श्री पुरुषोत्तम स्तुतिः (प्रह्लाद कृतम्) मूल पाठ, विधि व नियम | Sri Purushottama Stuti (Prahlada Krutam)It takes 2 minutes... to read this article !

श्री पुरुषोत्तम स्तुतिः (प्रह्लाद कृतम्) का मूल संस्कृत पाठ, हिंदी अर्थ, पाठ विधि व नियम विस्तार से जानें। Sri Purushottama Stuti (Prahlada Krutam) के लाभ, महत्व, जप का सही समय और पूजा विधि सहित संपूर्ण जानकारी।

श्री पुरुषोत्तम स्तुतिः (प्रह्लाद कृतम्) मूल पाठ

ओं नमः परमार्थार्थ स्थूलसूक्ष्मक्षराक्षर ।
व्यक्ताव्यक्त कलातीत सकलेश निरञ्जन ॥ १ ॥

गुणाञ्जन गुणाधार निर्गुणात्मन् गुणस्थिर ।
मूर्तामूर्त महामूर्ते सूक्ष्ममूर्ते स्फुटास्फुट ॥ २ ॥

करालसौम्यरूपात्मन् विद्याविद्यालयाच्युत ।
सदसद्रूप सद्भाव सदसद्भावभावन ॥ ३ ॥

नित्यानित्यप्रपञ्चात्मन् निष्प्रपञ्चामलाश्रित ।
एकानेक नमस्तुभ्यं वासुदेवादिकारण ॥ ४ ॥

यः स्थूलसूक्ष्मः प्रकटः प्रकाशो
यः सर्वभूतो न च सर्वभूतः ।
विश्वं यतश्चैतदविश्वहेतो-
-र्नमोऽस्तु तस्मै पुरुषोत्तमाय ॥ ५ ॥

इति श्रीविष्णुपुराणे प्रथमांशे विंशोऽध्याये प्रह्लादकृत श्री पुरुषोत्तम स्तुतिः ।

श्री पुरुषोत्तम स्तुतिः (प्रह्लाद कृतम्) पाठ की विधि

1. पाठ का समय
  • प्रातः ब्रह्म मुहूर्त या संध्या काल
  • संबंधित देवता का वार विशेष फलदायी
  • विशेष मुहूर्त, ग्रहण काल, जयंती पर सर्वोत्तम
2. आसन व दिशा
  • कुश या ऊनी आसन
  • उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख
3. पूजा सामग्री
  • श्री पुरुषोत्तम की प्रतिमा या चित्र
  • दीपक, धूप, पुष्प
  • पीला या लाल वस्त्र

श्री पुरुषोत्तम स्तुतिः (प्रह्लाद कृतम्) पाठ के नियम

  • स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें
  • मन, वाणी और शरीर से शुद्ध रहें
  • पाठ के समय मौन और एकाग्रता आवश्यक
  • स्तुति का पाठ कम से कम 11 बार
  • भय या संकट में 108 बार पाठ विशेष लाभ देता है

श्री पुरुषोत्तम स्तुतिः (प्रह्लाद कृतम्) के लाभ

  • अकाल मृत्यु और दुर्घटनाओं से रक्षा
  • शत्रु बाधा और षड्यंत्र से सुरक्षा
  • ग्रह दोष और राहु-केतु शांति
  • मानसिक भय, अवसाद और अनिद्रा से मुक्ति
  • घर और साधक के चारों ओर सुरक्षा कवच

विशेष साधना उपाय

यदि किसी व्यक्ति पर लगातार नकारात्मक प्रभाव या भय बना रहता है, तो 21 दिनों तक नियमित रूप से दीपक जलाकर श्री पुरुषोत्तम स्तुतिः (प्रह्लाद कृतम्) का पाठ करें। यह साधना अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • पाठ अधूरा न छोड़ें
  • क्रोध या अशुद्ध अवस्था में पाठ न करें
  • स्तुति का उच्चारण स्पष्ट हो

श्री पुरुषोत्तम स्तुतिः (प्रह्लाद कृतम्) केवल एक स्तुतिः नहीं बल्कि दिव्य सुरक्षा कवच है। शास्त्रों में वर्णित विधि से किया गया पाठ साधक को भयमुक्त, सुरक्षित और आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाता है।

Sadhanas Editorial Desk

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