सनातन धर्म और हिंदू पंचांग में ‘एकादशी’ (Ekadashi) के व्रत को सभी व्रतों का राजा (Vrat Raj) कहा गया है। चंद्र मास (Lunar Month) के दोनों पक्षों— शुक्ल पक्ष (Waxing Moon) और कृष्ण पक्ष (Waning Moon)— की ग्यारहवीं तिथि को एकादशी कहा जाता है। इस प्रकार, एक सामान्य वर्ष में कुल 24 एकादशी तिथियां आती हैं। लेकिन, भारतीय पंचांग के अनुसार जब अधिक मास (Adhik Maas/Leap Month) लगता है, तो उस वर्ष एकादशियों की संख्या बढ़कर 26 हो जाती है। आपको यह जानकर खुशी होगी कि वर्ष 2026 में अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) पड़ रहा है, जिसके कारण साल 2026 में कुल 26 एकादशी व्रत रखे जाएंगे।
एकादशी का व्रत सीधे तौर पर जगत के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु (Lord Vishnu) को समर्पित है। पद्म पुराण और स्कंद पुराण जैसे धर्मग्रंथों में स्पष्ट उल्लेख है कि जो भी मनुष्य पूर्ण श्रद्धा, भक्ति और नियमों के साथ एकादशी का उपवास करता है, उसके कई जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं और अंत में उसे मोक्ष (वैकुंठ धाम) की प्राप्ति होती है। यह व्रत केवल आध्यात्मिक रूप से ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी शरीर को निरोगी और मन को शांत रखने का सबसे अचूक साधन है।
व्रत करने वाले श्रद्धालुओं के लिए सही तिथि, पारण का समय (Fast breaking time) और नियमों की जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि बिना सही पारण के एकादशी व्रत का फल प्राप्त नहीं होता। यदि आप भी नए साल में भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए उपवास रखने की तैयारी कर रहे हैं, तो यह लेख आपके लिए एक सम्पूर्ण मार्गदर्शिका (Complete Guide) है। यहाँ हम आपके लिए लेकर आए हैं— “Ekadashi 2026 List: साल 2026 की सभी एकादशी Dates, Vrat Tithi & Parana Time”।
Ekadashi 2026 Vrat & Parana Calendar (Month-Wise Table)
| महीना (Month) | एकादशी का नाम (Ekadashi Name) | व्रत की तारीख (Vrat Date) | पारण का दिन (Parana Day) |
| जनवरी | षटतिला एकादशी | 14 जनवरी 2026 (बुधवार) | 15 जनवरी 2026 (गुरुवार) |
| जनवरी | जया एकादशी | 29 जनवरी 2026 (गुरुवार) | 30 जनवरी 2026 (शुक्रवार) |
| फरवरी | विजया एकादशी | 13 फरवरी 2026 (शुक्रवार) | 14 फरवरी 2026 (शनिवार) |
| फरवरी | आमलकी एकादशी | 27 फरवरी 2026 (शुक्रवार) | 28 फरवरी 2026 (शनिवार) |
| मार्च | पापमोचनी एकादशी | 15 मार्च 2026 (रविवार) | 16 मार्च 2026 (सोमवार) |
| मार्च | कामदा एकादशी | 29 मार्च 2026 (रविवार) | 30 मार्च 2026 (सोमवार) |
| अप्रैल | वरुथिनी एकादशी | 13 अप्रैल 2026 (सोमवार) | 14 अप्रैल 2026 (मंगलवार) |
| अप्रैल | मोहिनी एकादशी | 27 अप्रैल 2026 (सोमवार) | 28 अप्रैल 2026 (मंगलवार) |
| मई | अपरा / अचला एकादशी | 13 मई 2026 (बुधवार) | 14 मई 2026 (गुरुवार) |
| मई | पद्मिनी एकादशी (अधिक मास) | 27 मई 2026 (बुधवार) | 28 मई 2026 (गुरुवार) |
| जून | परमा एकादशी (अधिक मास) | 11 जून 2026 (गुरुवार) | 12 जून 2026 (शुक्रवार) |
| जून | निर्जला एकादशी | 25 जून 2026 (गुरुवार) | 26 जून 2026 (शुक्रवार) |
| जुलाई | योगिनी एकादशी | 11 जुलाई 2026 (शनिवार) | 12 जुलाई 2026 (रविवार) |
| जुलाई | देवशयनी एकादशी | 25 जुलाई 2026 (शनिवार) | 26 जुलाई 2026 (रविवार) |
| अगस्त | कामिका एकादशी | 9 अगस्त 2026 (रविवार) | 10 अगस्त 2026 (सोमवार) |
| अगस्त | श्रावण पुत्रदा एकादशी | 23 अगस्त 2026 (रविवार) | 24 अगस्त 2026 (सोमवार) |
| सितंबर | अजा एकादशी | 7 सितंबर 2026 (सोमवार) | 8 सितंबर 2026 (मंगलवार) |
| सितंबर | परिवर्तिनी एकादशी | 22 सितंबर 2026 (मंगलवार) | 23 सितंबर 2026 (बुधवार) |
| अक्टूबर | इंदिरा एकादशी (पितृ पक्ष) | 6 अक्टूबर 2026 (मंगलवार) | 7 अक्टूबर 2026 (बुधवार) |
| अक्टूबर | पापांकुशा एकादशी | 22 अक्टूबर 2026 (गुरुवार) | 23 अक्टूबर 2026 (शुक्रवार) |
| नवंबर | रमा एकादशी | 5 नवंबर 2026 (गुरुवार) | 6 नवंबर 2026 (शुक्रवार) |
| नवंबर | देवोत्थान (प्रबोधिनी) एकादशी | 21 नवंबर 2026 (शनिवार) | 22 नवंबर 2026 (रविवार) |
| दिसंबर | उत्पन्ना एकादशी | 4 दिसंबर 2026 (शुक्रवार) | 5 दिसंबर 2026 (शनिवार) |
| दिसंबर | मोक्षदा एकादशी / गीता जयंती | 20 दिसंबर 2026 (रविवार) | 21 दिसंबर 2026 (सोमवार) |
(नोट: पारण हमेशा व्रत के अगले दिन सूर्योदय के बाद और ‘हरि वासर’ समाप्त होने पर ही किया जाता है। स्थानीय पंचांग और सूर्योदय के समय के अनुसार पारण के सटीक घंटों और मिनटों में थोड़ा अंतर हो सकता है।)
इस अत्यंत विस्तृत लेख में हम साल 2026 में आने वाली सभी 26 एकादशियों की सही तारीखें, उनका महत्व और व्रत खोलने (पारण) के सटीक नियमों की चर्चा करेंगे।
एकादशी व्रत क्या है और इसका पारण (Parana) कैसे किया जाता है?
एकादशी तिथियों की सूची जानने से पहले, यह समझना बहुत जरूरी है कि ‘व्रत तिथि’ और ‘पारण समय’ का गणित क्या है।
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व्रत तिथि (Vrat Tithi): एकादशी का व्रत हमेशा सूर्योदय के समय व्याप्त एकादशी तिथि (उदया तिथि) को रखा जाता है। वैष्णव संप्रदाय (Vaishnava Sampradaya) और स्मार्त संप्रदाय (गृहस्थ) के नियमों के अनुसार कई बार एकादशी का व्रत लगातार दो दिन पड़ जाता है। ऐसे में गृहस्थ लोगों को पहले दिन और संन्यासियों/मोक्ष चाहने वालों को दूसरे दिन (दूजी एकादशी) व्रत रखना चाहिए।
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पारण का समय (Parana Time): व्रत का पारण (यानी व्रत खोलना) हमेशा अगले दिन, ‘द्वादशी तिथि’ (Dwadashi) को सूर्योदय के बाद किया जाता है। पारण के लिए सबसे श्रेष्ठ समय प्रातः काल का होता है।
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हरि वासर (Hari Vasara) का नियम: एकादशी पारण का सबसे कड़ा नियम यह है कि पारण कभी भी ‘हरि वासर’ के दौरान नहीं करना चाहिए। द्वादशी तिथि की पहली एक-चौथाई (1/4) अवधि को हरि वासर कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार, हरि वासर समाप्त होने के बाद ही अन्न या जल ग्रहण करके व्रत खोलना चाहिए। यदि द्वादशी तिथि सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो रही हो, तो भी सूर्योदय के बाद ही पारण किया जाता है।
Ekadashi 2026 List: साल 2026 का संपूर्ण कैलेंडर (Month-wise Dates)
आइए, वर्ष 2026 की सभी 26 एकादशी तिथियों पर एक विस्तृत नज़र डालते हैं। 2026 में मई और जून के महीने में अधिक मास (मलमास) होने के कारण 2 अतिरिक्त एकादशियां (पद्मिनी और परमा) भी पड़ेंगी।
(नोट: एकादशी व्रत की तिथियां उदया तिथि के सिद्धांत और पंचांग की गणना पर आधारित हैं। पारण का समय अगले दिन की द्वादशी तिथि के अनुसार होता है।)
1. षटतिला एकादशी (Shattila Ekadashi) – जनवरी 2026
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एकादशी की तारीख (Date): 14 जनवरी 2026 (बुधवार)
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पारण का दिन (Parana Day): 15 जनवरी 2026 (गुरुवार) की सुबह।
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महत्व: माघ कृष्ण पक्ष की इस एकादशी में ‘तिल’ (Sesame seeds) का 6 प्रकार से उपयोग किया जाता है (तिल स्नान, तिल का उबटन, तिलोदक, तिल का हवन, तिल का भोजन और तिल का दान)। यह व्रत घोर दरिद्रता और दुर्भाग्य को नष्ट करता है।
2. जया / भौमी एकादशी (Jaya Ekadashi) – जनवरी 2026
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एकादशी की तारीख (Date): 29 जनवरी 2026 (गुरुवार)
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पारण का दिन (Parana Day): 30 जनवरी 2026 (शुक्रवार) की सुबह।
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महत्व: माघ शुक्ल पक्ष की यह एकादशी पिशाच योनि (भूत-प्रेत के भय) से मुक्ति दिलाने वाली मानी गई है। इस व्रत को करने से व्यक्ति को ब्रह्महत्या जैसे महापाप से भी मुक्ति मिल जाती है।
3. विजया एकादशी (Vijaya Ekadashi) – फरवरी 2026
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एकादशी की तारीख (Date): 13 फरवरी 2026 (शुक्रवार)
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पारण का दिन (Parana Day): 14 फरवरी 2026 (शनिवार) की सुबह।
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महत्व: फाल्गुन कृष्ण पक्ष की यह एकादशी हर कार्य में ‘विजय’ (Success) दिलाती है। मान्यता है कि लंका पर आक्रमण करने से पहले मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने समुद्र किनारे इसी एकादशी का व्रत रखकर विजय का आशीर्वाद प्राप्त किया था।
4. आमलकी एकादशी (Amalaki Ekadashi) – फरवरी 2026
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एकादशी की तारीख (Date): 27 फरवरी 2026 (शुक्रवार)
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पारण का दिन (Parana Day): 28 फरवरी 2026 (शनिवार) की सुबह।
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महत्व: फाल्गुन शुक्ल पक्ष की इस एकादशी को ‘आंवला एकादशी’ भी कहा जाता है। इस दिन आंवले के पेड़ (Amla tree) की पूजा की जाती है, क्योंकि उसमें साक्षात भगवान विष्णु और शिव का वास माना गया है।
5. पापमोचनी एकादशी (Papmochani Ekadashi) – मार्च 2026
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एकादशी की तारीख (Date): 15 मार्च 2026 (रविवार)
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पारण का दिन (Parana Day): 16 मार्च 2026 (सोमवार) की सुबह।
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महत्व: चैत्र कृष्ण पक्ष की यह एकादशी, जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, मनुष्य को उसके द्वारा जाने-अनजाने में किए गए सभी ‘पापों से मुक्त’ (Papmochani) करती है। यह मानसिक शांति और शुद्धिकरण के लिए सर्वश्रेष्ठ है।
6. कामदा एकादशी (Kamada Ekadashi) – मार्च 2026
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एकादशी की तारीख (Date): 29 मार्च 2026 (रविवार)
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पारण का दिन (Parana Day): 30 मार्च 2026 (सोमवार) की सुबह।
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महत्व: चैत्र शुक्ल पक्ष की यह एकादशी हिंदू नववर्ष (नवसंवत्सर) की पहली एकादशी होती है। ‘कामदा’ का अर्थ है मनोकामनाएं पूर्ण करने वाली। इसका व्रत रखने से मनुष्य को राक्षस या प्रेत योनि से मुक्ति मिलती है और उसकी सभी जायज़ इच्छाएं पूरी होती हैं।
7. वरुथिनी एकादशी (Varuthini Ekadashi) – अप्रैल 2026
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एकादशी की तारीख (Date): 13 अप्रैल 2026 (सोमवार)
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पारण का दिन (Parana Day): 14 अप्रैल 2026 (मंगलवार) की सुबह।
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महत्व: वैशाख कृष्ण पक्ष की वरुथिनी एकादशी का फल दस हजार वर्षों की तपस्या के बराबर माना गया है। यह व्रत व्यक्ति को शारीरिक कष्टों से बचाता है और सौभाग्य की प्राप्ति कराता है। इस दिन खरबूजा (Melon) दान करने की विशेष परंपरा है।
8. मोहिनी एकादशी (Mohini Ekadashi) – अप्रैल 2026
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एकादशी की तारीख (Date): 27 अप्रैल 2026 (सोमवार)
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पारण का दिन (Parana Day): 28 अप्रैल 2026 (मंगलवार) की सुबह।
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महत्व: वैशाख शुक्ल पक्ष की इसी पावन तिथि पर भगवान विष्णु ने समुद्र मंथन के बाद अमृत को असुरों से बचाने के लिए ‘मोहिनी’ (अत्यंत सुंदर स्त्री) का रूप धारण किया था। यह व्रत मोह-माया के जालों को काटता है।
9. अपरा / अचला एकादशी (Apara Ekadashi) – मई 2026
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एकादशी की तारीख (Date): 13 मई 2026 (बुधवार)
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पारण का दिन (Parana Day): 14 मई 2026 (गुरुवार) की सुबह।
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महत्व: ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की अचला या अपरा एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को अपार (असीमित) धन और पुण्य की प्राप्ति होती है। यह व्रत समाज में मान-सम्मान और यश को बढ़ाता है।
विशेष: अधिक मास (Adhik Maas) की एकादशियां – 2026
हिंदू पंचांग में जब सूर्य संक्रांति के बिना कोई चंद्र मास बीतता है, तो उसे अधिक मास, मलमास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। यह हर 3 साल में एक बार आता है। वर्ष 2026 में अधिक मास होने के कारण ये 2 दुर्लभ एकादशियां पड़ेंगी:
10. पद्मिनी एकादशी (Padmini Ekadashi) – मई 2026 (अधिक मास)
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एकादशी की तारीख (Date): 27 मई 2026 (बुधवार)
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पारण का दिन (Parana Day): 28 मई 2026 (गुरुवार) की सुबह।
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महत्व: यह अधिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी है। इसका व्रत रखने से तीर्थ स्थानों की यात्रा करने, यज्ञ करने और कठिन तपस्या करने से भी अधिक पुण्य प्राप्त होता है। यह 3 साल में केवल एक बार आती है।
11. परमा एकादशी (Parama Ekadashi) – जून 2026 (अधिक मास)
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एकादशी की तारीख (Date): 11 जून 2026 (गुरुवार)
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पारण का दिन (Parana Day): 12 जून 2026 (शुक्रवार) की सुबह।
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महत्व: अधिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को परमा एकादशी कहते हैं। यह दुर्लभ व्रत व्यक्ति को परम (Supreme) सिद्धियां, वैभव और भगवान विष्णु का असीम प्रेम दिलाता है।
12. निर्जला एकादशी (Nirjala Ekadashi) – जून 2026
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एकादशी की तारीख (Date): 25 जून 2026 (गुरुवार)
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पारण का दिन (Parana Day): 26 जून 2026 (शुक्रवार) की सुबह।
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महत्व: ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी को ‘भीमसेनी एकादशी’ या ‘निर्जला एकादशी’ कहते हैं। यह पूरे वर्ष की सबसे बड़ी और सबसे कठिन एकादशी है। इस व्रत में जल की एक बूंद भी ग्रहण नहीं की जाती (Without water)। मान्यता है कि महर्षि वेदव्यास जी के कहने पर महाबली भीम ने केवल यही एक व्रत रखा था। जो व्यक्ति साल भर की एकादशी नहीं कर पाता, वह केवल निर्जला एकादशी का व्रत करके सभी 24 एकादशियों का पुण्य एक साथ प्राप्त कर सकता है।
13. योगिनी एकादशी (Yogini Ekadashi) – जुलाई 2026
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एकादशी की तारीख (Date): 11 जुलाई 2026 (शनिवार)
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पारण का दिन (Parana Day): 12 जुलाई 2026 (रविवार) की सुबह।
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महत्व: आषाढ़ कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी का व्रत त्वचा संबंधी रोगों (Skin diseases), कुष्ठ रोग और शारीरिक विकारों से मुक्ति दिलाने के लिए प्रसिद्ध है। यह व्रत शरीर को निरोगी और सुंदर बनाता है।
14. देवशयनी एकादशी (Devshayani Ekadashi) – जुलाई 2026
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एकादशी की तारीख (Date): 25 जुलाई 2026 (शनिवार)
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पारण का दिन (Parana Day): 26 जुलाई 2026 (रविवार) की सुबह।
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महत्व: आषाढ़ शुक्ल पक्ष की यह एकादशी हिंदू धर्म की सबसे महत्वपूर्ण तिथियों में से एक है। इसी दिन से भगवान श्री हरि विष्णु क्षीरसागर में 4 महीने के लिए योग निद्रा (Sleep) में चले जाते हैं। इसी दिन से ‘चातुर्मास’ (Chaturmas) का आरंभ होता है और विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे सभी मांगलिक कार्य 4 महीने के लिए वर्जित हो जाते हैं।
15. कामिका एकादशी (Kamika Ekadashi) – अगस्त 2026
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एकादशी की तारीख (Date): 9 अगस्त 2026 (रविवार)
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पारण का दिन (Parana Day): 10 अगस्त 2026 (सोमवार) की सुबह।
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महत्व: श्रावण (सावन) कृष्ण पक्ष की इस एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु और भगवान शिव दोनों का आशीर्वाद मिलता है। चातुर्मास में यह पहली एकादशी होती है, जो पापों को ऐसे नष्ट करती है जैसे सूखी घास को आग की छोटी सी चिंगारी जला देती है।
16. श्रावण पुत्रदा एकादशी (Shravana Putrada Ekadashi) – अगस्त 2026
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एकादशी की तारीख (Date): 23 अगस्त 2026 (रविवार)
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पारण का दिन (Parana Day): 24 अगस्त 2026 (सोमवार) की सुबह।
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महत्व: सावन शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी का व्रत उन दंपत्तियों (Couples) के लिए एक वरदान है जो संतान सुख से वंचित हैं। पूर्ण श्रद्धा से यह उपवास करने से भगवान विष्णु की कृपा से सुयोग्य और संस्कारी संतान (Child) की प्राप्ति होती है।
17. अजा एकादशी (Aja Ekadashi) – सितंबर 2026
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एकादशी की तारीख (Date): 7 सितंबर 2026 (सोमवार)
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पारण का दिन (Parana Day): 8 सितंबर 2026 (मंगलवार) की सुबह।
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महत्व: भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अजा एकादशी अत्यंत शक्तिशाली है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र ने अपनी खोई हुई सत्ता, पत्नी और पुत्र को इसी एकादशी का व्रत करके वापस प्राप्त किया था। यह खोया हुआ मान-सम्मान वापस दिलाती है।
18. परिवर्तिनी / जलझूलनी एकादशी (Parivartini Ekadashi) – सितंबर 2026
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एकादशी की तारीख (Date): 22 सितंबर 2026 (मंगलवार)
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पारण का दिन (Parana Day): 23 सितंबर 2026 (बुधवार) की सुबह।
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महत्व: भाद्रपद शुक्ल पक्ष की इस तिथि पर क्षीरसागर में सो रहे भगवान विष्णु अपनी ‘करवट बदलते’ (Turn on the side) हैं, इसलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है। इस दिन भगवान वामन के रूप की पूजा की जाती है।
19. इंदिरा एकादशी (Indira Ekadashi) – अक्टूबर 2026
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एकादशी की तारीख (Date): 6 अक्टूबर 2026 (मंगलवार)
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पारण का दिन (Parana Day): 7 अक्टूबर 2026 (बुधवार) की सुबह।
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महत्व: आश्विन कृष्ण पक्ष की इंदिरा एकादशी ‘पितृ पक्ष’ (Shradh) के दौरान आती है। यह एकमात्र ऐसी एकादशी है जिसका व्रत करने से प्राप्त होने वाला सारा पुण्य पितरों (Ancestors) को समर्पित किया जा सकता है। इससे पितरों को नरक से मुक्ति मिलती है और वे वैकुंठ को प्राप्त होते हैं।
20. पापांकुशा एकादशी (Papankusha Ekadashi) – अक्टूबर 2026
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एकादशी की तारीख (Date): 22 अक्टूबर 2026 (गुरुवार)
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पारण का दिन (Parana Day): 23 अक्टूबर 2026 (शुक्रवार) की सुबह।
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महत्व: आश्विन शुक्ल पक्ष की यह एकादशी मन और शरीर के पापों पर एक ‘अंकुश’ (Control/Goad) लगाने का काम करती है। यह व्रत तीर्थयात्राओं के समान पुण्य प्रदान करता है।
21. रमा एकादशी (Rama Ekadashi) – नवंबर 2026
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एकादशी की तारीख (Date): 5 नवंबर 2026 (गुरुवार)
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पारण का दिन (Parana Day): 6 नवंबर 2026 (शुक्रवार) की सुबह।
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महत्व: कार्तिक कृष्ण पक्ष (दिवाली से ठीक पहले) आने वाली यह एकादशी माता लक्ष्मी के नाम ‘रमा’ पर आधारित है। इस व्रत को करने से घर में स्थिर लक्ष्मी का वास होता है और जीवन से दरिद्रता हमेशा के लिए समाप्त हो जाती है।
22. देवोत्थान / प्रबोधिनी एकादशी (Devutthana Ekadashi) – नवंबर 2026
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एकादशी की तारीख (Date): 21 नवंबर 2026 (शनिवार)
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पारण का दिन (Parana Day): 22 नवंबर 2026 (रविवार) की सुबह।
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महत्व: कार्तिक शुक्ल पक्ष की यह एकादशी बहुत बड़ा पर्व है। इस दिन भगवान विष्णु 4 महीने की योग निद्रा से ‘जागते हैं’ (Wakes up)। इसी दिन से चातुर्मास समाप्त होता है और विवाह आदि शुभ कार्य फिर से शुरू हो जाते हैं। इस दिन ‘तुलसी विवाह’ (Tulsi Vivah) का भी भव्य आयोजन किया जाता है।
23. उत्पन्ना एकादशी (Utpanna Ekadashi) – दिसंबर 2026
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एकादशी की तारीख (Date): 4 दिसंबर 2026 (शुक्रवार)
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पारण का दिन (Parana Day): 5 दिसंबर 2026 (शनिवार) की सुबह।
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महत्व: मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की इसी एकादशी के दिन ‘माता एकादशी’ का जन्म हुआ था। भगवान विष्णु के शरीर से एक देवी उत्पन्न हुईं, जिन्होंने मुर नामक भयंकर राक्षस का वध किया। भगवान विष्णु ने प्रसन्न होकर उन्हें ‘एकादशी’ नाम दिया।
24. मोक्षदा एकादशी / गीता जयंती (Mokshada Ekadashi) – दिसंबर 2026
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एकादशी की तारीख (Date): 20 दिसंबर 2026 (रविवार)
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पारण का दिन (Parana Day): 21 दिसंबर 2026 (सोमवार) की सुबह।
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महत्व: मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की मोक्षदा एकादशी मोक्ष (Liberation) दिलाने वाली है। यह दिन अत्यंत पवित्र है क्योंकि कुरुक्षेत्र के मैदान में भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को ‘श्रीमद्भगवद्गीता’ (Bhagavad Gita) का उपदेश इसी दिन दिया था। इसलिए इसे ‘गीता जयंती’ के रूप में भी मनाया जाता है।
(नोट: अगले वर्ष यानी जनवरी 2027 में सफला एकादशी और पौष पुत्रदा एकादशी आएंगी, जो पंचांग के चंद्र चक्र को पूरा करेंगी।)
एकादशी व्रत के कड़े और महत्वपूर्ण नियम (Vrat Vidhi and Rules)
“Ekadashi 2026 List: साल 2026 की सभी एकादशी Dates, Vrat Tithi & Parana Time” जानने के साथ-साथ आपको व्रत के अनुशासन का पालन भी करना चाहिए। एकादशी का व्रत तीन दिनों का संकल्प होता है (दशमी, एकादशी और द्वादशी):
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दशमी तिथि (एक दिन पहले): दशमी की शाम (सूर्यास्त के बाद) भोजन नहीं करना चाहिए ताकि एकादशी के दिन पेट खाली और शुद्ध रहे। लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा और मसूर की दाल का सेवन दशमी से ही वर्जित हो जाता है।
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एकादशी के दिन: सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। पीले वस्त्र पहनकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें। इस दिन चावल (Rice) और किसी भी प्रकार का अन्न (Grains) खाना महापाप माना गया है। मान्यता है कि इस दिन चावल में महर्षि मेधा के अंश का वास होता है, जो मांस खाने के बराबर पाप लगाता है।
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रात्रि जागरण (Night Vigil): एकादशी व्रत का पूर्ण फल तभी मिलता है जब साधक रात को सोए नहीं (खासकर देवशयनी और देवोत्थान एकादशी पर)। रात भर भगवान के भजन, कीर्तन और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना चाहिए।
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द्वादशी तिथि (पारण का दिन): अगले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, ब्राह्मणों को भोजन कराएं, दान (दक्षिणा) दें और उसके बाद शुभ मुहूर्त (हरि वासर टल जाने के बाद) में अन्न या जल ग्रहण करके अपना व्रत खोलें।
व्रत के प्रकार (Types of Fasting)
आप अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार तीन में से कोई भी एक तरीका चुन सकते हैं:
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निर्जला व्रत: बिना पानी और बिना भोजन के पूरे 24 घंटे रहना (जैसे निर्जला एकादशी)।
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फलाहारी व्रत: पूरे दिन में केवल ताजे फल, दूध, और सूखे मेवे (Dry fruits) ग्रहण करना।
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अल्पाहार (सेंधा नमक): एक समय साबूदाना, कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से बना फलाहार (सेंधा नमक के साथ) ग्रहण करना। बीमार, वृद्ध और गर्भवती महिलाओं को यही व्रत करना चाहिए।
एकादशी व्रत के वैज्ञानिक लाभ (Scientific Benefits of Ekadashi Fasting)
आध्यात्मिक लाभों के अलावा, आधुनिक चिकित्सा विज्ञान (Medical Science) भी 15 दिनों में एक बार उपवास रखने को शरीर के लिए वरदान मानता है।
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ऑटोफैगी (Autophagy): जब आप 24 घंटे तक अन्न नहीं खाते, तो शरीर के अंदर एक प्राकृतिक सफाई प्रक्रिया (Autophagy) शुरू होती है, जिसमें कोशिकाएं अपने अंदर मौजूद टॉक्सिन्स (जहरीले तत्वों) को खा जाती हैं।
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पाचन तंत्र को आराम: हमारा पेट रोज़ाना भारी भोजन पचाकर थक जाता है। महीने में दो दिन का उपवास पाचन तंत्र (Digestive system) को रीस्टार्ट करता है।
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जल का संतुलन: पृथ्वी पर मौजूद पानी और चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण का गहरा संबंध है (जैसे ज्वार-भाटा)। ग्यारहवें दिन (एकादशी) चंद्रमा का प्रभाव शरीर के पानी पर सर्वाधिक होता है। इस दिन उपवास रखने से शरीर में जल का संतुलन (Water retention) सुधरता है और ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं कम होती हैं।
भारतीय पंचांग की ग्यारहवीं तिथि यानी ‘एकादशी’ मन, शरीर और आत्मा तीनों की शुद्धि का सबसे बड़ा वैज्ञानिक और आध्यात्मिक फॉर्मूला है।
इस विस्तृत लेख “Ekadashi 2026 List: साल 2026 की सभी एकादशी Dates, Vrat Tithi & Parana Time” के माध्यम से हमने वर्ष 2026 की सभी 26 एकादशियों (अधिक मास सहित) की पूरी सूची, उनके पीछे की पौराणिक मान्यताएं, व्रत के नियम और पारण के समय का पूरा खाका आपके सामने प्रस्तुत किया है।
आप इस कैलेंडर को अपने फोन में सेव (Bookmark) करके रख सकते हैं ताकि पूरे साल आप सही तिथि और समय पर भगवान श्री हरि विष्णु की आराधना कर सकें। पूर्ण श्रद्धा, पवित्रता और अटूट विश्वास के साथ किया गया एकादशी व्रत कभी खाली नहीं जाता। भगवान नारायण आप सभी की मनोकामनाएं पूर्ण करें और आपके परिवार में सुख, शांति तथा आरोग्य बनाए रखें।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः!
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: वर्ष 2026 में सबसे बड़ी ‘निर्जला एकादशी’ कब है?
उत्तर: साल 2026 में सबसे कठोर और पुण्यदायी ‘निर्जला एकादशी’ का व्रत 25 जून 2026 (गुरुवार) को रखा जाएगा। इस दिन बिना जल पिए उपवास किया जाता है।
प्रश्न 2: क्या एकादशी के व्रत में पानी पी सकते हैं?
उत्तर: जी हाँ। ‘निर्जला एकादशी’ को छोड़कर, साल की बाकी सभी एकादशियों पर आप अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार पानी, नीबू पानी, दूध या फलों का रस पी सकते हैं। भगवान कभी भी शरीर को कष्ट देकर भक्ति करने को नहीं कहते।
प्रश्न 3: पारण के समय ‘हरि वासर’ (Hari Vasara) क्या होता है?
उत्तर: एकादशी के अगले दिन लगने वाली ‘द्वादशी तिथि’ के पहले एक-चौथाई (1/4th) हिस्से को ‘हरि वासर’ कहा जाता है। यह समय लगभग 5 से 6 घंटे का हो सकता है। शास्त्रों के अनुसार, हरि वासर के दौरान व्रत नहीं खोलना चाहिए। पारण हमेशा इसके बाद ही करना चाहिए।
प्रश्न 4: एकादशी के दिन चावल (Rice) क्यों नहीं खाना चाहिए?
उत्तर: पौराणिक मान्यता है कि एकादशी के दिन चावल में महर्षि मेधा के शरीर के अंश का वास होता है, इसलिए इसे खाना मांस खाने के समान माना गया है। वैज्ञानिक दृष्टि से, चावल में जल तत्व अधिक होता है, और एकादशी पर चंद्रमा के प्रभाव से यह मन को चंचल कर सकता है, जिससे व्रत में ध्यान (Meditation) लगाना कठिन हो जाता है।
प्रश्न 5: यदि भूल से एकादशी का पारण समय (Parana Time) निकल जाए, तो क्या करें?
उत्तर: पारण का सबसे उत्तम समय सुबह सूर्योदय के बाद होता है। यदि किसी कारणवश सुबह का समय निकल जाए, तो दोपहर (मध्याह्न) के समय पारण नहीं करना चाहिए। ऐसे में आपको दोपहर बीत जाने के बाद (लगभग 1:00 बजे के बाद) ही अपना व्रत खोलना चाहिए।