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Vaishnav Ekadashi Calendar 2026: कब है कौन-सी वैष्णव एकादशी? देखें Dates, Vrat Tithi & Parana TimeIt takes 13 minutes... to read this article !

सनातन धर्म में ‘एकादशी’ (Ekadashi) भगवान श्री हरि विष्णु की आराधना का सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण दिन है। लेकिन जब हम एकादशी व्रत की बात करते हैं, तो अक्सर पंचांगों और कैलेंडरों में तिथियों को लेकर असमंजस की स्थिति बन जाती है। कई बार आपने देखा होगा कि एक ही एकादशी का व्रत दो अलग-अलग दिनों में रखा जाता है— पहले दिन ‘स्मार्त’ (गृहस्थ) व्रत रखते हैं और दूसरे दिन ‘वैष्णव’ (इस्कॉन और संन्यासी) व्रत रखते हैं।

भगवान कृष्ण और श्री चैतन्य महाप्रभु के अनुयायियों (ISKCON) के लिए वैष्णव नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है। वर्ष 2026 वैष्णव भक्तों के लिए बहुत विशेष होने वाला है, क्योंकि वर्ष 2026 में अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) भी पड़ रहा है। इसका अर्थ है कि इस वर्ष सामान्य 24 एकादशियों के बजाय कुल 26 एकादशी व्रत रखे जाएंगे।

यदि आप भी पूर्ण शुद्धता और इस्कॉन (ISKCON) के नियमों के अनुसार भगवान विष्णु और कृष्ण की कृपा पाना चाहते हैं, तो आपके लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि “Vaishnav Ekadashi Calendar 2026: कब है कौन-सी वैष्णव एकादशी? देखें Dates, Vrat Tithi & Parana Time”

इस अत्यंत विस्तृत लेख में हम आपको स्मार्त और वैष्णव एकादशी के बीच का अंतर, इस्कॉन के कड़े नियम, हरि वासर, और वर्ष 2026 की सभी 26 वैष्णव एकादशियों की सटीक तिथियां एवं पारण का समय बताएंगे।

Vaishnav Ekadashi 2026 Calendar (Quick Reference Table)

यहाँ ISKCON और वैष्णव संप्रदाय की तिथियों की संपूर्ण टेबल (Table) दी गई है:

महीना (Month) वैष्णव एकादशी का नाम वैष्णव व्रत तिथि (Date) पारण का दिन (Parana Day)
जनवरी षटतिला एकादशी 14 जनवरी 2026 15 जनवरी 2026
जनवरी भैमी / जया एकादशी 29 जनवरी 2026 30 जनवरी 2026
फरवरी विजया एकादशी 13 फरवरी 2026 14 फरवरी 2026
फरवरी आमलकी एकादशी 27 फरवरी 2026 28 फरवरी 2026
मार्च पापमोचनी एकादशी 15 मार्च 2026 16 मार्च 2026
मार्च कामदा एकादशी 29 मार्च 2026 30 मार्च 2026
अप्रैल वरुथिनी एकादशी 13 अप्रैल 2026 14 अप्रैल 2026
अप्रैल मोहिनी एकादशी 27 अप्रैल 2026 28 अप्रैल 2026
मई अपरा एकादशी 13 मई 2026 14 मई 2026
मई पद्मिनी एकादशी (अधिक मास) 27 मई 2026 28 मई 2026
जून परमा एकादशी (अधिक मास) 11 जून 2026 12 जून 2026
जून पांडव निर्जला एकादशी 25 जून 2026 26 जून 2026
जुलाई योगिनी एकादशी 11 जुलाई 2026 12 जुलाई 2026
जुलाई शयनी (देवशयनी) एकादशी 25 जुलाई 2026 26 जुलाई 2026
अगस्त कामिका एकादशी 9 अगस्त 2026 10 अगस्त 2026
अगस्त पवित्रोपना (पुत्रदा) एकादशी 24 अगस्त 2026 25 अगस्त 2026
सितंबर अन्नदा / अजा एकादशी 7 सितंबर 2026 8 सितंबर 2026
सितंबर पार्श्व (परिवर्तिनी) एकादशी 22 सितंबर 2026 23 सितंबर 2026
अक्टूबर इंदिरा एकादशी 6 अक्टूबर 2026 7 अक्टूबर 2026
अक्टूबर पाशांकुशा एकादशी 22 अक्टूबर 2026 23 अक्टूबर 2026
नवंबर रमा एकादशी 5 नवंबर 2026 6 नवंबर 2026
नवंबर उत्थान (देवोत्थान) एकादशी 21 नवंबर 2026 22 नवंबर 2026
दिसंबर उत्पन्ना एकादशी 4/5 दिसंबर 2026 अगले दिन सुबह
दिसंबर मोक्षदा एकादशी / गीता जयंती 20 दिसंबर 2026 21 दिसंबर 2026

(नोट: इस्कॉन के स्थानीय मंदिरों और भौगोलिक स्थिति (देश/शहर) के अनुसार पारण के मिनटों में बदलाव हो सकता है। इसलिए सटीक पारण समय के लिए अपने नजदीकी इस्कॉन मंदिर के कैलेंडर का भी संदर्भ लें।)

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1. स्मार्त और वैष्णव एकादशी में क्या अंतर है? (Smarta vs Vaishnava Ekadashi)

अक्सर लोग भ्रमित हो जाते हैं कि एकादशी दो दिन क्यों होती है। इसके पीछे वैदिक पंचांग का एक गहरा गणित और नियम है:

  • स्मार्त एकादशी (Smarta Ekadashi): स्मार्त वे लोग होते हैं जो गृहस्थ जीवन जीते हैं और पंचदेवों (शिव, विष्णु, दुर्गा, सूर्य, गणेश) की पूजा करते हैं। स्मार्त नियम के अनुसार, यदि सूर्योदय के समय (भले ही वह एक सेकंड के लिए हो) एकादशी तिथि मौजूद है, तो उस दिन एकादशी का व्रत मान लिया जाता है। इसमें दशमी तिथि का मिश्रण (Dashami Viddha) हो सकता है।

  • वैष्णव/इस्कॉन एकादशी (Vaishnava Ekadashi): वैष्णव वे हैं जिन्होंने अपना जीवन पूर्ण रूप से भगवान विष्णु या कृष्ण को समर्पित कर दिया है। वैष्णव संप्रदाय (जैसे ISKCON) का नियम बहुत सख्त है। इसे ‘अरुणोदय विद्धा’ (Arunodaya Viddha) नियम कहते हैं।

    • अरुणोदय का अर्थ है सूर्योदय से लगभग 1 घंटा 36 मिनट (4 घटी) पहले का समय।

    • यदि अरुणोदय काल में ‘दशमी’ तिथि का एक अंश भी मौजूद है, तो वैष्णव उस दिन व्रत नहीं रखते। वे उसे ‘दशमी विद्धा’ (अशुद्ध) मानते हैं।

    • ऐसी स्थिति में वैष्णव भक्त अगले दिन (द्वादशी तिथि) को उपवास रखते हैं, जिसे ‘महाद्वादशी’ (Mahadvadashi) कहा जाता है। महाद्वादशी का व्रत करने से एकादशी और द्वादशी दोनों का पुण्य एक साथ मिलता है।

2. वैष्णव एकादशी व्रत और पारण (Parana) के कड़े नियम

इस्कॉन और वैष्णव संप्रदाय में व्रत खोलने (Fast Breaking) को ‘पारण’ (Parana) कहा जाता है। पारण का समय व्रत की सफलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

  1. हरि वासर (Hari Vasara) का नियम: एकादशी के अगले दिन (द्वादशी तिथि) के पहले एक-चौथाई (1/4th) भाग को ‘हरि वासर’ कहा जाता है। वैष्णव शास्त्रों के अनुसार, हरि वासर के दौरान कभी भी व्रत नहीं खोलना चाहिए। पारण हमेशा हरि वासर समाप्त होने के बाद ही किया जाना चाहिए।

  2. पारण का समय: वैष्णवों को अपना व्रत अगले दिन सूर्योदय के बाद और हरि वासर समाप्त होने के बाद ही खोलना चाहिए। यदि द्वादशी तिथि सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो रही है, तब भी पारण सूर्योदय के बाद ही होगा।

  3. अन्न का पूर्ण निषेध: वैष्णव एकादशी में चावल (Rice), गेहूं, दालें, और किसी भी प्रकार के अनाज (Grains) का सेवन पूर्णतः वर्जित है। यहाँ तक कि प्रसाद में भी अन्न का भोग भगवान को नहीं लगाया जाता।

3. Vaishnav Ekadashi Calendar 2026: संपूर्ण वर्ष की सूची (Month-Wise ISKCON Dates)

वर्ष 2026 में अधिक मास (Adhik Maas) के कारण कुल 26 वैष्णव एकादशी व्रत आएंगे। आइए जानते हैं हर महीने की एकादशी की सटीक तारीख, उसका नाम और पारण का दिन। (नोट: पारण का सटीक समय आपके शहर के सूर्योदय पर निर्भर करता है, इसलिए पारण का समय सुबह के प्रहर में माना गया है।)

1. षटतिला एकादशी (Shat-tila Ekadashi) – जनवरी 2026

  • वैष्णव व्रत की तारीख: 14 जनवरी 2026 (बुधवार)

  • पारण का दिन: 15 जनवरी 2026 (गुरुवार) की सुबह।

  • महत्व: माघ मास की इस एकादशी में भगवान विष्णु की पूजा 6 प्रकार के तिलों से की जाती है। यह अज्ञानता और घोर पापों को नष्ट करने वाली है।

2. भैमी / जया एकादशी (Bhaimi / Jaya Ekadashi) – जनवरी 2026

  • वैष्णव व्रत की तारीख: 29 जनवरी 2026 (गुरुवार)

  • पारण का दिन: 30 जनवरी 2026 (शुक्रवार) की सुबह।

  • महत्व: माघ शुक्ल पक्ष की इस एकादशी को इस्कॉन में ‘भैमी एकादशी’ भी कहा जाता है। यह पिशाच योनि से मुक्ति दिलाती है।

3. विजया एकादशी (Vijaya Ekadashi) – फरवरी 2026

  • वैष्णव व्रत की तारीख: 13 फरवरी 2026 (शुक्रवार)

  • पारण का दिन: 14 फरवरी 2026 (शनिवार) की सुबह।

  • महत्व: फाल्गुन कृष्ण पक्ष की यह एकादशी कार्य में विजय दिलाती है। भगवान राम ने लंका विजय से पूर्व यह व्रत किया था।

4. आमलकी एकादशी (Amalaki Ekadashi) – फरवरी 2026

  • वैष्णव व्रत की तारीख: 27 फरवरी 2026 (शुक्रवार)

  • पारण का दिन: 28 फरवरी 2026 (शनिवार) की सुबह।

  • महत्व: फाल्गुन शुक्ल पक्ष की इस एकादशी पर आंवले के वृक्ष की पूजा की जाती है, जो साक्षात नारायण का स्वरूप है।

5. पापमोचनी एकादशी (Papamochani Ekadashi) – मार्च 2026

  • वैष्णव व्रत की तारीख: 15 मार्च 2026 (रविवार)

  • पारण का दिन: 16 मार्च 2026 (सोमवार) की सुबह।

  • महत्व: यह एकादशी मनुष्य के सारे पापों (Pap) से उसे मुक्त (Mochani) करती है।

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6. कामदा एकादशी (Kamada Ekadashi) – मार्च 2026

  • वैष्णव व्रत की तारीख: 29 मार्च 2026 (रविवार)

  • पारण का दिन: 30 मार्च 2026 (सोमवार) की सुबह।

  • महत्व: चैत्र शुक्ल पक्ष की कामदा एकादशी भक्तों की सभी सात्विक मनोकामनाओं को पूर्ण करती है।

7. वरुथिनी एकादशी (Varuthini Ekadashi) – अप्रैल 2026

  • वैष्णव व्रत की तारीख: 13 अप्रैल 2026 (सोमवार)

  • पारण का दिन: 14 अप्रैल 2026 (मंगलवार) की सुबह।

  • महत्व: वैशाख कृष्ण पक्ष की यह एकादशी सौभाग्य प्रदान करने वाली और 10 हज़ार साल की तपस्या का फल देने वाली है।

8. मोहिनी एकादशी (Mohini Ekadashi) – अप्रैल 2026

  • वैष्णव व्रत की तारीख: 27 अप्रैल 2026 (सोमवार)

  • पारण का दिन: 28 अप्रैल 2026 (मंगलवार) की सुबह।

  • महत्व: समुद्र मंथन के दौरान भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप इसी दिन धारण किया था। यह मोह-माया से मुक्ति दिलाती है।

9. अपरा एकादशी (Apara Ekadashi) – मई 2026

  • वैष्णव व्रत की तारीख: 13 मई 2026 (बुधवार)

  • पारण का दिन: 14 मई 2026 (गुरुवार) की सुबह।

  • महत्व: यह अपार धन और पुण्य प्रदान करती है। इसे अचला एकादशी भी कहते हैं।

विशेष: अधिक मास (Adhik Maas) की वैष्णव एकादशियां – 2026

वैष्णव कैलेंडर में अधिक मास (जिसे पुरुषोत्तम मास कहा जाता है) की एकादशियों का अत्यंत विशेष महत्व है। वर्ष 2026 में यह अद्भुत संयोग बन रहा है।

10. पद्मिनी एकादशी (Padmini Ekadashi) – मई 2026

  • वैष्णव व्रत की तारीख: 27 मई 2026 (बुधवार)

  • पारण का दिन: 28 मई 2026 (गुरुवार) की सुबह।

  • महत्व: अधिक मास के शुक्ल पक्ष की इस एकादशी का फल कई यज्ञों और तीर्थ यात्राओं से भी बड़ा माना गया है।

11. परमा एकादशी (Parama Ekadashi) – जून 2026

  • वैष्णव व्रत की तारीख: 11 जून 2026 (गुरुवार)

  • पारण का दिन: 12 जून 2026 (शुक्रवार) की सुबह।

  • महत्व: अधिक मास के कृष्ण पक्ष की यह एकादशी अत्यंत दुर्लभ सिद्धियां और भगवान विष्णु की अहैतुकी कृपा दिलाती है।

12. पांडव निर्जला एकादशी (Pandava Nirjala Ekadashi) – जून 2026

  • वैष्णव व्रत की तारीख: 25 जून 2026 (गुरुवार) (इस्कॉन कैलेंडर के अनुसार)

  • पारण का दिन: 26 जून 2026 (शुक्रवार) की सुबह।

  • महत्व: इस्कॉन में इसे पांडव निर्जला या भीमसेनी एकादशी कहा जाता है। यह पूरे वर्ष की सबसे बड़ी एकादशी है। इस दिन पानी पीना भी वर्जित होता है। यदि कोई साल भर व्रत न कर पाए, तो केवल इस एक व्रत को करने से 26 एकादशियों का फल मिल जाता है।

13. योगिनी एकादशी (Yogini Ekadashi) – जुलाई 2026

  • वैष्णव व्रत की तारीख: 11 जुलाई 2026 (शनिवार)

  • पारण का दिन: 12 जुलाई 2026 (रविवार) की सुबह।

  • महत्व: आषाढ़ कृष्ण पक्ष की यह एकादशी त्वचा रोगों और कुष्ठ रोगों से मुक्ति दिलाती है।

14. शयनी / देवशयनी एकादशी (Sayana Ekadashi) – जुलाई 2026

  • वैष्णव व्रत की तारीख: 25 जुलाई 2026 (शनिवार)

  • पारण का दिन: 26 जुलाई 2026 (रविवार) की सुबह।

  • महत्व: इसे इस्कॉन में शयनी एकादशी कहते हैं। इसी दिन से भगवान श्री हरि 4 माह के लिए योगनिद्रा में जाते हैं और ‘चातुर्मास’ (Chaturmas) शुरू हो जाता है।

15. कामिका एकादशी (Kamika Ekadashi) – अगस्त 2026

  • वैष्णव व्रत की तारीख: 9 अगस्त 2026 (रविवार)

  • पारण का दिन: 10 अगस्त 2026 (सोमवार) की सुबह।

  • महत्व: श्रावण कृष्ण पक्ष की एकादशी। इस दिन भगवान विष्णु की तुलसी से पूजा करने का विशेष महत्व है।

16. पवित्रोपना / पुत्रदा एकादशी (Pavitropana Ekadashi) – अगस्त 2026

  • वैष्णव व्रत की तारीख: 23/24 अगस्त 2026 (रविवार/सोमवार) (पंचांग अनुसार वैष्णव तिथि 24 अगस्त को मान्य होगी)

  • पारण का दिन: 25 अगस्त 2026 (मंगलवार) की सुबह।

  • महत्व: इस्कॉन में इसे पवित्रोपना एकादशी कहा जाता है। यह योग्य और कृष्ण-भावना भावित संतान की प्राप्ति के लिए उत्तम है।

17. अन्नदा / अजा एकादशी (Annada / Aja Ekadashi) – सितंबर 2026

  • वैष्णव व्रत की तारीख: 7 सितंबर 2026 (सोमवार)

  • पारण का दिन: 8 सितंबर 2026 (मंगलवार) की सुबह।

  • महत्व: यह खोया हुआ साम्राज्य और मान-सम्मान वापस दिलाने वाली एकादशी है।

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18. पार्श्व / परिवर्तिनी एकादशी (Parshva Ekadashi) – सितंबर 2026

  • वैष्णव व्रत की तारीख: 22 सितंबर 2026 (मंगलवार)

  • पारण का दिन: 23 सितंबर 2026 (बुधवार) की सुबह।

  • महत्व: इस दिन क्षीरसागर में भगवान विष्णु करवट बदलते हैं। इस दिन वामन भगवान की पूजा होती है।

19. इंदिरा एकादशी (Indira Ekadashi) – अक्टूबर 2026

  • वैष्णव व्रत की तारीख: 6 अक्टूबर 2026 (मंगलवार)

  • पारण का दिन: 7 अक्टूबर 2026 (बुधवार) की सुबह।

  • महत्व: पितृ पक्ष (Shradh) में आने वाली इस एकादशी का पुण्य पितरों को समर्पित किया जाता है, जिससे उन्हें वैकुंठ की प्राप्ति होती है।

20. पाशांकुशा / पापांकुशा एकादशी (Pashankusha Ekadashi) – अक्टूबर 2026

  • वैष्णव व्रत की तारीख: 22 अक्टूबर 2026 (गुरुवार)

  • पारण का दिन: 23 अक्टूबर 2026 (शुक्रवार) की सुबह।

  • महत्व: यह पापों पर अंकुश लगाने वाली है।

21. रमा एकादशी (Rama Ekadashi) – नवंबर 2026

  • वैष्णव व्रत की तारीख: 5 नवंबर 2026 (गुरुवार)

  • पारण का दिन: 6 नवंबर 2026 (शुक्रवार) की सुबह।

  • महत्व: लक्ष्मी जी (रमा) के नाम पर यह एकादशी धन और भक्ति दोनों प्रदान करती है।

22. उत्थान / देवोत्थान एकादशी (Utthana Ekadashi) – नवंबर 2026

  • वैष्णव व्रत की तारीख: 21 नवंबर 2026 (शनिवार)

  • पारण का दिन: 22 नवंबर 2026 (रविवार) की सुबह।

  • महत्व: इसे प्रबोधिनी एकादशी भी कहते हैं। इस दिन भगवान विष्णु 4 महीने की निद्रा से जागते हैं और चातुर्मास समाप्त होता है।

23. उत्पन्ना एकादशी (Utpanna Ekadashi) – दिसंबर 2026

  • वैष्णव व्रत की तारीख: 4/5 दिसंबर 2026 (स्थान और इस्कॉन पंचांग के अनुसार)

  • पारण का दिन: अगले दिन सुबह।

  • महत्व: इसी दिन ‘एकादशी’ देवी का जन्म भगवान विष्णु के शरीर से हुआ था।

24. मोक्षदा एकादशी (Mokshada Ekadashi) – दिसंबर 2026

  • वैष्णव व्रत की तारीख: 20 दिसंबर 2026 (रविवार)

  • पारण का दिन: 21 दिसंबर 2026 (सोमवार) की सुबह।

  • महत्व: इसी दिन कुरुक्षेत्र में भगवान कृष्ण ने अर्जुन को ‘गीता’ का ज्ञान दिया था। इसे गीता जयंती भी कहते हैं।

4. इस्कॉन में एकादशी का पालन कैसे करें? (How to observe Vaishnav Ekadashi)

इस्कॉन के संस्थापक आचार्य श्रील प्रभुपाद जी ने एकादशी के दिन भक्तों के लिए कुछ सरल लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण नियम बताए हैं:

  1. महामंत्र का जाप (Chanting): एकादशी का मुख्य उद्देश्य केवल भूखा रहना नहीं है, बल्कि भगवान कृष्ण का स्मरण करना है। वैष्णवों को इस दिन कम से कम 25 से 32 माला (सामान्य दिनों की 16 माला से अधिक) ‘हरे कृष्ण’ महामंत्र का जाप करना चाहिए।

  2. श्रीमद्भागवतम् का पठन: इस दिन भगवान की लीलाओं का अध्ययन करना चाहिए। श्रीमद्भागवतम् या भगवद गीता का पाठ करना अत्यंत शुभ है।

  3. खान-पान के नियम: वैष्णव एकादशी में अन्न (चावल, दाल, गेहूं) पूरी तरह से वर्जित है। आप दूध, दही, आलू, कुट्टू का आटा, साबूदाना, सेंधा नमक, फल और मेवे ग्रहण कर सकते हैं। प्रसाद में कभी भी अन्न का भोग न लगाएं।

  4. तुलसी महारानी की सेवा: एकादशी के दिन तुलसी के पत्तों को नहीं तोड़ना चाहिए। भोग लगाने के लिए एक दिन पहले (दशमी को) ही तुलसी दल तोड़कर रख लेने चाहिए।

“Vaishnav Ekadashi Calendar 2026: कब है कौन-सी वैष्णव एकादशी? देखें Dates, Vrat Tithi & Parana Time” — इस लेख का उद्देश्य आपको वैष्णव संप्रदाय के अत्यंत सटीक और शुद्ध पंचांग की जानकारी देना है।

स्मार्त और वैष्णव एकादशी में केवल समय की गणना का अंतर है, लेकिन भक्ति का भाव एक ही है। वर्ष 2026 में अधिक मास के संयोग से आपको भगवान कृष्ण की सेवा के लिए दो अतिरिक्त एकादशियों (पद्मिनी और परमा) का सुअवसर प्राप्त हो रहा है।

इन तिथियों को अपने डायरी या मोबाइल में सेव कर लें, ताकि आप अरुणोदय विद्धा के दोष से बचकर शुद्ध महाद्वादशी (वैष्णव एकादशी) का व्रत रख सकें। भगवान श्री हरि आप सभी की आध्यात्मिक प्रगति और भक्ति में वृद्धि करें।

हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे।

हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: वर्ष 2026 में इस्कॉन की पांडव निर्जला एकादशी कब है?

उत्तर: इस्कॉन (वैष्णव) कैलेंडर के अनुसार, वर्ष 2026 में पांडव निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून 2026 (गुरुवार) को रखा जाएगा। यह व्रत बिना अन्न और जल के किया जाता है।

प्रश्न 2: वैष्णव एकादशी हमेशा स्मार्त एकादशी के एक दिन बाद क्यों होती है?

उत्तर: स्मार्त एकादशी सूर्योदय के समय तिथि को मान लेती है (चाहे उसमें दशमी का कुछ अंश हो)। लेकिन वैष्णव (इस्कॉन) ‘अरुणोदय’ (सूर्योदय से 1.5 घंटे पहले) के समय को देखते हैं। यदि उस समय दशमी का अंश (विद्धा) हो, तो वैष्णव उसे अशुद्ध मानकर अगले दिन (द्वादशी को) व्रत करते हैं।

प्रश्न 3: क्या एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ सकते हैं?

उत्तर: नहीं। वैष्णव नियमों के अनुसार, एकादशी और द्वादशी के दिन तुलसी महारानी भी भगवान के लिए व्रत रखती हैं। इसलिए इन दिनों तुलसी पत्र तोड़ना अपराध माना जाता है। भोग के लिए तुलसी एक दिन पहले ही तोड़ लेनी चाहिए।

प्रश्न 4: हरि वासर (Hari Vasara) में पारण क्यों नहीं करते?

उत्तर: हरि वासर द्वादशी तिथि का शुरुआती एक-चौथाई समय होता है। यह समय सीधे भगवान नारायण को समर्पित है और इस दौरान अन्न या जल ग्रहण करने से एकादशी व्रत का संपूर्ण फल नष्ट हो जाता है। इसलिए वैष्णव हमेशा हरि वासर टलने के बाद पारण करते हैं।

"नमस्कार! मैं अमित तिवारी हूँ, और आप मुझे एक 'साधक' के रूप में जान सकते हैं। बचपन से ही सनातन धर्म, तंत्र-मंत्र और आध्यात्मिक साधनाओं ने मुझे अपनी ओर गहराई से आकर्षित किया है। वर्षों के निरंतर अध्ययन, गुरु-कृपा और अपने व्यक्तिगत साधना-अनुभवों से मैंने जो कुछ भी सीखा है, उसे मैं sadhnas.in के माध्यम से आपके साथ साझा कर रहा हूँ। मेरा मुख्य उद्देश्य इंटरनेट पर फैले भ्रम को दूर करके प्रामाणिक, सत्य और शास्त्र-सम्मत जानकारी को बेहद सरल भाषा में आप तक पहुँचाना है। मैं कोई गुरु या उपदेशक नहीं हूँ, बल्कि आप ही की तरह ईश्वर की खोज में निकला एक राही हूँ। मेरी यही कोशिश है कि मेरे अनुभवों और लेखनी से आपकी आध्यात्मिक यात्रा और भी सुगम व सफल हो सके।"

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