गर्भ स्तुतिः (देव कृतम्) | Garbha Stuti (Deva Krutham)It takes 1 minutes... to read this article !

Garbha Stuti (Deva Krutham): गर्भ स्तुति (देव कृतम्) एक पवित्र संस्कृत स्तोत्र है जिसमें ब्रह्मांड के रचयिता देवों द्वारा ईश्वर के दिव्य गुणों, सत्ता और भक्तिपूर्ण स्तुति का सुंदर वर्णन किया गया है। यह स्तोत्र पाठकों को भक्ति-भाव, आध्यात्मिक शांति और ईश्वर के अनुग्रह की अनुभूति प्रदान करता है।

देवा ऊचुः ।
जगद्योनिरयोनिस्त्वमनन्तोऽव्यय एव च ।
ज्योतिः स्वरूपो ह्यनघः सगुणो निर्गुणो महान् ॥ १ ॥

भक्तानुरोधात् साकारो निराकारो निरङ्कुशः ।
निर्व्यूहो निखिलाधारो निःशङ्को निरुपद्रवः ॥ २ ॥

निरुपाधिश्च निर्लिप्तो निरीहो निधनान्तकः ।
स्वात्मारामः पूर्णकामो निमिषो नित्य एव च ॥ ३ ॥

स्वेच्छामयः सर्वहेतुः सर्वः सर्वगुणाश्रयः ।
सुखदो दुःखदो दुर्गो दुर्जनान्तक एव च ॥ ४ ॥

सुभगो दुर्भगो वाग्मी दुराराध्यो दुरत्ययः ।
वेदहेतुश्च वेदश्च वेदाङ्गो वेदविद्विभुः ॥ ५ ॥

इत्येवमुक्त्वा देवाश्च प्रणेमुश्च मुहुर्मुहुः ।
हर्षाश्रुलोचनाः सर्वे ववृषुः कुसुमानि च ॥ ६ ॥

द्विचत्वारिंशन्नामानि प्रातरुत्थाय यः पठेत् ।
दृढां भक्तिं हरेर्दास्यं लभते वाञ्छितं फलम् ॥ ७ ॥

इत्येवं स्तवनं कृत्वा देवास्ते स्वालयं ययुः ।
बभूव जलवृष्टिश्च निश्चेष्टा मथुरापुरी ॥ ८ ॥

इति श्रीब्रह्मवैवर्ते महापुराणे श्रीकृष्णजन्मखण्डे सप्तमोऽध्याये देवकृत गर्भस्तुतिः ।
Sadhanas Editorial Desk

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