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Pushya Nakshatra Calendar 2026: गुरु-रवि पुष्य योग की तिथियां और खरीदारी का मुहूर्तIt takes 11 minutes... to read this article !

वैदिक ज्योतिष और हिंदू पंचांग में समय (मुहूर्त) का विशेष महत्व है। किसी भी नए और शुभ कार्य की शुरुआत, धन निवेश या कीमती वस्तुओं की खरीदारी के लिए एक ऐसा नक्षत्र है जिसे आंख मूंदकर चुना जा सकता है—और वह है पुष्य नक्षत्र (Pushya Nakshatra)। इसे समस्त 27 नक्षत्रों का ‘राजा’ माना जाता है।

यदि आप वर्ष 2026 में कोई नया व्यापार शुरू करने, सोना-चांदी खरीदने, नया घर बुक करने या वाहन लेने की योजना बना रहे हैं, तो पुष्य नक्षत्र आपके लिए सबसे शुभ और फलदायी समय रहेगा। इस विस्तृत लेख में, हम आपको पुष्य नक्षत्र कैलेंडर 2026, इसके अंतर्गत आने वाले महा-संयोगों (जैसे गुरु पुष्य और रवि पुष्य योग), शुभ मुहूर्तों, और ज्योतिषीय उपायों की संपूर्ण जानकारी प्रदान करेंगे।

1. ज्योतिष शास्त्र में पुष्य नक्षत्र का महत्व (Importance of Pushya Nakshatra)

‘पुष्य’ शब्द का अर्थ है—पोषण करने वाला, ऊर्जा देने वाला या वृद्धि करने वाला। इसे ‘तिष्य’ (मांगलिक) और ‘अमरेज्य’ (देवताओं द्वारा पूजित) भी कहा जाता है।

  • स्वामी ग्रह (Ruling Planet): इस नक्षत्र का स्वामी कर्मफल दाता ‘शनि’ (Saturn) है। शनि स्थायीत्व (Stability) का प्रतीक है। यही कारण है कि पुष्य नक्षत्र में शुरू किए गए कार्य या खरीदी गई संपत्ति में लंबे समय तक बरकत रहती है और वह स्थायी लाभ देती है।

  • अधिष्ठाता देवता (Deity): पुष्य नक्षत्र के देवता ‘बृहस्पति’ (Jupiter) हैं। देवगुरु बृहस्पति ज्ञान, धन, समृद्धि और सौभाग्य के कारक हैं।

  • प्रतीक (Symbol): इस नक्षत्र का प्रतीक गाय का थन (Cow’s udder) या कमल का फूल है। जिस प्रकार गाय का दूध बिना किसी भेदभाव के सभी को पोषण देता है, वैसे ही यह नक्षत्र जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक पोषण लाता है।

शनि और बृहस्पति के इस दुर्लभ संगम के कारण ही पुष्य नक्षत्र को अत्यंत चमत्कारी माना जाता है। यह नकारात्मक ऊर्जाओं को नष्ट करके जीवन में सकारात्मकता और समृद्धि का संचार करता है।

2. पुष्य नक्षत्र में बनने वाले विशेष योग (Special Yogas in Pushya Nakshatra)

पुष्य नक्षत्र अपने आप में अत्यंत शुभ है, लेकिन जब यह सप्ताह के कुछ विशेष दिनों के साथ जुड़ता है, तो इसकी शक्ति कई गुना बढ़ जाती है:

क. गुरु पुष्य योग (Guru Pushya Yoga)

जब पुष्य नक्षत्र गुरुवार (Thursday) के दिन पड़ता है, तो इसे ‘गुरु पुष्य योग’ या ‘गुरु पुष्यामृत योग’ कहा जाता है। गुरुवार भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति का दिन है। यह योग धन निवेश, सोना खरीदने, नया व्यापार शुरू करने और विद्या आरंभ के लिए पूरे वर्ष का सबसे श्रेष्ठ मुहूर्त माना जाता है। वर्ष 2026 में 3 बार गुरु पुष्य योग का निर्माण हो रहा है।

ख. रवि पुष्य योग (Ravi Pushya Yoga)

जब पुष्य नक्षत्र रविवार (Sunday) के दिन पड़ता है, तो यह ‘रवि पुष्य योग’ कहलाता है। सूर्य मान-सम्मान, नेतृत्व और करियर का कारक है। यह योग सरकारी नौकरी से जुड़े काम, औषधियों के निर्माण या सेवन, और प्रशासनिक कार्यों की शुरुआत के लिए अत्यधिक शुभ होता है। 2026 में 3 बार रवि पुष्य योग बनेगा।

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ग. शनि पुष्य और सोम पुष्य योग

शनिवार के दिन आने वाले पुष्य नक्षत्र को ‘शनि पुष्य योग’ कहते हैं, जो तंत्र साधना, मशीनरी की खरीद और रियल एस्टेट निवेश के लिए अच्छा है। सोमवार के दिन पड़ने वाला ‘सोम पुष्य योग’ मानसिक शांति और चंद्र से जुड़े उपायों के लिए फलदायी होता है।

3. पुष्य नक्षत्र 2026 का संपूर्ण कैलेंडर: तिथियां और समय (Pushya Nakshatra Calendar 2026)

वर्ष 2026 में पुष्य नक्षत्र कुल 14 बार आएगा। नीचे दी गई तालिका में नक्षत्र के आरंभ और समाप्ति का समय (भारतीय समयानुसार – IST) तथा उस दिन बनने वाले विशेष योग की सूची दी गई है। अपनी खरीदारी या शुभ कार्यों की योजना आप इसके अनुसार बना सकते हैं:

महीना (Month) तिथि (Date) दिन (Day) नक्षत्र आरंभ (Start Time) नक्षत्र समाप्त (End Time) विशेष शुभ योग (Special Yoga)
जनवरी 04 जनवरी 2026 रविवार 03:11 PM 05 जनवरी, 01:25 PM रवि पुष्य योग
फरवरी 01 फरवरी 2026 रविवार 01:34 AM 01 फरवरी, 11:58 PM रवि पुष्य योग
फरवरी 28 फरवरी 2026 शनिवार 09:35 AM 01 मार्च, 08:34 AM शनि पुष्य योग
मार्च 27 मार्च 2026 शुक्रवार 03:24 PM 28 मार्च, 02:50 PM
अप्रैल 23 अप्रैल 2026 गुरुवार 08:57 PM 24 अप्रैल, 08:14 PM गुरु पुष्य योग
मई 21 मई 2026 गुरुवार 04:12 AM 22 मई, 02:49 AM गुरु पुष्य योग
जून 17-18 जून 2026 बुध/गुरुवार 17 जून, 01:37 PM 18 जून, 11:32 AM गुरु पुष्य योग (18 जून को)
जुलाई 15 जुलाई 2026 बुधवार 12:09 AM 15 जुलाई, 09:46 PM
अगस्त 11 अगस्त 2026 मंगलवार 10:09 AM 12 अगस्त, 07:59 AM
सितंबर 07 सितंबर 2026 सोमवार 06:14 PM 08 सितंबर, 04:39 PM सोम पुष्य योग
अक्टूबर 05 अक्टूबर 2026 सोमवार 12:13 AM 05 अक्टूबर, 11:09 PM सोम पुष्य योग
नवंबर 01 नवंबर 2026 रविवार 05:39 AM 02 नवंबर, 04:30 AM रवि पुष्य योग
नवंबर 28 नवंबर 2026 शनिवार 12:50 PM 29 नवंबर, 10:59 AM शनि पुष्य योग
दिसंबर 25 दिसंबर 2026 शुक्रवार 10:50 PM 26 दिसंबर, 08:12 PM

(नोट: स्थान और पंचांग (Panchang) की गणना के अनुसार समय में कुछ मिनटों का स्थानीय अंतर आ सकता है। अपने शहर के सटीक समय के लिए स्थानीय पंचांग अवश्य देखें।)

4. वर्ष 2026 में गुरु पुष्य और रवि पुष्य योग का महा-संयोग

साल 2026 इसलिए भी बहुत खास है क्योंकि इसमें सबसे शक्तिशाली माने जाने वाले योग भरपूर मात्रा में बन रहे हैं।

  • गुरु पुष्य के स्वर्णिम अवसर: यदि आप 2026 में कोई बड़ी प्रॉपर्टी, घर, या भारी मात्रा में स्वर्ण आभूषण खरीदना चाहते हैं, तो 23 अप्रैल, 21 मई और 18 जून की तारीखों को अभी से डायरी में नोट कर लें। 21 मई 2026 का दिन विशेष रूप से शुभ है क्योंकि इस समय ज्योतिषीय ग्रहों की स्थिति (बृहस्पति और चंद्रमा का गोचर) अत्यधिक लाभकारी रहने वाली है।

  • रवि पुष्य के आरोग्य अवसर: 4 जनवरी, 1 फरवरी और 1 नवंबर को रवि पुष्य योग बन रहा है। ये दिन बच्चों के ‘स्वर्णप्राशन’ (Suvarnaprashan), नई दवा या चिकित्सा शुरू करने, और प्रशासनिक परीक्षाओं के फॉर्म भरने के लिए सर्वश्रेष्ठ हैं।

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5. पुष्य नक्षत्र में क्या खरीदना सबसे शुभ होता है? (What to Buy?)

पुष्य नक्षत्र का संबंध वृद्धि और स्थायित्व से है। इस दिन खरीदी गई कोई भी वस्तु लंबे समय तक आपके जीवन में रहती है और उसका मूल्य बढ़ता है।

  1. सोना और चांदी (Gold and Silver): पुष्य नक्षत्र में सोने या चांदी के आभूषण और सिक्के खरीदना कुबेर की कृपा लाता है। सोना बृहस्पति का और चांदी चंद्रमा का प्रतीक है, और इस दिन इनका क्रय करना घर में दरिद्रता को प्रवेश नहीं करने देता।

  2. जमीन, मकान या फ्लैट (Real Estate): शनि स्थायित्व का ग्रह है। अगर आप अपने सपनों का घर खरीद रहे हैं या किसी भूखंड (Plot) में निवेश कर रहे हैं, तो पुष्य नक्षत्र पर टोकन मनी देना या रजिस्ट्री करवाना अत्यंत फलदायी होता है।

  3. वाहन (Vehicles): कार, बाइक या किसी भी व्यावसायिक वाहन की खरीदारी के लिए यह नक्षत्र दुर्घटनाओं से रक्षा करता है और यात्रा को सुरक्षित बनाता है।

  4. इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू सामान: घर की सुख-सुविधाओं की वस्तुएं जैसे फ्रिज, टीवी, या फर्नीचर आदि खरीदना भी इस दिन शुभ माना जाता है।

  5. बही-खाता (Account Books): व्यापारी वर्ग के लिए नए बही-खाते, लैपटॉप या व्यापारिक सॉफ्टवेयर खरीदने और उन्हें आरंभ करने के लिए यह समय अमृत के समान है।

6. पुष्य नक्षत्र के दिन क्या कार्य और उपाय करें? (Rituals & Spiritual Activities)

केवल खरीदारी ही नहीं, बल्कि पुष्य नक्षत्र आध्यात्मिक साधना और ग्रहों की शांति के लिए भी एक बेहतरीन अवसर है।

बच्चों के लिए स्वर्णप्राशन (Suvarnaprashan)

आयुर्वेद में पुष्य नक्षत्र के दिन बच्चों (जन्म से लेकर 16 वर्ष तक) को ‘स्वर्णप्राशन’ कराने का विशेष विधान है। स्वर्णप्राशन सोने की भस्म, शहद, ब्राह्मी, शंखपुष्पी और घी का एक सिद्ध मिश्रण होता है। पुष्य नक्षत्र के दिन इसे पिलाने से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity), बुद्धि, और शारीरिक बल में जादुई वृद्धि होती है। वर्ष 2026 में विशेषकर ‘रवि पुष्य’ के दिनों पर अपने बच्चों को आयुर्वेदिक क्लीनिक ले जाकर स्वर्णप्राशन अवश्य कराएं।

धन और सुख-शांति के ज्योतिषीय उपाय

  • केले और पीपल के पेड़ की पूजा: गुरु पुष्य योग के दिन केले के पेड़ की जड़ में जल, हल्दी, गुड़ और चने की दाल अर्पित करें। शनि पुष्य के दिन पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।

  • मंत्र जाप (Mantra Jaap): इस दिन बृहस्पति और विष्णु भगवान के मंत्रों का जाप करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं।

    • गुरु मंत्र: “ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः” (108 बार)

    • विष्णु मंत्र: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” (108 बार)

  • पीले वस्त्र और दान: गुरुवार के दिन पड़ने वाले पुष्य नक्षत्र में पीले वस्त्र धारण करें। ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को चने की दाल, हल्दी, पीले फल या सोने का दान (अपनी सामर्थ्य अनुसार) करना आपके सौभाग्य को कई गुना बढ़ा देता है।

  • श्री यंत्र की स्थापना: यदि व्यापार ठीक नहीं चल रहा है, तो इस दिन स्फटिक या पारद का ‘श्री यंत्र’ लाकर घर या कार्यस्थल के मंदिर में स्थापित करें और लक्ष्मी जी की पूजा करें।

7. पुष्य नक्षत्र में विवाह क्यों वर्जित माना गया है? (Why is Marriage Prohibited?)

यहां एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात ध्यान देने योग्य है। यद्यपि पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रों का राजा कहा जाता है, लेकिन इस नक्षत्र में विवाह (Marriage) करना पूर्णतः वर्जित (Strictly Prohibited) है।

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इसके पीछे एक पौराणिक कथा और ज्योतिषीय कारण दोनों हैं:

  • पौराणिक कथा: शिव पुराण के अनुसार, पुष्य नक्षत्र के समय भगवान शिव अपनी गहन तपस्या और समाधि में लीन थे। देवी पार्वती उनसे विवाह करना चाहती थीं, लेकिन शिव जी की समाधि के कारण इस नक्षत्र में विवाह संभव नहीं हो पाया। अंततः यह माना गया कि भगवान शिव ने इस नक्षत्र को विवाह कार्यों के लिए श्राप दिया था।

  • ज्योतिषीय कारण: विवाह के लिए शुक्र (Venus) का अनुकूल होना आवश्यक है जो प्रेम और दांपत्य जीवन का कारक है। पुष्य नक्षत्र में शनि (तपस्या, वैराग्य) और बृहस्पति (ज्ञान, संन्यास) का अत्यधिक प्रभाव होता है। ये दोनों ग्रह सांसारिक मोह और रोमांस से विरक्त (Detached) करते हैं। इसलिए इस नक्षत्र में विवाह करने से पति-पत्नी के बीच नीरसता आ सकती है या वैवाहिक जीवन में कष्ट उत्पन्न हो सकते हैं। अतः पुष्य नक्षत्र में सगाई, रोका या विवाह की रस्में भूलकर भी नहीं करनी चाहिए।

वर्ष 2026 आपके जीवन में आर्थिक उन्नति, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक शांति के कई अवसर लेकर आ रहा है। पुष्य नक्षत्र 2026 (Pushya Nakshatra 2026) का यह कैलेंडर केवल तारीखों की सूची नहीं है, बल्कि आपके भविष्य की सफलताओं का एक रोडमैप है।

चाहे आपको निवेश करना हो, सोना खरीदना हो, बच्चों को स्वर्णप्राशन कराना हो या किसी नए व्यवसाय की नींव रखनी हो, ऊपर दी गई तारीखों, विशेषकर गुरु पुष्य (23 अप्रैल, 21 मई, 18 जून) और रवि पुष्य (4 जनवरी, 1 फरवरी, 1 नवंबर) के सुअवसरों का पूरा लाभ उठाएं। ग्रहों का यह शुभ संरेखण निश्चित रूप से आपके जीवन में स्थिरता, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आएगा।

8. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: पुष्य नक्षत्र को सभी नक्षत्रों का राजा क्यों कहा जाता है?

उत्तर: पुष्य नक्षत्र का स्वामी शनि (स्थायित्व) और देवता बृहस्पति (ज्ञान व धन) हैं। यह एकमात्र ऐसा नक्षत्र है जो विवाह को छोड़कर, सभी प्रकार के शुभ कार्यों, खरीदारी और निवेश के लिए बिना कोई अन्य मुहूर्त देखे अत्यंत शुभ माना जाता है। यह नकारात्मक दोषों को दूर करने की क्षमता रखता है, इसीलिए इसे नक्षत्रों का राजा (King of Nakshatras) कहा जाता है।

प्रश्न 2: वर्ष 2026 में सबसे श्रेष्ठ गुरु पुष्य योग कब है?

उत्तर: साल 2026 में कुल 3 गुरु पुष्य योग बन रहे हैं—23 अप्रैल, 21 मई, और 18 जून। इनमें से 21 मई 2026 का गुरु पुष्य योग अधिक मास (Adhik Maas) और शुक्ल पक्ष के शुभ संयोग के कारण निवेश और नई शुरुआत के लिए सबसे अधिक शक्तिशाली माना जा रहा है।

प्रश्न 3: क्या पुष्य नक्षत्र में जन्म लेने वाले बच्चे भाग्यशाली होते हैं?

उत्तर: हाँ, ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पुष्य नक्षत्र में जन्मे बच्चे अत्यंत भाग्यशाली, बुद्धिमान, धैर्यवान और धर्मपरायण होते हैं। उन पर शनि और बृहस्पति दोनों की कृपा होती है, जिससे वे अपने जीवन में मान-सम्मान और अपार धन अर्जित करते हैं। वे अपने परिवार की वृद्धि और पालन-पोषण करने वाले होते हैं।

प्रश्न 4: गुरु पुष्य और रवि पुष्य योग में मुख्य अंतर क्या है?

उत्तर: गुरु पुष्य योग (गुरुवार + पुष्य नक्षत्र) मुख्य रूप से धन वृद्धि, प्रॉपर्टी/सोना खरीदने और नए व्यापारिक निवेश के लिए श्रेष्ठ होता है। वहीं, रवि पुष्य योग (रविवार + पुष्य नक्षत्र) औषधियों के निर्माण/सेवन, स्वर्णप्राशन, सरकारी कार्यों और प्रशासनिक सफलता प्राप्त करने के लिए अधिक शुभ माना जाता है।

प्रश्न 5: पुष्य नक्षत्र में कौन सा कार्य बिल्कुल नहीं करना चाहिए?

उत्तर: पुष्य नक्षत्र में विवाह, सगाई या कोई भी वैवाहिक रस्म बिल्कुल नहीं करनी चाहिए। भगवान शिव के श्राप और शनि-बृहस्पति (वैराग्य व ज्ञान के ग्रह) के प्रभाव के कारण, इस नक्षत्र में किया गया विवाह सफल नहीं माना जाता और दांपत्य जीवन में परेशानियां आ सकती हैं। इसके अलावा इस दिन किसी भी अनैतिक या गैर-कानूनी कार्य से बचना चाहिए।

"नमस्कार! मैं अमित तिवारी हूँ, और आप मुझे एक 'साधक' के रूप में जान सकते हैं। बचपन से ही सनातन धर्म, तंत्र-मंत्र और आध्यात्मिक साधनाओं ने मुझे अपनी ओर गहराई से आकर्षित किया है। वर्षों के निरंतर अध्ययन, गुरु-कृपा और अपने व्यक्तिगत साधना-अनुभवों से मैंने जो कुछ भी सीखा है, उसे मैं sadhnas.in के माध्यम से आपके साथ साझा कर रहा हूँ। मेरा मुख्य उद्देश्य इंटरनेट पर फैले भ्रम को दूर करके प्रामाणिक, सत्य और शास्त्र-सम्मत जानकारी को बेहद सरल भाषा में आप तक पहुँचाना है। मैं कोई गुरु या उपदेशक नहीं हूँ, बल्कि आप ही की तरह ईश्वर की खोज में निकला एक राही हूँ। मेरी यही कोशिश है कि मेरे अनुभवों और लेखनी से आपकी आध्यात्मिक यात्रा और भी सुगम व सफल हो सके।"

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