कुष्मांडा देवी कवच (Kushmanda Devi Kavach) का संपूर्ण संस्कृत पाठ पढ़ें। मां कुष्मांडा के पवित्र कवच के सभी श्लोक शुद्ध एवं सरल रूप में यहां उपलब्ध हैं।
कुष्मांडा देवी कवच मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कुष्मांडा को समर्पित एक पवित्र कवच है। इस लेख में कुष्मांडा देवी कवच का संपूर्ण संस्कृत पाठ प्रस्तुत किया गया है, जिससे भक्त श्रद्धापूर्वक इसका पाठ कर सकते हैं।
कुष्मांडा देवी कवच | Kushmanda Devi Kavach
हंसरै में शिर पातु कूष्माण्डे भवनाशिनीम् ।
हसलकरीं नेत्रेच, हसरौश्च ललाटकम् ॥
कौमारी पातु सर्वगात्रे, वाराही उत्तरे तथा,
पूर्वे पातु वैष्णवी इन्द्राणी दक्षिणे मम ।
दिगिव्दिक्षु सर्वत्रेव कूं बीजं सर्वदावतु ॥
॥ इति कुष्मांडा देवी कवच संपूर्ण ॥
इस प्रकार कुष्मांडा देवी कवच मां कुष्मांडा को समर्पित एक पवित्र स्तोत्र है। भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ इसका पाठ कर देवी की कृपा, संरक्षण एवं आशीर्वाद की प्रार्थना करते हैं।