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Pashupati Mantra Sadhana: कैसे करें? जानें साधना विधि, नियम, लाभ, महत्व और सावधानियांIt takes 15 minutes... to read this article !

सनातन धर्म में भगवान शिव को ‘देवों के देव महादेव’ कहा जाता है। शिव के अनेक स्वरूप हैं, और हर स्वरूप की अपनी एक अलग महिमा और ऊर्जा है। इन्हीं में से एक अत्यंत कल्याणकारी और रहस्यमयी स्वरूप है— पशुपतिनाथ। जब जीवन में हर तरफ से निराशा घेर ले, परेशानियां खत्म होने का नाम न लें, कर्ज का बोझ बढ़ जाए, या कोई विशेष मनोकामना लंबे समय से अधूरी हो, तब भगवान शिव के पशुपति स्वरूप की साधना अचूक मानी जाती है।

हाल के वर्षों में, विशेषकर 2026 के वर्तमान समय में, भागदौड़ भरी जिंदगी और मानसिक तनाव के बीच पशुपति साधना और व्रत की प्रासंगिकता बहुत अधिक बढ़ गई है। यदि आप भी इंटरनेट पर यह खोज रहे हैं कि Pashupati Mantra Sadhana: कैसे करें? जानें साधना विधि, नियम, लाभ, महत्व और सावधानियां, तो यह विस्तृत और शोधपूर्ण लेख विशेष रूप से आपके लिए तैयार किया गया है।

इस लेख में हम पशुपति मंत्र, पशुपति व्रत (5 सोमवार का व्रत), साधना की विस्तृत विधि, कड़े नियम, इसके चमत्कारिक लाभ और उन सावधानियों पर गहराई से चर्चा करेंगे, जिनका पालन न करने पर साधना निष्फल हो सकती है। यह लेख आपको 100% प्रामाणिक, सत्य और उपयोगी जानकारी प्रदान करेगा।

भगवान पशुपतिनाथ कौन हैं? (Who is Lord Pashupatinath?)

साधना को समझने से पहले हमें ‘पशुपति’ शब्द का अर्थ और इसके आध्यात्मिक दर्शन को समझना होगा। ‘पशुपति’ दो शब्दों से मिलकर बना है— ‘पशु’ और ‘पति’

  • शिव पुराण और शैव दर्शन के अनुसार, इस संसार में जन्म लेने वाला हर जीव (मनुष्य सहित) जो अज्ञानता, माया, मोह, काम, क्रोध और लोभ के बंधनों (पाश) में बंधा हुआ है, वह ‘पशु’ है।

  • ‘पति’ का अर्थ है स्वामी या रक्षक।

  • ‘पाश’ का अर्थ है वह रस्सी या अज्ञानता का बंधन जिससे जीव बंधा है।

अर्थात्, जो देव सम्पूर्ण जीवों (पशुओं) को माया के पाश (बंधन) से मुक्त करके मोक्ष प्रदान करते हैं, वे ही ‘पशुपतिनाथ’ हैं। जब कोई साधक पशुपति साधना करता है, तो भगवान शिव उसके जीवन के सभी बंधनों, दुखों और दरिद्रता को काट देते हैं। नेपाल के काठमांडू में स्थित पशुपतिनाथ मंदिर और भारत में मंदसौर (मध्य प्रदेश) का पशुपतिनाथ मंदिर इसके सबसे बड़े उदाहरण और आस्था के केंद्र हैं।

पशुपति मंत्र क्या है? (What is Pashupati Mantra?)

पशुपति साधना में मुख्य रूप से भगवान शिव के पशुपति स्वरूप का ध्यान करते हुए विशिष्ट मंत्रों का जाप किया जाता है। साधक अपनी श्रद्धा और दीक्षा के अनुसार निम्नलिखित में से किसी भी मंत्र का चुनाव कर सकता है:

1. मूल पशुपति मंत्र (Pashupati Mool Mantra)

ॐ पशुपतये नमः

अर्थ: मैं सभी जीवों के स्वामी, परम कृपालु भगवान पशुपतिनाथ को प्रणाम करता हूँ। यह एक अत्यंत शक्तिशाली और सरल मंत्र है। इसका जाप कोई भी व्यक्ति, किसी भी आयु वर्ग का साधक आसानी से कर सकता है। यह मन को तुरंत शांति प्रदान करता है।

2. पशुपति गायत्री मंत्र (Pashupati Gayatri Mantra)

ॐ पशुपतये विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो पशुपतिः प्रचोदयात्॥

अर्थ: हम भगवान पशुपतिनाथ को जानते हैं, उन महादेव का हम ध्यान करते हैं। वे पशुपति स्वरूप शिव हमारी बुद्धि को सन्मार्ग पर प्रेरित करें। यह मंत्र आत्मिक शांति, ज्ञान वृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति के लिए सर्वोत्तम है।

3. मनोकामना पूर्ति पशुपति मंत्र (For Fulfilling Desires)

ॐ नमः शिवाय शुभं शुभं कुरु कुरु शिवाय नमः ॐ

यह एक संपुटित मंत्र है जिसका उपयोग विशेष रूप से जीवन की बाधाओं को दूर करने और शुभता लाने के लिए पशुपति व्रत के दौरान किया जाता है।

पशुपति मंत्र साधना का महत्व (Significance of Pashupati Sadhana)

कलियुग में जहां मनुष्य अपने कर्मों और भागदौड़ के कारण अनेक प्रकार के शारीरिक और मानसिक रोगों से ग्रस्त है, वहां पशुपति साधना एक संजीवनी का कार्य करती है।

  1. शीघ्र फलदायी: शिव महापुराण के अनुसार भगवान शिव बहुत जल्दी प्रसन्न होने वाले देवता (आशुतोष) हैं। पशुपति साधना, विशेषकर 5 सोमवार का पशुपति व्रत, अत्यंत शीघ्र फल प्रदान करता है।

  2. सभी संकटों का नाश: यह साधना केवल एक विशिष्ट समस्या के लिए नहीं है, बल्कि यह जीवन के हर पहलू—चाहे वह आर्थिक हो, पारिवारिक हो या मानसिक—सभी को सुधारती है।

  3. कर्म बंधनों से मुक्ति: यह मंत्र न केवल इस जन्म के बल्कि पूर्व जन्म के बुरे कर्मों के प्रभाव (प्रारब्ध) को भी काटने की शक्ति रखता है।

  4. सकारात्मक ऊर्जा का संचार: पशुपति मंत्र के स्पंदन (Vibrations) से साधक के चारों ओर एक सुरक्षा चक्र बन जाता है, जो नकारात्मक ऊर्जा, नजर दोष और तंत्र-मंत्र के प्रभाव को नष्ट कर देता है।

साधना के लिए आवश्यक सामग्री (Materials Required for Sadhana)

पशुपति साधना और पूजा अनुष्ठान शुरू करने से पहले, सभी आवश्यक सामग्रियों को एकत्रित कर लेना चाहिए। नीचे दी गई तालिका (Table) में पूजा सामग्री की पूरी सूची है:

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क्रमांक सामग्री का नाम (Material Name) मात्रा / विवरण (Details)
1 भगवान शिव की मूर्ति या शिवलिंग घर के मंदिर में या शिवालय में
2 रुद्राक्ष की माला 108 दाने वाली (मंत्र जाप के लिए)
3 बैठने का आसन ऊनी या कुशा का आसन (लाल या पीला)
4 पंचामृत का सामान दूध, दही, घी, शहद, शक्कर
5 मिट्टी या आटे के दीपक 6 दीपक (शाम की विशेष पूजा के लिए)
6 शुद्ध गाय का घी दीपक जलाने के लिए
7 बेलपत्र (Bilva Leaves) बिना कटे-फटे, कम से कम 11 या 108
8 फूल और माला सफेद या पीले फूल, धतूरा, आक के फूल
9 चंदन पीला या सफेद चंदन (भस्म भी रख सकते हैं)
10 नैवेद्य (प्रसाद) घर का बना शुद्ध मीठा (हलवा, खीर या चूरमा)

Pashupati Mantra Sadhana: कैसे करें? जानें साधना विधि

पशुपति मंत्र साधना को मुख्य रूप से दो तरीकों से किया जा सकता है: पहला, नियमित दैनिक साधना (रोजाना मंत्र जाप) और दूसरा, 5 सोमवार का पशुपति व्रत अनुष्ठान। वर्तमान में सबसे अधिक फलदायी 5 सोमवार के पशुपति व्रत को माना जाता है। यहाँ हम इसी 5 सोमवार वाले अनुष्ठान की संपूर्ण और विस्तृत विधि बता रहे हैं:

प्रथम चरण: प्रातः काल की पूजा विधि (Morning Rituals)

  1. संकल्प का दिन: इस साधना की शुरुआत किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के प्रथम सोमवार से करनी चाहिए। सावन का महीना (Shravan Maas) इसके लिए सर्वोत्तम है।

  2. स्नान और शुद्धता: सोमवार की सुबह ब्रह्म मुहूर्त (सूर्य उदय से पहले) में उठें। नित्यकर्मों से निवृत्त होकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र (सफेद, पीले या हल्के रंग के) धारण करें। काले वस्त्रों का त्याग करें।

  3. मंदिर का चुनाव: पशुपति साधना की सबसे बड़ी शर्त यह है कि आपको 5 सोमवार तक एक ही शिव मंदिर (शिवालय) में जाना होता है। इसलिए अपने घर के पास किसी ऐसे शिवालय का चुनाव करें जहाँ आप सुबह और शाम दोनों समय आसानी से जा सकें।

  4. पूजा की थाली तैयार करना: अपनी पूजा की थाली में जल का कलश, पंचामृत, बेलपत्र, फूल, चंदन, अक्षत (साबुत चावल), और कुछ मीठा प्रसाद रख लें।

  5. शिवालय में पूजा: मंदिर जाकर सबसे पहले भगवान गणेश और माता पार्वती को प्रणाम करें। फिर शिवलिंग पर जल और पंचामृत से अभिषेक करें।

  6. संकल्प लेना: सीधे हाथ (Right hand) में थोड़ा जल, अक्षत और एक फूल लें। मन में अपना नाम, गोत्र और अपनी वह विशेष मनोकामना बोलें जिसके लिए आप यह पशुपति व्रत कर रहे हैं। भगवान पशुपतिनाथ से 5 सोमवार के व्रत और मंत्र जाप को निर्विघ्न पूर्ण करने की प्रार्थना करें और जल को नीचे जमीन पर छोड़ दें।

  7. प्रातः काल का जाप: शिवलिंग के पास बैठकर रुद्राक्ष की माला से “ॐ पशुपतये नमः” मंत्र की कम से कम 1 या 3 माला का जाप करें। इसके बाद घर आ जाएं। दिन भर फलाहार (Fruits and Milk) पर रहें या जैसा आपका शरीर अनुमति दे, सात्विक व्रत रखें।

द्वितीय चरण: सांध्य काल (शाम) की विशेष पूजा विधि (Evening Rituals)

पशुपति व्रत साधना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा शाम की पूजा है। इसमें कोई भी गलती नहीं होनी चाहिए।

  1. प्रसाद बनाना: शाम को सूर्यास्त से कुछ समय पहले स्नान कर लें। अपनी रसोई में पूर्ण शुद्धता के साथ कुछ मीठा प्रसाद बनाएं। इसमें आटे का चूरमा, सूजी का हलवा या खीर बनाई जा सकती है।

  2. 6 दीपक तैयार करना: शाम की पूजा के लिए मिट्टी के या आटे के 6 दीये तैयार करें। इनमें शुद्ध घी और रुई की गोल बत्ती (गोल या लंबी, जैसी आपके यहाँ मान्य हो, लेकिन शिव जी के लिए गोल बत्ती श्रेष्ठ है) लगा लें।

  3. प्रसाद के तीन हिस्से करना: जो मीठा प्रसाद आपने बनाया है, उसे साथ लेकर मंदिर जाएं। ध्यान रहे: प्रसाद के तीन बराबर हिस्से आपको घर से करके नहीं ले जाने हैं, बल्कि मंदिर पहुँचकर भगवान शिव के सामने उस प्रसाद के तीन बराबर भाग करने हैं।

  4. दीप प्रज्वलन और प्रसाद अर्पण:

    • भगवान शिव के सामने बैठकर, 6 दीयों में से केवल 5 दीये प्रज्वलित कर दें (जला दें)। छठा दीया बिना जलाए अपनी थाली में ही रखा रहने दें।

    • जो प्रसाद के 3 हिस्से आपने किए हैं, उनमें से 2 हिस्से शिवलिंग के पास मंदिर में ही छोड़ दें (भगवान के भोग के लिए)।

    • प्रसाद का 1 हिस्सा अपनी थाली में वापस रख लें।

  5. शाम का मंत्र जाप: वहीं बैठकर पुनः रुद्राक्ष की माला से “ॐ पशुपतये नमः” मंत्र की 1, 3 या 5 माला का जाप करें। भगवान से अपनी मनोकामना दोहराएं और अपनी भूल-चूक की क्षमा मांगे।

  6. घर वापसी और छठा दीपक: पूजा के बाद घर लौट आएं। जब आप अपने घर के मुख्य द्वार (Main Entry) पर पहुँचें, तो घर के अंदर प्रवेश करने से पहले, दरवाजे के बाहर खड़े होकर (मुख घर की ओर रखते हुए) अपने सीधे हाथ (Right Hand) की तरफ उस छठे दीपक को प्रज्वलित कर दें जो आप बिना जलाए वापस लाए थे।

  7. व्रत खोलना (पारण): घर के अंदर आकर सबसे पहले वह प्रसाद ग्रहण करें जो आप थाली में वापस लाए थे (प्रसाद का तीसरा हिस्सा)। अति महत्वपूर्ण नियम: इस प्रसाद में से घर के किसी भी अन्य सदस्य (बच्चों, पति/पत्नी) को हिस्सा नहीं देना है। जिसने व्रत किया है, यह केवल उसी को खाना है। प्रसाद खाने के बाद आप अपना सात्विक भोजन ग्रहण कर सकते हैं।

यह विधि आपको लगातार 4 सोमवार तक दोहरानी है। पांचवें सोमवार को उद्यापन किया जाता है।

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पशुपति मंत्र साधना के कड़े नियम (Strict Rules to Follow)

आध्यात्मिक मार्ग में अनुशासन का बहुत महत्व है। यदि आप Pashupati Mantra Sadhana कर रहे हैं, तो निम्नलिखित नियमों का पालन अनिवार्य है:

  1. एक ही शिवालय (Same Temple): आपको पांचों सोमवार एक ही मंदिर में जाकर पूजा करनी है। आप मंदिर नहीं बदल सकते। यदि किसी कारणवश आप शहर से बाहर हैं, तो उस सोमवार को व्रत न करें, अगले सोमवार को उसी मंदिर में जाकर व्रत जारी रखें।

  2. ब्रह्मचर्य का पालन: साधना के इन 5 सप्ताह के दौरान शारीरिक और मानसिक रूप से पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।

  3. आहार की शुद्धता: पूरे अनुष्ठान के दौरान मांस, मदिरा, अंडा, प्याज, लहसुन और किसी भी प्रकार के तामसिक भोजन का पूर्ण रूप से त्याग करना अनिवार्य है।

  4. प्रसाद का नियम: शाम के समय मंदिर से लाया गया तीसरा प्रसाद किसी भी स्थिति में किसी और को नहीं बांटना है, यहाँ तक कि गाय या जानवर को भी नहीं। यह साधक के लिए ही है।

  5. सकारात्मक विचार: साधना काल में किसी की निंदा न करें, झूठ न बोलें और क्रोध से बचें। शिव शांत स्वरूप हैं, इसलिए मन को शांत रखना जरूरी है।

  6. महिलाओं के लिए मासिक धर्म (Periods) का नियम: यदि व्रत के बीच में मासिक धर्म आ जाए, तो उस सोमवार को व्रत और पूजा न करें। उस सोमवार को 5 की गिनती में शामिल न करें। अगले सोमवार जब शुद्ध हो जाएं, तब उसे अगला व्रत मानकर अनुष्ठान पूरा करें।

पशुपति साधना के लाभ (Benefits of Pashupati Mantra Sadhana)

जो व्यक्ति पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान पशुपतिनाथ की शरण में जाता है, उसे निम्नलिखित चमत्कारिक लाभ प्राप्त होते हैं:

1. अटके हुए कार्यों का पूर्ण होना

यदि आपका कोई सरकारी काम, कोर्ट-कचहरी का मामला, या कोई डील लंबे समय से फंसी हुई है, तो पशुपति साधना के प्रभाव से वे कार्य चमत्कारिक रूप से बनने लगते हैं।

2. ऋण (कर्ज) से मुक्ति और आर्थिक वृद्धि

दरिद्रता का नाश करने के लिए शिव की आराधना सर्वश्रेष्ठ है। व्यापार में घाटा हो रहा हो या कर्ज बढ़ गया हो, तो इस मंत्र के जाप से धन आगमन के नए मार्ग खुलते हैं और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।

3. विवाह और संतान सुख

जिन युवक-युवतियों के विवाह में देरी हो रही हो या कोई योग्य जीवनसाथी न मिल रहा हो, उनके लिए 5 सोमवार का यह व्रत अचूक है। इसके अलावा, নিঃসंतान दंपत्तियों को संतान सुख की प्राप्ति के लिए भी पशुपति साधना की सलाह दी जाती है।

4. रोगों से मुक्ति (स्वास्थ्य लाभ)

महामृत्युंजय स्वरूप शिव रोगों का नाश करते हैं। यदि घर में कोई लंबे समय से बीमार है, तो उसके नाम से संकल्प लेकर यह अनुष्ठान करने से स्वास्थ्य में लाभ होता है।

5. मानसिक शांति और भय मुक्ति

अज्ञात भय, डिप्रेशन (Depression), तनाव और चिंता को दूर करने में “ॐ पशुपतये नमः” मंत्र एक साइकोलॉजिकल हीलर (Psychological healer) की तरह काम करता है। यह मन को एकाग्र और भयमुक्त बनाता है।

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6. नवग्रह शांति

भगवान शिव सभी ग्रहों के नियंत्रक हैं। पशुपति साधना करने से कुंडली के कालसर्प दोष, शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और राहु-केतु के बुरे प्रभाव स्वतः ही शांत हो जाते हैं।

साधना में बरती जाने वाली सावधानियां (Precautions)

साधना में छोटी सी चूक भी इसके प्रभाव को कम कर सकती है, इसलिए इन सावधानियों को ध्यान में रखें:

  • दीपक जलाते समय: घर के बाहर छठा दीपक जलाते समय ध्यान रखें कि हवा से वह तुरंत न बुझे। दीपक जलाते समय मन में शिव का स्मरण अवश्य करें।

  • अहंकार न करें: साधना के दौरान यदि कोई आध्यात्मिक अनुभूति हो या कार्य सिद्ध होने लगे, तो अहंकार न करें और न ही इसका दिखावा करें।

  • स्वच्छता का पूरा ध्यान: बिना स्नान किए पूजा स्थल को न छुएं। मंदिर जाते समय मन और तन दोनों की शुद्धि आवश्यक है।

  • खंडित सामग्री का प्रयोग न करें: बेलपत्र चढ़ाने से पहले देख लें कि वे कटे-फटे या कीड़े लगे हुए न हों। फूल ताजे होने चाहिए।

पांचवें सोमवार को पशुपति व्रत उद्यापन विधि (Udyapan Vidhi)

5 सोमवार के पशुपति व्रत अनुष्ठान को पूर्ण करने के लिए पांचवें सोमवार को उद्यापन (समापन) किया जाता है। इसकी विधि इस प्रकार है:

  1. पांचवें सोमवार को सुबह की पूजा सामान्य तरीके से करें जैसे पिछले चार सोमवार की थी।

  2. शाम के समय भी 6 दीपक, प्रसाद (जिसके तीन हिस्से करने हैं) लेकर मंदिर जाएं।

  3. विशेष सामग्री: उद्यापन वाले दिन भगवान शिव को अर्पित करने के लिए एक साबुत श्रीफल (नारियल) लें। उस पर कलावा (मौली) लपेट लें। साथ ही 108 साबुत दाने (चाहे वह 108 बेलपत्र हों, 108 कमल गट्टे हों, या 108 अक्षत/चावल के साबुत दाने हों) लेकर जाएं।

  4. शाम की पूजा में पहले 5 दीये जलाएं, प्रसाद के 2 हिस्से भगवान को अर्पित करें।

  5. अब 108 दाने (बेलपत्र या चावल) एक-एक करके “ॐ पशुपतये नमः” बोलते हुए शिवलिंग पर अर्पित करें।

  6. अंत में वह नारियल (श्रीफल) कुछ दक्षिणा (पैसे) के साथ भगवान शिव के चरणों में अर्पित कर दें।

  7. हाथ जोड़कर भगवान से प्रार्थना करें: “हे पशुपतिनाथ! मैंने अपनी बुद्धि और क्षमता के अनुसार 5 सोमवार का यह अनुष्ठान पूर्ण किया है। यदि मुझसे कोई भूल हुई हो तो क्षमा करें और मेरी (मनोकामना बोलें) इच्छा को पूर्ण करें।”

  8. इसके बाद अपना एक प्रसाद का हिस्सा और छठा बिना जला दीपक लेकर घर आएं, मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं और घर आकर प्रसाद ग्रहण करें।

Pashupati Mantra Sadhana वास्तव में कलियुग का कल्पवृक्ष है। भगवान शिव जितने भोले हैं, उनकी शक्ति उतनी ही असीमित है। जब एक इंसान सभी रास्तों से निराश हो जाता है, तो पशुपतिनाथ का दरबार ही उसका अंतिम और सबसे सच्चा सहारा होता है। यह 5 सोमवार का व्रत और मंत्र जाप आपको धैर्य, शांति और सकारात्मकता से भर देता है।

यदि आप ऊपर दी गई विधि, नियम और सावधानियों का पालन करते हुए पूरे मन और श्रद्धा के साथ पशुपति मंत्र की साधना करेंगे, तो निश्चित मानिए कि महादेव आपकी झोली कभी खाली नहीं रहने देंगे। शिव पर विश्वास रखें और अपनी साधना शुरू करें। ॐ नमः शिवाय!

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. क्या पशुपति मंत्र साधना घर के मंदिर में की जा सकती है?

नियमित ‘ॐ पशुपतये नमः’ मंत्र का जाप आप घर के मंदिर में बैठकर कर सकते हैं। लेकिन यदि आप 5 सोमवार का ‘पशुपति व्रत अनुष्ठान’ कर रहे हैं, तो सुबह और शाम की पूजा के लिए आपको किसी प्राण-प्रतिष्ठित शिव मंदिर (शिवालय) में जाना अनिवार्य है। घर पर 6 दीये वाला विधान पूर्ण नहीं माना जाता है।

2. प्रसाद के लिए क्या बनाना सबसे उत्तम रहता है?

पशुपति व्रत के प्रसाद में गाय के घी से बना आटे का चूरमा, आटे का हलवा या सूजी का हलवा सबसे उत्तम माना जाता है। ऐसा प्रसाद बनाना चाहिए जिसे आसानी से तीन बराबर हिस्सों में बांटा जा सके। बाजार की बनी मिठाइयों का प्रयोग करने से बचना चाहिए।

3. घर के मुख्य द्वार पर छठा दीपक किस तरफ जलाना चाहिए?

जब आप शाम को मंदिर से घर लौटते हैं, तो घर के अंदर प्रवेश करने से ठीक पहले (जब आपका मुख घर के अंदर की तरफ हो), अपने सीधे हाथ (Right hand side) की ओर चौखट के बाहर वह छठा दीपक जलाना चाहिए।

4. यदि व्रत के दिन भूल से कुछ खा लिया जाए तो क्या करें?

यदि भूलवश कुछ खा लिया है, तो भगवान शिव से मानसिक रूप से क्षमा मांग लें और अपना व्रत जारी रखें। शिव भाव के भूखे हैं। लेकिन यदि जानबूझकर व्रत तोड़ा गया है, तो वह सोमवार मान्य नहीं होगा और आपको फिर से नया संकल्प लेकर शुरुआत करनी पड़ सकती है।

5. क्या पति-पत्नी दोनों एक साथ यह व्रत कर सकते हैं?

हाँ, पति-पत्नी या घर के अन्य सदस्य एक साथ यह व्रत कर सकते हैं। लेकिन ध्यान रहे, पूजा की थाली, 6 दीपक, प्रसाद और संकल्प सबका अलग-अलग होना चाहिए। एक ही प्रसाद में से दोनों का हिस्सा नहीं लगेगा। सबको अपना-अपना प्रसाद अलग से बनाकर लाना होगा।

"नमस्कार! मैं अमित तिवारी हूँ, और आप मुझे एक 'साधक' के रूप में जान सकते हैं। बचपन से ही सनातन धर्म, तंत्र-मंत्र और आध्यात्मिक साधनाओं ने मुझे अपनी ओर गहराई से आकर्षित किया है। वर्षों के निरंतर अध्ययन, गुरु-कृपा और अपने व्यक्तिगत साधना-अनुभवों से मैंने जो कुछ भी सीखा है, उसे मैं sadhnas.in के माध्यम से आपके साथ साझा कर रहा हूँ। मेरा मुख्य उद्देश्य इंटरनेट पर फैले भ्रम को दूर करके प्रामाणिक, सत्य और शास्त्र-सम्मत जानकारी को बेहद सरल भाषा में आप तक पहुँचाना है। मैं कोई गुरु या उपदेशक नहीं हूँ, बल्कि आप ही की तरह ईश्वर की खोज में निकला एक राही हूँ। मेरी यही कोशिश है कि मेरे अनुभवों और लेखनी से आपकी आध्यात्मिक यात्रा और भी सुगम व सफल हो सके।"

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