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Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी कब है? जानें गणपति स्थापना मुहूर्त, पूजा विधि और नियमIt takes 15 minutes... to read this article !

“गणपति बप्पा मोरया, मंगल मूर्ति मोरया!”

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य, पूजा-पाठ या अनुष्ठान की शुरुआत भगवान श्री गणेश की वंदना के बिना अधूरी मानी जाती है। विघ्नहर्ता, मंगलकर्ता और प्रथम पूज्य देवता श्री गणेश जी का जन्मोत्सव पूरे भारत में, विशेषकर महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और मध्य प्रदेश में, एक भव्य और ऊर्जावान महापर्व के रूप में मनाया जाता है, जिसे ‘गणेश चतुर्थी’ (Ganesh Chaturthi) या ‘विनायक चतुर्थी’ कहा जाता है।

यह पर्व केवल एक दिन का नहीं, बल्कि पूरे 10 दिनों का महा-उत्सव (Ganeshotsav) होता है। ढोल-नगाड़ों की थाप, गुलाल की बौछार, और मोदक की सुगंध के बीच जब बप्पा घर में पधारते हैं, तो ऐसा लगता है मानो सारी परेशानियां और दुख उनके साथ ही विदा हो गए हों।

यदि आप भी बप्पा के परम भक्त हैं और जानना चाहते हैं कि वर्ष 2026 में गणेश चतुर्थी कब है (Ganesh Chaturthi 2026 Date), गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त क्या है, मूर्ति स्थापना के नियम क्या हैं, और 10 दिनों की पूजा विधि व विसर्जन की परंपरा क्या है, तो यह विस्तृत और शोधपरक लेख आपके लिए ही तैयार किया गया है।

1. वर्ष 2026 में गणेश चतुर्थी कब है? (Ganesh Chaturthi 2026 Date & Time)

हिंदू पंचांग के अनुसार, गणेश चतुर्थी का पावन पर्व हर वर्ष भाद्रपद (भादों) मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन मध्याह्न (दोपहर) के समय भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र श्री गणेश जी का जन्म हुआ था।

वैदिक पंचांग की सटीक गणनाओं के अनुसार, वर्ष 2026 में गणेश चतुर्थी का महापर्व 14 सितंबर 2026, सोमवार को अत्यंत हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। सोमवार का दिन भगवान शिव का है, और इसी दिन उनके पुत्र गजानन का जन्मोत्सव होना इस पर्व को और भी अधिक मंगलकारी बना रहा है।

गणेश चतुर्थी 2026: गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त (Muhurat Table)

भगवान गणेश की मूर्ति की स्थापना (Ganpati Sthapana) हमेशा शुभ मुहूर्त और मध्याह्न काल में की जाती है, क्योंकि बप्पा का जन्म दोपहर के समय हुआ था।

विवरण (Event Details) तिथि और समय (Date & Time 2026)
गणेश चतुर्थी 2026 की मुख्य तिथि 14 सितंबर 2026 (सोमवार)
भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि का आरंभ 13 सितंबर 2026, सायं (शाम) 05:40 बजे से
भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि की समाप्ति 14 सितंबर 2026, सायं 04:15 बजे तक
गणपति स्थापना का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त (मध्याह्न काल) 14 सितंबर, सुबह 11:05 बजे से दोपहर 01:35 बजे तक
वर्जित चंद्र दर्शन का समय (कलंक चतुर्थी) 13 सितंबर (रात) और 14 सितंबर को पूरा दिन
अनंत चतुर्दशी (गणेश विसर्जन की तिथि) 24 सितंबर 2026 (गुरुवार)

(नोट: गणेश स्थापना हमेशा उदया तिथि और मध्याह्न मुहूर्त के अनुसार 14 सितंबर 2026 को ही की जाएगी।)

2. गणेश चतुर्थी क्यों मनाई जाती है? (Significance of Ganesh Chaturthi)

गणेश चतुर्थी का यह पर्व भगवान गणेश के धरती पर अवतरण (जन्म) का उत्सव है। इस पर्व को मनाने के पीछे कई गहरे धार्मिक और ऐतिहासिक कारण छिपे हैं:

I. भगवान गणेश का प्राकट्य (Birth Story)

शिव पुराण की कथा के अनुसार, माता पार्वती ने स्नान करने जाने से पूर्व अपने शरीर के उबटन (मैल और चंदन) से एक सुंदर बालक की मूर्ति बनाई और उसमें प्राण फूंक दिए। उन्होंने उस बालक को आदेश दिया कि जब तक वे स्नान कर रही हैं, कोई भी अंदर न आने पाए।

जब भगवान शिव वहां आए, तो उस बालक ने उन्हें रोक दिया। शिव जी को यह नहीं पता था कि यह बालक कौन है, और क्रोध में आकर उन्होंने अपने त्रिशूल से बालक का सिर धड़ से अलग कर दिया। माता पार्वती जब बाहर आईं और अपने पुत्र को मृत देखा, तो वे अत्यंत क्रोधित हो गईं और सृष्टि का विनाश करने पर उतारू हो गईं। तब भगवान शिव ने अपने गणों को उत्तर दिशा में भेजा और सबसे पहले जो जीव मिला—एक गज (हाथी)—उसका सिर लाकर बालक के धड़ पर लगा दिया। इस प्रकार ‘गजानन’ का जन्म हुआ। यह घटना भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को हुई थी।

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II. ‘प्रथम पूज्य’ का वरदान

हाथी का सिर लगने के बाद जब बालक जीवित हुआ, तो सभी देवताओं ने उन्हें आशीर्वाद दिया। भगवान शिव और ब्रह्मा जी ने उन्हें ‘प्रथम पूज्य’ होने का वरदान दिया, अर्थात् किसी भी शुभ कार्य में सबसे पहले गणेश जी की पूजा की जाएगी, अन्यथा वह कार्य सफल नहीं होगा।

III. सामाजिक और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक (Ganeshotsav History)

आधुनिक काल में गणेश उत्सव का जो भव्य स्वरूप (पंडाल और सार्वजनिक पूजा) हम देखते हैं, उसकी शुरुआत 1893 में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने की थी। उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ भारतीयों को एकजुट करने और सामाजिक छुआछूत को मिटाने के लिए गणेश चतुर्थी को एक सार्वजनिक महोत्सव (Sarvajanik Ganeshotsav) का रूप दिया था। आज यह त्योहार भारत की सांस्कृतिक एकता का सबसे बड़ा प्रतीक है।

3. घर में गणपति स्थापना के कड़े नियम (Rules for Ganpati Sthapana)

यदि आप 2026 में बप्पा को अपने घर ला रहे हैं, तो मूर्ति के चयन से लेकर स्थापना तक कुछ विशेष शास्त्रों के नियमों का पालन करना आवश्यक है:

  1. मूर्ति का स्वरूप (The Idol): हमेशा मिट्टी (Eco-friendly) से बनी गणेश जी की मूर्ति ही घर लाएं। प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) की मूर्ति को शास्त्रों में उचित नहीं माना गया है। घर के लिए गणेश जी की बैठी हुई मुद्रा (ललितासन) सबसे शुभ मानी जाती है।

  2. सूंड़ की दिशा (Direction of the Trunk): घर की पूजा के लिए हमेशा वह मूर्ति लाएं जिसमें गणेश जी की सूंड़ बाईं ओर (Left side) मुड़ी हो। इसे वाममुखी गणपति कहते हैं। दाईं ओर सूंड वाले (सिद्धि विनायक) गणपति की पूजा अत्यंत कठोर होती है और इसे मंदिरों के लिए उपयुक्त माना जाता है।

  3. मूर्ति लाते समय मुख ढकना: जब आप बप्पा की मूर्ति को बाजार से घर लाएं, तो उनका चेहरा एक साफ कपड़े (लाल या पीले) से ढका होना चाहिए। चेहरा केवल स्थापना के समय ही खोला जाता है।

  4. स्थापना की दिशा (Placement): घर में गणपति की स्थापना ईशान कोण (North-East direction) में करनी चाहिए। स्थापना करते समय भगवान का मुख पश्चिम दिशा की ओर हो, ताकि पूजा करते समय आपका मुख पूर्व दिशा की ओर रहे।

  5. क्या न करें: भूलकर भी गणेश जी की मूर्ति को घर के बेडरूम, सीढ़ियों के नीचे, या बाथरूम की दीवार से सटे स्थान पर स्थापित न करें।

4. गणेश चतुर्थी की संपूर्ण पूजा सामग्री (Puja Samagri List)

बप्पा की पूजा में कोई विघ्न न आए, इसके लिए पहले से ही यह सामग्री एकत्रित कर लें:

  • मिट्टी की गणेश प्रतिमा

  • एक लकड़ी की चौकी, लाल या पीला रेशमी कपड़ा

  • गंगाजल, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)

  • पीला चंदन, कुमकुम, अक्षत (साबुत चावल), रोली

  • लाल फूल (विशेषकर गुड़हल/Hibiscus), गेंदे के फूल की माला

  • दूर्वा घास (Durva Grass): 21 दूर्वा की गांठें (यह गणेश जी को अत्यंत प्रिय है)

  • यज्ञोपवीत (जनेऊ), कलावा (मौली), इत्र

  • तांबूल (पान के पत्ते, सुपारी, लौंग, इलायची)

  • नैवेद्य (भोग): 21 मोदक, मोतीचूर के लड्डू, केले, और नारियल

  • धूप, गाय के घी का दीपक, और कपूर।

5. गणपति स्थापना और पूजा की विस्तृत विधि (Step-by-Step Puja Vidhi)

14 सितंबर 2026 को मध्याह्न काल (शुभ मुहूर्त) में बप्पा की स्थापना इस शास्त्र-सम्मत विधि से करें:

१. चौकी की सजावट और प्राण प्रतिष्ठा

  • शुभ मुहूर्त में चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं। उस पर थोड़े से अक्षत (चावल) रखकर भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करें।

  • गंगाजल छिड़क कर मूर्ति और स्वयं को पवित्र करें।

  • आंखें बंद करके हाथ जोड़ें और बप्पा का आवाहन करें: “हे विघ्नहर्ता! कृपया मेरे घर में पधारें और हमारी पूजा स्वीकार करें।” (मूर्ति का कपड़ा हटा दें)।

२. षोडशोपचार पूजा (16 Steps of Worship)

  • सबसे पहले गणपति बाप्पा को जल से प्रतीकात्मक स्नान कराएं, फिर पंचामृत अर्पित करें और अंत में पुनः शुद्ध जल चढ़ाएं।

  • गणेश जी को वस्त्र (मौली या कलावा) और जनेऊ अर्पित करें।

  • उनके माथे पर पीले चंदन, रोली और अक्षत का तिलक लगाएं।

  • बप्पा को लाल फूल और 21 दूर्वा दल (घास) “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करते हुए अर्पित करें। दूर्वा कभी भी गणेश जी के पैरों में न रखें, हमेशा उनके मस्तक या पेट पर चढ़ाएं।

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३. नैवेद्य (भोग) अर्पण

  • भगवान गणेश को उनका सबसे प्रिय भोग ‘मोदक’ (Modak) और मोतीचूर के लड्डू अर्पित करें।

  • साथ ही ताजे फल, नारियल और पान-सुपारी का तांबूल चढ़ाएं।

४. कथा और आरती

  • हाथ में फूल लेकर गणेश चतुर्थी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें।

  • इसके बाद घी का दीपक जलाकर भगवान गणेश की आरती (“जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा…”) उतारें।

  • पूजा के बाद घर के सभी सदस्यों में प्रसाद का वितरण करें।

(ध्यान दें: जब तक बप्पा घर में विराजमान रहते हैं, दोनों समय (सुबह और शाम) उनकी आरती और ताजे भोग का अर्पण अनिवार्य है।)

6. गणेश चतुर्थी व्रत के नियम (Vrat Niyam)

जो भक्त गणेश चतुर्थी के दिन उपवास रखते हैं, उन्हें कुछ कड़े नियमों का पालन करना चाहिए:

  • सात्विकता: पूरे 10 दिनों तक घर में पूर्ण रूप से सात्विक वातावरण होना चाहिए। मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज का प्रयोग घर में वर्जित है।

  • व्रत का पारण: चतुर्थी का व्रत दिन भर रखा जाता है और शाम को चंद्र दर्शन (चंद्रमा को अर्घ्य देने) के बाद, गणेश जी की पूजा करके खोला जाता है।

  • अकेला न छोड़ें: जब तक गणपति बाप्पा घर में स्थापित हैं, घर को कभी भी सूना (खाली) नहीं छोड़ना चाहिए। कम से कम एक व्यक्ति हमेशा बाप्पा के पास उपस्थित रहना चाहिए।

7. चंद्र दर्शन दोष: कलंक चतुर्थी की कथा (The Taboo of Sighting the Moon)

गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा को देखना वर्जित माना गया है। शास्त्रों में भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को ‘कलंक चतुर्थी’ या ‘पत्थर चौथ’ भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा के दर्शन करने से व्यक्ति पर झूठा कलंक (False Accusation) या चोरी का इल्जाम लगता है।

पौराणिक कथा: एक बार भगवान गणेश अपने वाहन मूषक (चूहे) पर सवार होकर जा रहे थे। अचानक चूहे का संतुलन बिगड़ा और गणेश जी गिर पड़े। यह देखकर चंद्र देव (Moon) को अपनी सुंदरता पर बहुत घमंड था, और वे गणेश जी के गजमुख रूप और बड़े पेट को देखकर जोर-जोर से हंसने लगे। चंद्र देव के इस अहंकार से क्रोधित होकर गणेश जी ने उन्हें श्राप दिया, “हे चंद्र! जो भी व्यक्ति भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन तुम्हारे दर्शन करेगा, उस पर झूठा कलंक लगेगा और वह समाज में अपमानित होगा।”

भगवान कृष्ण को लगा था कलंक: द्वापर युग में स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने भूलवश इस दिन चंद्रमा देख लिया था, जिसके कारण उन पर ‘स्यमंतक मणि’ (Syamantak Mani) चुराने का झूठा कलंक लगा था। बाद में कृष्ण जी ने जामवंत को युद्ध में हराकर वह मणि वापस की और स्वयं को निर्दोष साबित किया।

यदि भूल से चंद्रमा दिख जाए तो क्या करें? यदि आपको भूलवश 13 या 14 सितंबर को चतुर्थी का चंद्रमा दिख जाए, तो दोष से बचने के लिए तुरंत इस मंत्र का जाप करें: “सिंहः प्रसेनमवधीत्सिंहो जाम्बवता हतः। सुकुमारक मारोदीस्तव ह्येष स्यमन्तकः॥” (साथ ही किसी पड़ोसी की छत पर छोटा सा पत्थर फेंकने की भी एक लोक परंपरा है, जिसे ‘पत्थर चौथ’ कहा जाता है)।

8. गणेशोत्सव की प्रमुख परंपराएं: मोदक, ढोल-ताशा और पंडाल

गणेश उत्सव की रौनक पूरे भारत में देखने लायक होती है, लेकिन महाराष्ट्र में इसकी छटा विश्व स्तरीय होती है:

  • मोदक का महत्व (Modak): गणेश जी का पेट बहुत बड़ा है (लंबोदर), और उन्हें मीठा बहुत पसंद है। उकडीचे मोदक (Ukadiche Modak – चावल के आटे, नारियल और गुड़ से बने स्टीम्ड मोदक) गणेश चतुर्थी का मुख्य आकर्षण होते हैं।

  • ढोल-ताशा पथक: महाराष्ट्र में जब बप्पा का आगमन होता है, तो पारंपरिक ‘ढोल-ताशा’ बजाने वाले युवाओं और युवतियों की टोलियां सड़कों पर उतर आती हैं। उनकी ऊर्जा और ताल सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

  • भव्य पंडाल: मुंबई का ‘लालबागचा राजा’ (Lalbaugcha Raja), पुणे का ‘दगडूशेठ हलवाई गणपति’, और जीएसबी सेवा मंडल जैसे पंडालों में करोड़ों रुपये की सजावट और सोने-चांदी के आभूषणों से सजे गजानन के दर्शन के लिए लाखों लोगों की भीड़ उमड़ती है।

9. अनंत चतुर्दशी और गणेश विसर्जन (Anant Chaturdashi & Ganesha Visarjan)

गणेश उत्सव का समापन 10वें दिन ‘अनंत चतुर्दशी’ को होता है। वर्ष 2026 में यह तिथि 24 सितंबर 2026, गुरुवार को पड़ेगी।

विसर्जन क्यों किया जाता है? हिंदू दर्शन के अनुसार, मिट्टी से बनी मूर्ति में पूजा के द्वारा प्राण प्रतिष्ठित किए जाते हैं। 10 दिनों तक भगवान घर में अतिथि (Guest) बनकर रहते हैं और हमारे सभी दुखों, कष्टों और नकारात्मक ऊर्जा को अपने भीतर सोख लेते हैं। विसर्जन के दिन, हम बप्पा को सम्मान के साथ जल में प्रवाहित कर देते हैं, जिसका अर्थ है कि वे हमारे दुखों को अपने साथ ले जा रहे हैं और वापस अपने माता-पिता (शिव-पार्वती) के पास कैलाश पर्वत लौट रहे हैं।

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विसर्जन के समय भक्त रोते हुए आंखों से गाते हैं: “गणपति बप्पा मोरया, पुढच्या वर्षी लवकर या!” (अर्थात: हे गणपति बाप्पा, अगले वर्ष जल्दी आना)।

10. गणेश चतुर्थी पर किए जाने वाले अचूक उपाय (Astrological Remedies)

यदि आपके जीवन में कोई विशेष संकट है, आर्थिक परेशानी है या कार्यों में लगातार विघ्न आ रहे हैं, तो 14 सितंबर 2026 को गणेश चतुर्थी के दिन इन अचूक उपायों को अवश्य आजमाएं:

I. आर्थिक संकट और धन प्राप्ति के लिए (For Wealth)

यदि आप भारी कर्ज में डूबे हैं, तो गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश को 21 दूर्वा की गांठें और गुड़-धनिये का भोग लगाएं। साथ ही, एक हरे रंग के कपड़े में 5 गोमती चक्र, 5 इलायची और दूर्वा बांधकर बप्पा के चरणों में रखें। पूजा के बाद इस पोटली को अपनी तिजोरी में रख लें। धन के मार्ग खुल जाएंगे।

II. विद्यार्थियों की सफलता और विद्या के लिए (For Education)

जिन बच्चों का पढ़ाई में मन नहीं लगता, उन्हें इस दिन बप्पा को ‘पीले रंग की कलम’ (Pen) और एक नई कॉपी/पुस्तक अर्पित करनी चाहिए। गणेश जी को बुद्धि का दाता (विद्यापति) कहा जाता है। इस उपाय से बुद्धि कुशाग्र होती है और परीक्षा में सफलता मिलती है।

III. विवाह में आ रही रुकावटों को दूर करने के लिए (For Marriage)

जिन युवक-युवतियों के विवाह में अनावश्यक देरी हो रही है, उन्हें गणेश जी को हल्दी की 5 गांठे और सुपारी अर्पित करनी चाहिए। “ॐ विघ्नेश्वराय नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें। मंगलकार्यों में आ रही सभी बाधाएं दूर हो जाएंगी।

IV. हर प्रकार के विघ्न नाश के लिए

यदि आपके हर काम में कोई न कोई रुकावट आ जाती है, तो गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश का ‘अथर्वशीर्ष’ (Ganapati Atharvashirsha) का पाठ करें और उन्हें सिंदूर का लेप लगाएं (चोला चढ़ाएं)। बप्पा आपके जीवन के सभी विघ्नों को हर लेंगे।

11. इको-फ्रेंडली गणेशोत्सव: समय की मांग (Eco-Friendly Celebrations)

आज के समय में जब नदियां और समुद्र प्रदूषण का शिकार हो रहे हैं, तब हमारा धर्म हमें सिखाता है कि हम प्रकृति की रक्षा करें। प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) और रासायनिक रंगों (Chemical colors) से बनी मूर्तियां पानी में नहीं घुलतीं और जलीय जीवों को मार देती हैं। यह भगवान का सम्मान नहीं, बल्कि उनका अपमान है।

इस वर्ष आप संकल्प लें कि आप केवल शुद्ध मिट्टी (Clay) से बनी हुई और प्राकृतिक रंगों से रंगी हुई मूर्ति ही घर लाएंगे। आप घर पर ही एक बाल्टी या टब में पानी भरकर बप्पा का विसर्जन (Eco-friendly Visarjan) कर सकते हैं और उस पानी को अपने घर के पौधों में डाल सकते हैं। इस प्रकार बप्पा हमेशा आपके घर की मिट्टी में और आपके साथ रहेंगे।

Ganesh Chaturthi 2026 (14 सितंबर 2026) का पर्व केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह हमारे भीतर की सकारात्मक ऊर्जा, नए आरंभ और उम्मीदों का प्रतीक है। भगवान गणेश का बड़ा सिर हमें बड़ी सोच रखने की प्रेरणा देता है, उनके बड़े कान दूसरों को धैर्य से सुनने का संदेश देते हैं, और उनकी छोटी आंखें हमें जीवन में फोकस (एकाग्रता) बनाए रखना सिखाती हैं।

इस वर्ष आप भी पूरे उल्लास, नियमों और सात्विकता के साथ बप्पा का स्वागत करें। उन्हें मोदक का भोग लगाएं, दूर्वा अर्पित करें और अपने भीतर के अहंकार को मिटाकर सच्चे हृदय से उनकी आराधना करें। विघ्नहर्ता श्री गणेश आपके जीवन के सभी दुखों, बीमारियों और संकटों को दूर कर आपके परिवार को सुख, शांति, सद्बुद्धि और समृद्धि से भर दें, यही हमारी मंगल कामना है।

“ॐ गं गणपतये नमः! गणपति बप्पा मोरया!”

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs on Ganesh Chaturthi 2026)

प्रश्न 1: वर्ष 2026 में गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi) किस तारीख को है?

उत्तर: हिंदू पंचांग के अनुसार, गणेश चतुर्थी का पावन पर्व भाद्रपद (भादों) मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह तिथि 14 सितंबर 2026, सोमवार को पड़ रही है। इसी दिन गणपति बाप्पा की स्थापना की जाएगी।

प्रश्न 2: गणपति स्थापना का सर्वश्रेष्ठ समय (शुभ मुहूर्त) क्या है?

उत्तर: धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, भगवान गणेश का जन्म मध्याह्न (दोपहर) के समय हुआ था। इसलिए उनकी स्थापना हमेशा मध्याह्न काल में करनी चाहिए। 14 सितंबर 2026 को गणपति स्थापना का सबसे शुभ मुहूर्त सुबह 11:05 बजे से लेकर दोपहर 01:35 बजे तक रहेगा।

प्रश्न 3: गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा को क्यों नहीं देखना चाहिए?

उत्तर: इस दिन चंद्रमा के दर्शन करना वर्जित है क्योंकि इसे ‘कलंक चतुर्थी’ कहा जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, चंद्र देव ने गणेश जी के स्वरूप का मजाक उड़ाया था, जिससे क्रोधित होकर गणेश जी ने उन्हें श्राप दिया था कि जो भी भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को चांद देखेगा, उस पर झूठा कलंक (False allegation) या चोरी का इल्जाम लगेगा। भगवान कृष्ण को भी भूलवश चांद देखने के कारण स्यमंतक मणि चुराने का कलंक लगा था।

प्रश्न 4: गणेश जी की पूजा में ‘दूर्वा’ (घास) का क्या महत्व है?

उत्तर: भगवान गणेश को दूर्वा (हरी घास) अत्यंत प्रिय है। एक पौराणिक कथा के अनुसार, अनलासुर नामक एक भयंकर राक्षस को निगलने के बाद गणेश जी के पेट में अत्यधिक जलन होने लगी थी। तब ऋषि-मुनियों ने उनके मस्तक और पेट पर दूर्वा घास रखी, जिससे उनकी जलन शांत हुई। इसीलिए गणेश जी की पूजा 21 दूर्वा की गांठें चढ़ाए बिना पूर्ण नहीं मानी जाती।

प्रश्न 5: वर्ष 2026 में गणेश विसर्जन (अनंत चतुर्दशी) किस दिन होगा?

उत्तर: गणेश उत्सव 10 दिनों तक चलता है और इसका समापन ‘अनंत चतुर्दशी’ के दिन होता है। वर्ष 2026 में अनंत चतुर्दशी 24 सितंबर 2026, गुरुवार को पड़ेगी। इसी दिन ढोल-नगाड़ों के साथ बप्पा की मूर्ति का पवित्र जल (समुद्र या नदी) में विसर्जन किया जाएगा।

"नमस्कार! मैं अमित तिवारी हूँ, और आप मुझे एक 'साधक' के रूप में जान सकते हैं। बचपन से ही सनातन धर्म, तंत्र-मंत्र और आध्यात्मिक साधनाओं ने मुझे अपनी ओर गहराई से आकर्षित किया है। वर्षों के निरंतर अध्ययन, गुरु-कृपा और अपने व्यक्तिगत साधना-अनुभवों से मैंने जो कुछ भी सीखा है, उसे मैं sadhnas.in के माध्यम से आपके साथ साझा कर रहा हूँ। मेरा मुख्य उद्देश्य इंटरनेट पर फैले भ्रम को दूर करके प्रामाणिक, सत्य और शास्त्र-सम्मत जानकारी को बेहद सरल भाषा में आप तक पहुँचाना है। मैं कोई गुरु या उपदेशक नहीं हूँ, बल्कि आप ही की तरह ईश्वर की खोज में निकला एक राही हूँ। मेरी यही कोशिश है कि मेरे अनुभवों और लेखनी से आपकी आध्यात्मिक यात्रा और भी सुगम व सफल हो सके।"

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