की संख्या: प्रतिदिन कम से कम 11, 21 या 51 माला का जाप करें। यह अनुष्ठान 11, 21 या 41 दिनों का होता है (गुरु के निर्देशानुसार)।

  • जाप करते समय मन में पूर्ण निर्भयता (Fearlessness) और भक्ति होनी चाहिए।

चरण 6: विसर्जन और क्षमा प्रार्थना

  • जाप पूरा होने के बाद थोड़ा सा जल हाथ में लेकर सारा पुण्य माता योगिनियों और भगवान भैरव को समर्पित कर दें।

  • हाथ जोड़कर अपनी भूल-चूक की क्षमा मांगें।

  • तुरंत आसन से न उठें; 5 मिनट वहीं बैठकर ऊर्जा को शरीर में जज्ब (Absorb) होने दें।

6. साधना काल में पालन करने योग्य कड़े नियम (Strict Rules of Sadhana)

तंत्र मार्ग की यह साधना दुधारी तलवार के समान है। यदि नियमों का पालन किया जाए, तो यह रक्षक है, और यदि तोड़ा जाए, तो भक्षक बन सकती है।

  1. कठोर ब्रह्मचर्य (Absolute Celibacy): अनुष्ठान के पहले दिन से लेकर अंतिम दिन तक मन, वचन और कर्म से पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना अनिवार्य है। कोई भी अशुद्ध विचार साधना को उसी क्षण खंडित कर देता है।

  2. गोपनीयता (Extreme Secrecy): तंत्र साधना की सबसे बड़ी शर्त है— ‘गोपनीयता’। आप क्या साधना कर रहे हैं, कितने दिन की कर रहे हैं और आपको क्या अनुभव हो रहे हैं, यह बात अपने गुरु के अलावा दुनिया के किसी भी इंसान (यहाँ तक कि जीवनसाथी) को नहीं बतानी चाहिए। बताने से ऊर्जा लीक (Leak) हो जाती है।

  3. स्त्रियों का सर्वोच्च सम्मान: 64 योगिनियां स्त्री स्वरूप हैं। साधना काल में यदि साधक किसी भी स्त्री (माता, बहन, पत्नी, या अपरिचित महिला) का अपमान करता है, उसे अपशब्द कहता है या उस पर बुरी नजर डालता है, तो योगिनियां उसे भयंकर श्राप देकर नष्ट कर देती हैं।

  4. सात्विक या वामाचारी आहार: यदि आप सात्विक (दक्षिण) मार्ग से साधना कर रहे हैं, तो मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज पूर्णतः वर्जित हैं। (यदि वाम मार्ग से गुरु के निर्देशन में कर रहे हैं, तो आहार गुरु तय करेंगे)।

  5. भूमि शयन (Sleeping on the Floor): विलासिता का त्याग करें और केवल जमीन पर कंबल या चटाई बिछाकर सोएं।

7. चौसठ योगिनी साधना में अत्यंत महत्वपूर्ण सावधानियां (Precautions)

  • भयभीत न हों (Do not Panic): जब योगिनी साधना उच्च स्तर पर पहुंचती है, तो साधक को अत्यंत डरावने अनुभव हो सकते हैं। कमरे में घुंघरुओं की आवाज आना, तेज सुगंध आना, या भयानक आकृतियां दिखाई देना आम बात है। यह योगिनियों द्वारा ली जाने वाली परीक्षा है। साधक को डरकर आंखें नहीं खोलनी चाहिए और न ही आसन छोड़ना चाहिए। यदि आसन छोड़ा, तो साधक विक्षिप्त (Mad) भी हो सकता है।

  • गुरु का होना अनिवार्य है: कभी भी किसी किताब या इंटरनेट से पढ़कर सीधे इस साधना को शुरू न करें। योग्य गुरु साधक की ऊर्जा के स्तर की जांच करके ही उसे सुरक्षा कवच और सही मंत्र प्रदान करते हैं।

  • लालच में आकर साधना न करें: यदि आप केवल रातों-रात अमीर बनने या किसी का बुरा करने की नीयत से यह साधना कर रहे हैं, तो शक्तियां आपको ही नष्ट कर देंगी। भाव शुद्ध और आत्म-कल्याण का होना चाहिए।

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8. वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific & Psychological View)

आधुनिक अध्यात्म विज्ञान और शरीर रचना विज्ञान (Anatomy) के अनुसार, मानव शरीर के भीतर 72,000 नाड़ियां (Nerves/Energy Channels) हैं। इनमें से 64 प्रमुख नाड़ियां हैं जो हमारे मस्तिष्क, हृदय और जननांगों को नियंत्रित करती हैं।

मनोवैज्ञानिक और योगिक दृष्टिकोण से ’64 योगिनियां’ कोई बाहर आसमान में रहने वाली देवियां नहीं हैं, बल्कि ये मानव शरीर के भीतर सोई हुई 64 सूक्ष्म ऊर्जाएं (Dormant Energies) हैं। इसके अलावा हमारे डीएनए (DNA) में भी 64 कोडॉन (Codons) होते हैं।

जब साधक विशेष तांत्रिक मंत्रों (ध्वनि तरंगों) का उच्चारण करता है, तो शरीर के ये 64 केंद्र या नाड़ियां जाग्रत हो जाती हैं। जब ये सोई हुई ऊर्जाएं जाग्रत होती हैं, तो मनुष्य के मस्तिष्क की क्षमता 100 गुना बढ़ जाती है, जिसे हम ‘सिद्धि’ या ‘चमत्कार’ कहते हैं। चौसठ योगिनी साधना वास्तव में अपनी ही आंतरिक शक्तियों का चरम प्रकटीकरण है।

Chausath Yogini Sadhana तंत्र शास्त्र का वह परम रहस्य है, जिसे प्राचीन काल से केवल योग्य और सिद्ध साधकों तक ही सीमित रखा गया। यह साधना उन लोगों के लिए है जो अपने जीवन से समझौता नहीं करना चाहते, जो प्रकृति के रहस्यों को समझना चाहते हैं और जो असीम शक्तियों को धारण करने का साहस रखते हैं।

इस विस्तृत लेख के माध्यम से आपने जाना कि 64 योगिनियां कौन हैं, उनकी उत्पत्ति कैसे हुई, इस साधना के भौतिक और आध्यात्मिक लाभ क्या हैं, और इसे करने की तांत्रिक विधि, नियम तथा सावधानियां क्या हैं।

पुनः यह स्मरण रहे कि भगवान शिव और माता काली की ये उग्र शक्तियां अत्यधिक दयालु होने के साथ-साथ अत्यंत क्रोधी भी हैं। इसलिए इस मार्ग पर कदम रखने से पहले एक समर्थ गुरु की खोज अवश्य करें। योग्य गुरु के निर्देशन, भैरव की आज्ञा और पूर्ण शुद्धता के साथ की गई चौसठ योगिनी साधना साधक के लिए इस ब्रह्मांड के सारे रहस्य खोल देती है और उसे एक ‘महामानव’ बना देती है।

॥ ॐ ह्रीं चौसठ योगिनीभ्यो नमः ॥

॥ जय माँ महाकाली ॥

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: क्या गृहस्थ (विवाहित) लोग चौसठ योगिनी साधना कर सकते हैं?

उत्तर: हाँ, गृहस्थ लोग चौसठ योगिनी साधना कर सकते हैं, लेकिन उन्हें ‘वाम मार्ग’ (तांत्रिक/श्मशान मार्ग) के बजाय ‘दक्षिण मार्ग’ (सात्विक मार्ग) का चुनाव करना चाहिए। सात्विक मार्ग में पूजा, जप और हवन शामिल होता है और इसमें कोई उग्र खतरा नहीं होता। गुरु के निर्देशन में गृहस्थ इसे पूर्णतः सुरक्षित रूप से कर सकते हैं।

प्रश्न 2: चौसठ योगिनी साधना के दौरान डरावने अनुभव क्यों होते हैं?

उत्तर: योगिनियां अत्यंत उग्र ऊर्जा का स्वरूप हैं। जब साधक के मंत्र जाप से उसकी आभा (Aura) और ब्रह्मांड की ऊर्जा का मिलन होता है, तो भौतिक और सूक्ष्म जगत के बीच का पर्दा हटने लगता है। घुंघरुओं की आवाजें या डरावनी आकृतियां साधक के धैर्य और निर्भयता की परीक्षा लेने के लिए प्रकट होती हैं। गुरु द्वारा दिया गया ‘रक्षा घेरा’ ही इन स्थितियों में साधक को सुरक्षित रखता है।

प्रश्न 3: क्या महिलाएं (स्त्रियां) चौसठ योगिनी साधना कर सकती हैं?

उत्तर: बिल्कुल। 64 योगिनियां स्वयं परम नारी शक्ति (Divine Feminine Energy) का ही स्वरूप हैं। महिलाएं इस साधना को बहुत जल्दी सिद्ध कर सकती हैं क्योंकि उनकी प्राकृतिक ऊर्जा योगिनियों के अनुकूल होती है। महिलाओं को केवल मासिक धर्म (Periods) के दौरान साधना को रोक देना चाहिए और शुद्धि के पश्चात वहीं से आगे बढ़ना चाहिए।

प्रश्न 4: चौसठ योगिनी साधना कितने दिनों में सिद्ध होती है?

उत्तर: यह पूरी तरह से साधक की पूर्व जन्म की साधना, उसकी वर्तमान एकाग्रता और गुरु की कृपा पर निर्भर करता है। तंत्र शास्त्र में सामान्यतः 11 दिन, 21 दिन, 41 दिन (एक मंडल) के अनुष्ठान होते हैं। यदि साधक पूर्ण ब्रह्मचर्य, मौन और निर्भयता के साथ साधना करे, तो कई बार 21 दिनों में ही योगिनियों की कृपा के संकेत मिलने शुरू हो जाते हैं।

प्रश्न 5: क्या बिना गुरु दीक्षा के केवल पुस्तक से पढ़कर यह साधना की जा सकती है?

उत्तर: नहीं, यह अत्यंत खतरनाक है। चौसठ योगिनी साधना विशुद्ध रूप से एक ‘तांत्रिक साधना’ है। पुस्तक या इंटरनेट से पढ़कर कोई भी उग्र तांत्रिक साधना करना ऐसे ही है जैसे बिना ड्राइविंग सीखे एक तेज रेसिंग कार चलाना। बिना गुरु के रक्षा मंत्र, दिशा-निर्देश और ऊर्जा के संतुलन के बिना साधक विक्षिप्त (पागल) हो सकता है या भारी आर्थिक/शारीरिक नुकसान उठा सकता है। गुरु की शरण में जाना अनिवार्य है।

"नमस्कार! मैं अमित तिवारी हूँ, और आप मुझे एक 'साधक' के रूप में जान सकते हैं। बचपन से ही सनातन धर्म, तंत्र-मंत्र और आध्यात्मिक साधनाओं ने मुझे अपनी ओर गहराई से आकर्षित किया है। वर्षों के निरंतर अध्ययन, गुरु-कृपा और अपने व्यक्तिगत साधना-अनुभवों से मैंने जो कुछ भी सीखा है, उसे मैं sadhnas.in के माध्यम से आपके साथ साझा कर रहा हूँ। मेरा मुख्य उद्देश्य इंटरनेट पर फैले भ्रम को दूर करके प्रामाणिक, सत्य और शास्त्र-सम्मत जानकारी को बेहद सरल भाषा में आप तक पहुँचाना है। मैं कोई गुरु या उपदेशक नहीं हूँ, बल्कि आप ही की तरह ईश्वर की खोज में निकला एक राही हूँ। मेरी यही कोशिश है कि मेरे अनुभवों और लेखनी से आपकी आध्यात्मिक यात्रा और भी सुगम व सफल हो सके।"

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