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Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज कब है? सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत कथाIt takes 16 minutes... to read this article !

भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म में महिलाओं द्वारा किए जाने वाले व्रतों का अत्यंत विशिष्ट और गौरवशाली स्थान है। जब बात पति के प्रति असीम प्रेम, समर्पण और अखंड सौभाग्य की हो, तो ‘हरतालिका तीज’ (Hartalika Teej) का नाम सबसे ऊपर आता है। करवा चौथ और वट सावित्री की तरह ही हरतालिका तीज सुहागिन महिलाओं का सबसे बड़ा और सबसे कठिन व्रत माना जाता है।

यह पावन पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के अलौकिक मिलन, तपस्या और अटूट प्रेम का प्रतीक है। मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाने के लिए जो घोर तपस्या की थी, उसी के फलस्वरूप उन्हें शिव जी की प्राप्ति हुई थी। यह व्रत न केवल विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए रखती हैं, बल्कि कुंवारी कन्याएं भी सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए इस निर्जला व्रत का पालन करती हैं।

यदि आप भी जानना चाहती हैं कि वर्ष 2026 में हरतालिका तीज कब है, इस कठिन व्रत के नियम क्या हैं, पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि क्या है, और इस दिन कौन से विशेष उपाय करने चाहिए, तो यह विस्तृत, शोधपरक और प्रामाणिक लेख आपके लिए ही तैयार किया गया है।

1. वर्ष 2026 में हरतालिका तीज कब है? (Hartalika Teej 2026 Date & Time)

हिंदू पंचांग के अनुसार, हरतालिका तीज का पावन व्रत हर वर्ष भाद्रपद (भादों) मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है। यह त्योहार श्री गणेश चतुर्थी से ठीक एक दिन पहले मनाया जाता है।

वैदिक पंचांग की सटीक गणनाओं के अनुसार, वर्ष 2026 में हरतालिका तीज का महापर्व 13 सितंबर 2026, रविवार को अत्यंत हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। रविवार का दिन होने के कारण महिलाओं को इस व्रत की तैयारियों और पूजा-पाठ के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा।

हरतालिका तीज 2026: शुभ मुहूर्त और तिथियों की तालिका (Muhurat Table)

हरतालिका तीज की पूजा मुख्य रूप से प्रदोष काल (शाम के समय) या प्रातःकाल में की जाती है। 2026 के लिए पूजा के शुभ मुहूर्त की तालिका यहाँ दी गई है:

विवरण (Event Details) तिथि और समय (Date & Time 2026)
हरतालिका तीज व्रत की मुख्य तिथि 13 सितंबर 2026 (रविवार)
भाद्रपद शुक्ल तृतीया तिथि का आरंभ 12 सितंबर 2026, रात्रि (देर शाम) से
भाद्रपद शुक्ल तृतीया तिथि की समाप्ति 13 सितंबर 2026, सायं (शाम) तक
प्रातःकालीन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 06:05 बजे से 08:35 बजे तक
प्रदोष काल (संध्या पूजा) का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त शाम 06:30 बजे से रात्रि 08:45 बजे तक
व्रत पारण (खोलने) का समय 14 सितंबर 2026 (गणेश चतुर्थी के दिन) सूर्योदय के बाद

(नोट: सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में भौगोलिक स्थिति के अनुसार कुछ मिनटों का अंतर आ सकता है। पूजा के लिए प्रदोष काल को सबसे उत्तम माना जाता है।)

2. हरतालिका तीज का अर्थ और नामकरण (Meaning of Hartalika)

‘हरतालिका’ शब्द दो शब्दों के मेल से बना है— ‘हरत’ और ‘आलिका’

  • हरत (Harat): इसका अर्थ है ‘हरण करना’ या ‘चुराकर ले जाना’।

  • आलिका (Aalika): इसका अर्थ है ‘सखी’ या ‘सहेली’।

पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती के पिता हिमालय उनका विवाह भगवान विष्णु से कराना चाहते थे, लेकिन माता पार्वती ने मन ही मन भगवान शिव को अपना पति मान लिया था। जब उनकी सखियों (सहेलियों) को यह बात पता चली, तो वे पार्वती जी को उनके पिता के घर से हरण करके (चुराकर) एक घने जंगल की गुफा में ले गईं, ताकि वे बिना किसी बाधा के शिव जी की तपस्या कर सकें। सखियों द्वारा हरण किए जाने के कारण ही इस व्रत का नाम ‘हरतालिका’ पड़ा।

3. हरियाली, कजरी और हरतालिका तीज में क्या अंतर है?

अक्सर लोग सावन और भादों में आने वाली तीजों को लेकर भ्रमित हो जाते हैं। हिंदू धर्म में मुख्य रूप से तीन तीज मनाई जाती हैं:

  1. हरियाली तीज (Hariyali Teej): यह सावन (श्रावण) मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को आती है। इसमें प्रकृति की हरियाली, झूला झूलने और शिव-पार्वती के मिलन का उत्सव मनाया जाता है।

  2. कजरी तीज (Kajari Teej): यह भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया को आती है। इसे सातुड़ी तीज भी कहते हैं, जिसमें नीमड़ी माता की पूजा होती है।

  3. हरतालिका तीज (Hartalika Teej): यह भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को आती है। यह तीनों तीजों में सबसे कठिन है क्योंकि यह पूर्णतः निर्जला (बिना जल के) व्रत है, जिसमें रात भर जागरण किया जाता है।

4. हरतालिका तीज का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व (Significance)

यह व्रत भारतीय नारी के त्याग, तपस्या और संकल्प शक्ति का सबसे बड़ा उदाहरण है।

  • अखंड सौभाग्य की प्राप्ति: मान्यता है कि जो भी सुहागिन स्त्री इस दिन निर्जला व्रत रखकर पूरे विधि-विधान से माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करती है, उसे माता पार्वती के समान ही अखंड सौभाग्य प्राप्त होता है और उसके पति की आयु लंबी होती है।

  • कुंवारी कन्याओं के लिए विशेष: जिन कन्याओं के विवाह में बाधाएं आ रही हैं या जो सुयोग्य वर की कामना रखती हैं, वे भी यह व्रत रखती हैं। भगवान शिव प्रसन्न होकर उन्हें मनचाहे वर का आशीर्वाद देते हैं।

  • पापों का नाश: भविष्य पुराण के अनुसार, हरतालिका तीज का व्रत करने से जन्म-जन्मांतर के पाप मिट जाते हैं और स्त्री को मृत्यु के पश्चात शिवलोक की प्राप्ति होती है।

  • आध्यात्मिक बल: यह व्रत सिखाता है कि यदि मनुष्य का संकल्प दृढ़ हो और ईश्वर पर अटूट विश्वास हो, तो वह कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अपनी मंजिल (ईश्वर) को प्राप्त कर सकता है।

5. हरतालिका तीज व्रत के कड़े नियम और सावधानियां (Strict Rules of the Vrat)

हरतालिका तीज को करवा चौथ से भी अधिक कठिन माना जाता है, क्योंकि करवा चौथ में चांद देखने के बाद पानी पी लिया जाता है, लेकिन हरतालिका तीज पूरे 24 घंटे का निर्जला व्रत है। इसके नियम अत्यंत कड़े हैं:

  • निर्जला उपवास (No Water): इस व्रत में अन्न तो दूर, जल (पानी) की एक बूंद भी ग्रहण नहीं की जाती है। व्रत अगले दिन सूर्योदय के बाद पूजा करके ही खोला जाता है।

  • सोना वर्जित (No Sleeping): व्रत रखने वाली महिलाओं को दिन में और विशेष रूप से रात में सोना नहीं चाहिए। इस व्रत में ‘रतजगा’ (रात भर जागरण) करने का विधान है। महिलाएं रात भर जागकर शिव-पार्वती के भजन, कीर्तन और लोकगीत गाती हैं।

  • क्रोध और अपशब्दों का त्याग: व्रत के दौरान मन को पूरी तरह से सात्विक रखना चाहिए। किसी पर क्रोध करना, अपशब्द बोलना या किसी की चुगली करने से व्रत का सारा फल नष्ट हो जाता है।

  • व्रत न छोड़ने का नियम: यदि किसी महिला ने एक बार हरतालिका तीज का व्रत उठा लिया (शुरू कर दिया), तो उसे जीवन भर यह व्रत रखना पड़ता है। यदि वह बीमार है, तो फलाहार कर सकती है, या उसकी जगह उसके पति यह व्रत रख सकते हैं, लेकिन व्रत छोड़ा नहीं जा सकता।

  • सोलह श्रृंगार: इस दिन महिलाओं को नए कपड़े पहनने चाहिए और माथे पर सिंदूर, हाथों में मेहंदी, पैरों में आलता सहित पूरा ‘सोलह श्रृंगार’ करना चाहिए।

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6. हरतालिका तीज की संपूर्ण पूजा सामग्री (Puja Samagri List)

पूजा प्रारंभ करने से पूर्व यह सुनिश्चित कर लें कि आपके पास सभी आवश्यक सामग्री उपलब्ध हो:

  • मूर्ति निर्माण के लिए: शुद्ध काली मिट्टी, बालू रेत या गंगा की मिट्टी (शिव, पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा बनाने के लिए)।

  • फुलेरा (Phulera): फूलों से सजा हुआ एक मंडप या चंदोवा, जिसे पूजा स्थल के ऊपर बांधा जाता है।

  • भगवान शिव के लिए: बेलपत्र (बिल्व पत्र), शमी के पत्ते, धतूरा, भांग, आंकड़े के फूल, भस्म, जनेऊ, रुद्राक्ष और सफेद चंदन।

  • माता पार्वती के लिए (सुहाग पिटारी): लाल चुनरी, बिंदी, सिंदूर, कुमकुम, मेहंदी, आलता, चूड़ियां, कंघी, शीशा, नेलपॉलिश आदि।

  • पूजा की सामान्य सामग्री: कलश, नारियल, केले के पत्ते, रोली, अक्षत (साबुत चावल), कलावा (मौली), गाय का घी, दीपक, कपूर, धूपबत्ती, और अगरबत्ती।

  • नैवेद्य (भोग): ताजे फल (केला, सेब), मिठाई, खीर, पंचामृत और पान-सुपारी।

7. हरतालिका तीज की शास्त्र-सम्मत पूजा विधि (Step-by-Step Puja Vidhi)

हरतालिका तीज की पूजा मुख्य रूप से शाम के समय प्रदोष काल में की जाती है। यदि आप घर पर पूजा कर रही हैं, तो 13 सितंबर 2026 को इस पारंपरिक विधि का पालन करें:

१. प्रातःकालीन संकल्प

  • सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

  • घर के मंदिर के सामने हाथ में जल और पुष्प लेकर संकल्प लें: “हे उमापति महादेव! मैं (अपना नाम), अपने पति की लंबी आयु, अखंड सौभाग्य और पारिवारिक सुख-शांति के लिए आज हरतालिका तीज का निर्जला व्रत कर रही हूँ। कृपया मुझे इस कठिन व्रत को पूर्ण करने की शक्ति दें।”

२. पूजा स्थल की सजावट और फुलेरा बांधना

  • शाम के समय घर के एक साफ हिस्से में (या पूजा कक्ष में) एक लकड़ी की चौकी रखें।

  • चौकी पर केले के पत्ते बिछाएं और उसके ऊपर ‘फुलेरा’ (फूलों का मंडप) बांधें।

  • चौकी के दाईं ओर जल से भरा एक कलश स्थापित करें, जिस पर लाल धागा बंधा हो और नारियल रखा हो।

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३. बालू रेत से शिव-पार्वती का निर्माण

  • इस व्रत की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें बाजार से लाई गई मूर्ति की नहीं, बल्कि अपने हाथों से बनाई गई मिट्टी या बालू (Sand) की मूर्ति की पूजा होती है।

  • शुद्ध बालू रेत या काली मिट्टी से भगवान शिव, माता पार्वती और श्री गणेश जी की प्रतिमा बनाएं और उन्हें चौकी पर स्थापित करें।

४. षोडशोपचार पूजा

  • सबसे पहले भगवान गणेश का ध्यान करें और उन्हें दूर्वा व कुमकुम अर्पित करें।

  • भगवान शिव का गंगाजल और पंचामृत से अभिषेक करें। उन्हें चंदन का लेप लगाएं, बेलपत्र, धतूरा, भांग और सफेद फूल चढ़ाएं।

  • माता पार्वती को कुमकुम का तिलक लगाएं। उन्हें लाल चुनरी ओढ़ाएं और सुहाग की पूरी पिटारी (श्रृंगार का सामान) अर्पित करें।

५. व्रत कथा का श्रवण

  • पूजा के बाद हाथ में फूल और अक्षत लेकर हरतालिका तीज की पौराणिक व्रत कथा (कथा नीचे दी गई है) का श्रवण करें या स्वयं पढ़ें। कथा के बिना व्रत पूर्ण नहीं माना जाता।

६. आरती और जागरण

  • कथा समाप्त होने के बाद शिव-पार्वती की आरती उतारें।

  • उन्हें फलों और मिठाइयों का भोग लगाएं।

  • रात भर जागरण करें। हर प्रहर (चार प्रहर) में भगवान शिव की पूजा करने का विशेष विधान है।

७. अगले दिन पारण (व्रत खोलना)

  • 14 सितंबर (चतुर्थी) की सुबह स्नान करके अंतिम पूजा करें।

  • माता पार्वती को चढ़ाया गया सुहाग का सामान किसी सुहागिन महिला या ब्राह्मणी को दान कर दें।

  • मिट्टी से बनी शिव-पार्वती की प्रतिमा को किसी पवित्र नदी या कुंड में विसर्जित कर दें।

  • इसके बाद जल ग्रहण करके और सात्विक भोजन कर अपना व्रत खोलें।

8. हरतालिका तीज की पौराणिक व्रत कथा (The Vrat Katha)

किसी भी व्रत का पूरा फल तब तक नहीं मिलता, जब तक उसकी कथा को पूरे भक्ति भाव से न सुना जाए। हरतालिका तीज की कथा स्वयं भगवान शिव ने माता पार्वती को उनके पूर्व जन्म के तप की याद दिलाने के लिए सुनाई थी:

कथा (पार्वती जी की घोर तपस्या):

भगवान शिव ने माता पार्वती से कहा, “हे पार्वती! क्या तुम्हें याद है कि तुमने मुझे अपने पति के रूप में पाने के लिए कितनी कठोर तपस्या की थी? तुमने हिमालय पर्वत पर अन्न-जल त्याग कर कई वर्षों तक केवल सूखे पत्ते खाकर मेरा ध्यान किया था। तुम्हारी यह दशा देखकर तुम्हारे पिता (हिमालय राज) बहुत दुखी रहते थे।”

“एक दिन देवर्षि नारद तुम्हारे पिता के पास आए और कहा कि भगवान विष्णु तुम्हारी पुत्री के गुणों से प्रभावित होकर उससे विवाह करना चाहते हैं। तुम्हारे पिता यह सुनकर अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्होंने तुम्हारा विवाह विष्णु जी से तय कर दिया। जब तुम्हें यह बात पता चली, तो तुम फूट-फूट कर रोने लगीं, क्योंकि तुमने मन ही मन मुझे (शिव को) अपना पति मान लिया था।”

“तुम्हारी सहेली (सखी) से तुम्हारा दुख नहीं देखा गया। उसने तुमसे रोने का कारण पूछा। जब तुमने अपनी व्यथा बताई, तो तुम्हारी सखी ने कहा कि वह तुम्हें एक ऐसे घने जंगल में छिपा देगी जहाँ तुम्हारे पिता तुम्हें नहीं ढूंढ पाएंगे। तुम्हारी सखी तुम्हें रातों-रात हरण करके (चुराकर) एक घने जंगल की एक गुफा में ले गई।”

“भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि थी। उसी गुफा में तुमने हस्त नक्षत्र में बालू रेत से एक शिवलिंग का निर्माण किया और रात भर जागरण करते हुए मेरी (शिव की) कठोर स्तुति की। तुमने अन्न और जल का पूर्णतः त्याग कर दिया था।”

“तुम्हारी इस कठोर तपस्या और निष्ठा से मेरा आसन डोल गया। मैं तुरंत तुम्हारे सामने प्रकट हुआ और तुमसे वरदान मांगने को कहा। तुमने कहा कि ‘यदि आप मेरी तपस्या से प्रसन्न हैं, तो मुझे अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करें।’ मैंने ‘तथास्तु’ कहा और अंतर्ध्यान हो गया।”

“उधर, तुम्हारे पिता तुम्हें खोजते हुए उस गुफा तक पहुंचे। तुमने उन्हें बताया कि तुमने शिव जी को पति रूप में प्राप्त कर लिया है और अब तुम घर तभी लौटोगी जब पिता तुम्हारा विवाह शिव के साथ करेंगे। हिमालय राज मान गए और फिर पूरे विधि-विधान से हमारा विवाह संपन्न हुआ।”

भगवान शिव ने अंत में कहा, “हे पार्वती! भाद्रपद शुक्ल तृतीया के दिन तुम्हारी सखियों ने तुम्हारा हरण किया था, इसलिए इस व्रत का नाम ‘हरतालिका’ पड़ा। जो भी सुहागिन स्त्री या कन्या इस दिन पूर्ण निष्ठा से निर्जला व्रत रखकर यह कथा सुनेगी और हमारा पूजन करेगी, मैं उसे अखंड सौभाग्य और मनचाहा वर प्रदान करूंगा।”

(कथा सुनने के बाद मन ही मन कहें: हे उमापति महादेव! जिस प्रकार आपने माता पार्वती की तपस्या स्वीकार की, उसी प्रकार इस कथा को पढ़ने, सुनने और हुंकारा भरने वाली सभी माताओं और बहनों की मनोकामना पूर्ण करना।)

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9. हरतालिका तीज के दिन किए जाने वाले अचूक उपाय (Astrological Remedies)

यदि आपके वैवाहिक जीवन में परेशानियां हैं, पति-पत्नी में मनमुटाव रहता है, या विवाह में देरी हो रही है, तो 13 सितंबर 2026 को हरतालिका तीज के दिन इन विशेष उपायों को अवश्य आजमाएं:

I. वैवाहिक जीवन में प्रेम और मधुरता के लिए

यदि पति-पत्नी के बीच अनबन या झगड़े अधिक होते हैं, तो हरतालिका तीज की शाम को माता पार्वती को लाल गुलाब के फूलों की माला और भगवान शिव को सफेद फूलों की माला अर्पित करें। माता पार्वती को सिंदूर चढ़ाएं और उसी सिंदूर से अपनी मांग भरें। इसके बाद “ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें। इससे दांपत्य जीवन में अपार प्रेम और आकर्षण बढ़ता है।

II. कुंवारी कन्याओं के शीघ्र विवाह के लिए (For Early Marriage)

जिन कन्याओं के विवाह में बार-बार बाधाएं आ रही हैं, उन्हें हरतालिका तीज के दिन निर्जला व्रत रखकर माता पार्वती को 16 हरी चूड़ियां और लाल चुनरी अर्पित करनी चाहिए। साथ ही, शिव-पार्वती के विवाह प्रसंग का पाठ करना चाहिए। भगवान शिव की कृपा से विवाह के योग शीघ्र बन जाते हैं।

III. आर्थिक संकट और कर्ज मुक्ति के लिए

हरतालिका तीज के दिन भगवान शिव को शमी के पत्ते और माता पार्वती को कमल का फूल चढ़ाएं। पूजा के बाद एक लाल कपड़े में 5 गोमती चक्र, 5 कौड़ियां और थोड़ा सा सिंदूर बांधकर अपनी तिजोरी या धन रखने वाले स्थान पर रख दें। माता लक्ष्मी और पार्वती की कृपा से घर में कभी धन की कमी नहीं होगी।

IV. पति की लंबी आयु और स्वास्थ्य के लिए

इस दिन 108 बेलपत्र लें और हर बेलपत्र पर अष्टगंध या सफेद चंदन से ‘ॐ’ या ‘राम’ लिखें। ये 108 बेलपत्र भगवान शिव के शिवलिंग पर अर्पित करें। यह उपाय पति की बीमारियों, दुर्घटनाओं और नौकरी में आ रही रुकावटों को दूर करता है।

10. हरतालिका तीज व्रत का वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific Perspective)

भारतीय त्योहारों में केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और मनोविज्ञान का गहरा विज्ञान भी छिपा है:

  • डिटॉक्सिफिकेशन (Detoxification): 24 घंटे का निर्जला उपवास वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ‘ऑटोफैगी’ (Autophagy) की प्रक्रिया को सक्रिय करता है। यह शरीर से विषाक्त पदार्थों (Toxins) को बाहर निकालने और पाचन तंत्र को पूर्ण आराम देने का सबसे बेहतरीन प्राकृतिक तरीका है।

  • इच्छाशक्ति (Willpower): बिना पानी पिए पूरे दिन और रात जागना मनुष्य की मानसिक दृढ़ता और सहनशक्ति का परीक्षण है। यह व्रत महिलाओं को मानसिक रूप से इतना मजबूत बनाता है कि वे जीवन की किसी भी कठिन परिस्थिति का डटकर सामना कर सकती हैं।

  • भावनात्मक जुड़ाव: जब एक पत्नी अपने पति के लिए इतना कठिन तप करती है, तो पति के मन में भी अपनी पत्नी के प्रति सम्मान, प्रेम और जिम्मेदारी का भाव कई गुना बढ़ जाता है, जिससे वैवाहिक जीवन मजबूत होता है।

Hartalika Teej 2026 (13 सितंबर 2026) केवल एक व्रत नहीं है, बल्कि यह नारी के निस्वार्थ प्रेम, उसके अटूट विश्वास और पति-पत्नी के पवित्र रिश्ते के प्रति सर्वोच्च समर्पण का प्रतीक है। यह पावन पर्व हमें सिखाता है कि जिस प्रकार माता पार्वती ने अपनी कठोर तपस्या और अटूट निष्ठा से भगवान शिव को प्राप्त किया था, उसी प्रकार सच्चे प्रेम, समर्पण और विश्वास से दुनिया की किसी भी मंजिल को हासिल किया जा सकता है।

इस वर्ष हरतालिका तीज पर आप भी पूरे विधि-विधान और कड़े नियमों का पालन करते हुए भगवान शिव और माता गौरी की पूजा करें। सोलह श्रृंगार करें, रात भर जागरण कर शिव भजनों का आनंद लें और ईश्वर से अपने सुहाग की लंबी आयु की प्रार्थना करें। भगवान उमापति महादेव आपके दांपत्य जीवन को सुख, शांति, समृद्धि और अपार प्रेम से भर दें, यही हमारी मंगल कामना है।

“बोलो शिव-पार्वती भगवान की जय! हरतालिका तीज की जय!”

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Top 5 FAQs on Hartalika Teej 2026)

प्रश्न 1: वर्ष 2026 में हरतालिका तीज (Hartalika Teej) किस तारीख को मनाई जाएगी?

उत्तर: हिंदू पंचांग के अनुसार, हरतालिका तीज का पावन पर्व भाद्रपद (भादों) मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह तिथि 13 सितंबर 2026, रविवार को पड़ रही है। यह त्योहार श्री गणेश चतुर्थी से ठीक एक दिन पहले आता है।

प्रश्न 2: हरतालिका तीज का व्रत ‘निर्जला’ क्यों रखा जाता है?

उत्तर: पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए घने जंगल में अन्न और जल का पूर्णतः त्याग करके कठोर तपस्या की थी। माता पार्वती की उसी निष्ठा और तपस्या का अनुसरण करते हुए, सुहागिन महिलाएं भी अपने पति की लंबी आयु के लिए 24 घंटे का ‘निर्जला’ (बिना पानी पिए) व्रत रखती हैं।

प्रश्न 3: इस व्रत का नाम ‘हरतालिका’ (Hartalika) क्यों पड़ा?

उत्तर: ‘हरतालिका’ शब्द दो शब्दों से बना है— ‘हरत’ (चुराना/हरण करना) और ‘आलिका’ (सखी या सहेली)। कथा के अनुसार, पार्वती जी की सखियों ने उन्हें उनके पिता के घर से हरण कर लिया था (चुरा लिया था) और एक गुफा में ले गई थीं, ताकि वे बिना किसी बाधा के शिव जी की तपस्या कर सकें। सखियों द्वारा हरण किए जाने के कारण ही इस व्रत का नाम ‘हरतालिका’ पड़ा।

प्रश्न 4: हरतालिका तीज की पूजा में बालू (रेत) के शिवलिंग का क्या महत्व है?

उत्तर: हरतालिका तीज की पूजा में बाजार की मूर्ति नहीं, बल्कि अपने हाथों से बालू रेत (Sand) या काली मिट्टी से बनाए गए शिव-पार्वती की पूजा का विधान है। इसका कारण यह है कि माता पार्वती ने भी जंगल की गुफा में बालू रेत से ही शिवलिंग का निर्माण किया था और उसकी पूजा करके शिव जी को प्रसन्न किया था।

प्रश्न 5: क्या कुंवारी कन्याएं भी हरतालिका तीज का व्रत रख सकती हैं?

उत्तर: जी हाँ, बिल्कुल। यह व्रत विवाहित महिलाओं के साथ-साथ कुंवारी कन्याओं द्वारा भी रखा जाता है। जो कन्याएं भगवान शिव के समान योग्य, समझदार और प्रेम करने वाले जीवनसाथी की कामना रखती हैं, वे पूर्ण श्रद्धा और नियमों के साथ हरतालिका तीज का व्रत रखती हैं। भगवान शिव और माता पार्वती उन्हें सुयोग्य वर की प्राप्ति का आशीर्वाद देते हैं।

"नमस्कार! मैं अमित तिवारी हूँ, और आप मुझे एक 'साधक' के रूप में जान सकते हैं। बचपन से ही सनातन धर्म, तंत्र-मंत्र और आध्यात्मिक साधनाओं ने मुझे अपनी ओर गहराई से आकर्षित किया है। वर्षों के निरंतर अध्ययन, गुरु-कृपा और अपने व्यक्तिगत साधना-अनुभवों से मैंने जो कुछ भी सीखा है, उसे मैं sadhnas.in के माध्यम से आपके साथ साझा कर रहा हूँ। मेरा मुख्य उद्देश्य इंटरनेट पर फैले भ्रम को दूर करके प्रामाणिक, सत्य और शास्त्र-सम्मत जानकारी को बेहद सरल भाषा में आप तक पहुँचाना है। मैं कोई गुरु या उपदेशक नहीं हूँ, बल्कि आप ही की तरह ईश्वर की खोज में निकला एक राही हूँ। मेरी यही कोशिश है कि मेरे अनुभवों और लेखनी से आपकी आध्यात्मिक यात्रा और भी सुगम व सफल हो सके।"

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