श्री सूर्य स्तुति (संस्कृत) | Shri Surya Stuti Lyrics in SanskritIt takes 1 minutes... to read this article !

श्री सूर्य स्तुति का संपूर्ण संस्कृत पाठ पढ़ें। भगवान सूर्यदेव की महिमा, तेज, आरोग्य एवं कृपा का वर्णन करने वाली इस पवित्र स्तुति के श्लोक यहां उपलब्ध हैं।

श्री सूर्य स्तुति भगवान सूर्यदेव को समर्पित एक पवित्र स्तुति है। सूर्यदेव को प्रत्यक्ष देवता, प्रकाश, ऊर्जा, स्वास्थ्य और जीवन का स्रोत माना जाता है। इस स्तुति में सूर्य भगवान के दिव्य तेज, महिमा एवं भक्तों पर उनकी कृपा का सुंदर वर्णन किया गया है। इस लेख में श्री सूर्य स्तुति का संपूर्ण संस्कृत पाठ प्रस्तुत किया गया है।

नमः सूर्यस्वरूपाय प्रकाशात्मस्वरूपिणे ।
भास्कराय नमस्तुभ्यं तथा दिनकृते नमः ॥ ६ ॥

शर्वरीहेतवे चैव सन्ध्याज्योत्स्नाकृते नमः ।
त्वं सर्वमेतद्भगवन् जगदुद्भ्रमता त्वया ॥ ७ ॥

भ्रमत्याविद्धमखिलं ब्रह्माण्डं सचराचरम् ।
त्वदंशुभिरिदं स्पृष्टं सर्वं सञ्जायते शुचि ॥ ८ ॥

क्रियते त्वत्करैः स्पर्शाज्जलादीनां पवित्रता ।
होमदानादिको धर्मो नोपकाराय जायते ॥ ९ ॥

ज्ञानैकधामभूताय निर्धूततमसे नमः ।
शुद्धज्योतिस्स्वरूपाय विशुद्धायामलात्मने ॥ २ ॥

वरिष्ठाय वरेण्याय परस्मै परमात्मने ।
नमोऽखिलजगद्व्यापिस्वरूपायात्ममूर्तये ॥ ३ ॥

तावद्यावन्न सम्योगि जगदेतत् त्वदंशुभिः ।
ऋचस्ते सकला ह्येता यजूंष्येतानि चान्यतः ॥ १० ॥

सकलानि च सामानि निपतन्ति त्वदड्गतः ।
ऋङ्मयस्त्वं जगन्नाथ त्वमेव च यजुर्मयः ॥ ११ ॥

यतः साममयश्चैव ततो नाथ त्रयीमयः ।
त्वमेव ब्रह्मणो रूपं परञ्चापरमेव च ॥ १२ ॥

मूर्तामूर्तस्तथा सूक्ष्मः स्थूलरूपस्तथा स्थितः ।
निमेषकाष्ठादिमयः कालरूपः क्षयात्मकः ।
प्रसीद स्वेच्छया रूपं स्वतेजः शमनं कुरु ॥ १३ ॥

इदं स्तोत्रवरं रम्यं श्रोतव्यं श्रद्धया नरैः ।
शिष्यो भूत्वा समाधिस्थो दत्त्वा देयं गुरोरपि ॥ ४ ॥

न शून्यभूतैः श्रोतव्यमेतत्तु सफलं भवेत् ।
सर्वकारणभूताय निष्ठायै ज्ञानचेतसाम् ॥ ५ ॥

इति श्रीमार्कण्डेयपुराणे सूर्यस्तुतिः ।

इस प्रकार श्री सूर्य स्तुति भगवान सूर्यदेव की आराधना और उपासना का एक श्रेष्ठ माध्यम है। श्रद्धा एवं भक्ति के साथ इसके पाठ द्वारा भक्त आरोग्य, सफलता, तेज, आत्मबल तथा सूर्यदेव की कृपा प्राप्त करने की प्रार्थना करते हैं।

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