श्री विष्णु स्तुति (विप्र कृतम्) का संपूर्ण संस्कृत पाठ पढ़ें। विप्र द्वारा रचित भगवान विष्णु की इस पवित्र स्तुति के श्लोक यहां उपलब्ध हैं।
श्री विष्णु स्तुति (विप्र कृतम्) भगवान विष्णु की महिमा, करुणा और विश्वपालक स्वरूप का वर्णन करने वाली एक पवित्र स्तुति है। यह स्तोत्र एक विप्र द्वारा रचित माना जाता है, जिसमें भगवान श्रीहरि के दिव्य गुणों एवं भक्तों पर उनकी कृपा का सुंदर वर्णन किया गया है। इस लेख में श्री विष्णु स्तुति (विप्र कृतम्) का संपूर्ण संस्कृत पाठ प्रस्तुत किया गया है।
श्री विष्णु स्तुतिः (विप्र कृतम्)
नमस्ते देवदेवेश नमस्ते भक्तवत्सल ।
नमस्ते करुणाराशे नमस्ते नन्दविक्रम ॥ १ ॥
गोविन्दाय सुरेशाय अच्युतायाऽव्ययाय च ।
कृष्णाय वासुदेवाय सर्वाध्यक्षाय साक्षिणे ॥ २ ॥
लोकस्थाय हृदिस्थाय अक्षरायाऽऽत्मने नमः ।
अनन्तायादिबीजाय आद्यायाऽखिलरूपिणे ॥ ३ ॥
यज्ञाय यज्ञपतये माधवाय मुरारये ।
जलस्थाय स्थलस्थाय सर्वगायाऽमलात्मने ॥ ४ ॥
सच्चिद्रूपाय सौम्याय नमः सर्वाघनाशिने ।
नमः कालाय कलये कामितार्थप्रदाय च ॥ ५ ॥
नमो दान्ताय शान्ताय विष्णवे जिष्णवे नमः ।
विश्वेशाय विशालाय वेधसे विश्ववासिने ॥ ६ ॥
सुराध्यक्षाय सिद्धाय श्रीधराय नमो नमः ।
हृषीकेशाय धैर्याय नमस्ते मोक्षदायिने ॥ ७ ॥
पुरुषोत्तमाय पुण्याय पद्मनाभाय भास्वते ।
आग्रेसराय तूलाय आग्रेसरायात्मने नमः ॥ ८ ॥
जनार्दनाय जैत्राय जितामित्राय जीविने ।
वेदवेद्याय विश्वाय नारसिंहाय ते नमः ॥ ९ ॥
ज्ञानाय ज्ञानरूपाय ज्ञानदायाखिलात्मने ।
धुरन्धराय धुर्याय धराधारायते नमः ॥ १० ॥
नारायणाय शर्वाय राक्षसानीकवैरिणे ।
गुह्याय गुह्यपतये गुरवे गुणधारिणे ॥ ११ ॥
कारुण्याय शरण्याय कान्तायाऽमृतमूर्तये ।
केशवाय नमस्तेऽस्तु नमो दामोदराय च ॥ १२ ॥
सङ्कर्षणाय शर्वाय नमस्त्रैलोक्यपालिने ।
भक्तप्रियाय हरये नमः सर्वार्तिनाशिने ॥ १३ ॥
नानाभेदविभेदाय नानारूपधराय च ।
नमस्ते भगवान् विष्णो पाहि मां करुणाकर ॥ १४ ॥
इति श्री विष्णु स्तुतिः ।
इस प्रकार श्री विष्णु स्तुति (विप्र कृतम्) भगवान श्रीहरि की भक्ति और आराधना का एक श्रेष्ठ माध्यम है। श्रद्धा एवं भक्ति के साथ इसके पाठ द्वारा भक्त भगवान विष्णु की कृपा, संरक्षण, सुख-समृद्धि एवं आध्यात्मिक उन्नति की प्रार्थना करते हैं।