Shri Nateshvari Nateshvara Sammelana (श्री नटेश्वरी-नटेश्वर सम्मेलन): पाठ कैसे करें? जानें साधना विधि, नियम, लाभ, महत्व और सावधानियांIt takes 64 minutes... to read this article !

सनातन धर्म, शैव-शाक्त आगमों और तंत्र शास्त्र के अनंत आध्यात्मिक ब्रह्मांड में, जब सृष्टि के सृजन, संतुलन, विशुद्ध प्रेम, दांपत्य जीवन की पूर्णता और ब्रह्मांडीय लय (Cosmic Rhythm) की बात आती है, तो भगवान शिव के ‘नटेश्वर’ (नटराज – नृत्यों के स्वामी) और माता पार्वती के ‘नटेश्वरी’ (नृत्यों की स्वामिनी) स्वरूप का स्मरण सर्वोपरि है।

‘सम्मेलन’ का अर्थ है— पूर्ण एकीकरण, मिलन या समरसता। जब भगवान शिव अपना प्रलयंकारी या आनंदमयी ‘तांडव’ (Tandava) करते हैं और उसी समय माता शक्ति अपना अत्यंत कोमल, लालित्यपूर्ण और सृजनात्मक ‘लास्य’ (Lasya) नृत्य करती हैं, तो इन दोनों नृत्यों के परम मिलन को ही शास्त्रों में ‘श्री नटेश्वरी-नटेश्वर सम्मेलन’ (Shri Nateshvari Nateshvara Sammelana) कहा गया है। यह कोई साधारण नृत्य या मिलन नहीं है; यह पुरुष (चेतना) और प्रकृति (ऊर्जा) का वह चरम एकाकार है, जहाँ आकर द्वैत (Duality) समाप्त हो जाता है और केवल परमानंद शेष रहता है। अर्द्धनारीश्वर स्वरूप इसी सम्मेलन का एक स्थिर रूप है, जबकि यह ‘सम्मेलन’ उस ऊर्जा का गतिशील (Dynamic) रूप है।

जब मनुष्य का जीवन घोर मानसिक अशांति, दांपत्य जीवन (Marriage) के अंतहीन कलह, कला या कार्यक्षेत्र में रचनात्मकता (Creativity) की कमी, शारीरिक व मानसिक ऊर्जा के असंतुलन, और आध्यात्मिक शून्यता से घिर जाता है, तब शिव-शक्ति के इस ‘सम्मेलन’ की शरण में जाना साक्षात जीवन के बेसुरे तारों को फिर से सुर में बांधने के समान है। जीवन के इस असंतुलन को मिटाने, भीतर की सोई हुई कुण्डलिनी को जाग्रत करने और शिव-शक्ति की अहैतुकी कृपा प्राप्त करने के लिए सिद्ध योगियों और तंत्र ग्रंथों में इस दिव्य मिलन की रहस्यमयी स्तुति का संकलन किया गया है, जिसे ‘श्री नटेश्वरी-नटेश्वर सम्मेलन’ स्तुति/पाठ के नाम से जाना जाता है।

यह कोई साधारण काव्य नहीं है; यह एक ऐसा जाग्रत नाद-ब्रह्म है, जो जीवन के भयंकर से भयंकर तनावों, अकेलेपन, और रिश्तों की कड़वाहट को पल भर में भस्म कर एक दिव्य आनंद की स्थापना करता है।

श्रीनटेश्वरीनटेश्वरसम्मेलन सहस्रनामावली हिंदी  |  Shri Nateshvarinateshvara Sammelana

॥ ॐ श्री गणेशाय नमः ॥

अस्य श्री नटेश्वरी नटेश्वरनाम साहस्रमालामन्त्रस्य ।

सदाशिवऋषिः । महाविराट् छन्दः ।

श्रीमन्नटेश्वरी नटेश्वरो देवता ।

ॐ श्री शिवाय नम इति बीजम् ।

ॐ अनन्तशक्तये नम इति शक्तिः ।

ॐ श्रीमहेश्वराय नम इति कीलकम् ।

श्री नटेश्वरीनटेश्वरप्रसादसिद्ध्यर्थं अर्चने विनियोगः ॥

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ नम्याय नमः अङ्गुष्ठाभ्यां नमः ।

ॐ स्वाहा नमः तर्जनीभ्यां स्वाहा ।

ॐ वषट्काराय नमः मध्यमाभ्यां वषट् ।

ॐ हुंकाराय नमः अनामिकाभ्यां हुम् ।

ॐ वौषट्काराय नमः कनिष्ठिकाभ्यां वौषट् ।

ॐ फट्कराय नमः करतलकर पृष्ठाभ्यां फट् ।

ॐ नम्याय नमः हृदयाय नमः ।

ॐ स्वाहा नमः शिरसे स्वाहा ।

ॐ वषट्काराय नमः शिखायै वषट् ।

ॐ हुंकाराय नमः कवचाय हुम् ।

ॐ वौषट्काराय नमः नेत्रत्रयाय वौषट् ।

ॐ फट्कराय नमः अस्त्राय फट् ॥

ॐ भूर्भुवस्सुवरोमिति दिग्बन्धः ॥

॥ ध्यानम् ॥

ध्यायेत्कोटिरविप्रभं त्रिनयनं शीतांशुगङ्गाधरं

दक्षाङ्घ्रिस्थितवामकुञ्चितपदं शार्दूलचर्माम्बरम् ।

वह्निं डोलकराभयं डमरुकं वामे शिवां (स्थितां) श्यामलां

कल्हारं जपसृक्षुकं (दधतीं प्रलम्बितकरा) कटिकरां

देवीं सभेशं भजे ॥

वामेलम्बकरां शुकञ्च दधतीं दक्षेऽम्बिकां ताण्डवम्

लमिति पञ्चपूजा

॥ अथ श्री नटेश्वरीनटेश्वरसम्मेलननाम साहस्री ॥

ॐ श्री शिवायै नमः ।

ॐ श्री शिवाय नमः । १

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ श्री शिवानाथायै नमः ।

ॐ श्री शिवानाथाय नमः । २

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ श्रीमत्यै नमः ।

ॐ श्रीमते नमः । ३

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ श्रीपतिपूजितायै नमः ।

ॐ श्रीपतिपूजिताय नमः । ४

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ शिवङ्कर्यै नमः ।

ॐ शिवङ्कराय नमः । ५

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ शिवतरायै नमः ।

ॐ शिवतराय नमः । ६

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ शिष्टहृष्टायै नमः ।

ॐ शिष्टहृष्टाय नमः । ७

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ शिवागमायै नमः ।

ॐ शिवागमाय नमः । ८

ॐ अखण्डानन्दचिद्रूपायै नमः ।

ॐ अखण्डानन्दचिद्रूपाय नमः । ९

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ परमानन्दताण्डवायै नमः ।

ॐ परमानन्दताण्डवाय नमः । १०

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ अपस्मृतिन्यस्तपादायै नमः ।

ॐ अपस्मृतिन्यस्तपादाय नमः । ११

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ कृत्तिवाससे नमः ।

ॐ कृत्तिवाससे नमः । १२

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ कृपाकरायै नमः ।

ॐ कृपाकराय नमः । १३

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ कालीवादप्रियायै नमः ।

ॐ कालीवादप्रियाय नमः । १४

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ कालायै नमः ।

ॐ कालाय नमः । १५

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ कालातीतायै नमः ।

ॐ कालातीताय नमः । १६

ॐ कलाधरायै नमः ।

ॐ कलाधराय नमः । १७

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ कालनेत्र्यै नमः ।

ॐ कालनेत्रे नमः । १८

ॐ कालहन्त्र्यै नमः ।

ॐ कालहन्त्रे नमः । १९

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ कालचक्रप्रवर्तकायै नमः ।

ॐ कालचक्रप्रवर्तकाय नमः । २०

ॐ कालज्ञायै नमः ।

ॐ कालज्ञाय नमः । २१

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ कामदायै नमः ।

ॐ कामदाय नमः । २२

ॐ कान्तायै नमः ।

ॐ कान्ताय नमः । २३

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ कामारये नमः ।

ॐ कामारये नमः । २४

ॐ कामपालकायै नमः ।

ॐ कामपालकाय नमः । २५

ॐ कल्याणमूर्तये नमः ।

ॐ कल्याणमूर्तये नमः । २६

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ कल्याणीरमण्यै नमः ।

ॐ कल्याणीरमणाय नमः । २७

ॐ कमलेक्षणायै नमः ।

ॐ कमलेक्षणाय नमः । २८

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ कालकण्ठ्यै नमः ।

ॐ कालकण्ठाय नमः । २९

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ कालकालायै नमः ।

ॐ कालकालाय नमः । ३०

ॐ कालकूटविषाशनायै नमः ।

ॐ कालकूटविषाशनाय नमः । ३१

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ कृतज्ञायै नमः ।

ॐ कृतज्ञाय नमः । ३२

ॐ कृतिसारज्ञायै नमः ।

ॐ कृतिसारज्ञाय नमः । ३३

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ कृशानवे नमः ।

ॐ कृशानवे नमः । ३४

ॐ कृष्णपिङ्गलायै नमः ।

ॐ कृष्णपिङ्गलाय नमः । ३५

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ करिचर्माम्बरधरायै नमः ।

ॐ करिचर्माम्बरधराय नमः । ३६

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ कपालिन्यै नमः ।

ॐ कपालिने नमः । ३७

ॐ कलुषापहायै नमः ।

ॐ कलुषापहाय नमः । ३८

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ कपालमालाभरणायै नमः ।

ॐ कपालमालाभरणाय नमः । ३९

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ कङ्काल्यै नमः ।

ॐ कङ्कालाय नमः । ४०

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ कलिनाशनायै नमः ।

ॐ कलिनाशनाय नमः । ४१

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ कैलासवासिन्यै नमः ।

ॐ कैलासवासिने नमः । ४२

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ कामेश्यै नमः ।

ॐ कामेशाय नमः । ४३

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ कवये नमः ।

ॐ कवये नमः । ४४

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ कपटवर्जितायै नमः ।

ॐ कपटवर्जिताय नमः । ४५

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ कमनीयायै नमः ।

ॐ कमनीयाय नमः । ४६

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ कलानाथशेखरायै नमः ।

ॐ कलानाथशेखराय नमः । ४७

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ कम्बुकन्धरायै नमः ।

ॐ कम्बुकन्धराय नमः । ४८

ॐ कन्दर्पकोटिसदृशायै नमः ।

ॐ कन्दर्पकोटिसदृशाय नमः । ४९

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ कपर्दिन्यै नमः ।

ॐ कपर्दिने नमः । ५०

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ कमलाननायै नमः ।

ॐ कमलाननाय नमः । ५१

ॐ कराब्जधृतकालाग्नये नमः ।

ॐ कराब्जधृतकालाग्नये नमः । ५२

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ कदम्बकुसुमारुणायै नमः ।

ॐ कदम्बकुसुमारुणाय नमः । ५३

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ कमनीयनिजानन्दमुद्राञ्चितकराम्बुजायै नमः ।

ॐ कमनीयनिजानन्दमुद्राञ्चितकराम्बुजाय नमः । ५४

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ स्फुरड्डमरुनिध्वाननिर्जिताम्भोधिनिस्वनायै नमः ।

ॐ स्फुरड्डमरुनिध्वाननिर्जिताम्भोधिनिस्वनाय नमः । ५५

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ उद्दण्डताण्डवायै नमः ।

ॐ उद्दण्डताण्डवाय नमः । ५६

ॐ चण्डायै नमः ।

ॐ चण्डाय नमः । ५७

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ ऊर्ध्वताण्डवपण्डितायै नमः ।

ॐ ऊर्ध्वताण्डवपण्डिताय नमः । ५८

ॐ सव्यताण्डवसम्पन्नायै नमः ।

ॐ सव्यताण्डवसम्पन्नाय नमः । ५९

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ महाताण्डववैभवायै नमः ।

ॐ महाताण्डववैभवाय नमः । ६०

ॐ ब्रह्माण्डकाण्डविस्फोटमहाप्रलयताण्डवायै नमः ।

ॐ ब्रह्माण्डकाण्डविस्फोटमहाप्रलयताण्डवाय नमः । ६१

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ महोग्रताण्डवाभिज्ञायै नमः ।

ॐ महोग्रताण्डवाभिज्ञाय नमः । ६२

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ परिभ्रमणताण्डवायै नमः ।

ॐ परिभ्रमणताण्डवाय नमः । ६३

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ नन्दिनाट्यप्रियायै नमः ।

ॐ नन्दिनाट्यप्रियाय नमः । ६४

ॐ नन्दिन्यै नमः ।

ॐ नन्दिने नमः । ६५

ॐ नटेश्यै नमः ।

ॐ नटेशाय नमः । ६६

ॐ नटवेषभृते नमः ।

ॐ नटवेषभृते नमः । ६७

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ कालिकानाट्यरसिकायै नमः ।

ॐ कालिकानाट्यरसिकाय नमः । ६८

ॐ निशानटननिश्चलायै नमः ।

ॐ निशानटननिश्चलाय नमः । ६९

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ भृङ्गिनाट्यप्रमाणज्ञायै नमः ।

ॐ भृङ्गिनाट्यप्रमाणज्ञाय नमः । ७०

ॐ भ्रमरायितनाट्यकृते नमः ।

ॐ भ्रमरायितनाट्यकृते नमः । ७१

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ वियदादि जगत्स्रष्ट्रयै नमः ।

ॐ वियदादि जगत्स्रष्ट्रे नमः । ७२

ॐ विविधानन्ददायकायै नमः ।

ॐ विविधानन्ददायकाय नमः । ७३

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ विकाररहितायै नमः ।

ॐ विकाररहिताय नमः । ७४

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ वैष्णव्यै नमः ।

ॐ विष्णवे नमः । ७५

ॐ विराडीशायै नमः ।

ॐ विराडीशाय नमः । ७६

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ विराण्मयायै नमः ।

ॐ विराण्मयाय नमः । ७७

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ विराढ्हृदयपद्मस्थायै नमः ।

ॐ विराढ्हृदयपद्मस्थाय नमः । ७८

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ विधये नमः ।

ॐ विधये नमः । ७९

ॐ विश्वाधिकायै नमः ।

ॐ विश्वाधिकाय नमः । ८०

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ विभवे नमः ।

ॐ विभवे नमः । ८१

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ वीरभद्रायै नमः ।

ॐ वीरभद्राय नमः । ८२

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ विशालाक्ष्यै नमः ।

ॐ विशालाक्षाय नमः । ८३

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ विष्णुबाणायै नमः ।

ॐ विष्णुबाणाय नमः । ८४

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ विशाम्पत्यै नमः ।

ॐ विशाम्पतये नमः । ८५

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ विद्यानिधये नमः ।

ॐ विद्यानिधये नमः । ८६

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ विरूपाक्ष्यै नमः ।

ॐ विरूपाक्षाय नमः । ८७

ॐ विश्वयोनये नमः ।

ॐ विश्वयोनये नमः । ८८

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ वृषध्वजायै नमः ।

ॐ वृषध्वजाय नमः । ८९

ॐ विरूपायै नमः ।

ॐ विरूपाय नमः । ९०

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ विश्वदिग्व्यापिन्यै नमः ।

ॐ विश्वदिग्व्यापिने नमः । ९१

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ वीतशोकायै नमः ।

ॐ वीतशोकाय नमः । ९२

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ विरोचनायै नमः ।

ॐ विरोचनाय नमः । ९३

ॐ व्योमकेश्यै नमः ।

ॐ व्योमकेशाय नमः । ९४

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ व्योममूर्तये नमः ।

ॐ व्योममूर्तये नमः । ९५

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ व्योमाकारायै नमः ।

ॐ व्योमाकाराय नमः । ९६

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ अव्ययाकृतये नमः ।

ॐ अव्ययाकृतये नमः । ९७

ॐ व्याघ्रपादप्रियायै नमः ।

ॐ व्याघ्रपादप्रियाय नमः । ९८

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ व्याघ्रचर्मधृते नमः ।

ॐ व्याघ्रचर्मधृते नमः । ९९

ॐ व्याधिनाशनायै नमः ।

ॐ व्याधिनाशनाय नमः । १०० ।

ॐ व्याकृतायै नमः ।

ॐ व्याकृताय नमः । १०१

ॐ व्यापृतायै नमः ।

ॐ व्यापृताय नमः । १०२

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ व्यापिन्यै नमः ।

ॐ व्यापिने नमः । १०३

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ व्याप्यसाक्षिण्यै नमः ।

ॐ व्याप्यसाक्षिणे नमः । १०४

ॐ विशारदायै नमः ।

ॐ विशारदाय नमः । १०५

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ व्यामोहनाशन्यै नमः ।

ॐ व्यामोहनाशनाय नमः । १०६

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ व्यासायै नमः ।

ॐ व्यासाय नमः । १०७

ॐ व्याख्यामुद्रालसत्करायै नमः ।

ॐ व्याख्यामुद्रालसत्कराय नमः । १०८

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ वरदायै नमः ।

ॐ वरदाय नमः । १०९

ॐ वामनायै नमः ।

ॐ वामनाय नमः । ११०

ॐ वन्द्यायै नमः ।

ॐ वन्द्याय नमः । १११

ॐ वरिष्ठायै नमः ।

ॐ वरिष्ठाय नमः । ११२

ॐ वज्रवर्मभृते नमः ।

ॐ वज्रवर्मभृते नमः । ११३

ॐ वेदवेद्यायै नमः ।

ॐ वेदवेद्याय नमः । ११४

ॐ वेदरूपायै नमः ।

ॐ वेदरूपाय नमः । ११५

ॐ वेदवेदान्तवित्तमायै नमः ।

ॐ वेदवेदान्तवित्तमाय नमः । ११६

ॐ वेदार्थविदे नमः ।

ॐ वेदार्थविदे नमः । ११७

ॐ वेदयोन्यै नमः ।

ॐ वेदयोनये नमः । ११८

ॐ वेदाङ्गायै नमः ।

ॐ वेदाङ्गाय नमः । ११९

ॐ वेदसंस्तुतायै नमः ।

ॐ वेदसंस्तुताय नमः । १२०

ॐ वैकुण्ठवल्लभायै नमः ।

ॐ वैकुण्ठवल्लभाय नमः । १२१

ॐ अवर्ष्यायै नमः ।

ॐ अवर्ष्याय नमः । १२२

ॐ वैश्वानरविलोचनायै नमः ।

ॐ वैश्वानरविलोचनाय नमः । १२३

ॐ समस्तभुवनव्यपिन्यै नमः ।

ॐ समस्तभुवनव्यपिने नमः । १२४

ॐ समृद्धये नमः ।

ॐ समृद्धये नमः । १२५

ॐ सततोदितायै नमः ।

ॐ सततोदिताय नमः । १२६

ॐ सूक्ष्मात्सूक्ष्मतरायै नमः ।

ॐ सूक्ष्मात्सूक्ष्मतराय नमः । १२७

ॐ सूर्यायै नमः ।

ॐ सूर्याय नमः । ११८

ॐ सूक्ष्मस्थूलत्ववर्जितायै नमः ।

ॐ सूक्ष्मस्थूलत्ववर्जिताय नमः । १२९

ॐ जह्नुकन्याधरायै नमः ।

ॐ जह्नुकन्याधराय नमः । १३०

ॐ जन्मजरामृत्युनिवारकायै नमः ।

ॐ जन्मजरामृत्युनिवारकाय नमः । १३१

ॐ शूरसेनायै नमः ।

ॐ शूरसेनाय नमः । १३२

ॐ शुभाकारायै नमः ।

ॐ शुभाकाराय नमः । १३३

ॐ शुभ्रमूर्तये नमः ।

ॐ शुभ्रमूर्तये नमः । १३४

ॐ शुचिस्मितायै नमः ।

ॐ शुचिस्मिताय नमः । १३५

ॐ अनर्धरत्नखचितकिरीटायै नमः ।

ॐ अनर्धरत्नखचितकिरीटाय नमः । १३६

ॐ निकटेस्थितायै नमः ।

ॐ निकटेस्थिताय नमः । १३७

ॐ सुधारूपायै नमः ।

ॐ सुधारूपाय नमः । १३८

ॐ सुराध्यक्षायै नमः ।

ॐ सुराध्यक्षाय नमः । १३९

ॐ सुभ्रुवे नमः ।

ॐ सुभ्रुवे नमः । १४०

ॐ सुखघनायै नमः ।

ॐ सुखघनाय नमः । १४१

ॐ सुधियै नमः ।

ॐ सुधिये नमः । १४२

ॐ भद्रायै नमः ।

ॐ भद्राय नमः । १४३

ॐ भद्रप्रदायै नमः ।

ॐ भद्रप्रदाय नमः । १४४

ॐ भद्रवाहनायै नमः ।

ॐ भद्रवाहनाय नमः । १४५

ॐ भक्तवत्सलायै नमः ।

ॐ भक्तवत्सलाय नमः । १४६

ॐ भगनेत्रहरायै नमः ।

ॐ भगनेत्रहराय नमः । १४७

ॐ भर्गायै नमः ।

ॐ भर्गाय नमः । १४८

ॐ भवघ्नायै नमः ।

ॐ भवघ्नाय नमः । १४९

ॐ भक्तिमन्निधये नमः ।

ॐ भक्तिमन्निधये नमः । १५०

ॐ अरुणायै नमः ।

ॐ अरुणाय नमः । १५१

ॐ शरणायै नमः ।

ॐ शरणाय नमः । १५२

ॐ शर्वायै नमः ।

ॐ शर्वाय नमः । १५३

ॐ शरण्यायै नमः ।

ॐ शरण्याय नमः । १५४

ॐ शर्मदायै नमः ।

ॐ शर्मदाय नमः । १५५

ॐ शिवायै नमः ।

ॐ शिवाय नमः । १५६

ॐ पवित्रायै नमः ।

ॐ पवित्राय नमः । १५७

ॐ परमोदारायै नमः ।

ॐ परमोदाराय नमः । १५८

ॐ परमापन्निवारकायै नमः ।

ॐ परमापन्निवारकाय नमः । १५९

ॐ सनातनायै नमः ।

ॐ सनातनाय नमः । १६०

ॐ समायै नमः ।

ॐ समाय नमः । १६१

ॐ सत्यायै नमः ।

ॐ सत्याय नमः । १६२

ॐ सत्यवादिन्यै नमः ।

ॐ सत्यवादिने नमः । १६३

ॐ समृद्धिदायै नमः ।

ॐ समृद्धिदाय नमः । १६४

ॐ धन्विन्यै नमः ।

ॐ धन्विने नमः । १६५

ॐ धनाधिपायै नमः ।

ॐ धनाधिपाय नमः । १६६

ॐ धन्यायै नमः ।

ॐ धन्याय नमः । १६७

ॐ धर्मगोप्त्रयै नमः ।

ॐ धर्मगोप्त्रे नमः । १६८

ॐ धराधिपायै नमः ।

ॐ धराधिपाय नमः । १६९

ॐ तरुण्यै नमः ।

ॐ तरुणाय नमः । १७०

ॐ तारकायै नमः ।

ॐ तारकाय नमः । १७१

ॐ ताम्रायै नमः ।

ॐ ताम्राय नमः । १७२

ॐ तरिष्णवे नमः ।

ॐ तरिष्णवे नमः । १७३

ॐ तत्वबोधकायै नमः ।

ॐ तत्वबोधकाय नमः । १७४

ॐ राजराजेश्वर्यै नमः ।

ॐ राजराजेश्वराय नमः । १७५

ॐ रम्यायै नमः ।

ॐ रम्याय नमः । १७६

ॐ रात्रिञ्चरविनाशनायै नमः ।

ॐ रात्रिञ्चरविनाशनाय नमः । १७७

ॐ गह्वरेष्ठायै नमः ।

ॐ गह्वरेष्ठाय नमः । १७८

ॐ गणाधीशायै नमः ।

ॐ गणाधीशाय नमः । १७९

ॐ गणेशायै नमः ।

ॐ गणेशाय नमः । १८०

ॐ गतिवर्जितायै नमः ।

ॐ गतिवर्जिताय नमः । १८१

ॐ पतञ्जलिप्राणनाथायै नमः ।

ॐ पतञ्जलिप्राणनाथाय नमः । १८२

ॐ परापरविवर्जितायै नमः ।

ॐ परापरविवर्जिताय नमः । १८३

ॐ परमात्मिकायै नमः ।

ॐ परमात्मने नमः । १८४

ॐ परञ्ज्योतिषे नमः ।

ॐ परञ्ज्योतिषे नमः । १८५

ॐ परमेष्ठिन्यै नमः ।

ॐ परमेष्ठिने नमः । १८६

ॐ परात्परायै नमः ।

ॐ परात्पराय नमः । १८७

ॐ नारसिंह्यै नमः ।

ॐ नारसिंहाय नमः । १८८

ॐ नगाध्यक्षायै नमः ।

ॐ नगाध्यक्षाय नमः । १८९

ॐ नादान्तायै नमः ।

ॐ नादान्ताय नमः । १९०

ॐ नादवर्जितायै नमः ।

ॐ नादवर्जिताय नमः । १९१

ॐ नमदानन्ददायै नमः ।

ॐ नमदानन्ददाय नमः । १९२

ॐ नम्यायै नमः ।

ॐ नम्याय नमः । १९३

ॐ नगराजनिकेतनायै नमः ।

ॐ नगराजनिकेतनाय नमः । १९४

ॐ दैव्यायै नमः ।

ॐ दैव्याय नमः । १९५

ॐ भिषजे नमः ।

ॐ भिषजे नमः । १९६

ॐ प्रमाणज्ञायै नमः ।

ॐ प्रमाणज्ञाय नमः । १९७

ॐ ब्रह्मण्यायै नमः ।

ॐ ब्रह्मण्याय नमः । १९८

ॐ ब्राह्मणात्मिकायै नमः ।

ॐ ब्राह्मणात्मिकाय नमः । १९९

ॐ कृताकृतायै नमः ।

ॐ कृताकृताय नमः । २०० ।

ॐ कृशायै नमः ।

ॐ कृशाय नमः । २०१

ॐ कृष्णायै नमः ।

ॐ कृष्णाय नमः । २०१

ॐ शान्तिदायै नमः ।

ॐ शान्तिदाय नमः । १०३

ॐ शरभाकृतये नमः ।

ॐ शरभाकृतये नमः । २०४

ॐ ब्रह्मविद्याप्रदायै नमः ।

ॐ ब्रह्मविद्याप्रदाय नमः । २०५

ॐ ब्रह्मणे नमः ।

ॐ ब्रह्मणे नमः । २०६

ॐ बृहद्गर्भायै नमः ।

ॐ बृहद्गर्भाय नमः । २०७

ॐ बृहस्पतये नमः ।

ॐ बृहस्पतये नमः । २०८

ॐ सद्योजातायै नमः ।

ॐ सद्योजाताय नमः । २०९

ॐ सदाराध्यायै नमः ।

ॐ सदाराध्याय नमः । २१०

ॐ सामगायै नमः ।

ॐ सामगाय नमः । २११

ॐ सामसंस्तुतायै नमः ।

ॐ सामसंस्तुताय नमः । २१२

ॐ अघोरायै नमः ।

ॐ अघोराय नमः । २१३

ॐ अद्भुतचारित्रायै नमः ।

ॐ अद्भुतचारित्राय नमः । २१४

ॐ आनन्दवपुषे नमः ।

ॐ आनन्दवपुषे नमः । २१५

ॐ अग्रण्यै नमः ।

ॐ अग्रण्ये नमः । २१६

ॐ सर्वविद्यानामीशानायै नमः ।

ॐ सर्वविद्यानामीशानाय नमः । २१७

ॐ ईश्वराणामधीश्वरायै नमः ।

ॐ ईश्वराणामधीश्वराय नमः । २१८

ॐ सर्वार्थायै नमः ।

ॐ सर्वार्थाय नमः । २१९

ॐ सर्वदातुष्टायै नमः ।

ॐ सर्वदातुष्टाय नमः । २१०

ॐ सर्वशास्त्रार्थसम्मतायै नमः ।

ॐ सर्वशास्त्रार्थसम्मताय नमः । २२१

ॐ सर्वज्ञायै नमः ।

ॐ सर्वज्ञाय नमः । २२२

ॐ सर्वदायै नमः ।

ॐ सर्वदाय नमः । २२३

ॐ स्थाणवे नमः ।

ॐ स्थाणवे नमः । २२४

ॐ सर्वेश्यै नमः ।

ॐ सर्वेशाय नमः । २२५

ॐ समरप्रियायै नमः ।

ॐ समरप्रियाय नमः । २२६

ॐ जनार्दनायै नमः ।

ॐ जनार्दनाय नमः । २२७

ॐ जगत्स्वामिन्यै नमः ।

ॐ जगत्स्वामिने नमः । २२८

ॐ जन्मकर्मनिवारकायै नमः ।

ॐ जन्मकर्मनिवारकाय नमः । २२९

ॐ मोचकायै नमः ।

ॐ मोचकाय नमः । २३०

ॐ मोहविच्छेत्र्यै नमः ।

ॐ मोहविच्छेत्रे नमः । २३१

ॐ मोदनीयायै नमः ।

ॐ मोदनीयाय नमः । २३२

ॐ महाप्रभवे नमः ।

ॐ महाप्रभवे नमः । २३३

ॐ व्युप्तकेश्यै नमः ।

ॐ व्युप्तकेशाय नमः । २३४

ॐ विविशदायै नमः ।

ॐ विविशदाय नमः । २३५

ॐ विष्वक्सेनायै नमः ।

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ॐ विष्वक्सेनाय नमः । २३६

ॐ विशोधकायै नमः ।

ॐ विशोधकाय नमः । २३७

ॐ सहस्राक्ष्यै नमः ।

ॐ सहस्राक्षाय नमः । २३८

ॐ सहस्राङ्घ्रये नमः ।

ॐ सहस्राङ्घ्रये नमः । २३९

ॐ सहस्रवदनाम्बुजायै नमः ।

ॐ सहस्रवदनाम्बुजाय नमः । २४०

ॐ सहस्राक्षार्चितायै नमः ।

ॐ सहस्राक्षार्चिताय नमः । २४१

ॐ सम्राज्ञ्यै नमः ।

ॐ सम्राजे नमः । २४२

ॐ सन्धात्र्यै नमः ।

ॐ सन्धात्रे नमः । २४३

ॐ सम्पदालयायै नमः ।

ॐ सम्पदालयाय नमः । २४४

ॐ बभ्रुवे नमः ।

ॐ बभ्रुवे नमः । २४५

ॐ बहुविधाकारायै नमः ।

ॐ बहुविधाकाराय नमः । २४६

ॐ बलप्रमथन्यै नमः ।

ॐ बलप्रमथनाय नमः । २४७

ॐ बलिन्यै नमः ।

ॐ बलिने नमः । २४८

ॐ मनोभर्त्र्यै नमः ।

ॐ मनोभर्त्रे नमः । २४९

ॐ मनोगम्यायै नमः ।

ॐ मनोगम्याय नमः । २५०

ॐ मननैकपरायणायै नमः ।

ॐ मननैकपरायणाय नमः । २५१

ॐ उदासीनायै नमः ।

ॐ उदासीनाय नमः । २५२

ॐ उपद्रष्ट्रयै नमः ।

ॐ उपद्रष्ट्रे नमः । २५३

ॐ मौनगम्यायै नमः ।

ॐ मौनगम्याय नमः । २५४

ॐ मुनीश्वर्यै नमः ।

ॐ मुनीश्वराय नमः । २५५

ॐ अमानिन्यै नमः ।

ॐ अमानिने नमः । २५६

ॐ मदन्यै नमः ।

ॐ मदनाय नमः । २५७

ॐ अमन्यवे नमः ।

ॐ अमन्यवे नमः । २५८

ॐ अमानायै नमः ।

ॐ अमानाय नमः । २५९

ॐ मानदायै नमः ।

ॐ मानदाय नमः । २६०

ॐ मनवे नमः ।

ॐ मनवे नमः । २६१

ॐ यशस्विन्यै नमः ।

ॐ यशस्विने नमः । २६२

ॐ यजमानात्मिकायै नमः ।

ॐ यजमानात्मने नमः । २६३

ॐ यज्ञभुजे नमः ।

ॐ यज्ञभुजे नमः । २६४

ॐ यजनप्रियायै नमः ।

ॐ यजनप्रियाय नमः । २६५

ॐ मीडुष्टमायै नमः ।

ॐ मीडुष्टमाय नमः । २६६

ॐ मृगधरायै नमः ।

ॐ मृगधराय नमः । २६७

ॐ मृकण्डुतनयप्रियायै नमः ।

ॐ मृकण्डुतनयप्रियाय नमः । २६८

ॐ पुरुहूतायै नमः ।

ॐ पुरुहूताय नमः । २६९

ॐ पुरद्वेषिण्यै नमः ।

ॐ पुरद्वेषिणे नमः । २७०

ॐ पुरत्रयविहारवत्यै नमः ।

ॐ पुरत्रयविहारवते नमः । २७१

ॐ पुण्यायै नमः ।

ॐ पुण्याय नमः । २७२

ॐ पुंसे नमः ।

ॐ पुंसे नमः । २७३

ओ पुरिशयायै नमः ।

ॐ पुरिशयाय नमः । २७४

ॐ पूष्ण्यै नमः ।

ॐ पूष्णे नमः । २७५

ॐ पूर्णायै नमः ।

ॐ पूर्णाय नमः । २७६

ॐ पुरातनायै नमः ।

ॐ पुरातनाय नमः । २७७

ॐ शयानायै नमः ।

ॐ शयानाय नमः । २७८

ॐ शन्तमायै नमः ।

ॐ शन्तमाय नमः । २७९

ॐ शान्तायै नमः ।

ॐ शान्ताय नमः । २८०

ॐ शासकायै नमः ।

ॐ शासकाय नमः । २८१

ॐ श्यामलाप्रियायै नमः ।

ॐ श्यामलाप्रियाय नमः । २८२

ॐ भावज्ञायै नमः ।

ॐ भावज्ञाय नमः । २८३

ॐ बन्धविच्छेत्र्यै नमः ।

ॐ बन्धविच्छेत्रे नमः । २८४

ॐ भावातीतायै नमः ।

ॐ भावातीताय नमः । २८५

ॐ अभयङ्कर्यै नमः ।

ॐ अभयङ्कराय नमः । २८६

ॐ मनीषिण्यै नमः ।

ॐ मनीषिणे नमः । २८७

ॐ मनुजाधीशायै नमः ।

ॐ मनुजाधीशाय नमः । २८८

ॐ मिथ्याप्रत्ययनाशिन्यै नमः ।

ॐ मिथ्याप्रत्ययनाशिनाय नमः । २८९

ॐ निरञ्जनायै नमः ।

ॐ निरञ्जनाय नमः । २९०

ॐ नित्यशुद्धायै नमः ।

ॐ नित्यशुद्धाय नमः । २९१

ॐ नित्यबुद्धायै नमः ।

ॐ नित्यबुद्धाय नमः । २९२

ॐ निराश्रयायै नमः ।

ॐ निराश्रयाय नमः । २९३

ॐ निर्विकल्पायै नमः ।

ॐ निर्विकल्पाय नमः । २९४

ॐ निरालम्बायै नमः ।

ॐ निरालम्बाय नमः । २९५

ॐ निर्विकारायै नमः ।

ॐ निर्विकाराय नमः । २९६

ॐ निरामयायै नमः ।

ॐ निरामयाय नमः । २९७

ॐ निरङ्कुशायै नमः ।

ॐ निरङ्कुशाय नमः । २९८

ॐ निराधारायै नमः ।

ॐ निराधाराय नमः । २९९

ॐ निरपायायै नमः ।

ॐ निरपायाय नमः । ३०० ।

ॐ निरत्ययायै नमः ।

ॐ निरत्ययाय नमः । ३०१

ॐ गुहाशयायै नमः ।

ॐ गुहाशयाय नमः । ३०२

ॐ गुणातीतायै नमः ।

ॐ गुणातीताय नमः । ३०३

ॐ गुरुमूर्त्यै नमः ।

ॐ गुरुमूर्तये नमः । ३०४

ॐ गुहप्रियायै नमः ।

ॐ गुहप्रियाय नमः । ३०५

ॐ प्रमाणायै नमः ।

ॐ प्रमाणाय नमः । ३०६

ॐ प्रणवायै नमः ।

ॐ प्रणवाय नमः । ३०७

ॐ प्राज्ञायै नमः ।

ॐ प्राज्ञाय नमः । ३०८

ॐ प्राणदायै नमः ।

ॐ प्राणदाय नमः । ३०९

ॐ प्राणनायिकायै नमः ।

ॐ प्राणनायिकाय नमः । ३१०

ॐ सूत्रात्मिकायै नमः ।

ॐ सूत्रात्मने नमः । ३११

ॐ सुलभायै नमः ।

ॐ सुलभाय नमः । ३१२

ॐ स्वच्छायै नमः ।

ॐ स्वच्छाय नमः । ३१३

ॐ सूदरायै नमः ।

ॐ सूदराय नमः । ३१४

ॐ सुन्दराननायै नमः ।

ॐ सुन्दराननाय नमः । ३१५

ॐ कपालमालालङ्कारायै नमः ।

ॐ कपालमालालङ्काराय नमः । ३१६

ॐ कालान्तकवपुर्धरायै नमः ।

ॐ कालान्तकवपुर्धराय नमः । ३१७

ॐ दुराराध्यायै नमः ।

ॐ दुराराध्याय नमः । ३१८

ॐ दुराधर्षायै नमः ।

ॐ दुराधर्षाय नमः । ३१९

ॐ दुष्टदूरायै नमः ।

ॐ दुष्टदूराय नमः । ३२०

ॐ दुरासदायै नमः ।

ॐ दुरासदाय नमः । ३२१

ॐ दुर्विज्ञेयायै नमः ।

ॐ दुर्विज्ञेयाय नमः । ३२२

ॐ दुराचारनाशिन्यै नमः ।

ॐ दुराचारनाशनाय नमः । ३२३

ॐ दुर्मदान्तक्यै नमः ।

ॐ दुर्मदान्तकाय नमः । ३२४

ॐ सर्वेश्वर्यै नमः ।

ॐ सर्वेश्वराय नमः । ३२५

ॐ सर्वसाक्षिण्यै नमः ।

ॐ सर्वसाक्षिणे नमः । ३२६

ॐ सर्वात्मिकायै नमः ।

ॐ सर्वात्मने नमः । ३२७

ॐ साक्षिवर्जितायै नमः ।

ॐ साक्षिवर्जिताय नमः । ३२८

ॐ सर्वद्वन्द्वक्षयकर्यै नमः ।

ॐ सर्वद्वन्द्वक्षयकराय नमः । ३२९

ॐ सर्वापद्विनिवारकायै नमः ।

ॐ सर्वापद्विनिवारकाय नमः । ३३०

ॐ सर्वप्रियतमायै नमः ।

ॐ सर्वप्रियतमाय नमः । ३३१

ॐ सर्वदारिद्रयक्लेशनाशिन्यै नमः ।

ॐ सर्वदारिद्रयक्लेशनाशनाय नमः । ३३२

ॐ द्रष्ट्रयै नमः ।

ॐ द्रष्ट्रे नमः । ३३३

ॐ दर्शयित्र्यै नमः ।

ॐ दर्शयित्रे नमः । ३३४

ॐ दान्तायै नमः ।

ॐ दान्ताय नमः । ३३५

ॐ दक्षिणामूर्तिरूपभृते नमः ।

ॐ दक्षिणामूर्तिरूपभृते नमः । ३३६

ॐ दक्षाध्वरहरायै नमः ।

ॐ दक्षाध्वरहराय नमः । ३३७

ॐ दक्षायै नमः ।

ॐ दक्षाय नमः । ३३८

ॐ दहरस्थायै नमः ।

ॐ दहरस्थाय नमः । ३३९

ॐ दयानिधये नमः ।

ॐ दयानिधये नमः । ३४०

ॐ समदृष्टयै नमः ।

ॐ समदृष्टये नमः । ३४१

ॐ सत्यकामायै नमः ।

ॐ सत्यकामाय नमः । ३४२

ॐ सनकादिमुनिस्तुतायै नमः ।

ॐ सनकादिमुनिस्तुताय नमः । ३४३

ॐ पत्ये नमः ।

ॐ पत्ये नमः । ३४४

ॐ पञ्चत्वनिर्मुक्तायै नमः ।

ॐ पञ्चत्वनिर्मुक्ताय नमः । ३४५

ॐ पञ्चकृत्यपरायणायै नमः ।

ॐ पञ्चकृत्यपरायणाय नमः । ३४६

ॐ पञ्चयज्ञप्रियायै नमः ।

ॐ पञ्चयज्ञप्रियाय नमः । ३४७

ॐ पञ्चप्राणाधिपतये नमः ।

ॐ पञ्चप्राणाधिपतये नमः । ३४८

ॐ अव्ययायै नमः ।

ॐ अव्ययाय नमः । ३४९

ॐ पञ्चभूतप्रभवे नमः ।

ॐ पञ्चभूतप्रभवे नमः । ३५०

ॐ पञ्चपूजासन्तुष्टमानसायै नमः ।

ॐ पञ्चपूजासन्तुष्टमानसाय नमः । ३५१

ॐ विघ्नेश्वर्यै नमः ।

ॐ विघ्नेश्वराय नमः । ३५२

ॐ विघ्नहन्त्र्यै नमः ।

ॐ विघ्नहन्त्रे नमः । ३५३

ॐ शक्तिपाणये नमः ।

ॐ शक्तिपाणये नमः । ३५४

ॐ शरोद्भवायै नमः ।

ॐ शरोद्भवाय नमः । ३५५

ॐ गूढायै नमः ।

ॐ गूढाय नमः । ३५६

ॐ गुह्यतमायै नमः ।

ॐ गुह्यतमाय नमः । ३५७

ॐ गोप्यायै नमः ।

ॐ गोप्याय नमः । ३५८

ॐ गोरक्षिगणसेवितायै नमः ।

ॐ गोरक्षिगणसेविताय नमः । ३५९

ॐ सुव्रतायै नमः ।

ॐ सुव्रताय नमः । ३६०

ॐ सत्यसङ्कल्पायै नमः ।

ॐ सत्यसङ्कल्पाय नमः । ३६१

ॐ स्वसंवेद्यायै नमः ।

ॐ स्वसंवेद्याय नमः । ३६२

ॐ सुखावहायै नमः ।

ॐ सुखावहाय नमः । ३६३

ॐ योगगम्यायै नमः ।

ॐ योगगम्याय नमः । ३६४

ॐ योगनिष्ठायै नमः ।

ॐ योगनिष्ठाय नमः । ३६५

ॐ योगानन्दायै नमः ।

ॐ योगानन्दाय नमः । ३६६

ॐ युधिष्ठिरायै नमः ।

ॐ युधिष्ठिराय नमः । ३६७

ॐ तत्वावबोधायै नमः ।

ॐ तत्वावबोधाय नमः । ३६८

ॐ तत्वेश्यै नमः ।

ॐ तत्वेशाय नमः । ३६९

ॐ तत्वभावायै नमः ।

ॐ तत्वभावाय नमः । ३७०

ॐ तपोनिधये नमः ।

ॐ तपोनिधये नमः । ३७१

ॐ अक्षरायै नमः ।

ॐ अक्षराय नमः । ३७२

ॐ त्र्यक्षर्यै नमः ।

ॐ त्र्यक्षराय नमः । ३७३

ॐ त्र्यक्षायै नमः ।

ॐ त्र्यक्षाय नमः । ३७४

ॐ पक्षपातविवर्जितायै नमः ।

ॐ पक्षपातविवर्जिताय नमः । ३७५

ॐ माणिभद्रार्चितायै नमः ।

ॐ माणिभद्रार्चिताय नमः । ३७६

ॐ मान्यायै नमः ।

ॐ मान्याय नमः । ३७७

ॐ मायाविन्यै नमः ।

ॐ मायाविने नमः । ३७८

ॐ मान्त्रिकायै नमः ।

ॐ मान्त्रिकाय नमः । ३७९

ॐ महत्यै नमः ।

ॐ महते नमः । ३८०

ॐ कुठारभृते नमः ।

ॐ कुठारभृते नमः । ३८१

ॐ कुलाद्रीशायै नमः ।

ॐ कुलाद्रीशाय नमः । ३८२

ॐ कुञ्चितैकपदाम्बुजायै नमः ।

ॐ कुञ्चितैकपदाम्बुजाय नमः । ३८३

ॐ यक्षराज्ञ्यै नमः ।

ॐ यक्षराजे नमः । ३८४

ॐ यक्षफलदायै नमः ।

ॐ यक्षफलदाय नमः । ३८५

ॐ यज्ञमूर्तये नमः ।

ॐ यज्ञमूर्तये नमः । ३८६

ॐ यशस्कर्यै नमः ।

ॐ यशस्कराय नमः । ३८७

ॐ सिद्धेश्यै नमः ।

ॐ लिद्धेशाय नमः । ३८८

ॐ सिद्धजनकायै नमः ।

ॐ सिद्धजनकाय नमः । ३८९

ॐ सिद्धान्तायै नमः ।

ॐ सिद्धान्ताय नमः । ३९०

ॐ सिद्धवैभवायै नमः ।

ॐ सिद्धवैभवाय नमः । ३९१

ॐ रविमण्डलमध्यस्थायै नमः ।

ॐ रविमण्डलमध्यस्थाय नमः । ३९२

ॐ रजोगुणविवर्जितायै नमः ।

ॐ रजोगुणविवर्जिताय नमः । ३९३

ॐ वह्निमण्डलमध्यस्थायै नमः ।

ॐ वह्निमण्डलमध्यस्थाय नमः । ३९४

ॐ वर्षीयस्यै नमः ।

ॐ वर्षीयसे नमः । ३९५

ॐ वरुणेश्वर्यै नमः ।

ॐ वरुणेश्वराय नमः । ३९६

ॐ सोममण्डलमध्यस्थायै नमः ।

ॐ सोममण्डलमध्यस्थाय नमः । ३९७

ॐ सोमायै नमः ।

ॐ सोमाय नमः । ३९८

ॐ सौम्यायै नमः ।

ॐ सौम्याय नमः । ३९९

ॐ सुहृदे नमः ।

ॐ सूहृदे नमः । ४०० ।

ॐ वरायै नमः ।

ॐ वराय नमः । ४०१

ॐ दक्षिणाग्नये नमः ।

ॐ दक्षिणाग्नये नमः । ४०२

ॐ गार्हपत्यायै नमः ।

ॐ गार्हपत्याय नमः । ४०३

ॐ दमनायै नमः ।

ॐ दमनाय नमः । ४०४

ॐ दानवान्तक्यै नमः ।

ॐ दानवान्तकाय नमः । ४०५

ॐ चतुर्वक्त्रायै नमः ।

ॐ चतुर्वक्त्राय नमः । ४०६

ॐ चक्रधरायै नमः ।

ॐ चक्रधराय नमः । ४०७

ॐ पञ्चवक्त्रायै नमः ।

ॐ पच्चवक्त्राय नमः । ४०८

ॐ परन्तपायै नमः ।

ॐ परन्तपाय नमः । ४०९

ॐ विश्वस्यायतनायै नमः ।

ॐ विश्वस्यायतनाय नमः । ४१०

ॐ वर्यायै नमः ।

ॐ वर्याय नमः । ४११

ॐ वन्दारुजनवत्सलायै नमः ।

ॐ वन्दारुजनवत्सलाय नमः । ४११

ॐ गायत्रीवल्लभायै नमः ।

ॐ गायत्रीवल्लभाय नमः । ४१३

ॐ गार्ग्यायै नमः ।

ॐ गार्ग्याय नमः । ४१४

ॐ गायकानुग्रहोन्मुखायै नमः ।

ॐ गायकानुग्रहोन्मुखाय नमः । ४१५

ॐ अनन्तरूपायै नमः ।

ॐ अनन्तरूपाय नमः । ४१६

ॐ एकात्मिकायै नमः ।

ॐ एकात्मने नमः । ४१७

ॐ स्वस्तरवे नमः ।

ॐ स्वस्तरवे नमः । ४१८

ॐ व्याहृत्यै नमः ।

ॐ व्याहृतये नमः । ४१९

ॐ स्वधा नमः ।

ॐ स्वधा नमः । ४२०

ॐ स्वाहा नमः ।

ॐ स्वाहा नमः । ४२१

ॐ अरूपायै नमः ।

ॐ अरुपाय नमः । ४२२

ॐ वसुमनसे नमः ।

ॐ वसुमनसे नमः । ४२३

ॐ वटुकायै नमः ।

ॐ वटुकाय नमः । ४२४

ॐ क्षेत्रपालकायै नमः ।

ॐ क्षेत्रपालकाय नमः । ४२५

ॐ श्राव्यायै नमः ।

ॐ श्राव्याय नमः । ४२६

ॐ शत्रुहरायै नमः ।

ॐ शत्रुहराय नमः । ४२७

ॐ शूलिन्यै नमः ।

ॐ शूलिने नमः । ४२८

ॐ श्रुतिस्मृतिविधायकायै नमः ।

ॐ श्रुतिस्मृतिविधायकाय नमः । ४२९

ॐ अप्रमेयायै नमः ।

ॐ अप्रमेयाय नमः । ४३०

ॐ अप्रतिस्थायै नमः ।

ॐ अप्रतिस्थाय नमः । ४३१

ॐ प्रद्युम्नायै नमः ।

ॐ प्रद्युम्नाय नमः । ४३२

ॐ प्रमथेश्वर्यै नमः ।

ॐ प्रमथेश्वराय नमः । ४३३

ॐ अनुत्तमायै नमः ।

ॐ अनुत्तमाय नमः । ४३४

ॐ अनुदासीनायै नमः ।

ॐ अनुदासीनाय नमः । ४३५

ॐ मुक्तिदायै नमः ।

ॐ मुक्तिदाय नमः । ४३६

ॐ मुदिताननायै नमः ।

ॐ मुदिताननाय नमः । ४३७

ॐ ऊर्ध्व रेतसे नमः ।

ॐ ऊर्ध्व रेतसे नमः । ४३८

ॐ ऊर्ध्वपादायै नमः ।

ॐ ऊर्ध्वपादाय नमः । ४३९

ॐ प्रौढनर्तनलम्पटायै नमः ।

ॐ प्रौढनर्तनलम्पटाय नमः । ४४०

ॐ महामायायै नमः ।

ॐ महामायाय नमः । ४४१

ॐ महाग्रासायै नमः ।

ॐ महाग्रासाय नमः । ४४२

ॐ महावीर्यायै नमः ।

ॐ महावीर्याय नमः । ४४३

ॐ महाभुजायै नमः ।

ॐ महाभुजाय नमः । ४४४

ॐ महानन्दायै नमः ।

ॐ महानन्दाय नमः । ४४५

ॐ महास्कन्धायै नमः ।

ॐ महास्कन्धाय नमः । ४४६

ॐ महेन्द्रायै नमः ।

ॐ महेन्द्राय नमः । ४४७

ॐ महसान्निधये नमः ।

ॐ महसान्निधये नमः । ४४८

ॐ भ्राजिष्णवे नमः ।

ॐ भ्राजिष्णवे नमः । ४४९

ॐ भावनागम्यायै नमः ।

ॐ भावनागम्याय नमः । ४५०

ॐ भ्रान्तिज्ञानविनाशिन्यै नमः ।

ॐ भ्रान्तिज्ञानविनाशनाय नमः । ४५१

ॐ महर्ध्यै नमः ।

ॐ महर्धये नमः । ४५२

ॐ महिमाधारायै नमः ।

ॐ महिमाधाराय नमः । ४५३

ॐ महासेनगुरवे नमः ।

ॐ महासेनगुरवे नमः । ४५४

ॐ महसे नमः ।

ॐ महसे नमः । ४५५

ॐ सर्वद्टशे नमः ।

ॐ सर्वद्टशे नमः । ४५६

ॐ सर्वभृते नमः ।

ॐ सर्वभृते नमः । ४५७

ॐ सर्गायै नमः ।

ॐ सर्गाय नमः । ४५८

ॐ सर्वहृत्कोशसंस्थितायै नमः ।

ॐ सर्वहृत्कोशसंस्थिताय नमः । ४५९

ॐ दीर्घपिङ्गजटाजूटायै नमः ।

ॐ दीर्घपिङ्गजटाजूटाय नमः । ४६०

ॐ दीर्घबाहवे नमः ।

ॐ दीर्घबाहवे नमः । ४६१

ॐ दिगम्बरायै नमः ।

ॐ दिगम्बराय नमः । ४६२

ॐ संयद्वामायै नमः ।

ॐ संयद्वामाय नमः । ४६३

ॐ संयमीन्द्रायै नमः ।

ॐ संयमीन्द्राय नमः । ४६४

ॐ संशयच्छिदे नमः ।

ॐ संशयच्छिदे नमः । ४६५

ॐ सहस्रदृशे नमः ।

ॐ सहस्रदृशे नमः । ४६६

ॐ हेतुदृष्टान्तनिर्मुक्तायै नमः ।

ॐ हेतुदृष्टान्तनिर्मुक्ताय नमः । ४६७

ॐ हेतवे नमः ।

ॐ हेतवे नमः । ४६८

ॐ हेरम्बजन्मभुवे नमः ।

ॐ हेरम्बजन्मभुवे नमः । ४६९

ॐ हेलाविनिर्मितजगते नमः ।

ॐ हेलाविनिर्मितजगते नमः । ४७०

ॐ हेमश्मश्रवे नमः ।

ॐ हेमश्मश्रवे नमः । ४७१

ॐ हिरण्मय्यै नमः ।

ॐ हिरण्मयाय नमः । ४७२

ॐ सकृद्विभातायै नमः ।

ॐ सकृद्विभाताय नमः । ४७३

ॐ संवेत्रयै नमः ।

ॐ संवेत्रे नमः । ४७४

ॐ सदसत्कोटिवर्जितायै नमः ।

ॐ सदसत्कोटिवर्जिताय नमः । ४७५

ॐ स्वात्मस्थायै नमः ।

ॐ स्वात्मस्थाय नमः । ४७६

ॐ स्वायुधायै नमः ।

ॐ स्वायुधाय नमः । ४७७

ॐ स्वामिन्यै नमः ।

ॐ स्वामिने नमः । ४७८

ॐ स्वानन्यायै नमः ।

ॐ स्वानन्याय नमः । ४७९

ॐ रवांशिताखिलायै नमः ।

ॐ रवांशिताखिलाय नमः । ४८०

ॐ रात्यै नमः ।

ॐ रातये नमः । ४८१

ॐ दात्यै नमः ।

ॐ दातये नमः । ४८२

ॐ चतुष्पादायै नमः ।

ॐ चतुष्पादाय नमः । ४८३

ॐ स्वात्मबन्धहरायै नमः ।

ॐ स्वात्मबन्धहराय नमः । ४८४

ॐ स्वभुवे नमः ।

ॐ स्वभुवे नमः । ४८५

ॐ वशिन्यै नमः ।

ॐ वशिने नमः । ४८६

ॐ वरेण्यायै नमः ।

ॐ वरेण्याय नमः । ४८७

ॐ विततायै नमः ।

ॐ वितताय नमः । ४८८

ॐ वज्रभृते नमः ।

ॐ वज्रभृते नमः । ४८९

ॐ वरुणात्मिकायै नमः ।

ॐ वरुणात्मकाय नमः । ४९०

ॐ चैतन्यायै नमः ।

ॐ चैतन्याय नमः । ४९१

ॐ चिच्छिदे नमः ।

ॐ चिच्छिदे नमः । ४९२

ॐ अद्वैतायै नमः ।

ॐ अद्वैताय नमः । ४९३

ॐ चिन्मात्रायै नमः ।

ॐ चिन्मात्राय नमः । ४९४

ॐ चित्सभाधिपायै नमः ।

ॐ चित्सभाधिपाय नमः । ४९५

ॐ भूमायै नमः ।

ॐ भूम्ने नमः । ४९६

ॐ भूतपतये नमः ।

ॐ भूतपतये नमः । ४९७

ॐ भाव्यायै नमः ।

ॐ भाव्याय नमः । ४९८

ॐ भूर्भुवोव्याहृतिप्रियायै नमः ।

ॐ भूर्भुवोव्याहृतिप्रियाय नमः । ४९९

ॐ वाच्यवाचकनिर्मुक्तायै नमः ।

ॐ वाच्यवाचकनिर्मुक्ताय नमः । ५०० ।

ॐ वागीश्यै नमः ।

ॐ वागीशाय नमः । ५०१

ॐ वागगोचरायै नमः ।

ॐ वागगोचराय नमः । ५०२

ॐ वेदान्तकृते नमः ।

ॐ वेदान्तकृते नमः । ५०३

ॐ तुर्यपादायै नमः ।

ॐ तुर्यपादाय नमः । ५०४

ॐ वैद्युतायै नमः ।

ॐ वैद्युताय नमः । ५०५

ॐ सुकृतोद्भवायै नमः ।

ॐ सुकृतोद्भवाय नमः । ५०६

ॐ अशुभक्षयकृते नमः ।

ॐ अशुभक्षयकृते नमः । ५०७

ॐ ज्योतिषे नमः ।

ॐ ज्योतिषे नमः । ५०८

ॐ अनाकाशायै नमः ।

ॐ अनाकाशाय नमः । ५०९

ॐ अविलेपकायै नमः ।

ॐ अविलेपकाय नमः । ५१०

ॐ आप्तकामायै नमः ।

ॐ आप्तकामाय नमः । ५११

ॐ अनुमन्त्र्यै नमः ।

ॐ अनुमन्त्रे नमः । ५१२

ॐ आत्मने नमः ।

ॐ आत्मने नमः । ५१३

ॐ अकामायै नमः ।

ॐ अकामाय नमः । ५१४

ॐ अभिन्नायै नमः ।

ॐ अभिन्नाय नमः । ५१५

ॐ अनणवे नमः ।

ॐ अनणवे नमः । ५१६

ॐ हरायै नमः ।

ॐ हराय नमः । ५१७

ॐ अस्नेहायै नमः ।

ॐ अस्नेहाय नमः । ५१८

ॐ सङ्गनिर्मुक्तायै नमः ।

ॐ सङ्गनिर्मुक्ताय नमः । ५१९

ॐ अह्रस्वायै नमः ।

ॐ अह्रस्वाय नमः । ५२०

ॐ अदीर्घायै नमः ।

ॐ अदीर्घाय नमः । ५२१

ॐ अविशेषकायै नमः ।

ॐ अविशेषकाय नमः । ५२२

ॐ स्वच्छन्दायै नमः ।

ॐ स्वच्छन्दाय नमः । ५२३

ॐ स्वच्छसंवित्तये नमः ।

ॐ स्वच्छसंवित्तये नमः । ५२४

ॐ अन्वेष्टव्यायै नमः ।

ॐ अन्वेष्टव्याय नमः । ५२५

ॐ अश्रुतायै नमः ।

ॐ अश्रुताय नमः । ५२६

ॐ अमृतायै नमः ।

ॐ अमृताय नमः । ५२७

ॐ अपरोक्षाये नमः ।

ॐ अपरोक्षाय नमः । ५२८

ॐ अवृणायै नमः ।

ॐ अवृणाय नमः । ५२९

ॐ अलिङ्गाये नमः ।

ॐ अलिङ्गाय नमः । ५३०

ॐ अविद्वेष्ट्रयै नमः ।

ॐ अविद्वेष्ट्रे नमः । ५३१

ॐ प्रेमसागरायै नमः ।

ॐ प्रेमसागराय नमः । ५३२

ॐ ज्ञानलिङ्गायै नमः ।

ॐ ज्ञानलिङ्गाय नमः । ५३३

ॐ गत्यै नमः ।

ॐ गत्यै नमः । ५३४

ॐ ज्ञानिन्यै नमः ।

ॐ ज्ञानिने नमः । ५३५

ॐ ज्ञानगम्यायै नमः ।

ॐ ज्ञानगम्याय नमः । ५३६

ॐ अवभासकायै नमः ।

ॐ अवभासकाय नमः । ५३७

ॐ शुद्धस्फटिकसङ्काशायै नमः ।

ॐ शुद्धस्फटिकसङ्काशाय नमः । ५३८

ॐ श्रुतिप्रस्तुतवैभवायै नमः ।

ॐ श्रुतिप्रस्तुतवैभवाय नमः । ५३९

ॐ हिरण्यबाहवे नमः ।

ॐ हिरण्यबाहवे नमः । ५४०

ॐ सेनान्यै नमः ।

ॐ सेनान्ये नमः । ५४१

ॐ हरिकेशायै नमः ।

ॐ हरिकेशाय नमः । ५४२

ॐ दिशाम्पतये नमः ।

ॐ दिशाम्पतये नमः । ५४३

ॐ सस्पिञ्जरायै नमः ।

ॐ सस्पिञ्जराय नमः । ५४४

ॐ पशुपतये नमः ।

ॐ पशुपतये नमः । ५४५

ॐ त्विषीमत्यै नमः ।

ॐ त्विषीमते नमः । ५४६

ॐ अध्वनाम्पतये नमः ।

ॐ अध्वनाम्पतये नमः । ५४७

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ॐ बभ्लुशायै नमः ।

ॐ बभ्लुशाय नमः । ५४८

ॐ भगवत्यै नमः ।

ॐ भगवते नमः । ५४९

ॐ भव्यायै नमः ।

ॐ भव्याय नमः । ५५०

ॐ विव्याधिन्यै नमः ।

ॐ विव्याधिने नमः । ५५१

ॐ विगतज्वरायै नमः ।

ॐ विगतज्वराय नमः । ५५२

ॐ अन्नानाम्पतये नमः ।

ॐ अन्नानाम्पतये नमः । ५५३

ॐ अत्युग्रायै नमः ।

ॐ अत्युग्राय नमः । ५५४

ॐ हरित्केशायै नमः ।

ॐ हरित्केशाय नमः । ५५५

ॐ अद्वयाकृतये नमः ।

ॐ अद्वयाकृतये नमः । ५५६

ॐ पुष्टानाम्पतये नमः ।

ॐ पुष्टानाम्पतये नमः । ५५७

ॐ अव्यग्रायै नमः ।

ॐ अव्यग्राय नमः । ५५८

ॐ भवहेत्यै नमः ।

ॐ भवहेत्ये नमः । ‘ ५५९

ॐ जगत्पतये नमः ।

ॐ जगत्पतये नमः । ५६०

ॐ आतताविन्यै नमः ।

ॐ आतताविने नमः । ५६१

ॐ महारुद्राण्यै नमः ।

ॐ महारुद्राय नमः । ५६२

ॐ क्षेत्राणाम्पतये नमः ।

ॐ क्षेत्राणाम्पतये नमः । ५६३

ॐ अक्षयायै नमः ।

ॐ अक्षयाय नमः । ५६४

ॐ सूतायै नमः ।

ॐ सूताय नमः । ५६५

ॐ सदस्पतये नमः ।

ॐ सदस्पतये नमः । ५६६

ॐ सूर्यै नमः ।

ॐ सुरये नमः । ५६७

ॐ अहन्त्यायै नमः ।

ॐ अहन्त्याय नमः । ५६८

ॐ वनपायै नमः ।

ॐ वनपाय नमः । ५६९

ॐ अवरायै नमः ।

ॐ अवराय नमः । ५७०

ॐ रोहितायै नमः ।

ॐ रोहिताय नमः । ५७१

ॐ स्थपतिन्यै नमः ।

ॐ स्थपतये नमः । ५७२

ॐ वृक्षपतये नमः ।

ॐ वृक्षपतये नमः । ५७३

ॐ मन्त्रिण्यै नमः ।

ॐ मन्त्रिणे नमः । ५७४

ॐ सुवाणिजायै नमः ।

ॐ सुवाणिजाय नमः । ५७५

ॐ कक्षाधिपायै नमः ।

ॐ कक्षाधिपाय नमः । ५७६

ॐ भुवन्तीशायै नमः ।

ॐ भुवन्तीशाय नमः । ५७७

ॐ भवाख्यायै नमः ।

ॐ भवाख्याय नमः । ५७८

ॐ वारिवस्कृतायै नमः ।

ॐ वारिवस्कृताय नमः । ५७९

ॐ ओषधीशायै नमः ।

ॐ ओषधीशाय नमः । ५८०

ॐ सतामीशायै नमः ।

ॐ सतामीशाय नमः । ५८१

ॐ उच्चैर्घोषायै नमः ।

ॐ उच्चैर्घोषाय नमः । ५८२

ॐ विभीषणायै नमः ।

ॐ विभीषणाय नमः । ५८३

ॐ पत्तीनामधिपायै नमः ।

ॐ पत्तीनामधिपाय नमः । ५८४

ॐ कृत्स्नवीतायै नमः ।

ॐ कृत्स्नवीताय नमः । ५८५

ॐ धावत्यै नमः ।

ॐ धावते नमः । ५८६

ॐ तस्यै नमः ।

ॐ तस्मै नमः । ५८७

ॐ सत्वपायै नमः ।

ॐ सत्वपाय नमः । ५८८

ॐ सहमानायै नमः ।

ॐ सहमानाय नमः । ५८९

ॐ सत्यधर्मण्यै नमः ।

ॐ सत्यधर्मणे नमः । ५९०

ॐ निव्याधिन्यै नमः ।

ॐ निव्याधिने नमः । ५९१

ॐ नियमायै नमः ।

ॐ नियमाय नमः । ५९२

ॐ यमायै नमः ।

ॐ यमाय नमः । ५९३

ॐ आव्याधिपतये नमः ।

ॐ आव्याधिपतये नमः । ५९४

ॐ आदित्यायै नमः ।

ॐ आदित्याय नमः । ५९५

ॐ ककुभायै नमः ।

ॐ ककुभाय नमः । ५९६

ॐ कालकोविदायै नमः ।

ॐ कलकोविदाय नमः । ५९७

ॐ निषङ्गिण्यै नमः ।

ॐ निषङ्गिणे नमः । ५९८

ॐ इषुधिमत्यै नमः ।

ॐ इषुधिमते नमः । ५९९

ॐ इन्द्राण्यै नमः ।

ॐ इन्द्राय नमः । ६०० ।

ॐ तस्कराणामधीश्वर्यै नमः ।

ॐ तस्कराणामधीश्वराय नमः । ६०१

ॐ निचेरुकायै नमः ।

ॐ निचेरुकाय नमः । ६०२

ॐ परिचरायै नमः ।

ॐ परिचराय नमः । ६०३

ॐ अरण्यानाम्पतये नमः ।

ॐ अरण्यानाम्पतये नमः । ६०४

ॐ अद्भुतायै नमः ।

ॐ अद्भुताय नमः । ६०५

ॐ सृकाविन्यै नमः ।

ॐ सृकाविने नमः । ६०६

ॐ मुष्णतान्नाथायै नमः ।

ॐ मुष्णतान्नाथाय नमः । ६०७

ॐ पञ्चाशद्वर्णरूपभृते नमः ।

ॐ पञ्चाशद्वर्णरूपभृते नमः । ६०८

ॐ नक्तञ्चरायै नमः ।

ॐ नक्तञ्चराय नमः । ६०९

ॐ प्रकृन्तानाम्पतये नमः ।

ॐ प्रकृन्तानाम्पतये नमः । ६१०

ॐ गिरिचरायै नमः ।

ॐ गिरिचराय नमः । ६११

ॐ गुर्व्यै नमः ।

ॐ गुरवे नमः । ६१२

ॐ कुलुञ्चानाम्पतये नमः ।

ॐ कुलुञ्चानाम्पतये नमः । ६१३

ॐ कूप्यायै नमः ।

ॐ कूप्याय नमः । ६१४

ॐ धन्वाविन्यै नमः ।

ॐ धन्वाविने नमः । ६१५

ॐ धनदाधिपायै नमः ।

ॐ धनदाधिपाय नमः । ६१६

ॐ आतन्वानायै नमः ।

ॐ आतन्वानाय नमः । ६१७

ॐ शतानन्दायै नमः ।

ॐ शतानन्दाय नमः । ६१८

ॐ गृत्सायै नमः ।

ॐ गृत्साय नमः । ६१९

ॐ गृत्सपतये नमः ।

ॐ गृत्सपतये नमः । ६२०

ॐ सुरायै नमः ।

ॐ सुराय नमः । ६२१

ॐ व्रातायै नमः ।

ॐ व्राताय नमः । ६२२

ॐ व्रातपतये नमः ।

ॐ व्रातपतये नमः । ६२३

ॐ विप्रायै नमः ।

ॐ विप्राय नमः । ६२४

ॐ वरीयस्यै नमः ।

ॐ वरीयसे नमः । ६२५

ॐ क्षुल्लकायै नमः ।

ॐ क्षुल्लकाय नमः । ६२६

ॐ क्षमिण्यै नमः ।

ॐ क्षमिणे नमः । ६२७

ॐ बिल्मिन्यै नमः ।

ॐ बिल्मिने नमः । ६२८

ॐ वरूथिन्यै नमः ।

ॐ वरूथिने नमः । ६२९

ॐ दुन्दुभ्यायै नमः ।

ॐ दुन्दुभ्याय नमः । ६३०

ॐ आहनन्यायै नमः ।

ॐ आहनन्याय नमः । ६३१

ॐ प्रमर्शकायै नमः ।

ॐ प्रमर्शकाय नमः । ६३२

ॐ धृष्णवे नमः ।

ॐ धृष्णवे नमः । ६३३

ॐ दूत्यै नमः ।

ॐ दूताय नमः । ६३४

ॐ तीक्ष्णदंष्ट्रायै नमः ।

ॐ तीक्ष्णदंष्ट्राय नमः । ६३५

ॐ सुधन्वन्यै नमः ।

ॐ सुधन्वने नमः । ६३६

ॐ सुभगायै नमः ।

ॐ सुभगाय नमः । ६३७

ॐ सुखिन्यै नमः ।

ॐ सुखिने नमः । ६३८

ॐ स्रुत्यायै नमः ।

ॐ स्रुत्याय नमः । ६३९

ॐ पथ्यायै नमः ।

ॐ पथ्याय नमः । ६४०

ॐ स्वतन्त्रस्थायै नमः ।

ॐ स्वतन्त्रस्थाय नमः । ६४१

ॐ काट्यायै नमः ।

ॐ काट्याय नमः । ६४२

ॐ नीप्यायै नमः ।

ॐ नीप्याय नमः । ६४३

ॐ करोटिभुते नमः ।

ॐ करोटिभुते नमः । ६४४

ॐ सूद्यायै नमः ।

ॐ सूद्याय नमः । ६४५

ॐ सरस्यायै नमः ।

ॐ सरस्याय नमः । ६४६

ॐ वैशन्तायै नमः ।

ॐ वैशन्ताय नमः । ६४७

ॐ नाद्यायै नमः ।

ॐ नाद्याय नमः । ६४८

ॐ अवट्यायै नमः ।

ॐ अवट्याय नमः । ६४९

ॐ प्रार्षजाय नमः ।

ॐ प्रार्षजाय नमः । ६५०

ॐ विद्युत्यायै नमः ।

ॐ विद्युत्याय नमः । ६५१

ॐ विशदायै नमः ।

ॐ विशदाय नमः । ६५२

ॐ मेघ्यायै नमः ।

ॐ मेघ्याय नमः । ६५३

ॐ रेष्मियायै नमः ।

ॐ रेष्मियाय नमः । ६५४

ॐ वास्तुपायै नमः ।

ॐ वास्तुपाय नमः । ६५५

ॐ वसवे नमः ।

ॐ वसवे नमः । ६५६

ॐ अग्रेवधायै नमः ।

ॐ अग्रेवधाय नमः । ६५७

ॐ अग्रेसम्पूज्यायै नमः ।

ॐ अग्रेसम्पूज्याय नमः । ६५८

ॐ हन्त्र्यै नमः ।

ॐ हन्त्रे नमः । ६५९

ॐ तारायै नमः ।

ॐ ताराय नमः । ६६०

ॐ मयोभवायै नमः ।

ॐ मयोभवाय नमः । ६६१

ॐ मयस्करायै नमः ।

ॐ मयस्कराय नमः । ६६२

ॐ महातीर्थ्यायै नमः ।

ॐ महातीर्थ्याय नमः । ६६३

ॐ कूल्यायै नमः ।

ॐ कूल्याय नमः । ६६४

ॐ पार्यायै नमः ।

ॐ पार्याय नमः । ६६५

ॐ पदात्मिकायै नमः ।

ॐ पदात्मकाय नमः । ६६६

ॐ शङ्गायै नमः ।

ॐ शङ्गाय नमः । ६६७

ॐ प्रतरणायै नमः ।`

ॐ प्रतरणाय नमः । ६६८

ॐ अवार्यायै नमः ।

ॐ अवार्याय नमः । ६६९

ॐ फेन्यायै नमः ।

ॐ फेन्याय नमः । ६७०

ॐ शष्प्यायै नमः ।

ॐ शष्प्याय नमः । ६७१

ॐ प्रवाहजायै नमः ।

ॐ प्रवाहजाय नमः । ६७२

ॐ मुनये नमः ।

ॐ मुनये नमः । ६७३

ॐ आतार्यायै नमः ।

ॐ आतार्याय नमः । ६७४

ॐ आलाद्यायै नमः ।

ॐ आलाद्याय नमः । ६७५

ॐ सिकत्यायै नमः ।

ॐ सिकत्याय नमः । ६७६

ॐ किंशिलाभिधायै नमः ।

ॐ किंशिलाभिधाय नमः । ६७७

ॐ पुलस्त्यै नमः ।

ॐ पुलस्तये नमः । ६७८

ॐ क्षयणायै नमः ।

ॐ क्षयणाय नमः । ६७९

ॐ गृह्यायै नमः ।

ॐ गृह्याय नमः । ६८०

ॐ गोष्ठयायै नमः ।

ॐ गोष्ठयाय नमः । ६८१

ॐ गोपरिपालकायै नमः ।

ॐ गोपरिपालकाय नमः । ६८२

ॐ शुष्क्यायै नमः ।

ॐ शुष्क्याय नमः । ६८३

ॐ हरित्यायै नमः ।

ॐ हरित्याय नमः । ६८४

ॐ लोप्याख्यायै नमः ।

ॐ लोप्याख्याय नमः । ६८५

ॐ सूर्म्यायै नमः ।

ॐ सूर्म्याय नमः । ६८६

ॐ पर्ण्यायै नमः ।

ॐ पर्ण्याय नमः । ६८७

ॐ अणिमादिभुवे नमः ।

ॐ अणिमादिभुवे नमः । ६८८

ॐ पर्णशद्यायै नमः ।

ॐ पर्णशद्याय नमः । ६८९

ॐ प्रत्यगात्मिकायै नमः ।

ॐ प्रत्यगात्मने नमः । ६९०

ॐ प्रसन्नायै नमः ।

ॐ प्रसन्नाय नमः । ६९१

ॐ परमोन्नतायै नमः ।

ॐ परमोन्नताय नमः । ३६९२

ॐ शीघ्रियायै नमः ।

ॐ शीघ्रियाय नमः । ६९३

ॐ शीभ्यायै नमः ।

ॐ शीभ्याय नमः । ६९४

ॐ आनन्दायै नमः ।

ॐ आनन्दाय नमः । ६९५

ॐ क्षयद्वीरायै नमः ।

ॐ क्षयद्वीराय नमः । ६९६

ॐ क्षराक्षरायै नमः ।

ॐ क्षराक्षराय नमः । ६९७

ॐ पाशिपातकसंहत्र्यै नमः ।

ॐ पाशिपातकसंहत्रे नमः । ६९८

ॐ तीक्ष्णेषवे नमः ।

ॐ तीक्ष्णेषवे नमः । ६९९

ॐ तिमिरापहायै नमः ।

ॐ तिमिरापहाय नमः । ७०० ।

ॐ वराभयप्रदायै नमः ।

ॐ वराभयप्रदाय नमः । ७०१

ॐ ब्रह्मपुच्छायै नमः ।

ॐ ब्रह्मपुच्छाय नमः । ७०२

ॐ ब्रह्मविद्यांवरायै नमः ।

ॐ ब्रह्मविद्यांवराय नमः । ७०३

ॐ ब्रह्मविद्यागुरवे नमः ।

ॐ ब्रह्मविद्यागुरवे नमः । ७०४

ॐ गुह्यायै नमः ।

ॐ गुह्याय नमः । ७०५

ॐ गुह्यकैस्समभिष्टुतायै नमः ।

ॐ गुह्यकैस्समभिष्टुताय नमः । ७०६

ॐ कृतान्तकृते नमः ।

ॐ कृतान्तकृते नमः । ७०७

ॐ क्रियाधारायै नमः ।

ॐ क्रियाधाराय नमः । ७०८

ॐ कृतिन्यै नमः ।

ॐ कृतिने नमः । ७०९

ॐ कृपणरक्षकायै नमः ।

ॐ कृपणरक्षकाय नमः । ७१०

ॐ नैष्कर्म्यदायै नमः ।

ॐ नैष्कर्म्यदाय नमः । ७११

ॐ नवरसायै नमः ।

ॐ नवरसाय नमः । ७११

ॐ त्रिस्थायै नमः ।

ॐ त्रिस्थाय नमः । ७१३

ॐ त्रिपुरभैरव्यै नमः ।

ॐ त्रिपुरभैरवाय नमः । ७१४

ॐ त्रिमातृकायै नमः ।

ॐ त्रिमातृकाय नमः । ७१५

ॐ त्रिवृद्रूपायै नमः ।

ॐ त्रिवृद्रूपाय नमः । ७१६

ॐ तृतीयायै नमः ।

ॐ तृतीयाय नमः । ७१७

ॐ त्रिगुणातिगायै नमः ।

ॐ त्रिगुणातिगाय नमः । ७१८

ॐ त्रिधाम्नयै नमः ।

ॐ त्रिधाम्ने नमः । ७१९

ॐ त्रिजगद्धेतवे नमः ।

ॐ त्रिजगद्धेतवे नमः । ७२०

ॐ त्रिकत्रयै नमः ।

ॐ त्रिकर्त्रे नमः । ७२१

ॐ तिर्यगूर्ध्वगायै नमः ।

ॐ तिर्यगूर्ध्वगाय नमः । ७२२

ॐ प्रपञ्चोपशमायै नमः ।

ॐ प्रपञ्चोपशमाय नमः । ७२३

ॐ नामरूपद्वयविवर्जितायै नमः ।

ॐ नामरूपद्वयविवर्जिताय नमः । ७२४

ॐ प्रकृतीशायै नमः ।

ॐ प्रकृतीशाय नमः । ७२५

ॐ प्रतिष्ठात्र्यै नमः ।

ॐ प्रतिष्ठात्रे नमः । ७२६

ॐ प्रभवायै नमः ।

ॐ प्रभवाय नमः । ७२७

ॐ प्रमथायै नमः ।

ॐ प्रमथाय नमः । ७२८

ॐ पथिन्यै नमः ।

ॐ पथिने नमः । ७२९

ॐ सुनिश्चितार्थायै नमः ।

ॐ सुनिश्चितार्थाय नमः । ७३०

ॐ राद्धान्तायै नमः ।

ॐ राद्धान्ताय नमः । ७३१

ॐ तत्वमर्थायै नमः ।

ॐ तत्वमर्थाय नमः । ७३२

ॐ तपसे नमः ।

ॐ तपसे नमः । ७३३

ॐ निधये नमः ।

ॐ निधये नमः । ७३४

ॐ हितायै नमः ।

ॐ हिताय नमः । ७३५

ॐ प्रमात्र्यै नमः ।

ॐ प्रमात्रे नमः । ७३६

ॐ प्राग्वर्तिन्यै नमः ।

ॐ प्राग्वर्तिने नमः । ७३७

ॐ सर्वोपनिषदाश्रयायै नमः ।

ॐ सर्वोपनिषदाश्रयाय नमः । ७३८

ॐ विश‍ृङ्खलायै नमः ।

ॐ विश‍ृङ्खलाय नमः । ७३९

ॐ वियद्धेतवे नमः ।

ॐ वियद्धेतवे नमः । ७४०

ॐ विषमायै नमः ।

ॐ विषमाय नमः । ७४१

ॐ विद्रुमप्रभायै नमः ।

ॐ विद्रुमप्रभाय नमः । ७४२

ॐ अखण्डबोधायै नमः ।

ॐ अखण्डबोधाय नमः । ७४३

ॐ अखण्डात्मने नमः ।

ॐ अखण्डात्मने नमः । ७४४

ॐ घण्टामण्डलमण्डितायै नमः ।

ॐ घण्टामण्डलमण्डिताय नमः । ७४५

ॐ अनन्तशक्तये नमः ।

ॐ अनन्तशक्तये नमः । ७४६

ॐ आचार्यायै नमः ।

ॐ आचार्याय नमः । ७४७

ॐ पुष्करायै नमः ।

ॐ पुष्कराय नमः । ७४८

ॐ सर्वपूरणायै नमः ।

ॐ सर्वपूरणाय नमः । ७४९

ॐ पुरजिते नमः ।

ॐ पुरजिते नमः । ७५०

ॐ पूर्वजायै नमः ।

ॐ पूर्वजाय नमः । ७५१

ॐ पुष्पहासायै नमः ।

ॐ पुष्पहासाय नमः । ७५२

ॐ पुण्यफलप्रदायै नमः ।

ॐ पुण्यफलप्रदाय नमः । ७५३

ॐ ध्यानगम्यायै नमः ।

ॐ ध्यानगम्याय नमः । ७५४

ॐ ध्यातृरूपायै नमः ।

ॐ ध्यातृरूपाय नमः । ७५५

ॐ ध्येयायै नमः ।

ॐ ध्येयाय नमः । ७५६

ॐ धर्मविदांवराये नमः ।

ॐ धर्मविदांवराय नमः । ७५७

ॐ अवशायै नमः ।

ॐ अवशाय नमः । ७५८

ॐ स्ववशायै नमः ।

ॐ स्ववशाय नमः । ७५९

ॐ अस्थाणवे नमः ।

ॐ अस्थाणवे नमः । ७६०

ॐ अन्तर्यामिन्यै नमः ।

ॐ अन्तर्यामिने नमः । ७६१

ॐ शतक्रतवे नमः ।

ॐ शतक्रतवे नमः । ७६२

ॐ कूटस्थायै नमः ।

ॐ कूटस्थाय नमः । ७६३

ॐ कूर्मपीठस्थायै नमः ।

ॐ कूर्मपीठस्थाय नमः । ७६४

ॐ कूश्माण्डग्रहमोचकायै नमः ।

ॐ कूश्माण्डग्रहमोचकाय नमः । ७६५

ॐ कूलङ्कषकृपासिन्धवे नमः ।

ॐ कूलङ्कषकृपासिन्धवे नमः । ७६६

ॐ कुशलिन्यै नमः ।

ॐ कुशलिने नमः । ७६७

ॐ कुङ्कुमेश्वर्यै नमः ।

ॐ कुङ्कुमेश्वराय नमः । ७६८

ॐ गदाधरायै नमः ।

ॐ गदाधराय नमः । ७६९

ॐ गणस्वामिन्यै नमः ।

ॐ गणस्वामिने नमः । ७७०

ॐ गरिष्ठायै नमः ।

ॐ गरिष्ठाय नमः । ७७१

ॐ तोमरायुधायै नमः । ३

ॐ तोमरायुधाय नमः । ७७२

ॐ जवनायै नमः ।

ॐ जवनाय नमः । ७७३

ॐ जगदाधारायै नमः ।

ॐ जगदाधाराय नमः । ७७४

ॐ जमदग्नये नमः ।

ॐ जमदग्नये नमः । ७७५

ॐ जराहरायै नमः ।

ॐ जराहराय नमः । ७७६

ॐ जटाधरायै नमः ।

ॐ जटाधराय नमः । ७७७

ॐ अमृताधारायै नमः ।

ॐ अमृताधाराय नमः । ७७८

ॐ अमृतांशवे नमः ।

ॐ अमृतांशवे नमः । ७७९

ॐ अमृतोद्भवायै नमः ।

ॐ अमृतोद्भवाय नमः । ७८०

ॐ विद्वत्तमायै नमः ।

ॐ विद्वत्तमाय नमः । ७८१

ॐ विदूरस्थायै नमः ।

ॐ विदूरस्थाय नमः । ७८२

ॐ विश्रमायै नमः ।

ॐ विश्रमाय नमः । ७८३

ॐ वेदनामयायै नमः ।

ॐ वेदनामयाय नमः । ७८४

ॐ चतुर्भुजायै नमः ।

ॐ चतुर्भुजाय नमः । ७८५

ॐ शततनवे नमः ।

ॐ शततनवे नमः । ७८६

ॐ शमिताखिलकौतुकायै नमः ।

ॐ शमिताखिलकौतुकाय नमः । ७८७

ॐ वौषट्कारायै नमः ।

ॐ वौषट्काराय नमः । ७८८

ॐ वषट्कारायै नमः ।

ॐ वषट्काराय नमः । ७८९

ॐ हुङ्कारायै नमः ।

ॐ हुङ्काराय नमः । ७९०

ॐ फट्कारायै नमः ।

ॐ फट्काराय नमः । ७९१

ॐ पट्वै नमः ।

ॐ पटवे नमः । ७९२

ॐ ब्रह्मिष्ठायै नमः ।

ॐ ब्रह्मिष्ठाय नमः । ७९३

ॐ ब्रह्मसूत्रार्थायै नमः ।

ॐ ब्रह्मसूत्रार्थाय नमः । ७९४

ॐ ब्रह्मज्ञायै नमः ।

ॐ ब्रह्मज्ञाय नमः । ७९५

ॐ ब्रह्मचेतनायै नमः ।

ॐ ब्रह्मचेतनाय नमः । ७९६

ॐ गायक्यै नमः ।

ॐ गायकाय नमः । ७९७

ॐ गरुडारूढायै नमः ।

ॐ गरुडारूढाय नमेः । ७९८

ॐ गजासुरविमर्दन्यै नमः ।

ॐ गजासुरविमर्दनाय नमः । ७९९

ॐ गर्वितायै नमः ।

ॐ गर्विताय नमः । ८०० ।

ॐ गगनावासायै नमः ।

ॐ गगनावासाय नमः । ८०१

ॐ ग्रन्थित्रयविभेदन्यै नमः ।

ॐ ग्रन्थित्रयविभेदनाय नमः । ८०२

ॐ भूतमुक्तावलीतन्तवे नमः ।

ॐ भूतमुक्तावलीतन्तवे नमः । ८०३

ॐ भूतपूर्वायै नमः ।

ॐ भूतपूर्वाय नमः । ८०४

ॐ भुजङ्गभृते नमः ।

ॐ भुजङ्गभृते नमः । ८०५

ॐ अतर्क्यायै नमः ।

ॐ अतर्क्याय नमः । ८०६

ॐ सुकरायै नमः ।

ॐ सुकराय नमः । ८०७

ॐ सारायै नमः ।

ॐ साराय नमः । ८०८

ॐ सत्तमात्रायै नमः ।

ॐ सत्तमात्राय नमः । ८०९

ॐ सदाशिवायै नमः ।

ॐ सदाशिवाय नमः । ८१०

ॐ शक्तिपातकरायै नमः ।

ॐ शक्तिपातकराय नमः । ८११

ॐ शक्तायै नमः ।

ॐ शक्ताय नमः । ८१२

ॐ शाश्वतायै नमः ।

ॐ शाश्वताय नमः । ८१३

ॐ श्रेयसान्निधये नमः ।

ॐ श्रेयसान्निधये नमः । ८१४

ॐ अजीर्णायै नमः ।

ॐ अजीर्णाय नमः । ८१५

ॐ सुकुमारायै नमः ।

ॐ सुकुमाराय नमः । ८१६

ॐ अन्यस्यै नमः ।

ॐ अन्यस्मै नमः । ८१७

ॐ पारदर्शिन्यै नमः ।

ॐ पारदर्शिने नमः । ८१८

ॐ पुरन्दरायै नमः ।

ॐ पुरन्दराय नमः । ८१९

ॐ अनावरणविज्ञानायै नमः ।

ॐ अनावरणविज्ञानाय नमः । ८२०

ॐ निर्विभागायै नमः ।

ॐ निर्विभागाय नमः । ८२१

ॐ विभावस्वै नमः ।

ॐ विभावसवे नमः । ८२२

ॐ विज्ञानमात्रायै नमः ।

ॐ विज्ञानमात्राय नमः । ८२३

ॐ विरजसे नमः ।

ॐ विरजसे नमः । ८२४

ॐ विरामायै नमः ।

ॐ विरामाय नमः । ८२५

ॐ विबुधाश्रयायै नमः ।

ॐ विबुधाश्रयाय नमः । ८२६

ॐ विदग्धमुग्धवेषाढ्यायै नमः ।

ॐ विदग्धमुग्धवेषाढ्याय नमः । ८२७

ॐ विश्वातीतायै नमः ।

ॐ विश्वातीताय नमः । ८२८

ॐ विशोकदायै नमः ।

ॐ विशोकदाय नमः । ८२९

ॐ मायानाट्यविनोदज्ञायै नमः ।

ॐ मायानाट्यविनोदज्ञाय नमः । ८३०

ॐ मायानटनशिक्षकायै नमः ।

ॐ मायानटनशिक्षकाय नमः । ८३१

ॐ मायानाटककृते नमः ।

ॐ मायानाटककृते नमः । ८३२

ॐ मायायै नमः ।

ॐ मायिने नमः । ८३३

ॐ मायायन्त्रविमोचकायै नमः ।

ॐ मायायन्त्रविमोचकाय नमः । ८३४

ॐ वृद्धिक्षयविनिर्मुक्तायै नमः ।

ॐ वृद्धिक्षयविनिर्मुक्ताय नमः । ८३५

ॐ विद्योतायै नमः ।

ॐ विद्योताय नमः । ८३६

ॐ विश्ववचङ्कायै नमः ।

ॐ विश्ववचङ्काय नमः । ८३७

ॐ कालात्मने नमः ।

ॐ कालात्मने नमः । ८३८

ॐ कालिकानाथायै नमः ।

ॐ कालिकानाथाय नमः । ८३९

ॐ कार्कोटकविभीषणायै नमः ।

ॐ कार्कोटकविभीषणाय नमः । ८४०

ॐ षडूर्मिरहितायै नमः ।

ॐ षडूर्मिरहिताय नमः । ८४१

ॐ स्तव्यायै नमः ।

ॐ स्तव्याय नमः । ८४२

ॐ षड्गुणैश्वर्यदायकायै नमः ।

ॐ षड्गुणैश्वर्यदायकाय नमः । ८४३

ॐ षडाधारगतायै नमः ।

ॐ षडाधारगताय नमः । ८४४

ॐ साङ्ख्यायै नमः ।

ॐ साङ्ख्याय नमः । ८४५

ॐ षडक्षरसमाश्रयायै नमः ।

ॐ षडक्षरसमाश्रयाय नमः । ८४६

ॐ अनिर्देश्यायै नमः ।

ॐ अनिर्देश्याय नमः । ८४७

ॐ अनिलायै नमः ।

ॐ अनिलाय नमः । ८४८

ॐ अगम्यायै नमः ।

ॐ अगम्याय नमः । ८४९

ॐ अविक्रियायै नमः ।

ॐ अविक्रियाय नमः । ८५०

ॐ अमोघवैभवायै नमः ।

ॐ अमोघवैभवाय नमः । ८५१

ॐ हेयादेयविनिर्मुक्तायै नमः ।

ॐ हेयादेयविनिर्मुक्ताय नमः । ८५२

ॐ हेलाकलितताण्डवायै नमः ।

ॐ हेलाकलितताण्डवाय नमः । ८५३

ॐ अपर्यन्तायै नमः ।

ॐ अपर्यन्ताय नमः । ८५४

ॐ अपरिच्छेद्यायै नमः ।

ॐ अपरिच्छेद्याय नमः । ८५५

ॐ अगोचरायै नमः ।

ॐ अगोचराय नमः । ८५६

ॐ रुग्विमोचकायै नमः ।

ॐ रुग्विमोचकाय नमः । ८५७

ॐ निरंशायै नमः ।

ॐ निरंशाय नमः । ८५८

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ॐ निगमानन्दायै नमः ।

ॐ निगमानन्दाय नमः । ८५९

ॐ निरानन्दायै नमः ।

ॐ निरानन्दाय नमः । ८६०

ॐ निदानभुवे नमः ।

ॐ निदानभुवे नमः । ८६१

ॐ आदिभूतायै नमः ।

ॐ आदिभूताय नमः । ८६२

ॐ महाभूतायै नमः ।

ॐ महाभूताय नमः । ८६३

ॐ श्वेच्छाकलितविग्रहायै नमः ।

ॐ श्वेच्छाकलितविग्रहाय नमः । ८६४

ॐ निस्पन्दायै नमः ।

ॐ निस्पन्दाय नमः । ८६५

ॐ प्रत्ययानन्दायै नमः ।

ॐ प्रत्ययानन्दाय नमः । ८६६

ॐ निर्निमेषायै नमः ।

ॐ निर्निमेषाय नमः । ८६७

ॐ निरन्तरायै नमः ।

ॐ निरन्तराय नमः । ८६८

ॐ प्रबुद्धायै नमः ।

ॐ प्रबुद्धाय नमः । ८६९

ॐ अपरमोदारायै नमः ।

ॐ अपरमोदाराय नमः । ८७०

ॐ परमानन्दसागरायै नमः ।

ॐ परमानन्दसागराय नमः । ८७१

ॐ संवित्सारायै नमः ।

ॐ संवित्साराय नमः । ८७२

ॐ कलापूर्णायै नमः ।

ॐ कलापूर्णाय नमः । ८७३

ॐ सुरासुरनमस्कृतायै नमः ।

ॐ सुरासुरनमस्कृताय नमः । ८७४

ॐ निर्वाणदायै नमः ।

ॐ निर्वाणदाय नमः । ८७५

ॐ निर्वृतिस्थायै नमः ।

ॐ निर्वृतिस्थाय नमः । ८७६

ॐ निर्वैरायै नमः ।

ॐ निर्वैराय नमः । ८७७

ॐ निरुपाधिकायै नमः ।

ॐ निरुपाधिकाय नमः । ८७८

ॐ आभास्वरायै नमः ।

ॐ आभास्वराय नमः । ८७९

ॐ परन्तत्वाय नमः ।

ॐ परन्तत्वाय नमः । ८८०

ॐ आदिमायै नमः ।

ॐ आदिमाय नमः । ८८१

ॐ पेशलायै नमः ।

ॐ पेशलाय नमः । ८८२

ॐ पवये नमः ।

ॐ पवये नमः । ८८३

ॐ संशान्तसर्वसङ्कल्पायै नमः ।

ॐ संशान्तसर्वसङ्कल्पाय नमः । ८८४

ॐ संसदीशायै नमः ।

ॐ संसदीशाय नमः । ८८५

ॐ सदोदितायै नमः ।

ॐ सदोदिताय नमः । ८८६

ॐ भावाभावविनिर्मुक्तायै नमः ।

ॐ भावाभावविनिर्मुक्ताय नमः । ८८७

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ भारूपायै नमः ।

ॐ भारूपाय नमः । ८८८

ॐ भावितायै नमः ।

ॐ भाविताय नमः । ८८९

ॐ भरायै नमः ।

ॐ भराय नमः । ८९०

ॐ सर्वातीतायै नमः ।

ॐ सर्वातीताय नमः । ८९१

ॐ सारतरायै नमः ।

ॐ सारतराय नमः । ८९२

ॐ साम्बायै नमः ।

ॐ साम्बाय नमः । ८९३

ॐ सारस्वतप्रदायै नमः ।

ॐ सारस्वतप्रदाय नमः । ८९४

ॐ सर्वकृते नमः ।

ॐ सर्वकृते नमः । ८९५

ॐ सर्वहृदे नमः ।

ॐ सर्वहृदे नमः । ८९६

ॐ सर्वमय्यै नमः ।

ॐ सर्वमयाय नमः । ८९७

ॐ सत्वावलम्बकायै नमः ।

ॐ सत्वावलम्बकाय नमः । ८९८

ॐ केवलायै नमः ।

ॐ केवलाय नमः । ८९९

ॐ केशवायै नमः ।

ॐ केशवाय नमः । ९०० ।

ॐ केळीकर्यै नमः ।

ॐ केळीकराय नमः । ९०१

ॐ केवलनायकायै नमः ।

ॐ केवलनायकाय नमः । ९०२

ॐ इच्चानिच्चाविरहितायै नमः ।

ॐ इच्चानिच्चाविरहिताय नमः । ९०३

ॐ विहारिण्यै नमः ।

ॐ विहारिणे नमः । ९०४

ॐ वीर्यवर्धनायै नमः ।

ॐ वीर्यवर्धनाय नमः । ९०५

ॐ विजिघत्सायै नमः ।

ॐ विजिघत्साय नमः । ९०६

ॐ विगतभिये नमः ।

ॐ विगतभिये नमः । ९०७

ॐ विपिपासायै नमः ।

ॐ विपिपासाय नमः । ९०८

ॐ विभावनायै नमः ।

ॐ विभावनाय नमः । ९०९

ॐ विश्रान्तिभुवे नमः ।

ॐ विश्रान्तिभुवे नमः । ९१०

ॐ विवसनायै नमः ।

ॐ विवसनाय नमः । ९११

ॐ विघ्नहत्र्यै नमः ।

ॐ विघ्नहत्रे नमः । ९१२

ॐ विबोधकायै नमः ।

ॐ विबोधकाय नमः । ९१३

ॐ वीरप्रियायै नमः ।

ॐ वीरप्रियाय नमः । ९१४

ॐ वीतभयायै नमः ।

ॐ वीतभयाय नमः । ९१५

ॐ विन्ध्यदर्पविनाशिन्यै नमः ।

ॐ विन्ध्यदर्पविनाशिनाय नमः । ९१६

ॐ वेताळनटनप्रीतायै नमः ।

ॐ वेताळनटनप्रीताय नमः । ९१७

ॐ वेतण्डत्वक्कृताम्बरायै नमः ।

ॐ वेतण्डत्वक्कृताम्बराय नमः । ९१८

ॐ वेलातिलङ्घिकरुणायै नमः ।

ॐ वेलातिलङ्घिकरुणाय नमः । ९१९

ॐ विलासिन्यै नमः ।

ॐ विलासिने नमः । ९२०

ॐ विक्रमोन्नतायै नमः ।

ॐ विक्रमोन्नताय नमः । ९२१

ॐ वैराग्यशेवधये नमः ।

ॐ वैराग्यशेवधये नमः । ९२२

ॐ विश्वभोक्त्र्यै नमः ।

ॐ विश्वभोक्त्रे नमः । ९२३

ॐ सर्वोर्ध्वसंस्थितायै नमः ।

ॐ सर्वोर्ध्वसंस्थिताय नमः । ९२४

ॐ महाकर्त्र्यै नमः ।

ॐ महाकर्त्रे नमः । ९२५

ॐ माहाभोक्त्र्यै नमः ।

ॐ महाभोक्त्रे नमः । ९२६

ॐ महासंविन्मय्यै नमः ।

ॐ महासंविन्मयाय नमः । ९२७

ॐ मधुने नमः ।

ॐ मधुने नमः । ९२८

ॐ मनोवचोभिरग्राह्यायै नमः ।

ॐ मनोवचोभिरग्राह्याय नमः । ९२९

ॐ महाबिलकृतालयायै नमः ।

ॐ महाबिलकृतालयाय नमः । ९३०

ॐ अनहङ्कृत्यै नमः ।

ॐ अनहङ्कृतये नमः । ९३१

ॐ अच्छेद्यायै नमः ।

ॐ अच्छेद्याय नमः । ९३२

ॐ स्वानन्दैकघनाकृतये नमः ।

ॐ स्वानन्दैकघनाकृतये नमः । ९३३

ॐ संवर्ताग्न्युदरायै नमः ।

ॐ संवर्ताग्न्युदराय नमः । ९३४

ॐ सर्वान्तरस्थायै नमः ।

ॐ सर्वान्तरस्थाय नमः । ९३५

ॐ सर्वदुर्ग्रहायै नमः ।

ॐ सर्वदुर्ग्रहाय नमः । ९३६

ॐ सम्पन्नायै नमः ।

ॐ सम्पन्नाय नमः । ९३७

ॐ सङ्क्रमायै नमः ।

ॐ सङ्क्रमाय नमः । ९३८

ॐ सत्रिण्यै नमः ।

ॐ सत्रिणे नमः । ९३९

ॐ सन्दोग्ध्र्यै नमः ।

ॐ सन्दोग्ध्रे नमः । ९४०

ॐ सकलोर्जितायै नमः ।

ॐ सकलोर्जिताय नमः । ९४१

ॐ सम्प्रवृद्धायै नमः ।

ॐ सम्प्रवृद्धाय नमः । ९४२

ॐ सन्निकृष्टायै नमः ।

ॐ सन्निकृष्टाय नमः । ९४३

ॐ संविमृष्टायै नमः ।

ॐ संविमृष्टाय नमः । ९४४

ॐ समग्रदृशे नमः ।

ॐ समग्रदृशे नमः । ९४५

ॐ संयमस्थायै नमः ।

ॐ संयमस्थाय नमः । ९४६

ॐ संहृदिस्थायै नमः ।

ॐ संहृदिस्थाय नमः । ९४७

ॐ सम्प्रविष्टायै नमः ।

ॐ सम्प्रविष्टाय नमः । ९४८

ॐ समुत्सुकायै नमः ।

ॐ समुत्सुकाय नमः । ९४९

ॐ सम्प्रहृष्टायै नमः ।

ॐ सम्प्रहृष्टाय नमः । ९५०

ॐ सन्निविष्टायै नमः ।

ॐ सन्निविष्टाय नमः । ९५१

ॐ संस्पष्टायै नमः ।

ॐ संस्पष्टाय नमः । ९५२

ॐ सम्प्रमर्दिन्यै नमः ।

ॐ सम्प्रमर्दनाय नमः । ९५३

ॐ सूत्रभूतायै नमः ।

ॐ सूत्रभूताय नमः । ९५४

ॐ स्वप्रकाशायै नमः ।

ॐ स्वप्रकाशाय नमः । ९५५

ॐ समशीलायै नमः ।

ॐ समशीलाय नमः । ९५६

ॐ सदादयायै नमः ।

ॐ सदादयाय नमः । ९५७

ॐ सत्वसंस्थायै नमः ।

ॐ सत्वसंस्थाय नमः । ९५८

ॐ सुषुप्तिस्थायै नमः ।

ॐ सुषुप्तिस्थाय नमः । ९५९

ॐ सुतल्पायै नमः ।

ॐ सूतल्पाय नमः । ९६०

ॐ सत्स्वरूपकायै नमः ।

ॐ सत्स्वरूपकाय नमः । ९६१

ॐ सङ्कल्पोल्लासनिर्मुक्तायै नमः ।

ॐ सङ्कल्पोल्लासनिर्मुक्ताय नमः । ९६२

ॐ सामनीरागचेतनायै नमः ।

ॐ सामनीरागचेतनाय नमः । ९६३

ॐ आदित्यवर्णायै नमः ।

ॐ आदित्यवर्णाय नमः । ९६४

ॐ सञ्ज्योतिषे नमः ।

ॐ सञ्ज्योतिषे नमः । ९६५

ॐ सम्यग्दर्शनतत्परायै नमः ।

ॐ सम्यग्दर्शनतत्पराय नमः । ९६६

ॐ महातात्पर्यनिलयायै नमः ।

ॐ महातात्पर्यनिलयाय नमः । ९६७

ॐ प्रत्यग्ब्रह्मैक्यनिश्चयायै नमः ।

ॐ प्रत्यग्ब्रह्मैक्यनिश्चयाय नमः । ९६८

ॐ प्रपञ्चोल्लसनिर्मुक्तायै नमः ।

ॐ प्रपञ्चोल्लसनिर्मुक्ताय नमः । ९६९

ॐ प्रत्यक्षायै नमः ।

ॐ प्रत्यक्षाय नमः । ९७०

ॐ प्रतिभात्मिकायै नमः ।

ॐ प्रतिभात्मकाय नमः । ९७१

ॐ प्रवेगायै नमः ।

ॐ प्रवेगाय नमः । ९७२

ॐ प्रमदार्धाङ्गायै नमः ।

ॐ प्रमदार्धाङ्गाय नमः । ९७३

ॐ प्रनर्तनपरायणायै नमः ।

ॐ प्रनर्तनपरायणाय नमः । ९७४

ॐ योगयोनये नमः ।

ॐ योगयोनये नमः । ९७५

ॐ ययाभूतायै नमः ।

ॐ ययाभूताय नमः । ९७६

ॐ यक्षगन्धर्ववन्दितायै नमः ।

ॐ यक्षगन्धर्ववन्दिताय नमः । ९७७

ॐ जटिलायै नमः ।

ॐ जटिलाय नमः । ९७८

ॐ चटुलापाङ्गायै नमः ।

ॐ चटुलापाङ्गाय नमः । ९७९

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ महानटनलम्पटायै नमः ।

ॐ महानटनलम्पटाय नमः । ९८०

ॐ पाटलांशवे नमः ।

ॐ पाटलांशवे नमः । ९८१

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ पटुतरायै नमः ।

ॐ पटुतराय नमः । ९८२

ॐ पारिजातद्रुमूलगायै नमः ।

ॐ पारिजातद्रुमूलगाय नमः । ९८३

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ पापाटवीबृह्मद्भानवे नमः ।

ॐ पापाटवीबृह्मद्भानवे नमः । ९८४

ॐ भानुमत्कोटिकोटिभायै नमः ।

ॐ भानुमत्कोटिकोटिभाय नमः । ९८५

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ कोटिकन्दर्पसौभाग्यसुन्दर्यै नमः ।

ॐ कोटिकन्दर्पसौभाग्यसुन्दराय नमः । ९८६

ॐ मधुरस्मितायै नमः ।

ॐ मधुरस्मिताय नमः । ९८७

ॐ लास्यामृताब्धिलहरीपूर्णेन्दवे नमः ।

ॐ लास्यामृताब्धिलहरीपूर्णेन्दवे नमः । ९८८

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ पुण्यगोचरायै नमः ।

ॐ पुण्यगोचराय नमः । ९८९

ॐ रुद्राक्षस्रङ्ग्मयाकल्पायै नमः ।

ॐ रुद्राक्षस्रङ्ग्मयाकल्पाय नमः । ९९०

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ कह्लारकिरणद्युतये नमः ।

ॐ कह्लारकिरणद्युतये नमः । ९९१

ॐ अमूल्यमणिसम्भास्वत्फणीन्द्रकरकङ्कणायै नमः ।

ॐ अमूल्यमणिसम्भास्वत्फणीन्द्रकरकङ्कणाय नमः । ९९२

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ चिच्छक्तिलोचनानन्दकन्दलायै नमः ।

ॐ चिच्छक्तिलोचनानन्दकन्दलाय नमः । ९९३

ॐ कुन्दपाण्डुरायै नमः ।

ॐ कुन्दपाण्डुराय नमः । ९९४

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ अगम्यमहिमाम्भोधये नमः ।

ॐ अगम्यमहिमाम्भोधये नमः । ९९५

श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन

ॐ अनौपौम्ययशोनिधये नमः ।

ॐ अनौपौम्ययशोनिधये नमः । ९९६

ॐ चिदानन्दनटाधीश्यै नमः ।

ॐ चिदानन्दनटाधीशाय नमः । ९९७

ॐ चित्केवलवपुर्धरायै नमः ।

ॐ चित्केवलवपुर्धराय नमः । ९९८

ॐ चिदेकरससम्पूर्णश्रीशिवायै नमः ।

ॐ चिदेकरससम्पूर्णश्रीशिवाय नमः । ९९९

ॐ श्रीमहेश्वर्यै नमः ।

ॐ श्रीमहेश्वराय नमः । १००० ।

॥ इति श्री नातेश्वरिनातेश्वारा सम्मेलन सम्पूर्ण ॥

इस अत्यंत विस्तृत, दार्शनिक और ज्ञानवर्धक लेख में हम गहराई से जानेंगे कि श्री नटेश्वरी-नटेश्वर सम्मेलन का तात्विक और आध्यात्मिक महत्व क्या है, इसके नित्य पाठ/ध्यान से जीवन में कौन से अकल्पनीय चमत्कार होते हैं, और इसे सिद्ध करने की प्रामाणिक वैदिक/तांत्रिक साधना विधि, नियम व सावधानियां क्या हैं।

1. श्री नटेश्वरी-नटेश्वर सम्मेलन का दार्शनिक और आध्यात्मिक महत्व

इस महान सम्मेलन (मिलन) की प्रचंड ऊर्जा, इसके पीछे छिपे अद्वैत दर्शन और ‘शिव-शक्ति तत्व’ को समझने के लिए हमें तांडव-लास्य के रहस्य, ब्रह्मांडीय संतुलन और नाद-विज्ञान को गहराई से समझना होगा।

तांडव और लास्य का संतुलन (Balance of Masculine & Feminine)

भगवान शिव का ‘तांडव’ विशुद्ध ऊर्जा, संहार, वैराग्य और पौरुष (Masculine energy) का प्रतीक है। इसके विपरीत माता नटेश्वरी (पार्वती/काली) का ‘लास्य’ नृत्य कोमलता, सृजन, प्रेम, सौंदर्य और मातृत्व (Feminine energy) का प्रतीक है। यदि केवल तांडव हो, तो सृष्टि भस्म हो जाएगी; यदि केवल लास्य हो, तो सृष्टि मोह-माया में उलझ जाएगी। इन दोनों का ‘सम्मेलन’ (मिलन) ही जीवन का सच्चा संतुलन है। जब साधक इस स्तुति का गान करता है, तो उसके भीतर का पौरुष और स्त्री-तत्व (Left and Right Brain / Ida and Pingala Nadis) संतुलित हो जाते हैं। व्यक्ति कठोर परिस्थितियों में मजबूत रहता है, परंतु हृदय से अत्यंत कोमल और प्रेमपूर्ण बना रहता है।

कुण्डलिनी जागरण और सहस्रार का मिलन (The Ultimate Yogic Union)

तंत्र और कुण्डलिनी योग के अनुसार, माता नटेश्वरी (शक्ति) हमारे शरीर के सबसे निचले चक्र ‘मूलाधार’ में कुण्डलिनी के रूप में सोई हुई हैं, और भगवान नटेश्वर (शिव) मस्तिष्क के सर्वोच्च चक्र ‘सहस्रार’ में विराजमान हैं। जब साधक इस ‘सम्मेलन’ का पाठ या ध्यान करता है, तो मूलाधार की शक्ति जाग्रत होकर नृत्य करती हुई ऊपर उठती है और सहस्रार में शिव से एकाकार हो जाती है। इसी मिलन को योग की अंतिम अवस्था ‘समाधि’ कहा जाता है। यह स्तुति कुण्डलिनी को सहज और आनंदमयी तरीके से जाग्रत करने का अमोघ अस्त्र है।

‘नाद-ब्रह्म’ और सृष्टि का स्पंदन (Cosmic Rhythm)

सृष्टि की हर चीज़ गतिमान है—इलेक्ट्रॉन से लेकर आकाशगंगाओं (Galaxies) तक। यह सब शिव और शक्ति का ही ब्रह्मांडीय नृत्य है। भगवान शिव के डमरू से निकला ‘नाद’ (Sound) और माता के नूपुर (पायल) की ध्वनि जब मिलती है, तो उसे ‘अनहत नाद’ कहते हैं। इस पाठ के मंत्र वास्तव में वही ब्रह्मांडीय आवृत्तियां (Cosmic Frequencies) हैं। जब साधक पूर्ण लय के साथ इसका पाठ करता है, तो उसका शरीर और मन ब्रह्मांड की लय (Frequency of the Universe) के साथ जुड़ जाता है (Syncs up)।

2. श्री नटेश्वरी-नटेश्वर सम्मेलन पाठ के अकल्पनीय और चमत्कारिक लाभ (Benefits)

भगवान नटेश्वर और माता नटेश्वरी साक्षात आनंद, कला, दांपत्य सुख, और मोक्ष के प्रदाता हैं। जो साधक पूर्ण श्रद्धा, सात्विकता, पवित्रता और एक निश्छल हृदय के साथ प्रतिदिन या विशेष पर्वों पर इस दिव्य स्तुति का सस्वर पाठ या मानसिक ध्यान करता है, उसे जीवन में निम्नलिखित अमोघ और चमत्कारी लाभ प्राप्त होते हैं:

दांपत्य जीवन और प्रेम संबंधों के लाभ (Marital Bliss & Harmony)

  • दांपत्य कलह और कड़वाहट का नाश: जो पति-पत्नी हमेशा झगड़ते रहते हैं, जिनके बीच संवाद खत्म हो गया है या जो अलगाव (Divorce) की कगार पर पहुँच गए हैं, उनके लिए यह स्तुति साक्षात अमृत है। इसके प्रभाव से दोनों के हृदयों का ‘अहंकार’ पिघल जाता है और शिव-पार्वती के समान अगाध प्रेम व समझ (Understanding) विकसित होती है।

  • सुयोग्य जीवनसाथी की प्राप्ति: विवाह में हो रहे विलंब या मांगलिक दोषों को दूर करने के लिए यह पाठ अचूक है। यह साधक के आभामंडल को इतना शुद्ध बना देता है कि एक शिव-भक्त और संस्कारी जीवनसाथी स्वतः ही जीवन में आकर्षित हो जाता है।

मनोवैज्ञानिक, मानसिक और शारीरिक लाभ (Mental & Physical Well-being)

  • मानसिक शांति और डिप्रेशन से मुक्ति: आधुनिक जीवन के भयंकर अवसाद (Depression), तनाव और चिंताओं को यह पाठ पूरी तरह समाप्त कर देता है। भगवान का नृत्य मन के ठहरे हुए और सड़े हुए विचारों को गति देकर बाहर निकाल फेंकता है, जिससे हृदय में असीम आनंद की अनुभूति होती है।

  • शारीरिक रोगों और ‘दोषों’ का शमन: शरीर में वात, पित्त और कफ का असंतुलन ही रोगों का कारण है। यह पाठ शरीर के चक्रों को संतुलित कर रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को बढ़ाता है और स्नायु तंत्र (Nervous system) को असीम शीतलता प्रदान करता है।

कला, रचनात्मकता और आध्यात्मिक लाभ (Success in Arts & Spirituality)

  • कला, संगीत और नृत्य में अजेय सफलता: जो लोग कला के क्षेत्र (नृत्य, संगीत, गायन, अभिनय, लेखन या किसी भी रचनात्मक कार्य) से जुड़े हैं, उनके लिए यह स्तुति साक्षात सरस्वती और नटराज का आशीर्वाद है। यह ‘क्रिएटिव ब्लॉक’ (Creative Block) को हटाकर साधक को ‘फ्लो स्टेट’ (Flow State) में ले जाती है।

  • आत्मज्ञान और सिद्धियों की प्राप्ति: यह पाठ अज्ञान के पर्दे को हटाकर साक्षात परब्रह्म का दर्शन कराता है। साधक को लौकिक सुखों के साथ-साथ आध्यात्मिक सिद्धियां और अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है।

3. श्री नटेश्वरी-नटेश्वर सम्मेलन की प्रामाणिक साधना और पाठ विधि (Sadhana Vidhi)

शिव-शक्ति के इस दिव्य मिलन की उपासना अत्यंत सौम्य, आनंदमयी, सात्विक और प्रेम से परिपूर्ण होती है। इस सिद्ध स्तोत्र का पूर्ण और त्वरित फल प्राप्त करने के लिए आगम ग्रंथों में बताई गई इस प्रामाणिक विधि का पालन करना अत्यंत चमत्कारी होता है:

उत्तम दिन, तिथि और मुहूर्त

  • दिन: भगवान शिव और माता शक्ति की संयुक्त आराधना के लिए सोमवार (Monday – शिव का दिन) और शुक्रवार (Friday – शक्ति का दिन) सबसे श्रेष्ठ और सर्वाधिक जाग्रत माने जाते हैं।

  • विशेष तिथियां: महाशिवरात्रि, प्रदोष व्रत (जो कि नटराज के नृत्य का विशेष समय है), नवरात्रि की अष्टमी, वसंत पंचमी, और श्रावण (सावन) मास का प्रत्येक दिन इस साधना के लिए हज़ारों गुणा अधिक फलदायी होता है।

  • समय: पाठ का सबसे उत्तम समय ‘प्रदोष काल’ (सूर्यास्त के 45 मिनट पूर्व से 45 मिनट बाद तक का समय) होता है। शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष काल में ही शिव-शक्ति कैलाश पर नृत्य करते हैं। प्रातःकाल ‘ब्रह्म मुहूर्त’ में भी इसका पाठ अमोघ है।

दिशा, आसन और वस्त्र का विधान

  • दिशा: पाठ करते समय अपना मुख सदैव पूर्व (East – नवीन आरंभ के लिए) या उत्तर (North – कैलाश की दिशा व आध्यात्मिक उन्नति के लिए) की ओर रखें।

  • आसन: बैठने के लिए सफेद, लाल (Red), या कुशा के आसन का प्रयोग करें। (सफेद शिव का और लाल शक्ति का प्रतीक है)।

  • वस्त्र: स्नान करके पूर्ण रूप से स्वच्छ हो जाएं। पूजा में श्वेत, लाल, या हल्के गुलाबी रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ परिणाम देता है।

पीठ की स्थापना और पूजन सामग्री (Setup)

सामग्री / विधान विवरण
प्रतिमा / चित्र एक स्वच्छ लकड़ी की चौकी पर लाल या सफेद कपड़ा बिछाकर भगवान शिव और माता पार्वती (अर्द्धनारीश्वर या नटराज-नटेश्वरी स्वरूप) का अत्यंत सुंदर चित्र या मूर्ति स्थापित करें। यदि नर्मदेश्वर शिवलिंग हो, तो उसे भी अवश्य रखें।
दीपक भगवान के समक्ष गाय के शुद्ध घी का या तिल के तेल का एक अखंड दीप प्रज्वलित करें। गुलाब, मोगरा या चंदन की अत्यंत सुगंधित धूप जलाएं।
तिलक और शृंगार भगवान शिव (नटेश्वर) को श्वेत चंदन/भस्म और माता पार्वती (नटेश्वरी) को कुमकुम/सिंदूर का तिलक लगाएं। स्वयं भी मस्तक पर चंदन या कुमकुम धारण करें।
पुष्प और बिल्वपत्र उन्हें लाल और सफेद दोनों प्रकार के पुष्प (गुलाब, मोगरा, चमेली) एक साथ (सम्मेलित रूप में) अर्पित करें। शिवलिंग पर बिल्वपत्र (Bel Patra) अवश्य चढ़ाएं।

दृढ़ संकल्प (Sankalpa)

पाठ से पूर्व दाएँ हाथ में थोड़ा सा जल, अक्षत (चावल) और एक सुगंधित पुष्प लें। अपना नाम, गोत्र और पाठ का स्पष्ट उद्देश्य बोलें (उदाहरण: “हे ब्रह्मांड के अधिपति श्री नटेश्वर-नटेश्वरी, मैं अपने जीवन से समस्त कला-बाधाओं, दांपत्य कलह, रोगों और अज्ञान के नाश, अखंड सुख-शांति, और आपकी अहैतुकी भक्ति के लिए श्री नटेश्वरी-नटेश्वर सम्मेलन का 21/41 दिन तक (या नित्य) पाठ/अर्चन करूँगा/करूँगी”), और फिर जल ज़मीन पर छोड़ दें।

|| श्री नटेश्वरी-नटेश्वर सम्मेलन स्तुति || (मूल पाठ)

(यहाँ आप अपनी स्तुति/स्तोत्र की पुस्तक या ग्रंथ से मूल संस्कृत श्लोकों का पाठ आरंभ करें।)

पाठ और ध्यान विधि (Chanting Method)

  • सर्वप्रथम विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश और माता सरस्वती का मानसिक ध्यान कर उन्हें साष्टांग प्रणाम करें।

  • नंदीश्वर भगवान को मानसिक रूप से प्रणाम करें (क्योंकि नंदी ही शिव के नृत्य में मृदंग बजाते हैं)।

  • मूल मंत्र “ॐ नमः शिवाय” या “ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः” की कम से कम 11 बार या एक माला (रुद्राक्ष की माला पर) जप करें।

  • अब पूर्ण एकाग्रता, असीम प्रेम भाव और हृदय में आनंद (बिना किसी तनाव के, एक नृत्य जैसी लय में) के साथ स्तुति का सस्वर पाठ आरंभ करें।

  • सहस्रार्चन/पुष्पार्चन विधि: यदि आप अत्यंत शीघ्र फल (विशेषकर दांपत्य सुख या कला में सफलता) चाहते हैं, तो स्तुति के प्रत्येक मुख्य श्लोक या नाम के उच्चारण के साथ भगवान के चित्र या शिवलिंग पर एक लाल और एक सफेद पुष्प (या पंखुड़ी) एक साथ अर्पित करें। यह शिव और शक्ति के एकीकरण (सम्मेलन) का अचूक तांत्रिक प्रयोग है।

क्षमा प्रार्थना और सात्विक भोग (Naivedya)

पाठ पूर्ण होने के बाद शिव-शक्ति को गाय के दूध की खीर (केसर युक्त), पंचामृत, सफेद मिष्ठान्न, शहद या ऋतुफल का सात्विक भोग लगाएं। अंत में कर्पूर से भगवान की आरती (ॐ जय शिव ओंकारा…) गाएं और साष्टांग दंडवत प्रणाम करते हुए पूजा-पाठ में हुई किसी भी अशुद्धि या उच्चारण की भूल के लिए क्षमा प्रार्थना अवश्य करें।

4. साधना के अत्यंत संवेदनशील और अनिवार्य नियम (Strict Rules for Sadhana)

शिव-शक्ति का यह स्वरूप परम मांगलिक, सात्विक और प्रेम व संतुलन का प्रतीक है। इनकी साधना में बाहरी आडंबर की नहीं, बल्कि हृदय की निर्मलता और आचरण की पवित्रता की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। इस साधना का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए इन नियमों का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य है:

  1. स्त्रियों और जीवनसाथी का सर्वोच्च सम्मान (The Ultimate Rule): यह इस साधना का सबसे बड़ा और अनिवार्य नियम है। शिव ने शक्ति को अपने वाम अंग में स्थान दिया है (अर्द्धनारीश्वर)। जो व्यक्ति अपनी पत्नी, प्रेमिका या घर की अन्य स्त्रियों का अपमान करता है, उन पर हाथ उठाता है या उन्हें अपशब्द कहता है, उस पर भगवान नटेश्वर कभी प्रसन्न नहीं होते। जीवनसाथी को साक्षात शिव/शक्ति का रूप मानें।

  2. पूर्ण सात्विक जीवन (Pure Sattvic Diet): अनुष्ठान के दौरान (विशेषकर 21 या 41 दिन के संकल्प काल में) घर में और अपने आहार में मांस, मदिरा, अंडे का पूर्णतः त्याग कर देना चाहिए। तामसिक भोजन आध्यात्मिक और प्रेम की ऊर्जा को नष्ट कर देता है और शरीर के चक्रों (Chakras) में अवरोध (Blockage) पैदा करता है।

  3. कला और श्रम का सम्मान: नटराज कला के देवता हैं। जो व्यक्ति कलाकारों का, संगीतकारों का या किसी भी प्रकार का सृजन करने वालों का अपमान करता है या कला की चोरी (Plagiarism) करता है, उसे इस साधना का फल नहीं मिलता। अपने कार्य (Work) को ही पूजा मानें।

  4. समता का भाव (Equanimity): जीवन में सुख आए या दुख, सफलता मिले या असफलता—दोनों में शिव के समान समता (Balance) बनाए रखना इस साधना का मुख्य नियम है। अत्यधिक उत्साह या अत्यधिक निराशा से बचें।

  5. ब्रह्मचर्य का पालन (Celibacy): किसी विशेष अनुष्ठान के दौरान साधक को शारीरिक और मानसिक रूप से पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। अश्लील विचारों से स्वयं को दूर रखें।

5. उपासना में ध्यान रखने योग्य विशेष सावधानियां (Precautions)

श्री नटेश्वरी-नटेश्वर सम्मेलन के पाठ में कुछ विशेष सावधानियां बरतनी चाहिए, ताकि साधना निर्विघ्न संपन्न हो और कोई विपरीत प्रभाव न पड़े:

  • तुलसी दल का निषेध: भगवान शिव की पूजा में ‘तुलसी’ (Tulsi leaves) का प्रयोग सर्वथा वर्जित माना गया है। उन्हें केवल बिल्वपत्र, धतूरा और पुष्प ही अर्पित करें।

  • गलत मंशा से प्रयोग (No Vashikaran/Revenge): यह स्तुति विशुद्ध प्रेम, मोक्ष और दांपत्य शांति के लिए है। इस पवित्र पाठ का प्रयोग कभी भी किसी स्त्री या पुरुष का बलपूर्वक ‘वशीकरण’ (Forced Vashikaran) करने, किसी का घर तोड़ने, या अपना व्यक्तिगत बदला लेने की नीयत से नहीं करना चाहिए। शिव न्यायकारी हैं; गलत और स्वार्थी मंशा से किया गया पाठ साधक का ही अहित करेगा।

  • शारीरिक पवित्रता (Sutak/Patak): बिना स्नान किए, गंदे वस्त्र पहनकर, जूठे मुंह, या अपवित्र अवस्था (जन्म-मृत्यु के सूतक/पातक) में भगवान की मूर्ति, चित्र या स्तोत्र की पुस्तक का स्पर्श सर्वथा वर्जित है। महिलाओं को अपने मासिक धर्म (Menstruation) के दौरान इस पाठ से पूर्णतः दूर रहना चाहिए; वे केवल मन ही मन शिव-शक्ति का स्मरण कर सकती हैं।

  • अहंकार का त्याग: कला या ज्ञान प्राप्त होने पर ‘मैं’ (Ego) का भाव नहीं आना चाहिए। “यह कला मेरी नहीं, बल्कि भीतर बैठे नटराज की है”, यह भाव सदा बनाए रखें।

6. आधुनिक युग में श्री नटेश्वरी-नटेश्वर सम्मेलन की असीम प्रासंगिकता (Relevance in Modern Era)

आज का आधुनिक युग अत्यधिक ‘गति’ (Speed), ‘स्वार्थ’, ‘अस्थिरता’ (Instability in Relationships), और ‘टॉक्सिक वर्क कल्चर’ (Toxic Work Culture) का युग है। लोग भौतिक सुख-सुविधाओं की अंधी दौड़ में दिन-रात भाग रहे हैं, लेकिन जीवन से ‘रस’ (Joy) और ‘रचनात्मकता’ (Creativity) पूरी तरह गायब हो चुकी है।

आज के समाज में विवाह टूटने (Divorce) की दर बहुत अधिक हो गई है। पति-पत्नी के बीच ‘कंपटीशन’ (Competition) आ गया है, जबकि विवाह ‘कम्पलीशन’ (Completion – एक दूसरे को पूरा करने) का नाम है। अत्यधिक डिजिटल जीवनशैली ने मनुष्य को डिप्रेशन (Depression) और एंग्जायटी का मरीज बना दिया है।

‘श्री नटेश्वरी-नटेश्वर सम्मेलन’ आधुनिक इंसान के इन्ही ‘रिश्तों के संकट’, ‘रचनात्मक शून्यता’, और ‘असंतुलन’ का सबसे शक्तिशाली आध्यात्मिक और मनोवैज्ञानिक उपचार (Psychological Healing) है:

  1. कार्य-जीवन संतुलन (Work-Life Balance): तांडव (कार्य/Action) और लास्य (शांति/Relaxation) का संतुलन ही वर्क-लाइफ बैलेंस है। यह पाठ आपको सिखाता है कि ऑफिस के तनाव (Tandava) को घर तक न लाएं, और घर पर परिवार के साथ लास्य (प्रेम) का आनंद लें।

  2. अहंकार का शमन (Destroying Ego in Relationships): शिव-शक्ति का मिलन हमें सिखाता है कि रिश्ते में कोई छोटा या बड़ा नहीं होता (अर्द्धनारीश्वर)। इस पाठ से पति और पत्नी दोनों के भीतर से अहंकार खत्म होकर ‘हम’ (We) की भावना जाग्रत होती है, जो आधुनिक विवाहों को बचाने की सबसे बड़ी चाबी है।

  3. फ्लो स्टेट और मेंटल हेल्थ (Flow State & Focus): जब दिमाग तनाव से भर जाता है, तो नटराज का ध्यान मस्तिष्क के ‘ब्रेन फॉग’ को हटाकर एक ऐसी लय (Rhythm) पैदा करता है कि आप अपने काम में डूब जाते हैं (Flow state)। यह डिप्रेशन और ओवरथिंकिंग (Overthinking) का सबसे बड़ा इलाज है।

  4. सौंदर्य और आकर्षण (Magnetic Aura): जब भीतर शिव-शक्ति संतुलित होते हैं, तो साधक के व्यक्तित्व में एक गजब का आकर्षण और आत्मविश्वास आ जाता है। लोग आपकी सकारात्मक ऊर्जा (Positive Vibe) से स्वतः जुड़ने लगते हैं।

Shri Nateshvari Nateshvara Sammelana (श्री नटेश्वरी-नटेश्वर सम्मेलन) केवल संस्कृत शब्दों का एक काव्यात्मक संकलन नहीं है; यह उस परम शिव और जगदम्बा के शाश्वत प्रेम, उनके ब्रह्मांडीय नृत्य और सृष्टि के कण-कण को ऊर्जावान बनाने वाले ‘नाद’ का साक्षात आवाहन है। जब एक साधक अपने सारे लौकिक ज्ञान, अहंकार और चिंताओं को त्यागकर, एक लयबद्ध और आनंदपूर्ण हृदय से इस स्तुति का गान करता है, तो भगवान शिव और माता पार्वती उसके जीवन के सारे बेसुरे तारों को कसकर एक मधुर संगीत में बदल देते हैं।

भगवान नटेश्वर अत्यंत कृपालु और अपने भक्तों को उत्तम दांपत्य सुख, असीम कला व आनंद प्रदान करने वाले साक्षात प्रेम-स्वरूप हैं। जब भी आपको लगे कि विवाह में बहुत कलह हो रहा है, आपका दांपत्य जीवन बिखर रहा है, आपके काम में रुकावटें आ रही हैं, कला में प्रगति रुक गई है, और मन अत्यंत अशांत है, तो सोमवार या शुक्रवार (विशेषकर प्रदोष काल में) लाल-सफेद आसन पर बैठें, घी का दीपक प्रज्वलित करें, शिव-शक्ति को पुष्प अर्पित करें, और पूर्ण हृदय से इस महास्तोत्र का गान करते हुए अपने ‘नटराज-नटेश्वरी’ को पुकारें।

आप स्वयं अनुभव करेंगे कि शिव-शक्ति के इस दिव्य नृत्य के नाद ने आपके जीवन की सारी कड़वाहट और बाधाओं को भस्म कर दिया है, और साक्षात भगवान शिव व माता पार्वती ने आपके जीवन को असीम प्रेम, अखंड दांपत्य सुख, रचनात्मक सफलता, और परम शांति के दिव्य प्रकाश से आलोकित कर दिया है। ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः!

श्री नटेश्वरी-नटेश्वर सम्मेलनः अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. श्री नटेश्वरी-नटेश्वर सम्मेलन क्या है और इसका क्या महत्व है?

श्री नटेश्वरी-नटेश्वर सम्मेलन भगवान शिव (नटराज/नटेश्वर) और माता पार्वती (नटेश्वरी) के परम आनंदमयी ब्रह्मांडीय नृत्य और उनके दिव्य मिलन की एक अत्यंत जाग्रत और रहस्यमयी स्तुति है। इसका महत्व इसलिए सर्वोपरि है क्योंकि यह पाठ जीवन में पुरुष (शिव) और प्रकृति (शक्ति) की ऊर्जा को संतुलित करता है। यह दांपत्य जीवन के कलह को मिटाने, कला व रचनात्मकता में सफलता दिलाने, और कुण्डलिनी जागरण का सबसे सुरक्षित और शक्तिशाली आध्यात्मिक उपाय है।

2. इस स्तुति का पाठ या ध्यान करने से जीवन में कौन सा सबसे बड़ा चमत्कारी लाभ प्राप्त होता है?

इस स्तोत्र का सबसे बड़ा और प्रत्यक्ष लाभ ‘पति-पत्नी के बीच चल रहे गंभीर कलह या तलाक (Divorce) की स्थिति का टलना’ और ‘अखंड दांपत्य सुख की प्राप्ति’ है। इसके नियमित पाठ से साधक के आभामंडल में एक गजब का आकर्षण (Aura) पैदा होता है, डिप्रेशन (तनाव) तुरंत दूर होता है, और नर्तकों, गायकों, लेखकों व कलाकारों को उनके क्षेत्र में अजेय सफलता (वाक्-सिद्धि व कला-सिद्धि) प्राप्त होती है।

3. इस स्तुति का पाठ करने के लिए सप्ताह का कौन सा दिन और समय सर्वोत्तम माना गया है?

भगवान शिव और माता शक्ति की आराधना के लिए ‘सोमवार’ (Monday – शिव का दिन) तथा ‘शुक्रवार’ (Friday – शक्ति और सौंदर्य का दिन) सबसे श्रेष्ठ माने जाते हैं। महाशिवरात्रि, प्रदोष व्रत और सावन के महीने में इसका पाठ अनंत फलदायी होता है। इसका पाठ ‘प्रदोष काल’ (सूर्यास्त से 45 मिनट पहले और बाद का समय) या प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में श्वेत या लाल वस्त्र धारण कर, पूर्व दिशा की ओर मुख करके करना सर्वाधिक उत्तम है।

4. क्या अविवाहित युवा भी सुयोग्य जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए इसका पाठ कर सकते हैं?

जी हाँ, बिल्कुल! अविवाहित युवक-युवतियां, जिनके विवाह में अकारण देरी हो रही है, मांगलिक दोष है, या जो एक सुसंस्कारी और शिव-भक्त जीवनसाथी की कामना रखते हैं, वे पूर्ण श्रद्धा के साथ इस सम्मेलन स्तुति का पाठ कर सकते हैं। यह उनके आभामंडल को शुद्ध करता है और ब्रह्मांडीय ऊर्जा के माध्यम से सही जीवनसाथी को आकर्षित (Law of Attraction) करने में मदद करता है।

5. शिव-शक्ति की इस साधना का सबसे बड़ा और अनिवार्य नियम क्या है?

इस साधना का सबसे बड़ा और अनिवार्य नियम ‘स्त्रियों (पत्नी/जीवनसाथी) का पूर्ण सम्मान’ और ‘अहंकार का त्याग’ है। जो व्यक्ति रिश्तों में धोखा देता है, अपनी पत्नी पर हाथ उठाता है या स्त्रियों का अपमान करता है, उसकी यह पूजा कभी फलित नहीं होती। इसके अतिरिक्त, इस पवित्र पाठ का प्रयोग किसी का बलपूर्वक ‘वशीकरण’ (Forced Vashikaran) करने की दुर्भावना से कभी नहीं करना चाहिए। पूर्ण सात्विकता (मांस-मदिरा का त्याग) और शिव पूजा में तुलसी का निषेध इस साधना के मूलभूत नियम हैं।

"नमस्कार! मैं अमित तिवारी हूँ, और आप मुझे एक 'साधक' के रूप में जान सकते हैं। बचपन से ही सनातन धर्म, तंत्र-मंत्र और आध्यात्मिक साधनाओं ने मुझे अपनी ओर गहराई से आकर्षित किया है। वर्षों के निरंतर अध्ययन, गुरु-कृपा और अपने व्यक्तिगत साधना-अनुभवों से मैंने जो कुछ भी सीखा है, उसे मैं sadhnas.in के माध्यम से आपके साथ साझा कर रहा हूँ। मेरा मुख्य उद्देश्य इंटरनेट पर फैले भ्रम को दूर करके प्रामाणिक, सत्य और शास्त्र-सम्मत जानकारी को बेहद सरल भाषा में आप तक पहुँचाना है। मैं कोई गुरु या उपदेशक नहीं हूँ, बल्कि आप ही की तरह ईश्वर की खोज में निकला एक राही हूँ। मेरी यही कोशिश है कि मेरे अनुभवों और लेखनी से आपकी आध्यात्मिक यात्रा और भी सुगम व सफल हो सके।"

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