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Sawan 2026 Vrat List: सावन में कौन-कौन से व्रत रखे जाएंगे? पूरी डेट लिस्टIt takes 10 minutes... to read this article !

सनातन धर्म में श्रावण मास यानी सावन के महीने का विशेष महत्व है। यह पूरा महीना देवों के देव महादेव को समर्पित होता है। शिवभक्त पूरे साल इस पावन महीने का बेसब्री से इंतजार करते हैं। मान्यता है कि सावन के महीने में भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करने और व्रत रखने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस महीने में पड़ने वाले सोमवार व्रतों का तो विशेष महत्व है ही, इसके अलावा भी सावन में मंगला गौरी व्रत, प्रदोष व्रत, सावन शिवरात्रि और एकादशी जैसे कई महत्वपूर्ण व्रत रखे जाते हैं।

अगर आप भी साल 2026 में सावन के पवित्र महीने में महादेव की कृपा पाने के लिए व्रत रखने की सोच रहे हैं, तो आपके लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि सावन 2026 में कौन-कौन से व्रत पड़ेंगे और उनकी सही तिथियां क्या हैं। इस विस्तृत लेख में हम आपको Sawan 2026 Vrat List, सावन शुरू और समाप्त होने की तिथि, पूजा विधि और व्रत के नियमों की पूरी जानकारी दे रहे हैं।

सावन मास का धार्मिक और पौराणिक महत्व

सावन का महीना भगवान शिव को इतना प्रिय क्यों है, इसके पीछे एक अत्यंत रोचक और पौराणिक कथा जुड़ी है। शिव पुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, सावन के महीने में ही देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था। इस मंथन से 14 रत्नों की प्राप्ति हुई थी, जिनमें से एक अत्यंत विषैला ‘हलाहल’ विष भी था। यह विष इतना भयंकर था कि इससे पूरी सृष्टि का विनाश हो सकता था।

सृष्टि को बचाने के लिए भगवान शिव ने उस विष को अपने कंठ (गले) में धारण कर लिया। विष के तीव्र प्रभाव से महादेव का कंठ नीला पड़ गया, जिसके कारण उन्हें ‘नीलकंठ’ कहा जाने लगा। विष की भीषण गर्मी को शांत करने के लिए सभी देवी-देवताओं ने भगवान शिव पर पवित्र नदियों का जल और दूध अर्पित किया। तब से यह मान्यता चली आ रही है कि सावन के महीने में भगवान शिव का जलाभिषेक करने से वे अत्यंत प्रसन्न होते हैं। यही कारण है कि पूरे सावन माह में कांवड़ यात्रा निकाली जाती है और शिव मंदिरों में जलाभिषेक का तांता लगा रहता है।

सावन 2026 कब से शुरू है? (Sawan 2026 Start and End Date)

भारत में पंचांग की दो मुख्य प्रणालियां मानी जाती हैं—पूर्णिमांत (उत्तर भारत में) और अमांत (दक्षिण और पश्चिम भारत में)। इसके कारण सावन की शुरुआत की तिथियों में क्षेत्रीय अंतर देखने को मिलता है।

उत्तर भारत (पूर्णिमांत पंचांग)

उत्तर भारत के राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार, झारखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली में पूर्णिमांत पंचांग का पालन किया जाता है।

  • सावन माह की शुरुआत: 30 जुलाई 2026, गुरुवार

  • सावन माह का समापन: 28 अगस्त 2026, शुक्रवार (रक्षाबंधन/श्रावण पूर्णिमा के दिन)

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दक्षिण और पश्चिम भारत (अमांत पंचांग)

महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्यों में अमांत पंचांग माना जाता है, जो उत्तर भारत के पंचांग से लगभग 15 दिन पीछे चलता है।

  • सावन माह की शुरुआत: 13 अगस्त 2026, गुरुवार

  • सावन माह का समापन: 11 सितंबर 2026, शुक्रवार

सावन सोमवार 2026 व्रत तिथियां (Sawan Somwar Dates 2026)

सावन के महीने में सोमवार का दिन सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि सावन सोमवार का व्रत रखने से अविवाहित कन्याओं को सुयोग्य वर की प्राप्ति होती है और सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्य का वरदान मिलता है।

उत्तर भारत के लिए सावन सोमवार व्रत की लिस्ट 2026

सावन सोमवार तिथि और दिन महत्व
पहला सावन सोमवार 3 अगस्त 2026, सोमवार सावन का पहला सोमवार व्रत
दूसरा सावन सोमवार 10 अगस्त 2026, सोमवार सोम प्रदोष व्रत का शुभ संयोग
तीसरा सावन सोमवार 17 अगस्त 2026, सोमवार नाग पंचमी का दुर्लभ संयोग
चौथा सावन सोमवार 24 अगस्त 2026, सोमवार सावन का अंतिम सोमवार व्रत

दक्षिण और पश्चिम भारत के लिए सावन सोमवार व्रत की लिस्ट 2026

सावन सोमवार तिथि और दिन
पहला सावन सोमवार 17 अगस्त 2026, सोमवार
दूसरा सावन सोमवार 24 अगस्त 2026, सोमवार
तीसरा सावन सोमवार 31 अगस्त 2026, सोमवार
चौथा सावन सोमवार 7 सितंबर 2026, सोमवार

सावन 2026: प्रमुख व्रत एवं त्योहारों की पूरी डेट लिस्ट

सावन सिर्फ सोमवार व्रतों का महीना नहीं है। इस महीने में कई बड़े त्योहार और उपवास आते हैं। यहाँ साल 2026 में सावन महीने के अंतर्गत आने वाले प्रमुख व्रतों और त्योहारों की सूची (उत्तर भारतीय पंचांग के अनुसार) दी गई है:

व्रत/त्योहार का नाम तिथि दिन
सावन मास आरंभ 30 जुलाई 2026 गुरुवार
पहला मंगला गौरी व्रत 4 अगस्त 2026 मंगलवार
कामिका एकादशी व्रत 9 अगस्त 2026 रविवार
सोम प्रदोष व्रत (कृष्ण पक्ष) 10 अगस्त 2026 सोमवार
सावन शिवरात्रि 11 अगस्त 2026 मंगलवार
दूसरा मंगला गौरी व्रत 11 अगस्त 2026 मंगलवार
हरियाली अमावस्या 12 अगस्त 2026 बुधवार
हरियाली तीज 15 अगस्त 2026 शनिवार
नाग पंचमी 17 अगस्त 2026 सोमवार
तीसरा मंगला गौरी व्रत 18 अगस्त 2026 मंगलवार
श्रावण पुत्रदा एकादशी 23 अगस्त 2026 रविवार
भौम प्रदोष व्रत (शुक्ल पक्ष) 25 अगस्त 2026 मंगलवार
चौथा मंगला गौरी व्रत 25 अगस्त 2026 मंगलवार
रक्षाबंधन / सावन पूर्णिमा 28 अगस्त 2026 शुक्रवार

सावन में कौन-कौन से व्रत रखे जाते हैं? (Fasts observed in Sawan)

सावन के महीने में भक्त अलग-अलग प्रकार के व्रत रखते हैं। आइए जानते हैं सावन में रखे जाने वाले प्रमुख व्रतों के बारे में:

1. सावन सोमवार व्रत

सावन के प्रत्येक सोमवार को भगवान शिव के लिए विशेष व्रत रखा जाता है। यह व्रत मनोवांछित फल प्राप्ति के लिए किया जाता है। बहुत से लोग सावन सोमवार से ही 16 सोमवार व्रत (सोलह सोमवार) की शुरुआत भी करते हैं। साल 2026 में 17 अगस्त के सोमवार को नाग पंचमी भी पड़ रही है, जो इस दिन के महत्व को कई गुना बढ़ा देती है।

2. मंगला गौरी व्रत

सावन के महीने में आने वाले हर मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखा जाता है। यह व्रत विशेष रूप से महिलाओं द्वारा माता पार्वती की कृपा पाने के लिए किया जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से दांपत्य जीवन में खुशहाली आती है और पति को दीर्घायु प्राप्त होती है।

  • सावन 2026 मंगला गौरी व्रत की तिथियां: 4 अगस्त, 11 अगस्त, 18 अगस्त और 25 अगस्त।

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3. सावन शिवरात्रि (मासिक शिवरात्रि)

हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि होती है, लेकिन सावन माह की शिवरात्रि का स्थान महाशिवरात्रि के समान ही पवित्र माना जाता है। सावन शिवरात्रि के दिन व्रत रखने और निशिता काल (मध्यरात्रि) में शिव पूजा करने से सभी पापों का नाश होता है। कांवड़ यात्री भी इसी दिन शिवलिंग पर गंगाजल अर्पित करते हैं।

  • सावन शिवरात्रि तिथि: 11 अगस्त 2026 (मंगलवार)।

4. सावन प्रदोष व्रत

प्रदोष व्रत भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। यह व्रत हर महीने के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। सावन के महीने में पड़ने वाले प्रदोष व्रत का फल हजार गायों के दान के बराबर माना जाता है।

  • साल 2026 में 10 अगस्त को सोम प्रदोष व्रत (सोमवार होने के कारण) और 25 अगस्त को भौम प्रदोष व्रत (मंगलवार होने के कारण) पड़ रहा है।

5. सावन की एकादशी

सावन माह में भगवान शिव के साथ-साथ श्री हरि विष्णु की पूजा का भी विधान है। सावन में दो एकादशी व्रत आते हैं:

  • कामिका एकादशी (9 अगस्त 2026): यह कृष्ण पक्ष की एकादशी है। इसके व्रत से पितरों को मोक्ष मिलता है और जाने-अनजाने में हुए पाप नष्ट होते हैं।

  • श्रावण पुत्रदा एकादशी (23 अगस्त 2026): यह शुक्ल पक्ष की एकादशी है। संतान प्राप्ति की कामना रखने वाले दंपतियों के लिए यह व्रत बहुत चमत्कारी माना जाता है।

सावन में व्रत रखने के प्रकार (Types of Fasting)

सावन के महीने में व्यक्ति अपनी श्रद्धा और शारीरिक क्षमता के अनुसार अलग-अलग तरीकों से व्रत का पालन कर सकता है:

  1. निर्जला व्रत: यह सबसे कठिन व्रत है, जिसमें व्रती सूर्योदय से लेकर अगले दिन सूर्योदय तक न तो अन्न ग्रहण करते हैं और न ही जल।

  2. फलाहारी व्रत: सावन सोमवार में ज्यादातर लोग यही व्रत करते हैं। इसमें पूरे दिन फल, दूध, साबूदाना, कुट्टू या सिंघाड़े के आटे का सेवन किया जा सकता है। इसमें अन्न (गेहूं, चावल, दाल) और सादे नमक का सेवन वर्जित होता है (सेंधा नमक का प्रयोग किया जा सकता है)।

  3. एक समय भोजन (एकभक्त व्रत): इस व्रत में पूरे दिन उपवास रखा जाता है और शाम को भगवान शिव की आरती और पूजा के बाद एक समय सात्विक भोजन ग्रहण किया जाता है।

सावन व्रत के नियम और पूजा विधि (Rules and Puja Vidhi)

सावन के व्रतों में पवित्रता और श्रद्धा का विशेष महत्व है। सही विधि से पूजा करने पर ही व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

व्रत के नियम

  • ब्रह्म मुहूर्त में जागरण: व्रत वाले दिन सुबह जल्दी उठें। घर और पूजा स्थल की अच्छी तरह से सफाई करें।

  • सात्विकता का पालन: व्रत के दौरान और पूरे सावन माह में सात्विक जीवन जिएं। क्रोध, निंदा और बुरे विचारों से दूर रहें।

  • खान-पान: यदि आप व्रत नहीं भी रख रहे हैं, तो भी सावन भर घर में मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज का सेवन पूरी तरह से वर्जित माना जाता है।

  • ब्रह्मचर्य: व्रत के दिन पूर्ण रूप से ब्रह्मचर्य का पालन करें।

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भगवान शिव की पूजा विधि

  • स्नान एवं संकल्प: सुबह स्नान करने के बाद स्वच्छ हल्के रंग के वस्त्र पहनें। हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।

  • जलाभिषेक: शिवलिंग पर गंगाजल या तांबे के लोटे से शुद्ध जल अर्पित करें।

  • पंचामृत अभिषेक: इसके बाद शिवलिंग का दूध, दही, घी, शहद और शक्कर (पंचामृत) से अभिषेक करें।

  • बेलपत्र और धतूरा: भगवान शिव को बेलपत्र (जो कटे-फटे न हों), भांग, धतूरा, मदार (आक) के फूल, शमी के पत्ते और सफेद चंदन अर्पित करें। ध्यान रहे, शिव पूजा में सिंदूर, हल्दी और तुलसी दल का प्रयोग नहीं किया जाता है।

  • मंत्र जाप: पूजा के दौरान निरंतर ॐ नमः शिवाय या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते रहें।

  • आरती: शाम के समय प्रदोष काल (सूर्यास्त के आसपास) में पुनः भगवान शिव की पूजा करें, धूप-दीप दिखाएं, आरती करें और शिव चालीसा का पाठ करें।

नौकरीपेशा लोगों के लिए सावन व्रत के टिप्स

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और ऑफिस के काम के साथ व्रत रखना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। नौकरीपेशा लोग इन टिप्स को अपनाकर आसानी से व्रत पूर्ण कर सकते हैं:

  • हाइड्रेटेड रहें: ऑफिस में काम करते समय ऊर्जा की आवश्यकता होती है। इसलिए अपने साथ नारियल पानी, नींबू पानी या छाछ रखें।

  • सूखे मेवे (Dry Fruits): काम के बीच में भूख लगने पर मखाने, बादाम, अखरोट या भुनी हुई मूंगफली का सेवन करें। इससे कमजोरी महसूस नहीं होगी।

  • जल्दी पूजा करें: सुबह ऑफिस जाने से पहले ही स्नान आदि से निवृत्त होकर पूजा कर लें। अगर सुबह समय न मिले, तो शाम को प्रदोष काल में स्नान करके शिव पूजा करें।

  • टिफिन में फलाहार: ऑफिस के लिए साबूदाने की खिचड़ी, सिंघाड़े के आटे का पराठा या ताजे फलों का चाट बनाकर ले जाएं।

सावन का महीना केवल व्रत और पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्म-संयम, प्रकृति प्रेम और आध्यात्मिक उन्नति का समय है। साल 2026 में सावन का पवित्र महीना 30 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान पड़ने वाले 4 सावन सोमवार, मंगला गौरी, शिवरात्रि और एकादशी जैसे व्रत आपको ईश्वर के और करीब लाते हैं। अपनी श्रद्धा, भक्ति और शारीरिक सामर्थ्य के अनुसार महादेव की आराधना करें। भगवान भोलेनाथ बहुत भोले हैं, वे मात्र एक लोटा जल और सच्ची श्रद्धा से ही प्रसन्न हो जाते हैं। हर हर महादेव!

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. सावन 2026 में कब से शुरू हो रहा है?

उत्तर भारत (पूर्णिमांत पंचांग) के अनुसार सावन 30 जुलाई 2026 को शुरू होगा और 28 अगस्त 2026 को समाप्त होगा। वहीं दक्षिण और पश्चिम भारत में सावन 13 अगस्त से 11 सितंबर 2026 तक रहेगा।

2. सावन 2026 में कुल कितने सोमवार पड़ेंगे?

साल 2026 के सावन महीने में कुल 4 सोमवार पड़ेंगे। उत्तर भारत के कैलेंडर के अनुसार इनकी तिथियां 3 अगस्त, 10 अगस्त, 17 अगस्त और 24 अगस्त होंगी।

3. क्या महिलाएं भी सावन में कोई विशेष व्रत रखती हैं?

हां, महिलाएं सावन सोमवार के अलावा सावन के हर मंगलवार को ‘मंगला गौरी व्रत’ रखती हैं। यह व्रत माता पार्वती को समर्पित होता है और अखंड सौभाग्य व सुखी दांपत्य जीवन के लिए रखा जाता है।

4. सावन में नाग पंचमी कब है?

साल 2026 में नाग पंचमी 17 अगस्त को मनाई जाएगी। यह दिन सावन के तीसरे सोमवार के साथ पड़ रहा है, जो शिव भक्तों के लिए एक अत्यंत शुभ और दुर्लभ संयोग है।

5. सावन के व्रत में क्या नहीं खाना चाहिए?

सावन के फलाहारी व्रत में अन्न (गेहूं, चावल, दालें), साधारण नमक, लहसुन, प्याज, मांस-मदिरा और किसी भी तरह के तामसिक भोजन का सेवन पूर्ण रूप से वर्जित होता है। इसके अलावा शिवजी की पूजा में बैंगन का सेवन भी अच्छा नहीं माना जाता है।

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