श्री कालिका स्वरूप स्तुतिः मूल पाठ, विधि व नियम | Sri Kalika Swaroopa StutiIt takes 3 minutes... to read this article !

श्री कालिका स्वरूप स्तुतिः का मूल संस्कृत पाठ, हिंदी अर्थ, पाठ विधि व नियम विस्तार से जानें। Sri Kalika Swaroopa Stuti के लाभ, महत्व, जप का सही समय और पूजा विधि सहित संपूर्ण जानकारी।

श्री कालिका स्वरूप स्तुतिः मूल पाठ

सिततरसंविदवाप्यं सदसत्कलनाविहीनमनुपाधि ।
जयति जगत्त्रयरूपं नीरूपं देवि ते रूपम् ॥ १ ॥

एकमनेकाकारं प्रसृतजगद्व्याप्तिविकृतिपरिहीनम् ।
जयति तवाद्वयरूपं विमलमलं चित्स्वरूपाख्यम् ॥ २ ॥

जयति तवोच्छलदन्तः स्वच्छेच्छायाः स्वविग्रहग्रहणम् ।
किमपि निरुत्तरसहजस्वरूपसंवित्प्रकाशमयम् ॥ ३ ॥

वान्त्वा समस्तकालं भूत्या झङ्कारघोरमूर्तिमपि ।
निग्रहमस्मिन् कृत्वानुग्रहमपि कुर्वती जयसि ॥ ४ ॥

कालस्य कालि देहं विभज्य मुनिपञ्चसङ्ख्यया भिन्नम् ।
स्वस्मिन् विराजमानं तद्रूपं कुर्वती जयसि ॥ ५ ॥

भैरवरूपी कालः सृजति जगत्कारणादिकीटान्तम् ।
इच्छावशेन यस्याः सा त्वं भुवनाम्बिका जयसि ॥ ६ ॥

जयति शशाङ्कदिवाकरपावकधामत्रयान्तरव्यापि ।
जननि तव किमपि विमलं स्वरूपरूपं परन्धाम ॥ ७ ॥

एकं स्वरूपरूपं प्रसरस्थितिविलयभेदस्त्रिविधम् ।
प्रत्येकमुदयसंस्थितिलयविश्रमतश्चतुर्विधं तदपि ॥ ८ ॥

इति वसुपञ्चकसङ्ख्यं विधाय सहजस्वरूपमात्मीयम् ।
विश्वविवर्तावर्तप्रवर्तक जयति ते रूपम् ॥ ९ ॥

सदसद्विभेदसूतेर्दलनपरा कापि सहजसंवित्तिः ।
उदिता त्वमेव भगवति जयसि जयाद्येन रूपेण ॥ १० ॥

जयति समस्तचराचरविचित्रविश्वप्रपञ्चरचनोर्मि ।
अमलस्वभावजलधौ शान्तं कान्तं च ते रूपम् ॥ ११ ॥

सहजोल्लासविकासप्रपूरिताशेषविश्वविभवैषा ।
पूर्णा तवाम्ब मूर्तिर्जयति परानन्दसम्पूर्णा ॥ १२ ॥

कवलितसकलजगत्रयविकटमहाकालकवलनोद्युक्ता ।
उपभुक्तभावविभवप्रभवापि कृशोदरी जयसि ॥ १३ ॥

रूपत्रयपरिवर्जितमसमं रूपत्रयान्तरव्यापि ।
अनुभवरूपमरूपं जयति परं किमपि ते रूपम् ॥ १४ ॥

अव्ययमकुलममेयं विगलितसदसद्विवेककल्लोलम् ।
जयति प्रकाशविभवस्फीतं काल्याः परं धाम ॥ १५ ॥

ऋतुमुनिसङ्ख्यं रूपं विभज्य पञ्चप्रकारमेकैकम् ।
दिव्यौघमुद्गिरन्ती जयति जगत्तारिणी जननी ॥ १६ ॥

भूदिग्गोखगदेवीचक्रसञ्ज्ञानविभवपरिपूर्णम् ।
निरुपमविश्रान्तिमयं श्रीपीठं जयति ते रूपम् ॥ १७ ॥

प्रलयलयान्तरभूमौ विलसितसदसत्प्रपञ्चपरिहीनाम् ।
देवि निरुत्तरतरां नौमि सदा सर्वतः प्रकटाम् ॥ १८ ॥

यादृङ्महाश्मशाने दृष्टं देव्याः स्वरूपमकुलस्थम् ।
तादृग् जगत्रयमिदं भवतु तवाम्ब प्रसादेन ॥ १९ ॥

इत्थं स्वरूपस्तुतिरभ्यधायि
सम्यक्समावेशदशावशेन ।
मया शिवेनास्तु शिवाय सम्यक्
ममैव विश्वस्य तु मङ्गलाय ॥ २० ॥

इति श्रीश्रीज्ञाननेत्रपाद रचितं श्री कालिका स्वरूप स्तुतिः ।

श्री कालिका स्वरूप स्तुतिः पाठ की विधि

1. पाठ का समय
  • प्रातः ब्रह्म मुहूर्त या संध्या काल
  • संबंधित देवता का वार विशेष फलदायी
  • विशेष मुहूर्त, ग्रहण काल, जयंती पर सर्वोत्तम
2. आसन व दिशा
  • कुश या ऊनी आसन
  • उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख
3. पूजा सामग्री
  • श्री कालिका स्वरूप की प्रतिमा या चित्र
  • दीपक, धूप, पुष्प
  • पीला या लाल वस्त्र

श्री कालिका स्वरूप स्तुतिः पाठ के नियम

  • स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें
  • मन, वाणी और शरीर से शुद्ध रहें
  • पाठ के समय मौन और एकाग्रता आवश्यक
  • स्तुति का पाठ कम से कम 11 बार
  • भय या संकट में 108 बार पाठ विशेष लाभ देता है

श्री कालिका स्वरूप स्तुतिः के लाभ

  • अकाल मृत्यु और दुर्घटनाओं से रक्षा
  • शत्रु बाधा और षड्यंत्र से सुरक्षा
  • ग्रह दोष और राहु-केतु शांति
  • मानसिक भय, अवसाद और अनिद्रा से मुक्ति
  • घर और साधक के चारों ओर सुरक्षा कवच

विशेष साधना उपाय

यदि किसी व्यक्ति पर लगातार नकारात्मक प्रभाव या भय बना रहता है, तो 21 दिनों तक नियमित रूप से दीपक जलाकर श्री कालिका स्वरूप स्तुतिः का पाठ करें। यह साधना अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • पाठ अधूरा न छोड़ें
  • क्रोध या अशुद्ध अवस्था में पाठ न करें
  • स्तुति का उच्चारण स्पष्ट हो

श्री कालिका स्वरूप स्तुतिः केवल एक स्तुतिः नहीं बल्कि दिव्य सुरक्षा कवच है। शास्त्रों में वर्णित विधि से किया गया पाठ साधक को भयमुक्त, सुरक्षित और आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाता है।

हमारी एडिटोरियल टीम अनुभवी वैदिक एवं तांत्रिक साधकों का एक समर्पित समूह है, जिन्होंने वर्षों तक वेद, तंत्र और प्राचीन शास्त्रों का गहन अध्ययन किया है। इन ग्रंथों में वर्णित साधनाओं का विधिवत पुरश्चरण कर, व्यावहारिक अनुभव के साथ ज्ञान को आत्मसात किया गया है। Sadhanas.in पर प्रकाशित प्रत्येक लेख और साधना शुद्ध रूप से प्राचीन शास्त्रों एवं प्रमाणिक ग्रंथों के अध्ययन पर आधारित है, ताकि साधकों को प्रामाणिक, सुरक्षित और सही मार्गदर्शन प्राप्त हो सके।

error: Content is protected !!