अंगारक स्तोत्रम् (संस्कृत) | Angarak Stotra Lyrics in SanskritIt takes 1 minutes... to read this article !

अंगारक स्तोत्रम् का संपूर्ण संस्कृत पाठ पढ़ें। मंगल ग्रह के अधिपति अंगारक देव को समर्पित यह पवित्र स्तोत्र शुद्ध एवं सरल संस्कृत श्लोकों में यहां उपलब्ध है।

अंगारक स्तोत्रम् भगवान अंगारक (मंगल ग्रह) को समर्पित एक पवित्र स्तुति है। इस स्तोत्र में मंगल देव की शक्ति, साहस, और जीवन में कष्टों को दूर करने की क्षमता का वर्णन किया गया है। इस लेख में अंगारक स्तोत्रम् का संपूर्ण संस्कृत पाठ प्रस्तुत किया गया है।

Angaraka Stotram | अंगारक स्तोत्रम् हिंदी

अंगारकः शक्तिधरो लोहितांगो धरासुतः ।
कुमारो मंगलो भौमो महाकायो धनप्रदः ॥१॥

ऋणहर्ता दृष्टिकर्ता रोगकृत् रोगनाशनः ।
विद्युत्प्रभो व्रणकरः कामदो धनहृत् कुजः ॥२॥

सामगानप्रियो रक्तवस्त्रो रक्तायतेक्षणः।
लोहितो रक्तवर्णश्च सर्वकर्मावबोधकः ॥३॥

रक्तमाल्यधरो हेमकुण्डली ग्रहनायकः ।
नामान्येतानि भौमस्य यः पठेत् सततं नरः ॥४॥

ऋणं तस्य च दौर्भाग्यं दारिद्र्यं च विनश्यति ।
धनं प्राप्नोति विपुलं स्त्रियं चैव मनोरमाम् ॥५॥

वंशोद्योतकरं पुत्रं लभते नात्र संशयः,
योऽर्चयेदह्नि भौमस्य मङ्गलं बहुपुष्पकैः ।
सर्वं नश्यति पीडा च तस्य ग्रहकृता ध्रुवम् ॥६॥

॥ इति श्री अंगारक स्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥

इस प्रकार अंगारक स्तोत्रम् मंगल ग्रह की कृपा प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण साधन है। श्रद्धा और नियमित पाठ से जीवन में साहस, ऊर्जा, सफलता और ग्रह दोषों की शांति प्राप्त होती है।

 
 

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