सनातन हिंदू धर्म और पंचांग (Hindu Calendar) में प्रत्येक महीने का अपना एक विशिष्ट धार्मिक, आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व होता है। वर्ष के बारह महीनों में से छठा महीना ‘भाद्रपद’ (Bhadrapada) कहलाता है। आम बोलचाल की भाषा में इसे ‘भादों’ या ‘भाद्र’ का महीना भी कहा जाता है। यह पवित्र चातुर्मास (Chaturmas) का दूसरा महीना होता है।
श्रावण (सावन) मास की रिमझिम फुहारों और भगवान शिव की आराधना के बाद भाद्रपद का महीना अपने साथ व्रत, संयम, प्रायश्चित और भक्ति का एक नया उल्लास लेकर आता है। यह वह पावन महीना है जब भगवान श्री हरि विष्णु के आठवें अवतार, लीलाधर श्री कृष्ण ने पृथ्वी पर जन्म लिया था और इसी महीने में विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश भी अपने भक्तों के घर पधारते हैं।
लेकिन, आपके मन में यह सवाल अवश्य उठ रहा होगा कि वर्ष 2026 में भाद्रपद माह प्रारंभ कब होता है (Bhadrapada Month 2026 Start Date)? इस महीने में कौन-कौन से प्रमुख व्रत और त्योहार आएंगे? इस दौरान पूजा की सही विधि क्या होनी चाहिए और किन कड़े नियमों का पालन करना अनिवार्य है?
इस अत्यंत विस्तृत, शोधपरक और प्रामाणिक लेख में हम आपको भाद्रपद माह 2026 से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी प्रदान करेंगे, ताकि आपका यह पावन महीना भक्ति और सकारात्मकता से परिपूर्ण रहे।
1. वर्ष 2026 में भाद्रपद (भादों) माह प्रारंभ कब होता है? (Bhadrapada Month 2026 Start Date)
हिंदू पंचांग की गणना मुख्य रूप से दो प्रकार के कैलेंडरों— पूर्णिमांत (जो पूर्णिमा पर समाप्त होता है) और अमावस्यांत (जो अमावस्या पर समाप्त होता है) के आधार पर की जाती है। भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में इन दोनों का ही पालन किया जाता है, इसलिए भाद्रपद माह की शुरुआत की तिथियां भी क्षेत्रों के अनुसार भिन्न होती हैं।
I. उत्तर भारतीय (पूर्णिमांत) पंचांग के अनुसार
उत्तर भारत (जैसे उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार, पंजाब, हरियाणा आदि) में पूर्णिमांत पंचांग का पालन किया जाता है। यहाँ कोई भी नया महीना पूर्णिमा तिथि के अगले दिन (कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से) शुरू होता है।
वर्ष 2026 में सावन महीने की पूर्णिमा यानी रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) को मनाया जाएगा। अतः इसके ठीक अगले दिन से भाद्रपद माह प्रारंभ हो जाएगा।
-
भाद्रपद माह 2026 (उत्तर भारत) आरंभ तिथि: 29 अगस्त 2026, शनिवार
-
भाद्रपद माह समाप्ति तिथि: 27 सितंबर 2026, रविवार (भाद्रपद पूर्णिमा के दिन)।
II. दक्षिण और पश्चिमी भारतीय (अमावस्यांत) पंचांग के अनुसार
गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और दक्षिण भारत के अधिकांश हिस्सों में अमावस्यांत पंचांग का पालन होता है। यहाँ नया महीना अमावस्या के अगले दिन (शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से) शुरू होता है।
-
भाद्रपद माह 2026 (दक्षिण/पश्चिम भारत) आरंभ तिथि: 12 सितंबर 2026, शनिवार (सावन अमावस्या के बाद)।
(नोट: भले ही महीनों के नाम और शुरुआत की तिथियां अलग-अलग हों, लेकिन श्री कृष्ण जन्माष्टमी और गणेश चतुर्थी जैसे प्रमुख त्योहार पूरे भारतवर्ष में एक ही दिन और एक ही तिथि पर मनाए जाते हैं।)
2. भाद्रपद (भादों) माह का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व (Religious Significance)
भाद्रपद माह का हिंदू धर्म में अत्यधिक महत्व है। ‘भाद्र’ का अर्थ होता है ‘कल्याण करने वाला’ और ‘पद’ का अर्थ है ‘मार्ग’। अर्थात, यह वह महीना है जो मनुष्य को कल्याण के मार्ग (Path of Welfare) पर ले जाता है।
चातुर्मास का संयम (Discipline of Chaturmas)
यह चातुर्मास का दूसरा महीना है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन चार महीनों (आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक) में भगवान श्री हरि विष्णु क्षीरसागर में योग निद्रा में लीन रहते हैं। इस दौरान सृष्टि का संचालन भगवान शिव करते हैं। इसलिए, भाद्रपद के महीने में संयम, नियम और अनुशासन का पालन करना अत्यंत आवश्यक माना जाता है। इस पूरे महीने में विवाह, मुंडन, सगाई और गृह प्रवेश जैसे सभी मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं।
पापों के प्रायश्चित का महीना
शास्त्रों में भाद्रपद को प्रायश्चित (Atonement) का महीना कहा गया है। जाने-अनजाने में हुए पापों, गलतियों और बुरे कर्मों के प्रति पश्चाताप करने और ईश्वर से क्षमा मांगने के लिए यह सबसे उत्तम समय है। यही कारण है कि इस महीने में उपवास (Fasting) और दान-पुण्य को सबसे अधिक महत्व दिया जाता है।
अवतारों का महीना
यह महीना भक्ति के उल्लास से भरा होता है। इसी महीने में भगवान विष्णु ने अपने सबसे पूर्णावतार ‘श्री कृष्ण’ के रूप में जन्म लिया था। इसी महीने में माता राधारानी (राधा अष्टमी) का प्राकट्य हुआ था। इसके अलावा, इसी माह में भगवान श्री गणेश का जन्मोत्सव (गणेश चतुर्थी) भी पूरे 10 दिनों तक अत्यंत भव्यता के साथ मनाया जाता है।
3. भाद्रपद माह 2026 के प्रमुख व्रत और त्योहार (Major Fasts and Festivals in 2026)
भाद्रपद का महीना व्रतों और त्योहारों का राजा है। हर दो-तीन दिन में एक बड़ा पर्व आता है। यहाँ वर्ष 2026 में भाद्रपद माह (पूर्णिमांत पंचांग के अनुसार) में आने वाले सभी प्रमुख व्रतों और त्योहारों की विस्तृत सूची दी गई है:
| पर्व / व्रत का नाम (Festival Name) | 2026 में तारीख (Date in 2026) | धार्मिक महत्व (Significance) |
| कजरी तीज (Kajari Teej) | 31 अगस्त 2026, सोमवार | सुहागिन महिलाओं द्वारा पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए रखा जाने वाला कठिन निर्जला व्रत। |
| हेरम्ब संकष्टी / बहुला चतुर्थी | 31 अगस्त 2026, सोमवार | भगवान गणेश के हेरम्ब स्वरूप और गौ माता (बछड़े सहित) की पूजा का दिन। माताएं संतान की रक्षा के लिए व्रत रखती हैं। |
| बलराम जयंती / हल छठ | 2 सितंबर 2026, बुधवार | भगवान श्री कृष्ण के बड़े भाई दाऊ दयाल (बलराम जी) का जन्मोत्सव। इसे किसान हल की पूजा करके मनाते हैं। |
| श्री कृष्ण जन्माष्टमी (Janmashtami) | 4 सितंबर 2026, शुक्रवार | भगवान श्री कृष्ण का 5253वां (अनुमानित) जन्मोत्सव। मध्यरात्रि में पूजा और अगले दिन दही-हांडी का उत्सव। |
| अजा एकादशी (Aja Ekadashi) | 8 सितंबर 2026, मंगलवार | भगवान ऋषिकेश (विष्णु) की पूजा का दिन। यह व्रत समस्त पापों का नाश करने वाला माना जाता है। |
| हरतालिका तीज (Hartalika Teej) | 13 सितंबर 2026, रविवार | माता पार्वती और भगवान शिव के पुनर्मिलन का प्रतीक। सुहागिन महिलाओं और कुंवारी कन्याओं का सबसे बड़ा निर्जला व्रत। |
| गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi) | 14 सितंबर 2026, सोमवार | प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश का जन्मोत्सव और 10 दिवसीय गणेशोत्सव का शुभारंभ। |
| ऋषि पंचमी (Rishi Panchami) | 15 सितंबर 2026, मंगलवार | सप्त ऋषियों की पूजा का विशेष दिन। महिलाओं द्वारा रजस्वला दोष से मुक्ति के लिए किया जाने वाला व्रत। |
| राधा अष्टमी (Radha Ashtami) | 18 सितंबर 2026, शुक्रवार | श्री कृष्ण की आह्लादिनी शक्ति, माता राधारानी का प्राकट्य दिवस। श्री बांके बिहारी मंदिर में भव्य उत्सव। |
| जलझूलनी / परिवर्तिनी एकादशी | 21 सितंबर 2026, सोमवार | मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु योग निद्रा में करवट बदलते हैं। इसे डोल ग्यारस भी कहा जाता है। |
| अनंत चतुर्दशी / गणेश विसर्जन | 25 सितंबर 2026, शुक्रवार | भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा और 10 दिवसीय गणेशोत्सव का समापन (बप्पा की विदाई)। |
| भाद्रपद पूर्णिमा / पितृ पक्ष आरंभ | 27 सितंबर 2026, रविवार | भाद्रपद मास की समाप्ति और अगले 15 दिनों तक चलने वाले पितृ पक्ष (श्राद्ध कर्म) का शुभारंभ। |
4. भाद्रपद माह के प्रमुख त्योहारों का संक्षिप्त विवरण
I. श्री कृष्ण जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami)
भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्री कृष्ण ने मथुरा के कारागार में रोहिणी नक्षत्र के दौरान मध्यरात्रि में जन्म लिया था। वर्ष 2026 में यह पावन पर्व 4 सितंबर (शुक्रवार) को मनाया जाएगा। इस दिन भक्त निर्जला या फलाहारी व्रत रखते हैं। रात 12 बजे शंख ध्वनि और मंत्रोच्चार के बीच कान्हा का पंचामृत से अभिषेक किया जाता है, उन्हें नए वस्त्र पहनाए जाते हैं और माखन-मिश्री व पंजीरी का भोग लगाया जाता है। अगले दिन (5 सितंबर) महाराष्ट्र और पूरे देश में ‘दही हांडी’ का उत्सव अत्यंत हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा।
II. गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi)
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को भगवान गणेश का जन्म हुआ था। वर्ष 2026 में 14 सितंबर (सोमवार) को घर-घर में मिट्टी के गजानन की स्थापना (गणपति स्थापन) की जाएगी। पूरे 10 दिनों तक चलने वाले इस ‘गणेशोत्सव’ में रोज सुबह-शाम बप्पा की आरती होती है और उन्हें मोदक तथा दूर्वा अर्पित की जाती है। 25 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी के दिन “गणपति बप्पा मोरिया, अगले बरस तू जल्दी आ” के जयकारों के साथ बप्पा का जल में विसर्जन किया जाएगा।
III. हरतालिका तीज (Hartalika Teej)
यह व्रत भाद्रपद शुक्ल तृतीया (गणेश चतुर्थी से ठीक एक दिन पहले) को रखा जाता है। मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए जंगल में मिट्टी का शिवलिंग बनाकर यही कठोर निर्जला व्रत किया था। 13 सितंबर 2026 को महिलाएं अपने अखंड सौभाग्य के लिए यह व्रत रखेंगी।
IV. अनंत चतुर्दशी (Anant Chaturdashi)
गणेश विसर्जन के साथ-साथ यह दिन भगवान विष्णु की पूजा के लिए भी विशेष है। इस दिन हाथ में 14 गांठों वाला ‘अनंत सूत्र’ (पवित्र धागा) बांधा जाता है। मान्यता है कि यह सूत्र व्यक्ति को जीवन के 14 तरह के संकटों से बचाता है।
5. भाद्रपद माह में खान-पान और जीवनशैली के कड़े नियम (Rules and Regulations)
भाद्रपद माह चातुर्मास का हिस्सा है और यह वर्षा ऋतु (Monsoon) का वह समय होता है जब वातावरण में सबसे अधिक नमी और फंगस (बैक्टीरिया) पनपते हैं। इसलिए आयुर्वेद और धर्म शास्त्रों में इस महीने के लिए कुछ कड़े नियम बनाए गए हैं, जिनका पालन करने से शरीर निरोगी रहता है और मन शांत रहता है।
क्या न खाएं? (Strict Dietary Restrictions)
-
दही का सेवन पूर्णतः वर्जित (Avoid Curd): भाद्रपद महीने का सबसे बड़ा नियम यह है कि इस पूरे महीने में दही (Curd/Yogurt) खाना सख्त मना होता है। आयुर्वेद के अनुसार, इस मौसम में दही शरीर में वात और पित्त को असंतुलित कर देता है, जिससे गले में खराश, बुखार और पेट से जुड़ी भयंकर बीमारियां हो सकती हैं।
-
गुड़ से परहेज (Avoid Jaggery): भादों के महीने में गुड़ खाने की भी मनाही होती है, क्योंकि यह शरीर में अत्यधिक गर्मी (Heat) पैदा करता है।
-
तामसिक भोजन (No Tamasic Food): इस पवित्र महीने में मांस, मदिरा (शराब), अंडा, लहसुन और प्याज का सेवन घर के किसी भी सदस्य को नहीं करना चाहिए। भोजन पूर्णतः सात्विक होना चाहिए।
-
अधिक मसालेदार भोजन: वात और पित्त से बचने के लिए बहुत अधिक मिर्च-मसाले और बाहर के तले-भुने भोजन से बचना चाहिए।
जीवनशैली के नियम (Lifestyle Guidelines)
-
ब्रह्मचर्य का पालन (Celibacy): चूँकि यह प्रायश्चित और भक्ति का महीना है, इसलिए साधकों को शारीरिक, मानसिक और वैचारिक रूप से पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
-
भूमि शयन (Sleeping on the Floor): शास्त्रों में विधान है कि चातुर्मास के दौरान विलासिता का त्याग कर देना चाहिए। इसलिए इस महीने में पलंग के बजाय जमीन पर कुशा का आसन या सादी चटाई बिछाकर सोना चाहिए।
-
प्रातः स्नान (Early Morning Bath): इस महीने में सूर्योदय से पूर्व (ब्रह्म मुहूर्त में) उठकर स्नान करने का विशेष महत्व है। स्नान के जल में तुलसी दल या थोड़ा सा गंगाजल मिलाने से पापों का नाश होता है।
-
असत्य और क्रोध का त्याग: किसी की चुगली करना (Gossip), अपशब्द बोलना, या बिना बात के क्रोध करना आपके सारे तपोबल और व्रत के पुण्यों को उसी क्षण नष्ट कर देता है।
6. भाद्रपद माह की संपूर्ण पूजा विधि (Complete Puja Vidhi)
इस महीने में मुख्य रूप से भगवान श्री कृष्ण (विष्णु अवतार) और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। यदि आप पूरे महीने ईश्वर की कृपा पाना चाहते हैं, तो यह दैनिक पूजा विधि अपनाएं:
प्रातःकालीन दैनिक पूजा (Morning Routine)
-
स्नान के पश्चात स्वच्छ (हल्के पीले या सफेद) वस्त्र धारण करें।
-
घर के मंदिर की साफ-सफाई करें और सूर्य देव को तांबे के लोटे में लाल पुष्प और रोली डालकर अर्घ्य दें।
-
भगवान श्री कृष्ण (लड्डू गोपाल) को पंचामृत से स्नान कराएं। उन्हें पीले चंदन का तिलक लगाएं और पीले पुष्प अर्पित करें।
-
तुलसी पत्र का महत्व: भगवान विष्णु और श्री कृष्ण की कोई भी पूजा ‘तुलसी’ के बिना अधूरी है। भाद्रपद माह में उन्हें जो भी भोग (माखन-मिश्री या सात्विक भोजन) लगाएं, उसमें तुलसी पत्र अवश्य डालें।
-
तत्पश्चात प्रथम पूज्य भगवान गणेश को दूर्वा (हरी घास) की 21 पत्तियां और सिंदूर अर्पित करें।
-
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” और “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का कम से कम 108 बार (एक माला) जाप करें।
संध्याकालीन पूजा (Evening Routine)
-
शाम के समय (गोधूलि बेला में) घर के मुख्य द्वार पर और तुलसी माता के सामने घी का दीपक अवश्य जलाएं। यह घर में सकारात्मक ऊर्जा (Positive Energy) लाता है।
-
शाम की आरती करें और परिवार के सभी सदस्य मिलकर श्री कृष्ण की लीलाओं या श्रीमद्भागवत पुराण का पाठ करें।
7. भाद्रपद माह में दान-पुण्य का महत्व (Significance of Charity)
सनातन धर्म में किसी भी महीने की सार्थकता दान और परोपकार के बिना सिद्ध नहीं होती। भाद्रपद माह में किए गए दान का फल कई गुना होकर प्राप्त होता है:
-
अन्न और जल दान: इस मौसम में बीमारियां फैलती हैं, इसलिए गरीब और जरूरतमंद लोगों को ताजा सात्विक भोजन और स्वच्छ जल का दान करना सबसे बड़ा पुण्य माना गया है।
-
गौ सेवा: कृष्ण जन्माष्टमी के महीने में गौ माता की सेवा करना सीधे भगवान श्री कृष्ण को प्रसन्न करता है। गौशाला में जाकर गायों को हरा चारा और गुड़ खिलाएं।
-
वस्त्र दान: निर्धन लोगों और ब्राह्मणों को छाता, जूते और पीले वस्त्रों का दान करने से भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त होती है और जीवन के सभी संकट टल जाते हैं।
Bhadrapada Month 2026 केवल कैलेंडर का एक पन्ना नहीं है; यह एक आध्यात्मिक यात्रा है जो हमारे मन, शरीर और आत्मा को शुद्ध करती है। उत्तर भारतीय पंचांग के अनुसार 29 अगस्त 2026 से शुरू होने वाला यह पावन महीना हमें याद दिलाता है कि मानव जीवन का परम उद्देश्य ईश्वर की भक्ति और संयमपूर्ण जीवन जीना है।
श्री कृष्ण जन्माष्टमी की अलौकिक रात्रि से लेकर गणेश चतुर्थी के उत्साह तक, भाद्रपद माह का हर दिन उत्सव और आस्था का प्रतीक है। इस वर्ष आप भी इस महीने के कड़े नियमों (जैसे दही का त्याग और सात्विक आहार) का पालन करें। पूर्ण निष्ठा के साथ भगवान कृष्ण और विघ्नहर्ता गजानन की पूजा करें। ईश्वर आपके जीवन से सभी विघ्नों को दूर कर आपके घर को सुख, शांति, समृद्धि और आनंद से भर दें, यही हमारी मंगल कामना है।
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
(जय श्री कृष्ण! गणपति बप्पा मोरिया!)
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs Regarding Bhadrapada Month 2026)
प्रश्न 1: वर्ष 2026 में भाद्रपद (भादों) माह कब से शुरू हो रहा है?
उत्तर: उत्तर भारतीय (पूर्णिमांत) पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में भाद्रपद माह की शुरुआत रक्षाबंधन के ठीक अगले दिन यानी 29 अगस्त 2026, शनिवार से हो रही है। यह महीना 27 सितंबर 2026 (पूर्णिमा) तक चलेगा। वहीं गुजरात और महाराष्ट्र (अमावस्यांत पंचांग) में यह महीना 12 सितंबर 2026 से प्रारंभ होगा।
प्रश्न 2: भाद्रपद (भादों) के महीने में क्या नहीं खाना चाहिए?
उत्तर: आयुर्वेद और धर्म शास्त्रों के अनुसार, भाद्रपद माह में दही (Curd) और गुड़ (Jaggery) का सेवन पूर्णतः वर्जित होता है। इस मौसम में दही खाने से शरीर में वात और पित्त का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे बुखार, सर्दी-खांसी और पेट के संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही तामसिक भोजन (मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज) से भी बचना चाहिए।
प्रश्न 3: भाद्रपद माह में किन देवी-देवताओं की मुख्य रूप से पूजा की जाती है?
उत्तर: यह पवित्र महीना मुख्य रूप से भगवान श्री हरि विष्णु (उनके श्री कृष्ण अवतार) और भगवान श्री गणेश को समर्पित है। इसी महीने में कृष्ण जन्माष्टमी, राधा अष्टमी और गणेश चतुर्थी का महापर्व आता है। इसके अलावा माता पार्वती (हरतालिका तीज) और भगवान शिव की पूजा का भी इस माह में विशेष महत्व है।
प्रश्न 4: क्या भाद्रपद माह में विवाह, सगाई और गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य किए जा सकते हैं?
उत्तर: नहीं, भाद्रपद माह में किसी भी प्रकार के मांगलिक कार्य (जैसे विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, मुंडन आदि) करना शास्त्र-सम्मत नहीं है। यह चातुर्मास का हिस्सा है, जिसके दौरान भगवान विष्णु योग निद्रा में होते हैं। अतः यह समय केवल संयम, भक्ति, व्रत और प्रायश्चित के लिए ही निर्धारित किया गया है।
प्रश्न 5: इस माह का नाम ‘भाद्रपद’ या ‘भादों’ क्यों पड़ा?
उत्तर: हिंदू पंचांग के सभी महीनों के नाम पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की स्थिति (नक्षत्र) के आधार पर रखे गए हैं। इस महीने की पूर्णिमा (भाद्रपद पूर्णिमा) के दिन चंद्रमा ‘पूर्वा भाद्रपद’ या ‘उत्तरा भाद्रपद’ नक्षत्र में गोचर करता है (स्थित होता है)। इसी नक्षत्र के नाम पर इस पावन महीने का नाम ‘भाद्रपद’ रखा गया है, जिसे आम भाषा में ‘भादों’ कहा जाता है।