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Yogini Ekadashi 2026: व्रत में भूलकर भी न करें ये 11 गलतियां, वर्ना छिन जाएगा सारा पुण्य!It takes 11 minutes... to read this article !

सनातन हिंदू धर्म में एकादशी के व्रत को सभी व्रतों का राजा (व्रतराज) कहा गया है। हर महीने के दोनों पक्षों में आने वाली एकादशियों का अपना-अपना महत्व है, लेकिन आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली ‘योगिनी एकादशी’ (Yogini Ekadashi) का आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व बहुत अधिक है।

पद्म पुराण और विष्णु पुराण के अनुसार, योगिनी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के समान पुण्य मिलता है। यह व्रत कुष्ठ रोग जैसे गंभीर शारीरिक कष्टों और जाने-अनजाने में किए गए बड़े से बड़े पापों से मुक्ति दिलाने वाला माना गया है। देवशयनी एकादशी (जब भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं) से ठीक पहले आने के कारण, इस दिन श्री हरि की कृपा पाना अत्यंत फलदायी होता है।

लेकिन, एकादशी का व्रत केवल भूखे रहने या भोजन न करने का नाम नहीं है। ‘एकादशी’ का अर्थ है अपनी 11 इंद्रियों (5 कर्मेन्द्रियां, 5 ज्ञानेन्द्रियां और 1 मन) पर नियंत्रण पाना। अक्सर लोग व्रत तो पूरी श्रद्धा से रखते हैं, लेकिन अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे उनका व्रत खंडित हो जाता है और उन्हें पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।

वर्ष 2026 में योगिनी एकादशी का पावन पर्व 9 जुलाई 2026 (गुरुवार) को मनाया जाएगा। यदि आप भी इस दिन व्रत रख रहे हैं या भगवान विष्णु की आराधना कर रहे हैं, तो Google Helpful Content Guidelines के अनुसार तैयार किए गए इस विस्तृत लेख में जानें उन 11 बड़ी गलतियों के बारे में, जिन्हें आपको भूलकर भी नहीं करना चाहिए।

योगिनी एकादशी 2026: व्रत तिथि और शुभ मुहूर्त एक नजर में

नियमों और गलतियों के बारे में विस्तार से जानने से पहले, आइए वर्ष 2026 में योगिनी एकादशी की महत्वपूर्ण तिथियों और मुहूर्तों को नीचे दी गई तालिका (Table) के माध्यम से समझ लेते हैं:

विवरण (Important Details) जानकारी (Information)
व्रत का नाम योगिनी एकादशी 2026
हिन्दू मास और पक्ष आषाढ़ मास, कृष्ण पक्ष
योगिनी एकादशी तिथि 9 जुलाई 2026, दिन गुरुवार
आराध्य देव श्री हरि विष्णु (जगत के पालनहार)
एकादशी तिथि का प्रारंभ 8 जुलाई 2026 (रात्रि से)
एकादशी तिथि का समापन 9 जुलाई 2026 (रात्रि तक)
पारण (व्रत खोलने) का समय 10 जुलाई 2026 (सुबह सूर्योदय के बाद पारण मुहूर्त में)
प्रमुख वर्जित कार्य चावल खाना, तामसिक भोजन, क्रोध, दिन में सोना

(नोट: एकादशी की सटीक शुरुआत और पारण का समय आपके स्थानीय सूर्योदय के अनुसार थोड़ा भिन्न हो सकता है, इसलिए अपने पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।)

योगिनी एकादशी पर भूलकर भी न करें ये 11 भयंकर गलतियां (11 Mistakes to Avoid on Ekadashi)

शास्त्रों में एकादशी के नियमों को बहुत कड़ा बताया गया है। यदि आप चाहते हैं कि आपके व्रत का पुण्य फल क्षीण न हो, तो दशमी तिथि की रात से लेकर द्वादशी तिथि के पारण तक इन 11 गलतियों से खुद को पूरी तरह बचाकर रखें:

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1. भूलकर भी न करें चावल (Rice) का सेवन

यह एकादशी का सबसे बड़ा और कड़ा नियम है। एकादशी के दिन न तो चावल पकाना चाहिए और न ही खाना चाहिए, चाहे आपने व्रत रखा हो या नहीं।

  • पौराणिक कारण: महर्षि भृगु के श्राप के कारण एकादशी के दिन चावल में ‘महर्षि मेधा’ के अंश (जिन्होंने राक्षसों से बचने के लिए शरीर त्याग कर पृथ्वी में प्रवेश किया था) का वास माना जाता है। इसलिए इस दिन चावल खाना मांस खाने के बराबर पाप माना गया है।

  • वैज्ञानिक कारण: चावल में जल तत्व की मात्रा बहुत अधिक होती है। जल मन को चंचल करता है। एकादशी के दिन ब्रह्मांडीय ऊर्जा के कारण शरीर में जल का आकर्षण बढ़ता है, जिससे मन अस्थिर हो सकता है और सात्विक भाव भंग हो सकता है।

2. तुलसी के पत्ते तोड़ना और जल चढ़ाना (Plucking or Watering Tulsi)

भगवान विष्णु की पूजा बिना तुलसी दल के पूरी नहीं होती, लेकिन एकादशी के दिन तुलसी के पौधे के साथ कोई भी छेड़छाड़ करना महापाप है।

  • कारण: मान्यता है कि माता तुलसी (वृंदा) हर एकादशी के दिन अपने आराध्य भगवान विष्णु के लिए स्वयं निर्जला व्रत रखती हैं। यदि आप इस दिन उन्हें जल अर्पित करते हैं, तो उनका व्रत खंडित हो जाता है। साथ ही, एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना उन्हें शारीरिक कष्ट देने के समान है।

  • क्या करें: पूजा के लिए तुलसी के पत्ते दशमी तिथि (एक दिन पहले) को ही तोड़कर सुरक्षित रख लें। एकादशी की शाम तुलसी जी के समक्ष केवल दूर से घी का दीपक प्रज्वलित करें।

3. तामसिक भोजन और वर्जित सब्जियों का सेवन

एकादशी के दिन आपके घर की रसोई पूरी तरह सात्विक होनी चाहिए। यदि परिवार में कोई सदस्य व्रत नहीं भी रख रहा है, तो भी घर में तामसिक भोजन नहीं बनना चाहिए।

  • क्या न खाएं: लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा (शराब), और अंडे का पूर्णतः निषेध है।

  • वर्जित सब्जियां और दालें: मसूर की दाल, बैंगन, गोभी, पालक और सेम की फली को एकादशी के दिन खाना शास्त्रों में निषिद्ध बताया गया है। ये चीजें शरीर में ‘तमोगुण’ (आलस्य और अज्ञान) को बढ़ाती हैं।

4. किसी की निंदा, चुगली करना या अपशब्द बोलना (Gossip & Abusive Language)

व्रत का अर्थ केवल अन्न का त्याग नहीं, बल्कि दुर्गुणों का त्याग भी है। एकादशी के दिन झूठ बोलना, किसी को अपशब्द (गाली) देना, या पीठ पीछे किसी की बुराई (Backbiting) करना आपके व्रत को शून्य कर देता है।

  • आध्यात्मिक दृष्टिकोण: जब आप किसी की चुगली करते हैं, तो आपके व्रत का सारा पुण्य उस व्यक्ति के खाते में चला जाता है जिसकी आप बुराई कर रहे हैं। एकादशी के दिन वाणी का संयम (मौन) रखना या केवल भगवान के नामों का उच्चारण करना चाहिए।

5. दिन के समय सोना (Sleeping During the Day)

एकादशी के दिन सोना (विशेषकर दोपहर के समय) वर्जित है। व्रत का उद्देश्य शारीरिक और मानसिक रूप से जाग्रत अवस्था में रहना है।

  • जो व्यक्ति एकादशी के दिन सोता है, उसका शरीर आलस्य से भर जाता है और वह भगवान के ध्यान से भटक जाता है।

  • क्या करें: बीमार, वृद्ध और गर्भवती महिलाओं को इस नियम में छूट है। स्वस्थ लोगों को दिन भर भगवान विष्णु के मंत्रों का मानसिक जाप, कीर्तन या श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करना चाहिए। रात में भी जागरण (Night Vigil) करने का बहुत अधिक पुण्य बताया गया है।

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6. बाल, नाखून काटना और शेविंग करना (Cutting Hair and Nails)

हिंदू धर्म में किसी भी पवित्र व्रत या उपवास वाले दिन शरीर के बाल (Haircut/Shaving) या नाखून काटना बहुत ही अशुभ माना जाता है।

  • इसे शरीर की अशुद्धि का प्रतीक माना गया है। जो व्यक्ति एकादशी के दिन नाखून या बाल काटता है, उसके जीवन में आर्थिक संकट (दरिद्रता) आने की संभावना बढ़ जाती है। यह काम आपको दशमी तिथि को ही निपटा लेना चाहिए।

7. पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन न करना (Breaking Celibacy)

योगिनी एकादशी का व्रत पापों के शमन के लिए किया जाता है। इस दिन कामुक विचारों का मन में आना भी आपके व्रत को भंग कर सकता है।

  • दशमी तिथि की रात्रि से लेकर द्वादशी तिथि के पारण तक शारीरिक और मानसिक रूप से पूर्ण ब्रह्मचर्य का कड़ाई से पालन करना चाहिए। जो व्यक्ति इस दिन काम-वासना में लिप्त होता है, उसे भयंकर दोष लगता है और उसे व्रत का कोई फल प्राप्त नहीं होता।

8. दातून तोड़ना या केमिकल वाले टूथपेस्ट का इस्तेमाल करना

शास्त्रों के अनुसार एकादशी के दिन किसी भी पेड़ की टहनी (दातून) को तोड़ना वर्जित है, क्योंकि पेड़ों में भी प्राण होते हैं और इस दिन उन्हें कष्ट देना पाप है।

  • इसके अलावा आज के समय में बाजार में मिलने वाले टूथपेस्ट में कई प्रकार के रसायन (Chemicals) और अशुद्धियां होती हैं, जो आपके उपवास को अपवित्र कर सकती हैं।

  • क्या करें: एकादशी की सुबह नींबू के रस, सेंधा नमक या आम के पत्तों (जो खुद टूटकर गिरे हों) से दांत साफ करें। या सबसे उत्तम है कि केवल पानी की कुल्ला करके अपनी उंगली से दांतों को साफ कर लें।

9. महिलाओं, बुजुर्गों और असहायों का अपमान करना

भगवान विष्णु को ‘रमापति’ (माता लक्ष्मी के पति) कहा जाता है। जिस घर में स्त्रियों का सम्मान नहीं होता, वहां न लक्ष्मी टिकती हैं और न ही श्री हरि की कृपा प्राप्त होती है।

  • एकादशी के दिन यदि आप क्रोध में आकर अपनी माता, पत्नी, बहन या किसी बुजुर्ग का अपमान करते हैं या किसी असहाय व्यक्ति को सताते हैं, तो आपका किया गया व्रत और पूजा भगवान कभी स्वीकार नहीं करते।

10. झाड़ू लगाना और जीव हत्या का पाप

एकादशी के दिन घर में झाड़ू लगाते समय बहुत सावधानी बरतनी चाहिए।

  • कारण: मान्यता है कि झाड़ू लगाते समय चींटी, मकड़ी या अन्य सूक्ष्म जीव अनजाने में मर सकते हैं। एकादशी के दिन जीव हत्या का पाप सामान्य दिनों से सौ गुना अधिक लगता है।

  • यदि सफाई करनी ही हो, तो सुबह जल्दी बेहद नरमी के साथ एक कपड़े से सफाई करें ताकि कोई भी जीव आहत न हो।

11. पारण के नियमों का उल्लंघन करना (Mistakes while Breaking the Fast)

यह एक ऐसी गलती है जो 90% लोग अनजाने में कर बैठते हैं। एकादशी का व्रत जितना महत्वपूर्ण है, उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण उस व्रत को सही समय पर खोलना (पारण करना) है।

  • गलत समय: यदि आप हरि वासर (द्वादशी तिथि की पहली एक चौथाई अवधि) में व्रत खोलते हैं, तो वह पाप माना जाता है। व्रत हमेशा हरि वासर समाप्त होने के बाद और सूर्योदय के बाद खोलना चाहिए।

  • बिना दान के पारण: द्वादशी के दिन व्रत खोलने से पहले किसी ब्राह्मण, गरीब या जरूरतमंद को अन्न, वस्त्र या दक्षिणा का दान अवश्य करना चाहिए। बिना दान किए भोजन ग्रहण करने से एकादशी का फल निष्फल हो जाता है।

योगिनी एकादशी 2026: व्रत को पूर्ण कैसे बनाएं? (What You SHOULD Do)

गलतियों से बचने के साथ-साथ आपको कुछ शुभ कर्म भी करने चाहिए जिससे भगवान विष्णु तुरंत प्रसन्न हों:

  • मंत्र जाप: पूरे दिन ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का मन ही मन जाप करते रहें।

  • विष्णु सहस्रनाम: इस दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ या श्रवण करना आपके सभी ग्रहों के दोषों को समाप्त कर देता है।

  • पीले रंग का प्रयोग: भगवान नारायण को पीला रंग अत्यंत प्रिय है। पूजा में पीले फूल (जैसे गेंदा, चंपा), पीला चंदन, पीले वस्त्र और पीले फलों (केला, आम) का ही प्रयोग और दान करें।

  • क्षमा याचना: पूजा के अंत में भगवान के सामने हाथ जोड़कर यह प्रार्थना जरूर करें: “हे प्रभु! अज्ञानतावश यदि मुझसे व्रत या पूजा में कोई त्रुटि हो गई हो, तो मुझे अपना नादान बालक समझकर क्षमा करें।”

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योगिनी एकादशी के वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक लाभ

उपवास (Fasting) की यह प्रक्रिया केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं है। आषाढ़ का महीना मानसून की शुरुआत का समय होता है। इस समय वायुमंडल में नमी बढ़ जाती है, जिससे मानव शरीर की पाचन शक्ति (Digestive system) सबसे कमजोर स्थिति में होती है।

एकादशी का उपवास शरीर को एक ब्रेक देता है, जिससे मेटाबॉलिज्म मजबूत होता है और ‘ऑटोफैगी’ (Autophagy) की प्रक्रिया शुरू होती है, जहां शरीर अपने ही डैमेज सेल्स को खत्म करने लगता है। ऊपर बताई गई 11 गलतियां (जैसे चावल न खाना, तामसिक भोजन न करना) दरअसल हमें बीमारियों से बचाने का एक प्राचीन वैज्ञानिक तरीका है। इसके अलावा, मौन रहना और काम-क्रोध से बचना हमारे मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) को सुदृढ़ कर हमें तनाव (Stress) और डिप्रेशन से बचाता है।

Yogini Ekadashi 2026 आपके जीवन से अंधकार, रोग, और पापों को मिटाने का एक स्वर्णिम अवसर है। भगवान विष्णु भाव के भूखे हैं, वे आपके द्वारा किए गए बड़े-बड़े अनुष्ठानों को नहीं, बल्कि आपकी आत्मा की शुद्धता को देखते हैं।

यदि आप 9 जुलाई 2026 को इस पावन व्रत का पालन कर रहे हैं, तो ऊपर बताई गई 11 गलतियों को अपने आचरण से कोसों दूर रखें। चावल के सेवन से लेकर किसी का दिल दुखाने तक, हर छोटे-बड़े पाप से बचें। एक शुद्ध मन से किया गया योगिनी एकादशी का व्रत आपके जीवन में धन, संपदा, शांति और अंत में मोक्ष का मार्ग अवश्य प्रशस्त करेगा।

5 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs on Yogini Ekadashi Rules)

1. क्या योगिनी एकादशी के व्रत में दवा (Medicine) ले सकते हैं?

जी हाँ। हिंदू धर्म में शरीर को कष्ट देकर भगवान की प्राप्ति का विधान नहीं है। यदि आप बीमार हैं या किसी नियमित दवा का सेवन करते हैं, तो आप एकादशी के व्रत में अपनी दवा ले सकते हैं। दवा को अन्न नहीं माना जाता, यह जीवन रक्षक है और इससे आपका व्रत नहीं टूटता।

2. यदि गलती से या भूलकर एकादशी के दिन चावल खा लें तो क्या करें?

यदि आपको याद नहीं रहा और आपने भूलवश चावल का सेवन कर लिया है, तो भगवान विष्णु के सामने हाथ जोड़कर सच्चे मन से क्षमा मांगें। इसके प्रायश्चित के रूप में आप अगले दिन (द्वादशी को) किसी गरीब को चावल या अन्न का दान अवश्य करें। भगवान अनजाने में हुई भूल को क्षमा कर देते हैं।

3. क्या एकादशी के दिन चाय या कॉफी पी सकते हैं?

एकादशी के व्रत में सात्विक पेय पदार्थों का सेवन किया जा सकता है। आप दूध से बनी चाय पी सकते हैं, लेकिन ध्यान रहे कि उसमें बहुत अधिक चीनी या कैफीन (कॉफी) का सेवन शरीर में एसिडिटी बढ़ा सकता है। इसलिए प्राकृतिक जूस या नींबू पानी का सेवन ज्यादा उचित है।

4. महिलाएं मासिक धर्म (Periods) में योगिनी एकादशी का व्रत कैसे करें?

महिलाएं मासिक धर्म के दौरान भी एकादशी का उपवास रख सकती हैं, क्योंकि व्रत आत्मा का विषय है, शरीर का नहीं। बस आपको इस दौरान भगवान की मूर्ति या पूजा सामग्री को स्पर्श नहीं करना है। आप दूर बैठकर मानसिक रूप से ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप कर सकती हैं।

5. योगिनी एकादशी के दिन भगवान को किस चीज का भोग लगाना सबसे शुभ होता है?

इस दिन भगवान विष्णु को पीले रंग की मिठाइयों (जैसे बेसन के लड्डू), केले, आम, मखाने की खीर या पंजीरी का भोग लगाना चाहिए। लेकिन ध्यान रखें कि किसी भी भोग में ‘तुलसी दल’ का होना अनिवार्य है, अन्यथा भगवान भोग स्वीकार नहीं करते हैं।

"नमस्कार! मैं अमित तिवारी हूँ, और आप मुझे एक 'साधक' के रूप में जान सकते हैं। बचपन से ही सनातन धर्म, तंत्र-मंत्र और आध्यात्मिक साधनाओं ने मुझे अपनी ओर गहराई से आकर्षित किया है। वर्षों के निरंतर अध्ययन, गुरु-कृपा और अपने व्यक्तिगत साधना-अनुभवों से मैंने जो कुछ भी सीखा है, उसे मैं sadhnas.in के माध्यम से आपके साथ साझा कर रहा हूँ। मेरा मुख्य उद्देश्य इंटरनेट पर फैले भ्रम को दूर करके प्रामाणिक, सत्य और शास्त्र-सम्मत जानकारी को बेहद सरल भाषा में आप तक पहुँचाना है। मैं कोई गुरु या उपदेशक नहीं हूँ, बल्कि आप ही की तरह ईश्वर की खोज में निकला एक राही हूँ। मेरी यही कोशिश है कि मेरे अनुभवों और लेखनी से आपकी आध्यात्मिक यात्रा और भी सुगम व सफल हो सके।"

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