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Chandra Grahan Calendar 2026: साल 2026 में चंद्र ग्रहण कब – कब है? जानें संपूर्ण जानकारीIt takes 17 minutes... to read this article !

खगोल विज्ञान और वैदिक ज्योतिष दोनों ही दृष्टियों से ग्रहण (Eclipse) का बहुत अधिक महत्व माना गया है। ब्रह्मांड में घटने वाली इस अद्भुत खगोलीय घटना को देखने के लिए जहाँ वैज्ञानिक और स्काई वॉचर्स (Sky watchers) उत्सुक रहते हैं, वहीं धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इसका सीधा प्रभाव मानव जीवन, प्रकृति और देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। जब बात चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan) की आती है, तो जनमानस के मन में सूतक काल, पूजा-पाठ के नियम और गर्भवती महिलाओं के लिए सावधानियों को लेकर कई सवाल उठते हैं।

साल 2026 में चंद्र ग्रहण कब है? जानें तिथि, समय, सूतक काल और संपूर्ण जानकारी

यदि आप यह जानना चाहते हैं कि साल 2026 में कितने चंद्र ग्रहण लगने वाले हैं, उनकी तिथियां क्या हैं, भारत में ग्रहण कब से कब तक दिखाई देगा, और Chandra Grahan 2026 timing sutak kaal क्या रहेगा, तो आप बिल्कुल सही जगह पर हैं।

इस विस्तृत लेख में हम Chandra Grahan Calendar 2026 की संपूर्ण जानकारी दे रहे हैं। हमने नासा (NASA) और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की नवीनतम रिपोर्ट्स के साथ-साथ पंचांग की सटीक गणनाओं को शामिल किया है, ताकि आपको 100% प्रामाणिक जानकारी मिल सके।

चंद्र ग्रहण क्या है? (What is Chandra Grahan / Lunar Eclipse?)

विज्ञान के अनुसार, चंद्र ग्रहण उस खगोलीय स्थिति को कहते हैं जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीधी रेखा में आ जाते हैं। इस स्थिति में पृथ्वी बीच में होती है और उसकी छाया (Shadow) चंद्रमा पर पड़ती है, जिससे चंद्रमा का कुछ हिस्सा या पूरा चंद्रमा अंधकारमय हो जाता है। चंद्र ग्रहण हमेशा पूर्णिमा (Full Moon) के दिन ही लगता है।

धार्मिक मान्यता (राहु-केतु की कथा):

सनातन धर्म के पुराणों (विशेषकर विष्णु पुराण और मत्स्य पुराण) के अनुसार, चंद्र ग्रहण का संबंध समुद्र मंथन से है। जब समुद्र मंथन से अमृत कलश निकला, तो भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर देवताओं को अमृत पिलाना शुरू किया। उस समय ‘स्वरभानु’ नामक एक असुर ने छल से देवताओं का रूप धरकर अमृत पी लिया। सूर्य और चंद्र देव ने उसे पहचान लिया और भगवान विष्णु को बता दिया। क्रोधित होकर विष्णु जी ने अपने सुदर्शन चक्र से स्वरभानु का सिर धड़ से अलग कर दिया। लेकिन अमृत गले से नीचे उतर चुका था, इसलिए वह मरा नहीं। उसका सिर ‘राहु’ और धड़ ‘केतु’ कहलाया। मान्यता है कि इसी दुश्मनी का बदला लेने के लिए राहु और केतु समय-समय पर सूर्य और चंद्रमा को निगलने का प्रयास करते हैं, जिसे हम ग्रहण कहते हैं।

साल 2026 में कुल कितने चंद्र ग्रहण लगेंगे? (How many Lunar Eclipses in 2026?)

वर्ष 2026 खगोलीय घटनाओं के लिहाज से बहुत ही खास साल है। इस साल कुल दो (2) चंद्र ग्रहण लगने वाले हैं। पहला चंद्र ग्रहण मार्च के महीने में लगेगा जो कि एक पूर्ण चंद्र ग्रहण (Total Lunar Eclipse) होगा और दूसरा चंद्र ग्रहण अगस्त के महीने में लगेगा जो एक गहरा आंशिक चंद्र ग्रहण (Partial Lunar Eclipse) होगा।

ग्रहण का प्रकार (Type of Eclipse) दिनांक (Date) भारतीय समय (IST) भारत में दृश्यता (Visibility in India)
पहला चंद्र ग्रहण (पूर्ण) 3 मार्च 2026 (मंगलवार) दोपहर 03:20 बजे से शाम 06:47 बजे तक हाँ, दिखाई देगा (Visible)
दूसरा चंद्र ग्रहण (आंशिक) 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) दोपहर के समय (भारत में) नहीं दिखाई देगा (Not Visible)

आइए, अब इन दोनों चंद्र ग्रहणों के बारे में विस्तार से जानते हैं।

1. साल का पहला चंद्र ग्रहण: 3 मार्च 2026 (Total Lunar Eclipse)

साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च 2026, दिन मंगलवार को लगने जा रहा है। यह एक पूर्ण चंद्र ग्रहण (Total Lunar Eclipse) होगा। हिंदू पंचांग के अनुसार, यह ग्रहण फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को लगेगा। यह ग्रहण इस मायने में बहुत खास है क्योंकि भारत के अधिकांश हिस्सों में चंद्रोदय (Moonrise) के समय लोग इस खगोलीय घटना को अपनी आँखों से देख सकेंगे।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस दिन होली (Holi) का पावन पर्व भी है। होलिका दहन और फाल्गुन पूर्णिमा के दिन लगने वाले इस ग्रहण का ज्योतिषीय प्रभाव सभी 12 राशियों पर बहुत गहरा पड़ने वाला है। इस ग्रहण के दौरान ‘ब्लड मून’ (Blood Moon) की स्थिति भी बनेगी, जहाँ चंद्रमा का रंग गहरा लाल या तांबे जैसा दिखाई देगा।

पहले चंद्र ग्रहण का समय और भारत में दृश्यता (Timings & Visibility in India)

भारतीय समयानुसार (IST) 3 मार्च 2026 को ग्रहण दोपहर के समय शुरू होगा और शाम को समाप्त होगा। चूँकि ग्रहण का अंतिम चरण भारत में सूर्यास्त और चंद्रोदय के समय घटित होगा, इसलिए इसे ‘ग्रस्तोदित चंद्र ग्रहण’ कहा जाएगा।

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पूर्ण चंद्र ग्रहण 2026 की समय-सारणी (3 मार्च):

  • उपच्छाया ग्रहण की शुरुआत (Penumbral Phase Begins): दोपहर लगभग 02:13 बजे

  • आंशिक ग्रहण की शुरुआत (Umbral Phase Begins): दोपहर 03:20 बजे

  • पूर्ण ग्रहण की शुरुआत (Totality Begins – Blood Moon): शाम 04:34 बजे

  • पूर्ण ग्रहण की समाप्ति (Totality Ends): शाम 05:33 बजे

  • भारत में चंद्रोदय का समय (Moonrise in India): शाम 06:22 बजे से 06:30 बजे के बीच (शहरों के अनुसार)

  • भारत में ग्रहण का अधिकतम प्रभाव देखने का समय: शाम 06:33 बजे से 06:40 बजे तक

  • ग्रहण की पूर्ण समाप्ति (Umbral Phase Ends): शाम 06:46 से 06:47 बजे तक

भारत में कहाँ-कहाँ दिखाई देगा?

मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और खगोलविदों की रिपोर्ट के अनुसार, यह चंद्र ग्रहण पूर्वोत्तर राज्यों (असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय), पश्चिम बंगाल, और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में सबसे स्पष्ट और लंबी अवधि के लिए दिखाई देगा क्योंकि वहाँ चंद्रमा जल्दी उदय होता है। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, लखनऊ, और भोपाल जैसे शहरों में ग्रहण का अंतिम चरण (शाम 6:20 बजे से 6:47 बजे तक) लगभग 20 से 27 मिनट के लिए देखा जा सकेगा। देश के पश्चिमी छोर (जैसे गुजरात के कुछ हिस्से) में इसकी दृश्यता बहुत कम समय के लिए होगी।

विश्व स्तर पर, यह ग्रहण पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर और अमेरिका (उत्तरी व दक्षिणी अमेरिका) में बहुत साफ दिखाई देगा।

3 मार्च 2026 के चंद्र ग्रहण का सूतक काल (Sutak Kaal Timings)

सनातन धर्म शास्त्रों के अनुसार, जब भी कोई ग्रहण भारत में दृश्यमान (Visible) होता है, तो उसका सूतक काल (Sutak Kaal) पूरी तरह से मान्य होता है। चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरू होने से ठीक 9 घंटे (9 Hours) पहले यानी 3 प्रहर पहले शुरू हो जाता है।

  • सूतक काल का आरंभ: 3 मार्च 2026, सुबह 06:20 से 06:23 बजे के बीच (स्थान के अनुसार)।

  • सूतक काल की समाप्ति: शाम 06:47 बजे (ग्रहण की समाप्ति के साथ ही सूतक काल भी समाप्त हो जाएगा)।

चूँकि यह ग्रहण भारत में मान्य है, इसलिए इस दिन सूतक काल के सभी धार्मिक नियमों, यम-नियमों और वर्जनाओं का पालन करना अनिवार्य होगा। मंदिरों के कपाट सुबह 6 बजे से ही बंद कर दिए जाएंगे और शाम को ग्रहण खत्म होने के बाद साफ-सफाई और शुद्धिकरण के बाद ही खोले जाएंगे।

2. साल का दूसरा चंद्र ग्रहण: 28 अगस्त 2026 (Partial Lunar Eclipse / 96% Blood Moon)

साल 2026 का दूसरा चंद्र ग्रहण 28 अगस्त 2026, दिन शुक्रवार को लगेगा। खगोलीय दृष्टि से यह एक गहरा आंशिक चंद्र ग्रहण (Deep Partial Lunar Eclipse) होगा। अंतरराष्ट्रीय खगोल विज्ञान पत्रिकाओं ने इसे बहुत ही दुर्लभ घटना बताया है।

इस ग्रहण के दौरान चंद्रमा का लगभग 93% से 96% हिस्सा पृथ्वी की गहरी छाया (Umbra) में प्रवेश कर जाएगा। इसी कारण इसे 96% ब्लड मून (96% Blood Moon) भी कहा जा रहा है। हालाँकि यह पूर्ण चंद्र ग्रहण नहीं है, क्योंकि चंद्रमा का एक बहुत छोटा सा किनारा सूर्य की रोशनी में रहेगा, लेकिन पृथ्वी की छाया में होने के कारण चंद्रमा का रंग गहरा लाल या नारंगी दिखाई देगा।

दूसरे चंद्र ग्रहण का समय और दृश्यता (Timings & Visibility)

यूनिवर्सल टाइम (UTC) के अनुसार यह ग्रहण 28 अगस्त की सुबह लगेगा।

  • आंशिक ग्रहण की शुरुआत: भारतीय समयानुसार (IST) 28 अगस्त को सुबह लगभग 08:03 बजे।

  • अधिकतम ग्रहण (Maximum Eclipse): सुबह 09:42 बजे से 10:11 बजे तक।

  • ग्रहण की समाप्ति: सुबह 11:21 बजे।

  • कुल अवधि: लगभग 198 मिनट (साढ़े तीन घंटे से अधिक)।

भारत में दृश्यता (Visibility in India):

चूँकि भारतीय समयानुसार यह ग्रहण सुबह (दिन के समय) लग रहा है, जब भारत में सूर्य आकाश में होगा और चंद्रमा अस्त हो चुका होगा। इसलिए, यह दूसरा चंद्र ग्रहण भारत में बिल्कुल भी दिखाई नहीं देगा (Not visible in India)

विश्व स्तर पर यह ग्रहण यूरोप, अफ्रीका और उत्तर एवं दक्षिण अमेरिका के अधिकांश हिस्सों में बहुत ही सुंदर रूप में देखा जा सकेगा।

28 अगस्त 2026 के चंद्र ग्रहण का सूतक काल लगेगा या नहीं?

धर्म सिंधु और निर्णय सिंधु जैसे प्राचीन भारतीय शास्त्रों का स्पष्ट नियम है— “यत्र दृश्यते तत्रैव सूतकम्”। अर्थात जहाँ ग्रहण आँखों से दिखाई देता है, केवल वहीं उसका सूतक और प्रभाव मान्य होता है।

चूँकि 28 अगस्त 2026 का चंद्र ग्रहण भारत में अदृश्य रहेगा, इसलिए भारत में इसका कोई सूतक काल (Sutak Kaal) मान्य नहीं होगा। इस दिन सभी लोग अपने दैनिक कार्य, पूजा-पाठ, खाना बनाना, भोजन करना और शुभ कार्य बिना किसी रोक-टोक और भय के संपन्न कर सकेंगे। मंदिरों के कपाट भी खुले रहेंगे।

चंद्र ग्रहण के दौरान सूतक काल के प्रमुख नियम (Rules & Regulations during Sutak Kaal)

3 मार्च 2026 को लगने वाला ग्रहण भारत में मान्य है, इसलिए सूतक काल का पालन करना आवश्यक है। सूतक काल को एक प्रकार का ‘अशुद्ध समय’ माना जाता है, जिसमें नकारात्मक ऊर्जा और कीटाणुओं का प्रभाव वातावरण में बढ़ जाता है।

यहाँ सूतक काल के दौरान किए जाने वाले और वर्जित कार्यों की विस्तृत सूची दी जा रही है:

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क्या न करें (What to Avoid):

  1. भोजन और जल ग्रहण वर्जित: सूतक लगने के बाद (यानी सुबह 6:23 बजे से) स्वस्थ और युवा व्यक्तियों को अन्न और जल ग्रहण नहीं करना चाहिए। हालाँकि, बच्चों, बुजुर्गों, बीमार व्यक्तियों और गर्भवती महिलाओं के लिए यह नियम शिथिल है; वे अपनी आवश्यकतानुसार फल, दूध या दवाई ले सकते हैं।

  2. खाना पकाना: सूतक काल के दौरान नया भोजन नहीं पकाना चाहिए।

  3. मूर्ति स्पर्श: घर के मंदिर या देवी-देवताओं की मूर्तियों को स्पर्श करना सख्त मना होता है।

  4. सोना (Sleeping): शास्त्रों के अनुसार, ग्रहण और सूतक के दौरान सोना नहीं चाहिए। आलस्य का त्याग कर भगवान का ध्यान करना चाहिए।

  5. शुभ कार्य: किसी भी नए काम की शुरुआत, मुंडन, सगाई या विवाह से जुड़ी बातचीत इस अवधि में नहीं करनी चाहिए।

  6. धारदार वस्तुओं का उपयोग: चाकू, कैंची, सुई, और ब्लेड जैसी नुकीली और धारदार वस्तुओं का उपयोग पूरी तरह वर्जित होता है।

  7. शारीरिक संबंध: सूतक काल और ग्रहण के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करना अत्यंत आवश्यक है।

क्या करें (What to Do):

  1. कुशा या तुलसी दल का प्रयोग: सूतक काल शुरू होने से पहले ही पीने के पानी, दूध, दही, अचार और पके हुए भोजन में तुलसी के पत्ते (Tulsi leaves) या कुशा (पवित्र घास) डाल देनी चाहिए। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी तुलसी में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं जो ग्रहण के दौरान उत्पन्न होने वाले हानिकारक विकिरणों (Radiations) से भोजन को दूषित होने से बचाते हैं।

  2. मंत्र जाप: यह समय मानसिक जप के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। धर्म शास्त्रों में उल्लेख है कि ग्रहण काल में किया गया एक मंत्र जाप 1,00,000 (एक लाख) गुना अधिक फल देता है।

  3. दान-पुण्य: ग्रहण के बाद स्नान करके गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करना चाहिए (जिसे अन्नदानम कहा जाता है)। ऐसा करने से पूर्व जन्म के पाप कटते हैं और नवग्रह शांत होते हैं।

गर्भवती महिलाओं के लिए चंद्र ग्रहण के विशेष नियम (Guidelines for Pregnant Women)

भारतीय परंपरा और आयुर्वेद में ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि ग्रहण के दौरान निकलने वाली नकारात्मक तरंगें (Negative frequencies) गर्भ में पल रहे शिशु के विकास पर बुरा असर डाल सकती हैं। 3 मार्च 2026 के चंद्र ग्रहण के दौरान गर्भवती माताओं को निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:

  1. घर के अंदर रहें: गर्भवती महिलाओं को सूतक काल से ही घर के अंदर रहना चाहिए और किसी भी परिस्थिति में ग्रहण को अपनी आँखों से नहीं देखना चाहिए।

  2. धारदार चीजों से दूरी: सब्जी काटना, सुई-धागे से कपड़े सिलना, कैंची का उपयोग करना या ताला-चाबी खोलना जैसे कार्य नहीं करने चाहिए। पुरानी मान्यताओं के अनुसार ऐसा करने से शिशु के अंगों पर निशान (Birthmarks) पड़ने का खतरा रहता है।

  3. गेरू का लेप: पारंपरिक तौर पर गर्भवती महिलाओं को अपने पेट (Abdomen) पर चंदन, हल्दी या ‘गेरू’ (लाल मिट्टी) का हल्का लेप लगाने की सलाह दी जाती है। यह एक सुरक्षा कवच का कार्य करता है।

  4. मानसिक शांति और मंत्र जाप: मन को शांत रखें। भयभीत न हों। अपने कमरे में शांति से बैठें और ‘संतान गोपाल मंत्र’ ($ॐ\ देवकी\ सुत\ गोविंद\ वासुदेव\ जगत्पते\ देहि\ मे\ तनयं\ कृष्ण\ त्वामहं\ शरणं\ गतः$), महामृत्युंजय मंत्र, या गायत्री मंत्र का मानसिक जाप करें।

  5. आराम करें: यदि थकान महसूस हो रही है, तो आप आराम से लेट सकती हैं।

  6. भोजन नियम: गर्भवती महिलाओं पर व्रत का कठोर नियम लागू नहीं होता। वे सूतक काल में भोजन कर सकती हैं, लेकिन ग्रहण की वास्तविक अवधि (शाम 6:26 से 6:47 बजे तक) के दौरान कुछ भी खाने-पीने से बचें।

चंद्र ग्रहण के दौरान किए जाने वाले शक्तिशाली मंत्र जाप (Powerful Mantras to Chant)

ग्रहण काल को तांत्रिकों और साधकों द्वारा ‘सिद्धि का समय’ कहा जाता है। आम व्यक्ति भी यदि इस दौरान ध्यान और मंत्रों का जाप करे, तो उसे मानसिक शांति और जीवन में सफलता प्राप्त होती है।

आप निम्नलिखित में से किसी भी मंत्र का चुनाव कर सकते हैं:

  • भगवान शिव का महामृत्युंजय मंत्र: जीवन में आरोग्य और संकटों से मुक्ति के लिए।

  • चंद्र बीज मंत्र: $ॐ\ श्रां\ श्रीं\ श्रौं\ सः\ चंद्रमसे\ नमः$ (कुंडली में चंद्रमा को मजबूत करने और मानसिक तनाव दूर करने के लिए)।

  • गायत्री मंत्र: सद्बुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा के लिए।

  • इष्ट देव का मंत्र: आपके जो भी आराध्य देव हैं (जैसे हनुमान जी, दुर्गा माँ, श्री कृष्ण), उनके नाम का निरंतर मानसिक जप करें।

ध्यान रहे कि सूतक काल में मंत्रों का जाप जोर-जोर से बोलकर नहीं, बल्कि ‘मानसिक रूप’ (मन ही मन) से किया जाना चाहिए।

चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण में क्या अंतर है? (Difference between Chandra Grahan and Surya Grahan)

अक्सर लोग सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण को लेकर भ्रमित हो जाते हैं। यहाँ इनके बीच के कुछ प्रमुख वैज्ञानिक और दृश्य अंतर स्पष्ट किए गए हैं:

  1. उत्पत्ति (Occurrence): सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है, और सूर्य की रोशनी को पृथ्वी तक पहुँचने से रोक देता है (यह हमेशा अमावस्या/New Moon को होता है)। वहीं, चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है, जिससे चंद्रमा पर पृथ्वी की छाया पड़ती है (यह हमेशा पूर्णिमा/Full Moon को होता है)।

  2. सुरक्षा (Eye Safety): सूर्य ग्रहण को कभी भी नंगी आँखों (Naked eyes) से नहीं देखना चाहिए, क्योंकि सूर्य से निकलने वाली अल्ट्रावायलेट (UV) किरणें रेटिना को स्थायी रूप से जला सकती हैं। इसके लिए विशेष सोलर फिल्टर वाले चश्मे (Eclipse glasses) की आवश्यकता होती है। इसके विपरीत, चंद्र ग्रहण को बिना किसी विशेष उपकरण या चश्मे के नंगी आँखों से देखना 100% सुरक्षित है

  3. अवधि (Duration): पूर्ण सूर्य ग्रहण कुछ ही मिनटों (अधिकतम 7-8 मिनट) तक रहता है, जबकि पूर्ण चंद्र ग्रहण 1 घंटे से लेकर 2 घंटे तक चल सकता है, और पूरी प्रक्रिया 3 से 4 घंटे तक खिंच सकती है।

  4. दृश्यता का क्षेत्र: सूर्य ग्रहण पृथ्वी के एक बहुत ही संकीर्ण (Narrow) हिस्से से दिखाई देता है। लेकिन चंद्र ग्रहण पृथ्वी के उस पूरे हिस्से (Night side) से देखा जा सकता है जहाँ उस समय रात होती है।

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2026 में चंद्र ग्रहण कैसे देखें? (How to Watch Chandra Grahan 2026)

अगर आप 3 मार्च 2026 का चंद्र ग्रहण देखने के लिए उत्साहित हैं, तो यहाँ कुछ बेहतरीन टिप्स दिए गए हैं:

  • समय पर बाहर निकलें: चूँकि भारत में ग्रहण चंद्रोदय (Moonrise) के साथ ही दिखाई देगा, इसलिए शाम 6:15 बजे के आसपास अपने घर की छत या खुले मैदान में पहुँच जाएँ।

  • पूर्वी क्षितिज की ओर देखें: चंद्रमा हमेशा पूर्व दिशा से उगता है। सुनिश्चित करें कि पूर्व दिशा की ओर कोई ऊंची इमारत, पेड़ या पहाड़ न हो। एक साफ़ और खुला क्षितिज (Clear Eastern Horizon) बेहतरीन नज़ारा देगा।

  • प्रदूषण और लाइट से बचें: शहर की जगमगाती रोशनियों (Light pollution) से दूर किसी पार्क, समुद्र तट या पहाड़ी इलाके पर जाएं। वहाँ से ब्लड मून का रंग बहुत गहरा और स्पष्ट दिखाई देगा।

  • उपकरण: वैसे तो आप इसे नंगी आँखों से देख सकते हैं, लेकिन यदि आपके पास दूरबीन (Binoculars) या एक बेसिक टेलीस्कोप है, तो चंद्रमा की सतह के गड्ढे (Craters) और छाया के खिसकने का नजारा और भी अद्भुत लगेगा।

  • ऑनलाइन लाइव स्ट्रीम: जो लोग किसी कारणवश बाहर नहीं जा सकते या जिनके शहरों में बादल छाए हुए हैं, वे नासा (NASA) की आधिकारिक वेबसाइट, YouTube चैनल, या ‘Time and Date’ की वेबसाइट पर इस ग्रहण की लाइव स्ट्रीमिंग मुफ्त में देख सकते हैं।

ग्रहण समाप्त होने के बाद क्या करें? (What to do after the Eclipse ends?)

3 मार्च 2026 को शाम 6:47 बजे जब ग्रहण पूरी तरह से समाप्त हो जाएगा, तब घर को शुद्ध करने और नकारात्मक ऊर्जा को बाहर निकालने के लिए निम्नलिखित कार्य अवश्य करने चाहिए:

  1. स्नान: ग्रहण समाप्त होते ही सबसे पहले पहने हुए कपड़ों सहित स्नान करें। पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिला लेना अत्यंत शुभ माना जाता है।

  2. घर की शुद्धि: पूरे घर में, विशेषकर कोनों में और रसोईघर में, गंगाजल या गौमूत्र का छिड़काव करें।

  3. मंदिर की सफाई: घर के पूजा स्थल की सफाई करें, भगवान की मूर्तियों को पंचामृत या गंगाजल से स्नान कराएं। उनके वस्त्र बदलें और नया दीपक प्रज्वलित करें।

  4. ताजा भोजन बनाना: रसोई की सफाई के बाद नया और ताजा भोजन पकाएं। सूतक काल से पहले का बना हुआ पका अन्न (जिसमें कुशा न डली हो) फेंक देना चाहिए या जानवरों को खिला देना चाहिए।

  5. दान: अपनी श्रद्धानुसार अगले दिन सुबह पंडितों या जरूरतमंदों को सूखा अनाज (चावल, दाल, आटा), गुड़, वस्त्र या कुछ धनराशि का दान अवश्य करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण भारत में कब है?

साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च 2026, दिन मंगलवार को है। भारत में इसे शाम 06:22 बजे (चंद्रोदय के समय) से लेकर 06:47 बजे तक देखा जा सकेगा।

2. 3 मार्च 2026 के चंद्र ग्रहण का सूतक काल कितने बजे से लगेगा?

चूँकि यह चंद्र ग्रहण भारत में मान्य है, इसलिए इसका सूतक काल ग्रहण लगने से 9 घंटे पहले ही शुरू हो जाएगा। भारत में सूतक काल 3 मार्च को सुबह 06:23 बजे से शुरू होकर ग्रहण की समाप्ति (शाम 06:47 बजे) तक रहेगा।

3. क्या अगस्त 2026 में लगने वाला चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा?

नहीं, 28 अगस्त 2026 को लगने वाला आंशिक चंद्र ग्रहण (Partial Lunar Eclipse) भारत में दिखाई नहीं देगा क्योंकि यह भारतीय समयानुसार दिन के समय घटित होगा, जब चंद्रमा अस्त हो चुका होगा।

4. क्या चंद्र ग्रहण को नंगी आँखों से देखना सुरक्षित है?

जी हाँ, सूर्य ग्रहण के विपरीत, चंद्र ग्रहण को नंगी आँखों (Naked eyes) से देखना 100% सुरक्षित है। इसके लिए किसी विशेष चश्मे या सोलर फिल्टर की आवश्यकता नहीं होती। चंद्रमा की रोशनी इतनी तेज नहीं होती कि वह आपकी आँखों को नुकसान पहुँचा सके।

5. ग्रहण के दौरान तुलसी का पत्ता खाने-पीने की चीजों में क्यों डाला जाता है?

वैज्ञानिक और आयुर्वेदिक दृष्टि से, तुलसी के पत्तों में एंटी-बैक्टीरियल और रोगनिरोधी (Antimicrobial) गुण होते हैं। ग्रहण के समय वातावरण में मौजूद पराबैंगनी किरणें और हानिकारक सूक्ष्मजीव सक्रिय हो जाते हैं। तुलसी दल खाने-पीने की चीजों को दूषित होने से बचाता है और उन्हें शुद्ध रखता है।

चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan) केवल एक भौगोलिक या खगोलीय घटना नहीं है; भारतीय संस्कृति में इसका गहरा ज्योतिषीय और आध्यात्मिक महत्व है। Chandra Grahan Calendar 2026 के अनुसार, 3 मार्च 2026 का पूर्ण चंद्र ग्रहण (Blood Moon) भारत में दिखाई देगा और इसका सूतक काल भी मान्य होगा। वहीं, 28 अगस्त 2026 का ग्रहण भारत में अदृश्य रहेगा।

ग्रहण का समय ईश्वर के ध्यान, आत्म-मंथन और दान-पुण्य करने का सर्वश्रेष्ठ समय होता है। गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को छोड़कर अन्य सभी को सूतक काल के नियमों का पालन करके अपने जीवन में अनुशासन लाना चाहिए। उम्मीद है कि इस विस्तृत लेख से आपको वर्ष 2026 में आने वाले चंद्र ग्रहणों की तिथियों, समय और सूतक काल से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी मिल गई होगी।

ग्रहण को डर के नज़रिए से नहीं, बल्कि ब्रह्मांड की इस अद्भुत रचना को समझने और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करने के अवसर के रूप में देखें।

(नोट: लेख में दिए गए समय भारतीय मानक समय- IST के अनुसार हैं। आपके शहर की भौगोलिक स्थिति के आधार पर चंद्रोदय के समय में 5 से 10 मिनट का मामूली अंतर हो सकता है। सटीक समय के लिए ग्रहण वाले दिन स्थानीय पंचांग देखें।)

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