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Gupt Navratri 2026: राशि के अनुसार करें देवी दुर्गा की सीक्रेट पूजा, पूरी होगी हर मनोकामना! (Best Zodiac Puja Tips)It takes 11 minutes... to read this article !

सनातन धर्म में नवरात्रि का पर्व बहुत ही पवित्र और ऊर्जा से भरा माना जाता है। हम सभी चैत्र और शारदीय नवरात्रि के बारे में तो जानते ही हैं, लेकिन साल में दो बार गुप्त नवरात्रि भी आती है, जो तंत्र साधना और सिद्धियों की प्राप्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 एक ऐसा ही दिव्य अवसर है, जब देवी दुर्गा के 10 महाविद्या रूपों की गुप्त रूप से पूजा की जाती है। यह समय उन लोगों के लिए बेहद खास है जो जीवन में किसी बड़ी परेशानी से गुजर रहे हैं या कोई विशेष मनोकामना पूरी करना चाहते हैं।

यदि आप भी यह सोच रहे हैं कि Rashi ke anusar Navratri ki puja kaise kare, तो आप बिल्कुल सही जगह पर हैं। इस विस्तृत लेख में, हम आपको गुप्त नवरात्रि 2026 की सही तिथियों, शुभ मुहूर्त, और Devi puja tips for 12 zodiac signs के बारे में विस्तार से बताएंगे।

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026: तिथियां और कलश स्थापना मुहूर्त

साल 2026 में आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि की शुरुआत 15 जुलाई 2026 (बुधवार) से हो रही है और इसका समापन 23 जुलाई 2026 (बृहस्पतिवार) को होगा। इन नौ दिनों में माता की गुप्त साधना का विशेष विधान है।

कलश स्थापना (घटस्थापना) मुहूर्त:

15 जुलाई 2026 को सुबह 05:33 बजे से लेकर सुबह 10:09 बजे तक कलश स्थापना का सबसे शुभ मुहूर्त रहेगा।

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 का कैलेंडर (दिन और देवियां)

दिन तिथि देवी / महाविद्या का नाम
पहला दिन 15 जुलाई 2026 (बुधवार) मां शैलपुत्री / मां काली
दूसरा दिन 16 जुलाई 2026 (गुरुवार) मां ब्रह्मचारिणी / मां तारा
तीसरा दिन 17 जुलाई 2026 (शुक्रवार) मां चंद्रघंटा / मां छिन्नमस्ता
चौथा दिन 18 जुलाई 2026 (शनिवार) मां कूष्मांडा / मां षोडशी (त्रिपुर सुंदरी)
पांचवां दिन 19 जुलाई 2026 (रविवार) मां स्कंदमाता / मां भुवनेश्वरी
छठवां दिन 20 जुलाई 2026 (सोमवार) मां कात्यायनी / मां त्रिपुर भैरवी
सातवां दिन 21 जुलाई 2026 (मंगलवार) मां कालरात्रि / मां धूमावती
आठवां दिन 22 जुलाई 2026 (बुधवार) मां महागौरी / मां बगलामुखी
नौवां दिन 23 जुलाई 2026 (गुरुवार) मां सिद्धिदात्री / मां मातंगी और कमला

राशि के अनुसार गुप्त नवरात्रि की पूजा ​कैसे करें? (Devi Puja Tips for 12 Zodiac Signs)

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यदि व्यक्ति अपनी राशि (Zodiac Sign) के अनुसार मां भगवती की उपासना करता है, तो उसे शीघ्र ही सकारात्मक परिणाम देखने को मिलते हैं। आइए विस्तार से जानते हैं Gupt Navratri puja tips for 12 zodiac signs और अचूक उपाय।

1. मेष राशि (Aries)

मेष राशि के जातकों का स्वामी मंगल होता है। गुप्त नवरात्रि में आपको मां स्कंदमाता और महाविद्या तारा की पूजा करनी चाहिए।

  • पूजा विधि: मां दुर्गा को लाल रंग के पुष्प (जैसे गुड़हल) अर्पित करें। लाल चंदन की माला से मंत्र जाप करना आपके लिए श्रेष्ठ रहेगा।

  • Gupt Navratri Worship Tips: “ऊं ह्रीं दुं दुर्गायै नम:” मंत्र का 108 बार जाप करें।

  • उपाय: मंगलवार के दिन माता को बूंदी के लड्डू या गुड़ का भोग लगाएं। इससे आत्मविश्वास में वृद्धि होगी और कर्ज से मुक्ति मिलेगी।

2. वृषभ राशि (Taurus)

वृषभ राशि के स्वामी शुक्र देव हैं। आपके लिए मां महागौरी और विद्या कमला की साधना अत्यंत फलदायी साबित होगी।

  • पूजा विधि: माता की पूजा में सफेद रंग के फूल, सफेद चंदन और इत्र का प्रयोग अवश्य करें।

  • Gupt Navratri Worship Tips: स्फटिक की माला से “ऊं सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके” का जाप करें।

  • उपाय: माता को मखाने की खीर या बताशे का भोग लगाएं। यह gupt navratri puja ke upay आपके वैवाहिक जीवन की समस्याओं को दूर कर धन-धान्य में वृद्धि करेगा।

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3. मिथुन राशि (Gemini)

मिथुन राशि के स्वामी बुध देव हैं। आपके लिए मां ब्रह्मचारिणी और महाविद्या भुवनेश्वरी की उपासना सर्वश्रेष्ठ है।

  • पूजा विधि: देवी को हरे रंग की चूड़ियां और वस्त्र भेंट करें। पूजा में दूर्वा (हरी घास) का इस्तेमाल करें।

  • Gupt Navratri Worship Tips: रुद्राक्ष की माला से माता के “ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” (नवार्ण मंत्र) का जाप करें।

  • उपाय: पंचमेवा का भोग लगाएं और बुधवार के दिन कन्याओं को हरी सामग्री दान करें। इससे व्यापार और करियर में आ रही रुकावटें दूर होंगी।

4. कर्क राशि (Cancer)

चंद्रमा के स्वामित्व वाली कर्क राशि वालों को मां शैलपुत्री और महाविद्या कमला की आराधना करनी चाहिए।

  • पूजा विधि: माता को सफेद कमल का फूल या चमेली का फूल अर्पित करें। पूजा करते समय सफेद आसन का प्रयोग करें।

  • Gupt Navratri Worship Tips: “ऊं श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं कमलवासिन्यै स्वाहा” मंत्र का जाप मानसिक शांति देगा।

  • उपाय: गाय के घी का दीपक जलाएं और माता को दूध से बनी मिठाइयों का भोग लगाएं। इससे मानसिक तनाव खत्म होगा और घर में सुख-शांति का वास होगा।

5. सिंह राशि (Leo)

सूर्य ग्रह के प्रभाव वाली सिंह राशि के जातकों को मां कूष्मांडा और महाविद्या त्रिपुर भैरवी की पूजा करनी चाहिए।

  • पूजा विधि: देवी की पूजा में लाल रंग के वस्त्र और रोली (कुमकुम) का प्रयोग करें।

  • Gupt Navratri Worship Tips: तांबे के लोटे में जल भरकर उसमें लाल फूल डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें, फिर माता के मंत्रों का जाप करें।

  • उपाय: माता को मालपुए या गुड़ से बनी चीजों का भोग लगाएं। यह Rashi ke anusar Gupt Navratri ki puja Vidhi आपके मान-सम्मान और लीडरशिप क्वालिटी में जबरदस्त बढ़ोतरी करेगी।

6. कन्या राशि (Virgo)

कन्या राशि वालों के स्वामी भी बुध हैं। आपको मां ब्रह्मचारिणी और महाविद्या भुवनेश्वरी की आराधना से लाभ मिलेगा।

  • पूजा विधि: पूजा के दौरान हरे रंग का आसन बिछाएं। माता को लौंग और इलायची का जोड़ा जरूर अर्पित करें।

  • Gupt Navratri Worship Tips: दुर्गा चालीसा का नित्य पाठ करें और माता को हरे फल (जैसे नाशपाती या अमरुद) चढ़ाएं।

  • उपाय: बुधवार के दिन गाय को हरा चारा खिलाएं। इससे बुद्धि प्रखर होगी और शिक्षा व नौकरी में आ रही बाधाएं नष्ट होंगी।

7. तुला राशि (Libra)

तुला राशि पर शुक्र का राज है। आपके लिए देवी महागौरी और महाविद्या षोडशी (त्रिपुर सुंदरी) की साधना सर्वोपरि है।

  • पूजा विधि: माता की प्रतिमा या तस्वीर के सामने गुलाब की अगरबत्ती जलाएं और उन्हें लाल चुनरी ओढ़ाएं।

  • Gupt Navratri Worship Tips: दुर्गा सप्तशती के कीलक स्तोत्र का पाठ विशेष रूप से फलदायी है।

  • उपाय: सफेद रसगुल्ले या बर्फी का भोग लगाएं। यह आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की पूजा के उपाय आपके जीवन में प्रेम और भौतिक सुख-सुविधाओं को आकर्षित करेगा।

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8. वृश्चिक राशि (Scorpio)

मंगल के स्वामित्व वाली वृश्चिक राशि के लोगों को मां कालरात्रि और महाविद्या छिन्नमस्ता की पूजा करनी चाहिए।

  • पूजा विधि: पूजा में लाल गुलाब और लाल रोली का प्रयोग करें। रात के समय गुप्त रूप से साधना करना आपके लिए श्रेष्ठ है।

  • Gupt Navratri Worship Tips: “ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” मंत्र का जाप आधी रात को करें (यदि तंत्र साधना का अनुभव न हो तो सामान्य पूजा ही करें)।

  • उपाय: गुड़ और चने का भोग लगाएं। इससे शत्रुओं का नाश होगा और कोर्ट-कचहरी के मामलों में सफलता मिलेगी।

9. धनु राशि (Sagittarius)

देवगुरु बृहस्पति की राशि धनु वालों को मां सिद्धिदात्री और महाविद्या मातंगी की पूजा करनी चाहिए।

  • पूजा विधि: माता को पीले गेंदे के फूल या पीले वस्त्र अर्पित करें। हल्दी से माता का तिलक करें।

  • Gupt Navratri Worship Tips: “ऊं दुं दुर्गायै नमः” मंत्र का जाप हल्दी की माला से करना अत्यंत शुभ है।

  • उपाय: बेसन के लड्डू या केले का भोग माता को लगाएं। इससे विवाह में आ रही देरी खत्म होती है और अध्यात्म में रुचि बढ़ती है।

10. मकर राशि (Capricorn)

शनि देव के प्रभाव वाली मकर राशि वालों को मां कालरात्रि और महाविद्या काली की साधना करनी चाहिए।

  • पूजा विधि: माता की पूजा में नीले या बैंगनी रंग के फूलों (जैसे अपराजिता) का प्रयोग करें।

  • Gupt Navratri Worship Tips: शनि दोष से मुक्ति के लिए दुर्गा सप्तशती का पाठ अचूक माना गया है।

  • उपाय: माता को उड़द की दाल की कचौरी या काले तिल से बनी मिठाई का भोग लगाएं। यह उपाय आपको गुप्त शत्रुओं और तंत्र-मंत्र की बाधाओं से बचाएगा।

11. कुंभ राशि (Aquarius)

मकर की तरह कुंभ राशि के स्वामी भी शनि देव हैं। आपके लिए भी मां कालरात्रि और दश महाविद्या में से मां काली की पूजा सर्वश्रेष्ठ है।

  • पूजा विधि: सरसों के तेल का दीपक जलाएं और माता को लौंग-कपूर अर्पित करें।

  • Gupt Navratri Worship Tips: “ऊं ह्रीं श्रीं क्रीं परमेश्वरि कालिके स्वाहा” का जाप करें (किसी योग्य गुरु के मार्गदर्शन में)।

  • उपाय: हलवा और काले चने का भोग लगाएं। यह gupt navratri puja ke upay आपके व्यापार को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा और पुरानी बीमारियों से राहत दिलाएगा।

12. मीन राशि (Pisces)

बृहस्पति के स्वामित्व वाली मीन राशि के लोगों को मां सिद्धिदात्री और महाविद्या कमला की आराधना करनी चाहिए।

  • पूजा विधि: पूजा स्थल पर पीला कपड़ा बिछाएं और माता को पीले फूल एवं केसर का तिलक लगाएं।

  • Gupt Navratri Worship Tips: रामरक्षा स्तोत्र या दुर्गा बत्तीसी का पाठ आपके लिए बहुत ही शुभ रहेगा।

  • उपाय: माता को केसर युक्त साबूदाने की खीर का भोग लगाएं। यह उपाय जीवन में दरिद्रता को दूर कर अपार धन-संपत्ति के योग बनाता है।

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की पूजा विधि (Gupt Navratri Puja Vidhi)

गुप्त नवरात्रि की पूजा सामान्य नवरात्रि से थोड़ी अलग होती है। इसमें दिखावा नहीं किया जाता है और साधक शांत व गुप्त रूप से माता की आराधना करते हैं। Rashi ke anusar Navratri puja kaise kare जानने के साथ-साथ सामान्य पूजा विधि को समझना भी जरूरी है:

  • ब्रह्म मुहूर्त में उठें: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र (अपनी राशि के अनुकूल रंग के) धारण करें।

  • कलश स्थापना: 15 जुलाई 2026 को शुभ मुहूर्त में एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर माता की मूर्ति और कलश की स्थापना करें। कलश में जल, सिक्का, सुपारी और आम के पत्ते डालें।

  • अखंड ज्योति: माता के सामने 9 दिनों तक जलने वाली अखंड ज्योति प्रज्वलित करें। यह ज्योति गाय के घी या तिल के तेल की हो सकती है।

  • संकल्प और मंत्र जाप: हाथ में जल और अक्षत लेकर अपनी मनोकामना का संकल्प लें। इसके बाद नवार्ण मंत्र या अपनी राशि के अनुसार बताए गए मंत्र का जाप करें।

  • भोग और आरती: प्रतिदिन सुबह-शाम माता की आरती करें और अपनी राशि के अनुसार भोग (प्रसाद) अर्पित करें।

  • गुप्ता का ध्यान रखें: यह ‘गुप्त’ नवरात्रि है, इसलिए अपनी साधना, व्रत और मंत्रों का जिक्र किसी बाहरी व्यक्ति से न करें।

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गुप्त नवरात्रि पूजा के उपाय (Gupt Navratri Puja Ke Upay)

कुछ ऐसे अचूक उपाय हैं जो हर राशि के जातक अपनी विशेष समस्याओं को दूर करने के लिए आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 में कर सकते हैं:

  • धन प्राप्ति के लिए: गुप्त नवरात्रि के दौरान प्रतिदिन माता को एक लाल गुलाब और एक लौंग का जोड़ा अर्पित करें। नवमी के दिन इन लौंग को लाल कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी में रख लें।

  • नौकरी या प्रमोशन के लिए: माता को नौ दिनों तक पान का पत्ता अर्पित करें। पत्ते पर चंदन से ‘श्रीं’ लिखकर माता के चरणों में रखें।

  • शीघ्र विवाह के लिए: जो जातक विवाह योग्य हैं, वे गुप्त नवरात्रि में माता को लाल चुनरी और सुहाग का सारा सामान (चूड़ी, सिंदूर, बिंदी आदि) भेंट करें।

  • रोग मुक्ति के लिए: मां दुर्गा के कुंजिका स्तोत्र का पाठ करें और माता को अनार का भोग लगाएं।

गुप्त नवरात्रि 2026 एक बहुत ही शक्तिशाली और आध्यात्मिक समय है। यदि आप पूरी श्रद्धा, विश्वास और गोपनीयता के साथ राशि के अनुसार गुप्त नवरात्रि की पूजा करते हैं, तो देवी दुर्गा और 10 महाविद्याओं की असीम कृपा आप पर अवश्य बरसेगी। ऊपर दिए गए Devi puja tips for 12 zodiac signs का पालन करें और अपने जीवन को दुख, दरिद्रता और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्त करें। याद रखें, तंत्र और गुप्त साधना में भाव और समर्पण का सबसे बड़ा महत्व होता है। जय माता दी!

Frequently Asked Questions (FAQs)

1. आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 कब से कब तक है?

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की शुरुआत 15 जुलाई 2026, बुधवार से हो रही है और इसका समापन 23 जुलाई 2026, बृहस्पतिवार को होगा।

2. Rashi ke anusar Navratri puja kaise kare?

अपनी राशि के स्वामी ग्रह के अनुसार माता के विशिष्ट स्वरूप की पूजा करनी चाहिए। उदाहरण के लिए, मेष राशि वाले मां स्कंदमाता की, वृषभ वाले महागौरी की, और मकर वाले मां कालरात्रि की पूजा लाल, सफेद या नीले वस्त्र पहनकर और संबंधित चीजों का भोग लगाकर कर सकते हैं। पूरी जानकारी ऊपर लेख में दी गई है।

3. गुप्त नवरात्रि और सामान्य नवरात्रि में क्या अंतर है?

चैत्र और शारदीय नवरात्रि गृहस्थों के लिए होती है, जिसमें पूजा सावर्जनिक रूप से और सात्विक भाव से की जाती है। वहीं, गुप्त नवरात्रि मुख्य रूप से साधकों, तांत्रिकों और अघोरियों द्वारा तंत्र-मंत्र की सिद्धि और 10 महाविद्याओं की गुप्त रूप से साधना के लिए की जाती है।

4. क्या गृहस्थ लोग भी गुप्त नवरात्रि की पूजा कर सकते हैं?

हां, गृहस्थ लोग भी गुप्त नवरात्रि में पूजा कर सकते हैं। हालांकि, उन्हें तांत्रिक अनुष्ठानों से बचना चाहिए और केवल सात्विक रूप से देवी दुर्गा की सामान्य पूजा, चालीसा, या दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए।

5. गुप्त नवरात्रि की पूजा के अचूक उपाय क्या हैं?

गुप्त नवरात्रि में धन लाभ के लिए माता को लौंग का जोड़ा और लाल गुलाब चढ़ाना, विवाह के लिए सुहाग की सामग्री अर्पित करना, और बाधाओं को दूर करने के लिए नवार्ण मंत्र (ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे) का जाप करना सबसे अचूक उपाय माने जाते हैं।

"नमस्कार! मैं अमित तिवारी हूँ, और आप मुझे एक 'साधक' के रूप में जान सकते हैं। बचपन से ही सनातन धर्म, तंत्र-मंत्र और आध्यात्मिक साधनाओं ने मुझे अपनी ओर गहराई से आकर्षित किया है। वर्षों के निरंतर अध्ययन, गुरु-कृपा और अपने व्यक्तिगत साधना-अनुभवों से मैंने जो कुछ भी सीखा है, उसे मैं sadhnas.in के माध्यम से आपके साथ साझा कर रहा हूँ। मेरा मुख्य उद्देश्य इंटरनेट पर फैले भ्रम को दूर करके प्रामाणिक, सत्य और शास्त्र-सम्मत जानकारी को बेहद सरल भाषा में आप तक पहुँचाना है। मैं कोई गुरु या उपदेशक नहीं हूँ, बल्कि आप ही की तरह ईश्वर की खोज में निकला एक राही हूँ। मेरी यही कोशिश है कि मेरे अनुभवों और लेखनी से आपकी आध्यात्मिक यात्रा और भी सुगम व सफल हो सके।"

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