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Annaprashan Muhurat 2026: जानें अन्नप्राशन संस्कार के शुभ मुहूर्त, तिथियां और विधिIt takes 13 minutes... to read this article !

सनातन हिंदू धर्म में जीवन को संस्कारवान और पवित्र बनाने के लिए जन्म से लेकर मृत्यु तक कुल 16 प्रमुख संस्कारों (16 Sanskars) का विधान है। इन संस्कारों का उद्देश्य मनुष्य के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक विकास को एक नई दिशा देना है। इन्हीं 16 संस्कारों में से सातवां और अत्यंत महत्वपूर्ण संस्कार है— ‘अन्नप्राशन संस्कार’ (Annaprashan Sanskar)

‘अन्नप्राशन’ संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बना है— ‘अन्न’ (भोजन या अनाज) और ‘प्राशन’ (ग्रहण करना या खिलाना)। इसका सीधा अर्थ है शिशु को जीवन में पहली बार अन्न चखाना। जन्म से लेकर लगभग 6 महीने तक शिशु का मुख्य आहार केवल माता का दूध (Breast milk) होता है। लेकिन जैसे-जैसे शिशु का विकास होता है, उसके शरीर को अधिक ऊर्जा और पोषण की आवश्यकता होती है, जो केवल दूध से पूरी नहीं हो सकती। इसलिए, शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास को गति देने के लिए उसे पहली बार ठोस आहार (Solid food) दिया जाता है।

भारतीय संस्कृति में शिशु को पहला अन्न ऐसे ही किसी भी दिन नहीं खिलाया जाता। इसके लिए बकायदा देवी-देवताओं का आवाहन किया जाता है और एक शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat) निकाला जाता है। यदि आपके घर में भी किसी नन्हें मेहमान का जन्म हुआ है और आप वर्ष 2026 में उसे पहली बार अन्न खिलाने जा रहे हैं, तो इसके लिए आपको सही तिथि और मुहूर्त का ज्ञान होना आवश्यक है।

इस बेहद विस्तृत, प्रामाणिक और शोधपरक लेख “Annaprashan Muhurat 2026” में हम आपको साल 2026 के सभी शुभ अन्नप्राशन मुहूर्तों की महीनेवार (Month-wise) सूची, सही उम्र के नियम, ज्योतिषीय आधार, पूजा विधि और इसके वैज्ञानिक महत्व के बारे में संपूर्ण जानकारी देंगे।

1. अन्नप्राशन संस्कार के लिए शिशु की सही उम्र क्या है? (Age Rules for Annaprashan)

हिंदू धर्मग्रंथों, विशेषकर ‘मनुस्मृति’ और ‘मुहूर्त चिंतामणि’ के अनुसार, लड़के और लड़की के अन्नप्राशन के लिए उम्र (महीनों) का एक अलग और विशेष नियम निर्धारित किया गया है। यह नियम शिशु के शारीरिक विकास और पाचन तंत्र (Digestive system) की परिपक्वता को ध्यान में रखकर बनाया गया है:

  • लड़कों के लिए नियम (For Boys): लड़कों का अन्नप्राशन हमेशा सम महीनों (Even Months) में किया जाना चाहिए। यानी शिशु के जन्म के बाद छठे (6th), आठवें (8th), दसवें (10th) या बारहवें (12th) महीने में अन्नप्राशन संस्कार करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

  • लड़कियों के लिए नियम (For Girls): लड़कियों का अन्नप्राशन हमेशा विषम महीनों (Odd Months) में किया जाना चाहिए। यानी शिशु के जन्म के बाद पांचवें (5th), सातवें (7th), नौवें (9th) या ग्यारहवें (11th) महीने में यह संस्कार संपन्न किया जाना चाहिए।

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण: आयुर्वेद के अनुसार, 5 से 6 महीने की उम्र में शिशु की ‘जठराग्नि’ (पाचन अग्नि) दूध के अलावा अन्य सुपाच्य और ठोस आहार को पचाने के लिए तैयार हो जाती है। शिशु के दांत निकलने की प्रक्रिया भी इसी समय शुरू होती है, जिससे उसे चबाने (Chewing) का अभ्यास कराना आवश्यक होता है।

2. अन्नप्राशन मुहूर्त निकालने के ज्योतिषीय नियम (Astrological Rules)

एक आदर्श Annaprashan Muhurat 2026 निकालते समय वैदिक पंचांग के कई अंगों पर बारीकी से विचार किया जाता है। गलत नक्षत्र या तिथि में शिशु को अन्न खिलाने से उसे पेट संबंधी विकार, जीवन में स्वास्थ्य समस्याएं और मानसिक अशांति का सामना करना पड़ सकता है।

शुभ वार (Days of the Week)

  • उत्तम दिन: सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार को अन्नप्राशन के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

  • वर्जित दिन: मंगलवार, शनिवार और रविवार को अन्नप्राशन संस्कार करने से बचना चाहिए। विशेषकर मंगलवार को उग्र दिन माना जाता है जो शिशु के स्वभाव को क्रोधी बना सकता है।

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शुभ तिथियां (Auspicious Tithis)

हिंदू पंचांग के अनुसार द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी और त्रयोदशी तिथियां अन्नप्राशन संस्कार के लिए सबसे शुभ मानी जाती हैं। अमावस्या, पूर्णिमा, नंदा तिथियां (प्रतिपदा, षष्ठी) और रिक्ता तिथियों (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) को टालना चाहिए।

शुभ नक्षत्र (Auspicious Nakshatras)

अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा और रेवती नक्षत्रों में अन्नप्राशन करना शिशु के लिए सुख, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य लेकर आता है।

3. Annaprashan Muhurat 2026: महीनेवार शुभ मुहूर्तों की सूची

यहाँ वर्ष 2026 के लिए अन्नप्राशन के शुभ मुहूर्तों की एक विस्तृत महीनेवार तालिका (Table) दी गई है। आप अपने शिशु की आयु (सम/विषम महीने के नियम) और अपनी सुविधा के अनुसार इनमें से कोई भी तिथि चुन सकते हैं।

(ध्यान दें: 14 जनवरी 2026 तक ‘खरमास’ रहेगा, जिसमें शुभ कार्य वर्जित होते हैं। इसलिए शुभ मुहूर्त 14 जनवरी के बाद से आरंभ होंगे।)

जनवरी 2026 में अन्नप्राशन मुहूर्त

मकर संक्रांति के बाद सूर्य के उत्तरायण होने पर मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है।

तारीख (Date) दिन (Day) शुभ नक्षत्र पंचांग तिथि
22 जनवरी 2026 गुरुवार रेवती माघ शुक्ल तृतीया
24 जनवरी 2026 शनिवार अश्विनी वसंत पंचमी (अबूझ मुहूर्त)
28 जनवरी 2026 बुधवार रोहिणी माघ शुक्ल नवमी / दशमी
29 जनवरी 2026 गुरुवार मृगशिरा माघ शुक्ल दशमी

फरवरी 2026 में अन्नप्राशन मुहूर्त

फरवरी के महीने में मौसम सुहावना होता है और शिशु को बाहरी आहार पचाने में आसानी होती है।

तारीख (Date) दिन (Day) शुभ नक्षत्र पंचांग तिथि
4 फरवरी 2026 बुधवार उत्तरा फाल्गुनी फाल्गुन कृष्ण चतुर्थी/पञ्चमी
5 फरवरी 2026 गुरुवार हस्त फाल्गुन कृष्ण पञ्चमी
12 फरवरी 2026 गुरुवार अनुराधा फाल्गुन कृष्ण द्वादशी
19 फरवरी 2026 गुरुवार उत्तरा भाद्रपद फुलेरा दूज (अबूझ मुहूर्त)
25 फरवरी 2026 बुधवार रोहिणी फाल्गुन शुक्ल अष्टमी
26 फरवरी 2026 गुरुवार मृगशिरा फाल्गुन शुक्ल नवमी

मार्च 2026 में अन्नप्राशन मुहूर्त

मार्च के महीने में चैत्र नवरात्रि का भी आरंभ होता है। नवरात्रों के दौरान शिशु को देवी का आशीर्वाद दिलाने के लिए अन्नप्राशन बहुत शुभ माना जाता है।

तारीख (Date) दिन (Day) शुभ नक्षत्र पंचांग तिथि
2 मार्च 2026 सोमवार मघा / पूर्वा फाल्गुनी फाल्गुन शुक्ल त्रयोदशी
9 मार्च 2026 सोमवार अनुराधा चैत्र कृष्ण षष्ठी
12 मार्च 2026 गुरुवार उत्तराषाढ़ा चैत्र कृष्ण नवमी
23 मार्च 2026 सोमवार रेवती चैत्र शुक्ल पञ्चमी

अप्रैल 2026 में अन्नप्राशन मुहूर्त

अप्रैल में वैशाख मास की शुरुआत होती है। अक्षय तृतीया जैसा महा-मुहूर्त इसी महीने में आता है, जो शिशु के भाग्य को अक्षय (अमर) बनाता है।

तारीख (Date) दिन (Day) शुभ नक्षत्र पंचांग तिथि
6 अप्रैल 2026 सोमवार स्वाती वैशाख कृष्ण तृतीया
8 अप्रैल 2026 बुधवार अनुराधा वैशाख कृष्ण पञ्चमी
15 अप्रैल 2026 बुधवार उत्तरा भाद्रपद वैशाख कृष्ण द्वादशी
20 अप्रैल 2026 सोमवार रोहिणी अक्षय तृतीया (महा-मुहूर्त)

मई 2026 में अन्नप्राशन मुहूर्त

तारीख (Date) दिन (Day) शुभ नक्षत्र पंचांग तिथि
1 मई 2026 शुक्रवार स्वाती ज्येष्ठ कृष्ण प्रतिपदा
6 मई 2026 बुधवार उत्तराषाढ़ा ज्येष्ठ कृष्ण षष्ठी
13 मई 2026 बुधवार उत्तरा भाद्रपद ज्येष्ठ कृष्ण त्रयोदशी
20 मई 2026 बुधवार रोहिणी ज्येष्ठ शुक्ल पञ्चमी

जून 2026 में अन्नप्राशन मुहूर्त

मानसून की शुरुआत के साथ अन्नप्राशन के कुछ गिने-चुने मुहूर्त जून में उपलब्ध हैं।

तारीख (Date) दिन (Day) शुभ नक्षत्र पंचांग तिथि
4 जून 2026 गुरुवार अनुराधा आषाढ़ कृष्ण चतुर्थी
10 जून 2026 बुधवार उत्तरा भाद्रपद आषाढ़ कृष्ण दशमी
19 जून 2026 शुक्रवार मघा आषाढ़ शुक्ल पञ्चमी

जुलाई से अक्टूबर 2026 तक का समय (चातुर्मास विचार)

हिंदू धर्म में 25 जुलाई 2026 (देवशयनी एकादशी) से लेकर 21 नवंबर 2026 (देवउठनी एकादशी) तक चातुर्मास रहेगा। इन 4 महीनों में भगवान विष्णु शयन काल में होते हैं। कई क्षेत्रों और पारिवारिक मान्यताओं में चातुर्मास के दौरान मुंडन और विवाह की तरह अन्नप्राशन को भी वर्जित माना जाता है। हालांकि, कुछ ज्योतिषी ‘अन्नप्राशन’ को एक आवश्यक और जीवन रक्षक संस्कार मानते हुए इसे कुछ विशेष पूजा के साथ कराने की अनुमति देते हैं। इस अवधि में अन्नप्राशन कराने के लिए अपने स्थानीय पंडित या ज्योतिषी से विचार-विमर्श अवश्य करें।

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नवंबर 2026 में अन्नप्राशन मुहूर्त

देवउठनी एकादशी (21 नवंबर) के बाद सभी मांगलिक कार्य पुनः आरंभ हो जाएंगे।

तारीख (Date) दिन (Day) शुभ नक्षत्र पंचांग तिथि
25 नवंबर 2026 बुधवार रोहिणी मार्गशीर्ष शुक्ल पञ्चमी
26 नवंबर 2026 गुरुवार मृगशिरा मार्गशीर्ष शुक्ल षष्ठी
30 नवंबर 2026 सोमवार उत्तरा फाल्गुनी मार्गशीर्ष शुक्ल दशमी

दिसंबर 2026 में अन्नप्राशन मुहूर्त

दिसंबर के मध्य में फिर से खरमास लगने के कारण शुरुआती दिनों में ही संस्कार संपन्न कर लें।

तारीख (Date) दिन (Day) शुभ नक्षत्र पंचांग तिथि
2 दिसंबर 2026 बुधवार हस्त पौष कृष्ण द्वितीया
5 दिसंबर 2026 शनिवार स्वाती पौष कृष्ण पञ्चमी
11 दिसंबर 2026 शुक्रवार अनुराधा पौष कृष्ण एकादशी

(नोट: ऊपर दी गई तिथियां सामान्य वैदिक पंचांग पर आधारित हैं। शिशु के जन्म नक्षत्र, नाम राशि और कुंडली के अनुसार अष्टवर्ग मिलान के लिए किसी विद्वान ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें।)

4. अन्नप्राशन संस्कार में ‘मामा’ (Maternal Uncle) की भूमिका

अन्नप्राशन संस्कार में शिशु के मामा (Maternal Uncle) यानी मां के भाई की सबसे अहम भूमिका होती है। हिंदू परंपराओं के अनुसार, शिशु को सबसे पहला निवाला (First bite) उसके मामा द्वारा ही खिलाया जाता है।

इसके पीछे का मुख्य कारण यह है कि जिस प्रकार शिशु की मां ने उसे अपना दूध पिलाकर पाला है, उसी प्रकार मामा (जो कि मां के मायके का प्रतिनिधि है) शिशु को बाहर का अन्न खिलाकर उसकी रक्षा और पोषण का वचन देता है। मामा शिशु के लिए नए कपड़े, चांदी की कटोरी-चम्मच और उपहार लेकर आते हैं।

5. अन्नप्राशन संस्कार की संपूर्ण पूजा विधि (Step-by-Step Puja Vidhi)

अन्नप्राशन संस्कार घर में, किसी मंदिर में या बैंक्वेट हॉल में पूरी पवित्रता और शास्त्र-सम्मत विधि से किया जाना चाहिए:

  1. स्नान और नवीन वस्त्र: अन्नप्राशन के दिन सुबह शिशु को शुद्ध जल से स्नान कराएं और नए कपड़े (अधिमानतः रेशमी या पारंपरिक कपड़े) पहनाएं। माता-पिता भी स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

  2. गणेश और नवग्रह शांति पूजा: घर के मंदिर या वेदी पर माता-पिता शिशु को गोद में लेकर बैठें। सबसे पहले विघ्नहर्ता भगवान गणेश जी की पूजा की जाती है। इसके बाद नवग्रह शांति और कुलदेवता/कुलदेवी का आवाहन किया जाता है, ताकि शिशु के अन्न ग्रहण करने में कोई बाधा न आए और वह हमेशा निरोगी रहे।

  3. स्वर्ण या रजत पात्र (Silver Bowl): शिशु को अन्न खिलाने के लिए सोने (Gold), चांदी (Silver), या कांसे के बर्तन का उपयोग किया जाता है। विज्ञान के अनुसार, चांदी के बर्तनों में एंटी-बैक्टीरियल (Anti-bacterial) गुण होते हैं, जो संक्रमण को रोकते हैं और शरीर में शीतलता बनाए रखते हैं।

  4. खीर का भोग: भगवान विष्णु को सबसे पहले ‘खीर’ (चावल, गाय के दूध, घी और शहद से बनी) का भोग लगाया जाता है। चावल को शुद्धता का प्रतीक माना जाता है और यह पचने में सबसे आसान होता है।

  5. पहला निवाला: भगवान का प्रसाद लगी हुई यह खीर एक चांदी के चम्मच या सोने की अंगूठी (Ring) के माध्यम से मामा द्वारा शिशु को चटाई जाती है। इसके बाद दादा-दादी, नाना-नानी और परिवार के अन्य सदस्य शिशु को थोड़ा-थोड़ा अन्न चखाते हैं और आशीर्वाद देते हैं।

  6. ब्राह्मण भोज: संस्कार के अंत में ब्राह्मणों (पंडित जी) को भोजन कराकर उन्हें दक्षिणा और वस्त्र दान में दिए जाते हैं।

6. भविष्य दर्शन खेल (The Fun Object-Picking Game)

अन्नप्राशन संस्कार के बाद एक बहुत ही रोचक और पारंपरिक खेल खेला जाता है, जिसे ‘भविष्य दर्शन’ कहा जाता है। इसमें एक चांदी की थाली या साफ कपड़े पर 5 या 6 अलग-अलग वस्तुएं रखी जाती हैं और शिशु को उनमें से किसी एक वस्तु को चुनने के लिए छोड़ दिया जाता है। माना जाता है कि शिशु जो वस्तु उठाता है, उसका भविष्य और रुचि उसी क्षेत्र में होगी:

  • पुस्तक (Book / Geeta): यदि बच्चा किताब छूता है, तो इसका अर्थ है कि वह भविष्य में ज्ञानी, विद्वान और शिक्षा के क्षेत्र में नाम कमाएगा।

  • कलम (Pen): कलम उठाना यह दर्शाता है कि शिशु भविष्य में बुद्धिजीवी, लेखक या उच्च अधिकारी बनेगा।

  • धन (Money / Gold Coin): सिक्के या आभूषण उठाने का मतलब है कि शिशु का रुझान व्यापार (Business), धन कमाने और आर्थिक समृद्धि की ओर होगा।

  • मिट्टी (Clay / Soil): मिट्टी उठाने का अर्थ है कि शिशु ज़मीन से जुड़ा रहेगा, या वह भूमि (Real Estate) और कृषि (Farming) का स्वामी बनेगा।

  • भोजन (Food / Sweets): यदि शिशु भोजन की ओर बढ़ता है, तो माना जाता है कि वह जीवन भर खान-पान का शौकीन रहेगा और उसके पास कभी किसी सुख-सुविधा की कमी नहीं होगी।

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7. माता-पिता के लिए कुछ आवश्यक सावधानियां (Tips for Parents)

शिशु के लिए यह संस्कार जितना धार्मिक है, उतना ही उसके स्वास्थ्य की दृष्टि से संवेदनशील भी है। माता-पिता को निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:

  1. खीर की मात्रा: 6 महीने का शिशु पहली बार अन्न खा रहा होता है। उसे बहुत ज्यादा खीर या भोजन न ठूंसें। चम्मच से केवल थोड़ा सा रस या दाना चटाना ही पर्याप्त है, ताकि उसका पेट खराब न हो।

  2. शहद का प्रयोग: यदि आप खीर में शहद (Honey) डाल रहे हैं, तो डॉक्टर की सलाह लें। कई बाल रोग विशेषज्ञ (Pediatricians) 1 साल से कम उम्र के बच्चों को शहद देने से मना करते हैं क्योंकि इससे ‘इन्फेंट बोटुलिज़्म’ (Infant Botulism) का खतरा हो सकता है।

  3. स्वच्छता: जिस बर्तन या चम्मच से शिशु को भोजन कराया जा रहा है, वह उबले हुए पानी में पूरी तरह से कीटाणुमुक्त (Sterilized) होना चाहिए।

  4. शिशु का मूड: पूजा के दौरान शिशु को जबरदस्ती न बिठाएं। यदि वह रो रहा है या नींद में है, तो उसे शांत होने दें। भारी और चुभने वाले कपड़ों के बजाय शिशु को आरामदायक (Comfortable) सूती कपड़े ही पहनाएं।

भारतीय पंचांग और संस्कार केवल रस्म-ओ-रिवाज़ नहीं हैं, बल्कि ये मनुष्य के शरीर, मन और प्रकृति के बीच संतुलन बनाने का विज्ञान हैं।

इस लेख “Annaprashan Muhurat 2026” के माध्यम से हमने आपको वर्ष 2026 में अन्नप्राशन के लिए सर्वोत्तम तिथियों और नियमों की सटीक जानकारी दी है। आप अपने परिवार की परंपरा और अपनी सहूलियत के अनुसार किसी भी शुभ तिथि का चयन कर सकते हैं।

अन्नप्राशन संस्कार बच्चे के जीवन में एक नए मील के पत्थर (Milestone) का प्रतीक है— जहाँ वह मां के दूध से बाहर निकलकर दुनिया के अन्न को स्वीकार करता है। पूर्ण श्रद्धा और पवित्रता के साथ इस संस्कार को संपन्न करें। ईश्वर, कुलदेवता और नवग्रहों की कृपा से आपके बच्चे का पाचन तंत्र मजबूत होगा, उसका मानसिक विकास तेज होगा और उसका भविष्य अत्यंत उज्ज्वल एवं मंगलमय होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: लड़कों और लड़कियों के अन्नप्राशन के महीनों में क्या अंतर है?

उत्तर: शास्त्रों के अनुसार, लड़कों का अन्नप्राशन हमेशा सम महीनों (Even months) यानी जन्म के छठे, आठवें, दसवें या बारहवें महीने में किया जाना चाहिए। वहीं, लड़कियों का अन्नप्राशन विषम महीनों (Odd months) यानी जन्म के पांचवें, सातवें, नौवें या ग्यारहवें महीने में करना शुभ माना गया है।

प्रश्न 2: क्या अन्नप्राशन के लिए Annaprashan Muhurat 2026 देखना अनिवार्य है?

उत्तर: जी हाँ, अन्नप्राशन शिशु के जीवन का पहला ठोस आहार ग्रहण करने का क्षण है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, गलत नक्षत्र या तिथि में अन्न खिलाने से शिशु के पाचन तंत्र, स्वास्थ्य और स्वभाव पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त देखकर ही यह संस्कार करना चाहिए।

प्रश्न 3: अन्नप्राशन संस्कार में सबसे पहले क्या खिलाया जाता है?

उत्तर: अन्नप्राशन संस्कार में शिशु को सबसे पहले ‘खीर’ खिलाई जाती है। इसे चावल, गाय के शुद्ध दूध, थोड़े से घी और मिश्री से बनाया जाता है। चावल सुपाच्य (Easy to digest) होता है और दूध शिशु के लिए परिचित स्वाद होता है, इसलिए इसे सर्वोत्तम प्रथम आहार माना गया है।

प्रश्न 4: क्या अन्नप्राशन संस्कार घर पर किया जा सकता है?

उत्तर: जी हाँ, बिल्कुल! अन्नप्राशन संस्कार को घर पर, किसी पवित्र मंदिर में, या किसी बैंक्वेट हॉल में आसानी से किया जा सकता है। इसके लिए घर के आंगन या साफ-सुथरे स्थान पर वेदी बनाकर गणेश पूजन और नवग्रह शांति की पूजा की जाती है।

प्रश्न 5: यदि शुभ मुहूर्त पर अन्नप्राशन न कर पाएं तो क्या करें?

उत्तर: यदि आप किसी कारणवश तय मुहूर्त या सही महीने में अन्नप्राशन नहीं करा पाते हैं, तो नवरात्रि के पवित्र दिनों में, अक्षय तृतीया, या वसंत पंचमी जैसे ‘अबूझ मुहूर्तों’ पर यह संस्कार बिना पंचांग देखे भी संपन्न किया जा सकता है। आप अपने कुल देवता के मंदिर में जाकर भी इसे सादगी से कर सकते हैं।

"नमस्कार! मैं अमित तिवारी हूँ, और आप मुझे एक 'साधक' के रूप में जान सकते हैं। बचपन से ही सनातन धर्म, तंत्र-मंत्र और आध्यात्मिक साधनाओं ने मुझे अपनी ओर गहराई से आकर्षित किया है। वर्षों के निरंतर अध्ययन, गुरु-कृपा और अपने व्यक्तिगत साधना-अनुभवों से मैंने जो कुछ भी सीखा है, उसे मैं sadhnas.in के माध्यम से आपके साथ साझा कर रहा हूँ। मेरा मुख्य उद्देश्य इंटरनेट पर फैले भ्रम को दूर करके प्रामाणिक, सत्य और शास्त्र-सम्मत जानकारी को बेहद सरल भाषा में आप तक पहुँचाना है। मैं कोई गुरु या उपदेशक नहीं हूँ, बल्कि आप ही की तरह ईश्वर की खोज में निकला एक राही हूँ। मेरी यही कोशिश है कि मेरे अनुभवों और लेखनी से आपकी आध्यात्मिक यात्रा और भी सुगम व सफल हो सके।"

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