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Nirjala Ekadashi 2026: कल 2:44 PM से लगेगी तिथि, परसों (25 जून) है महाव्रत! जानें Exact TimingsIt takes 9 minutes... to read this article !

सनातन धर्म में व्रतों की सफलता पूरी तरह से ‘समय’ (काल और मुहूर्त) पर निर्भर करती है। आज 23 जून है और साल के सबसे बड़े और सबसे कठिन व्रत— निर्जला एकादशी 2026 (Nirjala Ekadashi) का काउंटडाउन (Countdown) शुरू हो चुका है।

पंचांग के सटीक गणित के अनुसार, कल (24 जून 2026) दोपहर 2:44 बजे से ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि आरंभ हो जाएगी। लेकिन, हिंदू धर्म के ‘उदया तिथि’ नियम के कारण यह महाव्रत कल नहीं, बल्कि परसों यानी 25 जून 2026 (गुरुवार) को रखा जाएगा।

चूंकि इस व्रत में लगभग 24 घंटे से अधिक समय तक अन्न और जल (पानी) दोनों का पूर्ण रूप से त्याग करना होता है, इसलिए समय का एक-एक पल बहुत कीमती और नियम-बद्ध होता है। दशमी की रात (कल रात) से ही इस व्रत के कड़े नियम लागू हो जाएंगे, जो द्वादशी (26 जून) की सुबह पारण के समय तक चलेंगे।

इस ‘टाइम-फोकस्ड’ (Time-Focused) और विस्तृत लेख में हम आपको बताएंगे कि 24 जून की दोपहर से लेकर 26 जून की सुबह तक, हर पहर में आपको किन नियमों का पालन करना है। व्रत कब शुरू होगा, पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त (Golden Hour) क्या है, और ‘हरि वासर’ के किस समय में पारण भूलकर भी नहीं करना चाहिए।

Time-Focused Timeline: निर्जला एकादशी 2026 का सटीक पंचांग

व्रत रखने वाले साधकों को समय की स्पष्ट जानकारी होनी चाहिए, ताकि अनजाने में भी व्रत खंडित न हो। नीचे दी गई ‘टाइमलाइन’ (Timeline) को ध्यान से समझें:

महत्वपूर्ण घटना (Important Event) सटीक तिथि और समय (Exact Date & Time)
दशमी तिथि का आरंभ आज (23 जून), दोपहर के बाद से
एकादशी तिथि का प्रवेश (प्रारंभ) कल (24 जून 2026), दोपहर 02:44 बजे से
एकादशी तिथि का समापन परसों (25 जून 2026), शाम 05:02 बजे तक
निर्जला व्रत का मुख्य दिन परसों, 25 जून 2026 (गुरुवार)
व्रत खोलने का समय (पारण मुहूर्त) 26 जून 2026 (शुक्रवार), सुबह 05:40 से 08:20 के बीच

(विशेष नोट: यद्यपि एकादशी तिथि 25 जून को शाम 5 बजे के आसपास समाप्त हो जाएगी, लेकिन आपका निर्जला व्रत अगले दिन 26 जून की सुबह सूर्योदय के बाद पारण करने पर ही पूर्ण माना जाएगा।)

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24 जून (कल) दोपहर 2:44 बजे से बदल जाएंगे नियम: दशमी की रात का महत्व

निर्जला एकादशी का व्रत केवल 24 घंटे का नहीं होता, बल्कि इसके नियम व्रत से एक दिन पहले ही शुरू हो जाते हैं। कल (24 जून) दोपहर 2:44 बजे जैसे ही एकादशी तिथि प्रवेश करेगी, ब्रह्मांडीय ऊर्जा में बदलाव आ जाएगा।

व्रत की तैयारी के लिए कल आपको इन ‘टाइम-सेंसिटिव’ (Time-sensitive) बातों का ध्यान रखना होगा:

  • सूर्यास्त से पहले भोजन: कल (24 जून) शाम ढलने से पहले (सूर्यास्त से पूर्व) अपना हल्का और सात्विक भोजन ग्रहण कर लें। एकादशी तिथि लगने के बाद घर में लहसुन, प्याज, मसूर की दाल, बैंगन और विशेष रूप से चावल (Rice) पकाना और खाना महापाप माना गया है।

  • तुलसी दल तोड़ना: एकादशी के दिन (25 जून) तुलसी के पत्ते तोड़ना सख्त मना है। इसलिए कल दोपहर 2:44 बजे (एकादशी लगने) से पहले-पहले, पूजा के लिए आवश्यक तुलसी के पत्ते तोड़कर एक साफ कपड़े में रख लें।

  • ब्रह्मचर्य और पवित्रता: कल सूर्यास्त के बाद से ही मन, वचन और कर्म से ब्रह्मचर्य का पालन शुरू कर दें। रात को जमीन पर सोएं और भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए निद्रा लें।

25 जून (परसों) निर्जला एकादशी का दिन: Hour-by-Hour पूजा और व्रत गाइड

परसों (25 जून) वह मुख्य दिन है जब आपको भीषण गर्मी में बिना पानी के यह कठोर तपस्या करनी है। इस दिन का हर प्रहर (पहला, दूसरा, तीसरा और चौथा) पूजा-पाठ के लिए निर्धारित है।

सुबह का समय (Morning Golden Hours)

  • ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 04:05 – 04:45): इस समय उठना व्रत की सफलता के लिए सबसे अहम है। ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान के जल में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करें और पीले वस्त्र धारण करें।

  • संकल्प का समय (सुबह 05:30 – 06:00): सूर्योदय के तुरंत बाद हाथ में थोड़ा सा जल और अक्षत लेकर भगवान विष्णु के समक्ष संकल्प लें— “हे श्री हरि! मैं आज निर्जल और निराहार रहकर आपके इस महाव्रत का पालन करूंगा। मेरी रक्षा करें।”

  • पूजा का शुभ मुहूर्त (सुबह 06:00 – 10:30): यह समय भगवान विष्णु की षोडशोपचार पूजा के लिए सबसे उत्तम है। भगवान को पंचामृत से स्नान कराएं, पीला चंदन लगाएं, पीले फूल और तुलसी अर्पित करें। विष्णु सहस्त्रनाम या ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का जाप करें।

दोपहर का समय (Afternoon Challenges)

  • दोपहर (12:00 PM – 03:00 PM): यह वह समय होता है जब ज्येष्ठ मास की गर्मी अपने चरम पर होती है और शरीर में पानी की कमी (Dehydration) महसूस होने लगती है। इस समय धूप में बिल्कुल न निकलें। घर के ठंडे हिस्से में बैठकर गीता का पाठ करें या मानसिक जाप करें।

  • प्यास लगने पर क्या करें?: यदि प्यास बहुत अधिक सताने लगे, तो केवल भगवान का ध्यान करें। शास्त्रों में आचमन (पूजा के दौरान राई के दाने के बराबर जल हथेली से ग्रहण करना) की अनुमति है, लेकिन इसके अलावा पानी पीना व्रत को खंडित कर देगा।

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सांध्य काल और रात्रि (Evening & Night Vigil)

  • शाम की आरती (सूर्यास्त के समय): शाम के समय पुनः स्नान करके (या हाथ-मुंह धोकर) भगवान विष्णु की आरती करें।

  • रात्रि जागरण: निर्जला एकादशी की रात (25 जून की रात) को सोना नहीं चाहिए। समय के महत्व के अनुसार, एकादशी की रात को जागकर (रात्रि जागरण) कीर्तन करने से व्यक्ति को करोड़ों यज्ञों के बराबर पुण्य मिलता है।

26 जून (शुक्रवार): पारण (Fast Breaking) का सटीक समय और ‘हरि वासर’ का खतरा

हिंदू धर्म में व्रत रखने से ज्यादा कठिन उस व्रत को सही ‘समय’ पर खोलना (पारण करना) है। यदि आपने 24 घंटे भूखे-प्यासे रहकर व्रत किया, लेकिन व्रत को गलत समय पर खोल लिया, तो वह पूरा व्रत व्यर्थ (शून्य) हो जाता है।

हरि वासर क्या है? (The Danger of Hari Vasara)

एकादशी के अगले दिन ‘द्वादशी तिथि’ लगती है। द्वादशी तिथि के शुरुआती 25% (एक-चौथाई) हिस्से को ‘हरि वासर’ (Hari Vasara) कहा जाता है।

शास्त्रों का सख्त निर्देश है कि हरि वासर के दौरान व्रत का पारण भूलकर भी नहीं करना चाहिए। यह समय भगवान विष्णु की योगनिद्रा या विशेष आराधना का समय होता है। इस समय पानी या अन्न ग्रहण करना पाप माना गया है।

पारण का सही और सटीक समय (Exact Parana Time)

  • 26 जून 2026 की सुबह सूर्योदय के बाद और हरि वासर की अवधि समाप्त होने के पश्चात ही व्रत खोला जाएगा।

  • पारण का शुभ मुहूर्त: 26 जून को सुबह 05:40 बजे से 08:20 बजे के बीच अपना व्रत खोल लें।

  • पारण किसी भी स्थिति में द्वादशी तिथि के समाप्त होने से पहले हो जाना चाहिए।

पारण कैसे करें? (How to Break the Fast at the Right Time)

पारण के शुभ समय के भीतर:

  1. सुबह जल्दी स्नान करें और भगवान विष्णु की पूजा करें।

  2. किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को जल से भरा कलश (मटका), सत्तू, छाता, पंखा और मौसमी फल (जैसे तरबूज) दान करें।

  3. दान देने के बाद, भगवान विष्णु पर चढ़ाया गया तुलसी मिश्रित जल (चरणामृत) पीकर ही अपना व्रत खोलें।

  4. 24 घंटे प्यासे रहने के बाद एक साथ बहुत सारा पानी न पिएं। पहले चरणामृत लें, फिर थोड़ा नींबू पानी या सादा जल पिएं। इसके बाद ही सात्विक भोजन ग्रहण करें।

समय का सदुपयोग: निर्जला एकादशी पर दान के लिए कल (24 जून) ही कर लें ये तैयारियां

चूँकि परसों व्रत है और शरीर में निर्जल होने के कारण ऊर्जा कम होगी, इसलिए कल (24 जून) का समय बाजार जाकर दान की सामग्री (Shopping) इकट्ठी करने के लिए सबसे उत्तम है।

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कल (24 जून) के दिन बाजार से ये चीजें अवश्य ले आएं:

  • मिट्टी का नया घड़ा (मटका) या कलश: निर्जला एकादशी पर जल-दान सबसे बड़ा दान है। कल ही बाजार से एक नया मिट्टी का घड़ा ले आएं, ताकि परसों सुबह उसे शुद्ध जल से भरकर दान किया जा सके।

  • बांस का पंखा और छाता: ज्येष्ठ की गर्मी को देखते हुए ब्राह्मणों को पंखा और छाता दान करने का विशेष विधान है।

  • रसदार फल: तरबूज, खरबूजा, खीरा और आम खरीद लें।

  • सत्तू और चीनी: गर्मी में सत्तू का दान स्वर्ण दान के बराबर माना गया है।

इन सभी सामग्रियों को कल ही लाकर घर में रख लें, ताकि 26 जून की सुबह पारण के ‘सीमित समय’ (Time Window) के दौरान आपको दान की चीजें खोजने में भागदौड़ न करनी पड़े।

एकादशी व्रत में समय (Muhurat) का इतना महत्व क्यों है? (The Science of Time in Sanatan Dharma)

भारतीय ऋषियों ने पंचांग का निर्माण खगोल विज्ञान (Astronomy) के आधार पर किया था। एकादशी तिथि पर चंद्रमा की स्थिति ऐसी होती है कि यह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण और मानव शरीर के जलीय अंश (Water retention) पर सीधा प्रभाव डालती है।

  • 24 जून (कल) दोपहर 2:44 बजे से जब एकादशी तिथि शुरू होगी, तो वायुमंडल के दबाव और चंद्रमा की कलाओं में परिवर्तन होना शुरू हो जाएगा।

  • 25 जून (परसों) जब यह तिथि पूरे दिन व्याप्त रहेगी, तब हमारे शरीर का पाचन तंत्र (Digestive system) सबसे अधिक सुस्त होता है। आधुनिक विज्ञान भी मानता है कि 15 दिन में एक बार 24 घंटे का ‘ड्राई फास्ट’ (Dry Fast – बिना पानी का उपवास) करने से शरीर ‘ऑटोफैगी’ (Autophagy) मोड में चला जाता है और मृत कोशिकाओं को खाकर शरीर को अंदर से पूरी तरह ‘डिटॉक्स’ (Detox) कर देता है।

  • सही ‘समय’ पर पारण (व्रत खोलना) इसलिए जरूरी है ताकि जब जठराग्नि (पाचन अग्नि) पुनः जाग्रत हो, तभी उसे भोजन दिया जाए। गलत समय पर खाना खाने से शरीर को नुकसान पहुंच सकता है।

जो लोग निर्जल न रह सकें, वे इस समय क्या करें? (Alternatives)

यदि आप बीमार हैं, बुजुर्ग हैं या गर्भवती हैं और परसों 24 घंटे निर्जल रहने में असमर्थ हैं, तो आपको निराश होने की आवश्यकता नहीं है। ईश्वर समय और भाव देखते हैं, शरीर की यातना नहीं।

आप परसों (25 जून) के दिन ‘सजल’ (पानी पीकर) या ‘फलाहारी’ उपवास रख सकते हैं। दिन के समय फलों का रस, दूध, नारियल पानी या सात्विक फल ग्रहण कर लें। बस इस बात का सख्ती से ध्यान रखें कि 24 जून दोपहर 2:44 बजे से लेकर 26 जून की सुबह पारण के समय तक अन्न (चावल, गेहूं, दाल) भूलकर भी न खाएं।

“कल दोपहर 2:44 बजे से लगेगी एकादशी तिथि, कल या परसों व्रत मान्य कब?” — इस पूरी दुविधा (Confusion) का अब पूरी तरह से समाधान हो चुका है।

आज 23 जून है। कल (24 जून) दोपहर 2:44 बजे से एकादशी तिथि प्रवेश कर जाएगी और दशमी के कड़े नियम शुरू हो जाएंगे। और परसों यानी 25 जून 2026, गुरुवार के पावन दिन पर ‘निर्जला एकादशी’ (Nirjala Ekadashi) का यह महान और चमत्कारी व्रत रखा जाएगा। अंत में 26 जून की सुबह शुभ मुहूर्त में इसका पारण होगा।

समय किसी के लिए नहीं रुकता। साल में एक बार आने वाले 24 एकादशियों के बराबर पुण्य देने वाले इस ‘गोल्डन अवसर’ (Golden Opportunity) को हाथ से न जाने दें। कल से ही अपने मन को सात्विक कर लें और परसों पूरे भक्ति भाव से भगवान विष्णु की आराधना करें। श्री हरि आपके जीवन के सभी संकटों को हर कर आपको मोक्ष और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देंगे।

"नमस्कार! मैं अमित तिवारी हूँ, और आप मुझे एक 'साधक' के रूप में जान सकते हैं। बचपन से ही सनातन धर्म, तंत्र-मंत्र और आध्यात्मिक साधनाओं ने मुझे अपनी ओर गहराई से आकर्षित किया है। वर्षों के निरंतर अध्ययन, गुरु-कृपा और अपने व्यक्तिगत साधना-अनुभवों से मैंने जो कुछ भी सीखा है, उसे मैं sadhnas.in के माध्यम से आपके साथ साझा कर रहा हूँ। मेरा मुख्य उद्देश्य इंटरनेट पर फैले भ्रम को दूर करके प्रामाणिक, सत्य और शास्त्र-सम्मत जानकारी को बेहद सरल भाषा में आप तक पहुँचाना है। मैं कोई गुरु या उपदेशक नहीं हूँ, बल्कि आप ही की तरह ईश्वर की खोज में निकला एक राही हूँ। मेरी यही कोशिश है कि मेरे अनुभवों और लेखनी से आपकी आध्यात्मिक यात्रा और भी सुगम व सफल हो सके।"

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