अंगारक स्तोत्रम् (संस्कृत) Angarak Stotra Lyrics in Sanskrit: मंगल दोष निवारण, कर्ज मुक्ति और अजेय साहस का अमोघ महास्तोत्रIt takes 12 minutes... to read this article !

नवग्रहों (Nine Planets) के मंत्रिमंडल में सेनापति का दर्जा प्राप्त भगवान ‘मंगल’ (Mars) ऊर्जा, साहस, पराक्रम, रक्त (Blood), और भूमि (Property) के अधिपति हैं। ज्योतिष और वैदिक शास्त्रों में मंगल को अत्यंत उग्र और ‘क्रूर ग्रह’ माना गया है, परंतु वे ही सबसे बड़े रक्षक और ‘ऋणहर्ता’ (कर्ज मिटाने वाले) भी हैं। जब जन्म कुंडली में मंगल नीच का हो, पापी ग्रहों के साथ हो, या ‘मांगलिक दोष’ (Mangal Dosh) बना रहा हो, तो व्यक्ति का जीवन कर्ज, बीमारियों, क्रोध, दुर्घटनाओं और दांपत्य जीवन के कलह से घिर जाता है।

जब ऐसा प्रतीत हो कि मेहनत करने के बावजूद कर्ज का पहाड़ बढ़ता ही जा रहा है, विवाह में लगातार बाधाएं आ रही हैं, और जीवन में हर ओर शत्रु खड़े हैं, तब शास्त्रों में वर्णित ‘अंगारक स्तोत्रम्’ (Angarak Stotram) एक संजीवनी बूटी का कार्य करता है। ‘अंगारक’ मंगल देव का ही एक प्रचंड नाम है, जिसका अर्थ है— ‘दहकते हुए अंगारे के समान लाल और तेजस्वी’।

इस अत्यंत विस्तृत, आध्यात्मिक और ज्ञानवर्धक लेख में हम जानेंगे कि अंगारक (मंगल देव) का जन्म कैसे हुआ, Angarak Stotra Lyrics in Sanskrit के पाठ का मूल रहस्य क्या है, इसके पाठ से भारी कर्ज और मंगल दोष से कैसे मुक्ति मिलती है, और इसे सिद्ध करने की प्रामाणिक वैदिक विधि क्या है।

अंगारक (मंगल देव) का प्राकट्य और उनका ‘भूमि पुत्र’ स्वरूप

अंगारक स्तोत्र की शक्ति को समझने के लिए हमें मंगल देव की उत्पत्ति के रहस्य को जानना होगा। स्कंद पुराण और ब्रह्म वैवर्त पुराण के अनुसार, एक बार भगवान शिव ‘अंधकासुर’ नामक भयंकर राक्षस के साथ युद्ध कर रहे थे। युद्ध अत्यंत भीषण था और भगवान शिव के मस्तक से पसीने की एक बूंद छलक कर पृथ्वी (भूमि) पर गिर पड़ी।

उस पसीने की बूंद के धरती पर गिरते ही एक अत्यंत तेजस्वी, लाल वर्ण (रंग) वाले बालक का जन्म हुआ। चूँकि इस बालक का जन्म भूमि (पृथ्वी माता) के गर्भ से हुआ था, इसलिए इन्हें ‘भौम’ और ‘भूमि-पुत्र’ कहा गया। इस बालक ने काशी (वाराणसी) में भगवान शिव की घोर तपस्या की, जिससे प्रसन्न होकर महादेव ने इन्हें नवग्रहों में ‘मंगल’ (Mangal) का पद प्रदान किया।

अंगार (आग) के समान लाल और उग्र होने के कारण इन्हें ‘अंगारक’ कहा गया, और बुराइयों को नष्ट कर जीवन में मंगल (शुभता) लाने के कारण इन्हें ‘मंगल’ कहा गया। इसलिए, जो भी साधक अंगारक स्तोत्र का पाठ करता है, उस पर साक्षात शिव और पृथ्वी माता दोनों की कृपा होती है।

अंगारक स्तोत्रम् (संस्कृत) | Angarak Stotra Lyrics in Sanskrit (स्तोत्र का मूल भाव और शक्ति)

Angaraka Stotram | अंगारक स्तोत्रम् हिंदी

अंगारकः शक्तिधरो लोहितांगो धरासुतः ।
कुमारो मंगलो भौमो महाकायो धनप्रदः ॥१॥

ऋणहर्ता दृष्टिकर्ता रोगकृत् रोगनाशनः ।
विद्युत्प्रभो व्रणकरः कामदो धनहृत् कुजः ॥२॥

सामगानप्रियो रक्तवस्त्रो रक्तायतेक्षणः।
लोहितो रक्तवर्णश्च सर्वकर्मावबोधकः ॥३॥

रक्तमाल्यधरो हेमकुण्डली ग्रहनायकः ।
नामान्येतानि भौमस्य यः पठेत् सततं नरः ॥४॥

ये भी पढ़ें:  Anadi Kalpeshwar Stotra (अनादि कल्पेश्वर स्तोत्र): महादेव की महास्तुति, Lyrics in Sanskrit, पाठ विधि और अकल्पनीय लाभ

ऋणं तस्य च दौर्भाग्यं दारिद्र्यं च विनश्यति ।
धनं प्राप्नोति विपुलं स्त्रियं चैव मनोरमाम् ॥५॥

वंशोद्योतकरं पुत्रं लभते नात्र संशयः,
योऽर्चयेदह्नि भौमस्य मङ्गलं बहुपुष्पकैः ।
सर्वं नश्यति पीडा च तस्य ग्रहकृता ध्रुवम् ॥६॥

॥ इति श्री अंगारक स्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥

स्तोत्र का मूल भाव (Essence of the Stotra): अंगारक स्तोत्र में मंगल देव के विभिन्न चमत्कारी और सिद्ध नामों का गान किया गया है। महर्षियों द्वारा रचित इस स्तोत्र में मंगल देव की स्तुति करते हुए कहा गया है:

  • “हे अंगारक! हे भूमि-पुत्र! हे ऋणहर्ता! आप अग्नि के समान तेजस्वी हैं, मैं आपको प्रणाम करता हूँ।”

  • “हे कुज (पृथ्वी से जन्मे)! हे रक्ताक्ष (लाल नेत्रों वाले)! मेरे जीवन के सभी प्रकार के कर्जों (Rin) का नाश करें।”

  • “हे महाकाय! मेरे शत्रुओं का मर्दन करें, मुझे रोगों से मुक्त करें और मुझे भूमि व ऐश्वर्य का सुख प्रदान करें।”

संस्कृत में रचे गए इस स्तोत्र के शब्द इतने ऊर्जावान हैं कि जब कोई साधक सस्वर इसका पाठ करता है, तो उसके शरीर का मूलाधार चक्र (Root Chakra) जाग्रत होने लगता है। मूलाधार चक्र का स्वामी मंगल ग्रह ही है। इस स्तोत्र की ध्वनि तरंगें (Sound Vibrations) सीधे साधक के रक्त (Blood) और नाड़ियों में एक सकारात्मक ऊर्जा भर देती हैं, जिससे उसका भय और अवसाद (Depression) हमेशा के लिए नष्ट हो जाता है।

अंगारक स्तोत्रम् के पाठ से मिलने वाले अचूक और अकल्पनीय लाभ (Benefits)

मंगल देव केवल क्रोध या युद्ध के देवता नहीं हैं; यदि वे प्रसन्न हो जाएं तो व्यक्ति को रंक से राजा बना सकते हैं। अंगारक स्तोत्र का नित्य या विशेष अनुष्ठान के रूप में पाठ करने से साधक को निम्नलिखित चमत्कारी लाभ प्राप्त होते हैं:

1. भयंकर और पहाड़ जैसे कर्जों (Debts) से पूर्ण मुक्ति

यह अंगारक स्तोत्र का सबसे बड़ा और सबसे प्रसिद्ध लाभ है। ज्योतिष शास्त्र में मंगल को ‘ऋणहर्ता’ (Debt Destroyer) कहा गया है। जब व्यक्ति कर्ज़ के दुष्चक्र में इस कदर फंस जाए कि बैंक, लेनदार या साहूकार परेशान करने लगें और आय के सभी स्रोत बंद हो जाएं, तब अंगारक स्तोत्र का पाठ बंद दरवाज़ों को खोल देता है। इसके प्रभाव से व्यक्ति को नए अवसर मिलते हैं, रुका हुआ धन प्राप्त होता है और बड़े से बड़ा कर्ज चमत्कारिक रूप से उतर जाता है।

2. मांगलिक दोष (Mangal Dosh) और दांपत्य कलह का निवारण

यदि जन्म कुंडली में मांगलिक दोष है, जिसके कारण विवाह में विलंब हो रहा है या शादी के बाद पति-पत्नी के बीच रोज़ झगड़े होते हैं, तो अंगारक स्तोत्र का पाठ इस दोष की उग्रता को शांत कर देता है। यह स्तोत्र मंगल ग्रह की नकारात्मक ऊर्जा (Negative energy) को सोख लेता है और दांपत्य जीवन में प्रेम, समझ और शांति स्थापित करता है।

3. भूमि, भवन (Property) और अचल संपत्ति की प्राप्ति

मंगल देव ‘भूमि पुत्र’ हैं। जो लोग लंबे समय से अपना घर बनाने का सपना देख रहे हैं, ज़मीन-जायदाद के विवादों (Property disputes) में फंसे हुए हैं, या जिनका पैसा रियल एस्टेट (Real Estate) में डूब गया है, उन्हें अंगारक स्तोत्र का पाठ अवश्य करना चाहिए। इसके प्रभाव से भूमि संबंधी सभी विवाद सुलझ जाते हैं और व्यक्ति को स्वयं के भवन का सुख प्राप्त होता है।

4. रक्त संबंधी रोगों (Blood Diseases) और दुर्घटनाओं से रक्षा

चिकित्सा ज्योतिष (Medical Astrology) के अनुसार, मानव शरीर में मंगल रक्त (Blood), मज्जा (Marrow) और मांसपेशियों (Muscles) का कारक है। उच्च रक्तचाप (High BP), खून की कमी, या किसी गंभीर सर्जरी की स्थिति में यह स्तोत्र एक अमोघ औषधि का कार्य करता है। यह वाहन चलाते समय होने वाली दुर्घटनाओं (Accidents) और अकाल मृत्यु से साधक की रक्षा करता है।

ये भी पढ़ें:  Agneya Stotra (आग्नेय स्तोत्र): Lyrics in Sanskrit, ऊर्जा, ऐश्वर्य और आरोग्यता देने वाला शक्तिशाली स्तोत्र, लाभ व पाठ विधि

5. मुकदमों (Court Cases) में विजय और शत्रुओं का दमन

नवग्रहों के सेनापति होने के कारण, मंगल विजय और शक्ति के प्रतीक हैं। यदि आपको झूठे मुकदमों में फंसा दिया गया है या विरोधी आपको बर्बाद करने का षड्यंत्र रच रहे हैं, तो अंगारक स्तोत्र आपको एक अजेय योद्धा बना देता है। आपके शत्रु आपके सामने टिक नहीं पाते और अदालत का फैसला आपके पक्ष में आता है।

6. आलस्य का नाश और अपार आत्मविश्वास की प्राप्ति

मंगल ‘ऊर्जा’ (Energy) का साक्षात स्वरूप है। जो युवा डिप्रेशन में हैं, जिनमें आत्मविश्वास (Self-confidence) की कमी है, जो हर काम को कल पर टालते हैं (आलस्य), उनके लिए यह स्तोत्र किसी संजीवनी से कम नहीं है। इसका पाठ भीतर एक ऐसा ‘फायर’ (Fire) और जुनून पैदा करता है कि व्यक्ति अपने हर लक्ष्य को भेद देता है।

अंगारक स्तोत्रम् की प्रामाणिक वैदिक पाठ और अर्चन विधि (Authentic Puja Vidhi)

अंगारक स्तोत्र मंगल देव का एक जाग्रत स्तोत्र है। इसका पूरा लाभ प्राप्त करने के लिए इसे एक निश्चित विधि और अनुशासन के साथ करना चाहिए। यहाँ शास्त्रों में वर्णित सबसे प्रामाणिक विधि दी गई है:

1. उत्तम दिन, तिथि और मुहूर्त (Best Time)

इस स्तोत्र का पाठ आरंभ करने के लिए मंगलवार (Tuesday) का दिन सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। यदि यह शुक्ल पक्ष का मंगलवार हो तो और भी उत्तम है। आप अपनी सुविधा के अनुसार इसका पाठ प्रातःकाल (सूर्योदय के समय) कर सकते हैं। परंतु, यदि आप भारी कर्ज से मुक्ति के लिए अनुष्ठान कर रहे हैं, तो दोपहर का समय (अभिजीत मुहूर्त) या सूर्यास्त के तुरंत बाद का समय मंगल देव की आराधना के लिए बहुत प्रभावशाली माना गया है।

2. वस्त्र, दिशा और आसन का विधान

  • वस्त्र: स्नान करके पूर्ण रूप से शुद्ध हो जाएं। मंगल देव को लाल रंग अत्यंत प्रिय है। इसलिए पाठ के समय लाल रंग के वस्त्र (विशेषकर धोती या लाल चुन्नी) धारण करना चमत्कारिक परिणाम देता है।

  • दिशा: पाठ करते समय अपना मुख सदैव दक्षिण (South) या पूर्व (East) दिशा की ओर रखें (मंगल दक्षिण दिशा के स्वामी हैं)।

  • आसन: बैठने के लिए लाल रंग के ऊनी आसन या कुशा के आसन का ही प्रयोग करें।

3. पूजन सामग्री और मंगल देव की स्थापना

एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान शिव, हनुमान जी या मंगल यंत्र (यदि उपलब्ध हो) की स्थापना करें। मंगल देव शिव के अंश हैं और हनुमान जी मंगल के नियंत्रक माने जाते हैं। उनके सामने तांबे के दीये में चमेली के तेल या शुद्ध घी का एक दीपक प्रज्वलित करें। धूप जलाएं। मंगल देव को लाल पुष्प (जैसे गुड़हल या लाल गुलाब), लाल चंदन (रक्त चंदन), और सिंदूर अर्पित करें।

4. दृढ़ संकल्प (Sankalpa) – अनुष्ठान का प्राण

दाएँ हाथ में थोड़ा सा जल, लाल अक्षत (चावल जिन्हें कुमकुम से लाल किया गया हो) और एक लाल फूल लें। अपना नाम, गोत्र और पाठ का स्पष्ट उद्देश्य (जैसे- “हे मंगल देव, मैं अमुक कर्ज से मुक्ति पाने के लिए या घर प्राप्ति के लिए आपके अंगारक स्तोत्र का 21/41 दिन तक पाठ करूँगा”) बोलें। फिर उस जल को धरती पर छोड़ दें।

5. स्तोत्र का पाठ (Chanting Method)

  • सबसे पहले भगवान गणेश और अपने गुरु को प्रणाम करें।

  • फिर मंगल देव के मूल मंत्र “ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः” या “ॐ अं अंगारकाय नमः” की एक माला (108 बार) लाल चंदन या मूंगे की माला पर जपें।

  • इसके पश्चात् पूर्ण श्रद्धा, ओज और स्पष्ट उच्चारण के साथ ‘अंगारक स्तोत्र’ का पाठ करें। यदि संकट बहुत बड़ा है, तो आप रोज़ाना इस स्तोत्र का 3, 7 या 11 बार पाठ कर सकते हैं।

6. क्षमा प्रार्थना और भोग (नैवेद्य)

पाठ पूर्ण होने के बाद मंगल देव को लाल रंग की मिठाई का भोग लगाएं। इसमें गुड़, मसूर की दाल की बर्फी, बूंदी के लड्डू या रेवड़ी शामिल हो सकते हैं। अंत में आरती करें और अनजाने में हुए गलत उच्चारण के लिए क्षमा मांगें। (पाठ के बाद थोड़ा सा गुड़ किसी लाल गाय को या बंदरों को खिलाना अचूक फल देता है)।

ये भी पढ़ें:  Aparajita Stotram (अपराजिता स्तोत्रम्): Lyrics in Sanskrit, मुकदमों में सफलता और शत्रुओं का सर्वनाश करने वाला अमोघ अस्त्र

साधना के कड़े नियम और सावधानियां (Strict Rules for Mangal Sadhana)

मंगल एक उग्र और क्रूर ग्रह हैं। उनकी साधना आग से खेलने के समान है, जो आपके घर को रोशन भी कर सकती है और नियम टूटने पर नुकसान भी पहुँचा सकती है। इसलिए इन नियमों का कड़ाई से पालन करें:

  1. पूर्ण सात्विकता: अनुष्ठान के दौरान (विशेषकर मंगलवार के दिन) मांस, मदिरा, अंडे, लहसुन और प्याज का पूर्णतया त्याग कर दें। तामसिक भोजन मंगल को तुरंत क्रुद्ध कर देता है।

  2. ब्रह्मचर्य का पालन: शारीरिक और मानसिक ब्रह्मचर्य का कठोरता से पालन करें।

  3. क्रोध पर नियंत्रण: मंगल ‘क्रोध’ का कारक है। जब आप यह स्तोत्र पढ़ेंगे, तो शुरू में आपके भीतर ऊर्जा बढ़ने से आपको गुस्सा आ सकता है। आपको संकल्प लेना होगा कि आप अपने परिवार में किसी पर चिल्लाएंगे नहीं और ना ही अपशब्द कहेंगे। यदि आपने क्रोध किया, तो साधना निष्फल हो जाएगी।

  4. भाई का सम्मान: ज्योतिष में मंगल ‘भाई’ का कारक है। जो व्यक्ति अपने सगे भाई को धोखा देता है या उससे झगड़ा करता है, उस पर अंगारक स्तोत्र का कोई प्रभाव नहीं होता। अपने भाई से संबंध मधुर रखें।

Angarak Stotra केवल कुछ संस्कृत के श्लोकों का संग्रह नहीं है; यह व्यक्ति के भीतर की सोई हुई ज्वाला को जाग्रत करने का वैदिक ‘पासवर्ड’ है। जीवन में कर्ज और असफलता इंसान को अंदर से तोड़ देती है। वह समाज से नज़रें मिलाने से कतराने लगता है।

अंगारक स्तोत्र उस हारे हुए इंसान को एक ‘विजेता’ में बदल देता है। यह स्तोत्र हमें सिखाता है कि हमारे भीतर मंगल देव की ऊर्जा मौजूद है। जब हम पूरी श्रद्धा और संकल्प के साथ इस ऊर्जा का आह्वान करते हैं, तो कोई भी कर्ज इतना बड़ा नहीं रहता जिसे चुकाया न जा सके, कोई भी शत्रु इतना शक्तिशाली नहीं होता जिसे हराया न जा सके।

लाल वस्त्र धारण करें, लाल चंदन का तिलक लगाएं और पूर्ण निर्भयता के साथ इस अंगारक स्तोत्र का गान करें। साक्षात भूमि-पुत्र मंगल आपकी हर दरिद्रता को भस्म कर देंगे और आपके जीवन को सुख, संपत्ति और अजेय पराक्रम से भर देंगे। ॐ अं अंगारकाय नमः!

अंगारक स्तोत्रम्: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. अंगारक स्तोत्रम् का पाठ मुख्य रूप से किस उद्देश्य के लिए किया जाता है?

अंगारक स्तोत्र का पाठ मुख्य रूप से जीवन के भारी कर्जों (Debts) से मुक्ति पाने, जन्म कुंडली में मौजूद मांगलिक दोष (Mangal Dosh) को शांत करने, दांपत्य जीवन के कलह को मिटाने और भूमि/प्रॉपर्टी से जुड़े विवादों में सफलता प्राप्त करने के लिए किया जाता है।

2. इस स्तोत्र का पाठ करने के लिए सप्ताह का कौन सा दिन और समय सबसे उत्तम है?

मंगल देव की आराधना के लिए मंगलवार (Tuesday) का दिन सबसे श्रेष्ठ है। पाठ का सबसे उत्तम समय प्रातःकाल सूर्योदय के समय, दोपहर (अभिजीत मुहूर्त), या शाम को सूर्यास्त के ठीक बाद का होता है।

3. क्या महिलाएं भी अंगारक स्तोत्र का पाठ कर सकती हैं?

जी हाँ, बिल्कुल! महिलाएं अपने परिवार की सुख-शांति, पति के कर्ज की मुक्ति, या अपने मांगलिक दोष की शांति के लिए पूरी सात्विकता के साथ इस स्तोत्र का पाठ कर सकती हैं। केवल मासिक धर्म (Periods) के दौरान पूजा और सस्वर पाठ से बचना चाहिए।

4. शीघ्र कर्ज़ मुक्ति के लिए इस स्तोत्र के साथ और क्या उपाय करना चाहिए?

शीघ्र कर्ज मुक्ति के लिए मंगलवार के दिन अंगारक स्तोत्र का पाठ करने के साथ-साथ, किसी भी मंदिर में गुड़ और चने का दान करें। इसके अलावा, मंगलवार को लाल गाय को गुड़ खिलाना या बंदरों को केले/गुड़-चना खिलाना मंगल देव को अत्यंत प्रसन्न करता है और कर्ज मुक्ति के मार्ग खोलता है।

5. क्या अंगारक स्तोत्र का पाठ करते समय लाल रंग का उपयोग अनिवार्य है?

शास्त्रों के अनुसार मंगल देव का वर्ण (रंग) लाल है और उन्हें लाल रंग अत्यंत प्रिय है। यद्यपि ईश्वर भाव के भूखे हैं, लेकिन तांत्रिक और वैदिक नियमों के अनुसार पाठ के समय लाल वस्त्र, लाल आसन, लाल फूल (गुड़हल/गुलाब) और लाल चंदन का उपयोग करने से स्तोत्र की ऊर्जा कई गुना बढ़ जाती है और परिणाम शीघ्र मिलते हैं।

 
 
 

"नमस्कार! मैं अमित तिवारी हूँ, और आप मुझे एक 'साधक' के रूप में जान सकते हैं। बचपन से ही सनातन धर्म, तंत्र-मंत्र और आध्यात्मिक साधनाओं ने मुझे अपनी ओर गहराई से आकर्षित किया है। वर्षों के निरंतर अध्ययन, गुरु-कृपा और अपने व्यक्तिगत साधना-अनुभवों से मैंने जो कुछ भी सीखा है, उसे मैं sadhnas.in के माध्यम से आपके साथ साझा कर रहा हूँ। मेरा मुख्य उद्देश्य इंटरनेट पर फैले भ्रम को दूर करके प्रामाणिक, सत्य और शास्त्र-सम्मत जानकारी को बेहद सरल भाषा में आप तक पहुँचाना है। मैं कोई गुरु या उपदेशक नहीं हूँ, बल्कि आप ही की तरह ईश्वर की खोज में निकला एक राही हूँ। मेरी यही कोशिश है कि मेरे अनुभवों और लेखनी से आपकी आध्यात्मिक यात्रा और भी सुगम व सफल हो सके।"

error: Content is protected !!