Shri Kamala Sahasranamavali (श्री कमला सहस्रनामावली): Lyrics in Sanskrit, अचूक पाठ विधि और अकल्पनीय लाभIt takes 32 minutes... to read this article !

सनातन धर्म, तंत्र शास्त्र और आगम ग्रंथों में देवी उपासना का सर्वोच्च रूप ‘दस महाविद्या’ को माना गया है। इन दस महाविद्याओं में दसवीं और अंतिम महाविद्या ‘माता कमला’ (Maa Kamala) हैं। माता कमला साक्षात् महालक्ष्मी का तांत्रिक और सबसे उग्र-सौम्य (शक्तिशाली) स्वरूप हैं। जो साधक जीवन में घोर दरिद्रता, कर्ज, अभाव और संघर्षों से त्रस्त हैं, उनके लिए माता कमला की उपासना कल्पवृक्ष के समान है, जो इच्छा करते ही सब कुछ प्रदान कर देती है।

तंत्र साधना में जब असीम ऐश्वर्य, स्थिर लक्ष्मी, आकर्षण, सौंदर्य और मोक्ष की एक साथ कामना की जाती है, तब ‘श्री कमला सहस्रनामावली’ (Shri Kamala Sahasranamavali) का पाठ किया जाता है। ‘सहस्रनामावली’ का अर्थ है माता के 1000 पवित्र और जाग्रत नामों की माला। यह कोई साधारण स्तोत्र नहीं है, बल्कि यह 1000 ऐसे बीज मंत्रों का समूह है जो साधक के जीवन और ब्रह्मांड की ऊर्जा को पूरी तरह से बदल कर रख देता है।

इस अत्यंत विस्तृत और गूढ़ लेख में हम माता कमला के स्वरूप, दस महाविद्याओं में उनके स्थान, ‘श्री कमला सहस्रनामावली’ के अद्भुत लाभ, इसे जपने की प्रामाणिक सिद्ध विधि और इस साधना से जुड़े सभी कठोर नियमों पर गहराई से चर्चा करेंगे। यह जानकारी आपके आध्यात्मिक और भौतिक जीवन में एक बड़ी क्रांति ला सकती है।

माता कमला कौन हैं? (दसवीं महाविद्या का रहस्य)

सामान्य गृहस्थ माता लक्ष्मी की पूजा धन और समृद्धि के लिए करते हैं। परंतु, तंत्र शास्त्र में वर्णित ‘माता कमला’ केवल धन की देवी नहीं हैं; वे पूर्णता, चेतना, और सृष्टि के परम ऐश्वर्य की अधिष्ठात्री हैं।

कथाओं के अनुसार, जब समुद्र मंथन हुआ था, तब चौदह रत्नों के साथ माता लक्ष्मी प्रकट हुई थीं। उसी समय उनका जो सबसे जाज्वल्यमान, तेजपूर्ण और परम सिद्ध रूप था, वह ‘कमला’ कहलाया। माता कमला चार हाथियों (दिग्गजों) द्वारा अमृत कलश से स्नान करती हुई कमल के फूल पर विराजमान रहती हैं।

‘कमल’ का आध्यात्मिक अर्थ: कमल (Lotus) कीचड़ में खिलता है, फिर भी वह कीचड़ से पूरी तरह अछूता और पवित्र रहता है। माता कमला का यह स्वरूप साधक को यह संदेश देता है कि संसार के मोह-माया रूपी कीचड़ (भौतिक जीवन) में रहते हुए भी साधक कैसे पवित्र, निर्लेप और आध्यात्मिक ऊंचाइयों को छू सकता है। माता कमला ‘भोग’ (सांसारिक सुख) और ‘मोक्ष’ (आध्यात्मिक मुक्ति) दोनों एक साथ प्रदान करती हैं, जो तंत्र में अत्यंत दुर्लभ माना जाता है।

सहस्रनामावली का महत्व: 1000 नामों की शक्ति

वैदिक और तांत्रिक वांग्मय में ‘सहस्रनाम’ (1000 नाम) का बहुत बड़ा महत्व है। ‘सहस्र’ का अर्थ केवल गिनती का एक हजार नहीं है, बल्कि यह अनंतता (Infinity) और पूर्णता का प्रतीक है। हमारे सिर के ऊपरी हिस्से में ‘सहस्रार चक्र’ (हजार पंखुड़ियों वाला कमल) होता है, जो चेतना का सर्वोच्च शिखर है।

जब हम माता कमला के 1000 नामों (Shri Kamala Sahasranamavali) का उच्चारण करते हैं, तो प्रत्येक नाम ध्वनि विज्ञान (Cymatics) और मंत्र विज्ञान के अनुसार हमारे शरीर के सातों चक्रों को जाग्रत करता है। हर नाम माता के एक विशेष गुण, शक्ति और लीला का प्रतीक है। इन नामों के निरंतर जाप से साधक का ‘आभामंडल’ (Aura) स्वर्ण के समान चमकने लगता है और वह ब्रह्मांड की सकारात्मक शक्तियों (धन, अवसर, स्वास्थ्य) को चुंबक की तरह अपनी ओर आकर्षित करने लगता है।

Shri Kamala Sahasranamavali (श्री कमला सहस्रनामावली – 1000 नामों का पवित्र स्तोत्र)

ॐ श्रियै नमः ।
ॐ पद्मायै नमः ।
ॐ प्रकृत्यै नमः ।
ॐ सत्त्वायै नमः ।
ॐ शान्तायै नमः ।
ॐ चिच्छक्त्यै नमः ।
ॐ अव्ययायै नमः ।
ॐ केवलायै नमः ।
ॐ निष्कलायै नमः ।
ॐ शुद्धायै नमः ।
ॐ व्यापिन्यै नमः ।
ॐ व्योमविग्रहायै नमः ।
ॐ व्योमपद्मकृताधारायै नमः ।
ॐ परस्मै व्योम्ने नमः ।
ॐ मतोद्भवायै नमः ।
ॐ निर्व्योमायै नमः ।
ॐ व्योममध्यस्थायै नमः ।
ॐ पञ्चव्योमपदाश्रितायै नमः ।
ॐ अच्युतायै नमः ।
ॐ व्योमनिलयायै नमः । २०

ॐ परमानन्दरूपिण्यै नमः ।
ॐ नित्यशुद्धायै नमः ।
ॐ नित्यतृप्तायै नमः ।
ॐ निर्विकारायै नमः ।
ॐ निरीक्षणायै नमः ।
ॐ ज्ञानशक्त्यै नमः ।
ॐ कर्तृशक्त्यै नमः ।
ॐ भोक्तृशक्त्यै नमः ।
ॐ शिखावहायै नमः ।
ॐ स्नेहाभासायै नमः ।
ॐ निरानन्दायै नमः ।
ॐ विभूत्यै नमः ।
ॐ विमलायै नमः ।
ॐ चलायै नमः ।
ॐ अनन्तायै नमः ।
ॐ वैष्णव्यै नमः ।
ॐ व्यक्तायै नमः ।
ॐ विश्वानन्दायै नमः ।
ॐ विकाशिन्यै नमः ।
ॐ शक्त्यै नमः । ४०

ॐ विभिन्नसर्वार्त्यै नमः ।
ॐ समुद्रपरितोषिण्यै नमः ।
ॐ मूर्त्यै नमः ।
ॐ सनातन्यै नमः ।
ॐ हार्द्यै नमः ।
ॐ निस्तरङ्गायै नमः ।
ॐ निरामयायै नमः ।
ॐ ज्ञानज्ञेयायै नमः ।
ॐ ज्ञानगम्यायै नमः ।
ॐ ज्ञानज्ञेयविकासिन्यै नमः ।
ॐ स्वच्छन्दशक्त्यै नमः ।
ॐ गहनायै नमः ।
ॐ निष्कम्पार्चिषे नमः ।
ॐ सुनिर्मलायै नमः ।
ॐ स्वरूपायै नमः ।
ॐ सर्वगायै नमः ।
ॐ अपारायै नमः ।
ॐ बृंहिण्यै नमः ।
ॐ सुगुणोर्जितायै नमः ।
ॐ अकलङ्कायै नमः । ६०

ॐ निराधारायै नमः ।
ॐ निस्सङ्कल्पायै नमः ।
ॐ निराश्रयायै नमः ।
ॐ असङ्कीर्णायै नमः ।
ॐ सुशान्तायै नमः ।
ॐ शाश्वत्यै नमः ।
ॐ भासुर्यै नमः ।
ॐ स्थिरायै नमः ।
ॐ अनौपम्यायै नमः ।
ॐ निर्विकल्पायै नमः ।
ॐ निर्यन्त्रायै नमः ।
ॐ यन्त्रवाहिन्यै नमः ।
ॐ अभेद्यायै नमः ।
ॐ भेदिन्यै नमः ।
ॐ भिन्नायै नमः ।
ॐ भारत्यै नमः ।
ॐ वैखर्यै नमः ।
ॐ खगायै नमः ।
ॐ अग्राह्यायै नमः ।
ॐ ग्राहिकायै नमः । ८०

ॐ गूढायै नमः ।
ॐ गम्भीरायै नमः ।
ॐ विश्वगोपिन्यै नमः ।
ॐ अनिर्देश्यायै नमः ।
ॐ अप्रतिहतायै नमः ।
ॐ निर्बीजायै नमः ।
ॐ पावन्यै नमः ।
ॐ परायै नमः ।
ॐ अप्रतर्क्यायै नमः ।
ॐ अपरिमितायै नमः ।
ॐ भवभ्रान्तिविनाशिन्यै नमः ।
ॐ एकायै नमः ।
ॐ द्विरूपायै नमः ।
ॐ त्रिविधायै नमः ।
ॐ असङ्ख्यातायै नमः ।
ॐ सुरेश्वर्यै नमः ।
ॐ सुप्रतिष्ठायै नमः ।
ॐ महाधात्र्यै नमः ।
ॐ स्थित्यै नमः ।
ॐ वृद्ध्यै नमः । १००

ॐ ध्रुवायै नमः ।
ॐ गत्यै नमः ।
ॐ ईश्वर्यै नमः ।
ॐ महिमायै नमः ।
ॐ ऋद्ध्यै नमः ।
ॐ प्रमोदायै नमः ।
ॐ उज्ज्वलोद्यमायै नमः ।
ॐ अक्षयायै नमः ।
ॐ वर्धमानायै नमः ।
ॐ सुप्रकाशायै नमः ।
ॐ विहङ्गमायै नमः ।
ॐ नीरजायै नमः ।
ॐ जनन्यै नमः ।
ॐ नित्यायै नमः ।
ॐ जयायै नमः ।
ॐ रोचिष्मत्यै नमः ।
ॐ शुभायै नमः ।
ॐ तपोनुदायै नमः ।
ॐ ज्वालायै नमः ।
ॐ सुदीप्त्यै नमः । १२०

 

ॐ अंशुमालिन्यै नमः ।
ॐ अप्रमेयायै नमः ।
ॐ त्रिधायै नमः ।
ॐ सूक्ष्मायै नमः ।
ॐ परायै नमः ।
ॐ निर्वाणदायिन्यै नमः ।
ॐ अवदातायै नमः ।
ॐ सुशुद्धायै नमः ।
ॐ अमोघाख्यायै नमः ।
ॐ परम्परायै नमः ।
ॐ सन्धानक्यै नमः ।
ॐ शुद्धविद्यायै नमः ।
ॐ सर्वभूतमहेश्वर्यै नमः ।
ॐ लक्ष्म्यै नमः ।
ॐ तुष्ट्यै नमः ।
ॐ महाधीरायै नमः ।
ॐ शान्त्यै नमः ।
ॐ आपूरणे नवायै नमः ।
ॐ अनुग्रहाशक्त्यै नमः ।
ॐ आद्यायै नमः । १४०

ॐ जगज्ज्येष्ठायै नमः ।
ॐ जगद्विध्यै नमः ।
ॐ सत्यायै नमः ।
ॐ प्रह्वायै नमः ।
ॐ क्रियायोग्यायै नमः ।
ॐ अपर्णायै नमः ।
ॐ ह्लादिन्यै नमः ।
ॐ शिवायै नमः ।
ॐ सम्पूर्णाह्लादिन्यै नमः ।
ॐ शुद्धायै नमः ।
ॐ ज्योतिष्मत्यै नमः ।
ॐ अमतावहायै नमः ।
ॐ रजोवत्यै नमः ।
ॐ अर्कप्रतिभायै नमः ।
ॐ आकर्षिण्यै नमः ।
ॐ कर्षिण्यै नमः ।
ॐ रसायै नमः ।
ॐ परायै वसुमत्यै नमः ।
ॐ देव्यै नमः ।
ॐ कान्त्यै नमः । १६०

ॐ शान्त्यै नमः ।
ॐ मत्यै नमः ।
ॐ कलायै नमः ।
ॐ कलङ्करहितायै कलायै नमः ।
ॐ विशालायै नमः ।
ॐ उद्दीपन्यै नमः ।
ॐ रत्यै नमः ।
ॐ सम्बोधिन्यै नमः ।
ॐ हारिण्यै नमः ।
ॐ प्रभावायै नमः ।
ॐ भवभूतिदायै नमः ।
ॐ अमृतस्यन्दिन्यै नमः ।
ॐ जीवायै नमः ।
ॐ जनन्यै नमः ।
ॐ खण्डिकायै नमः ।
ॐ स्थिरायै नमः ।
ॐ धूमायै नमः ।
ॐ कलावत्यै नमः ।
ॐ पूर्णायै नमः ।
ॐ भासुरायै नमः । १८०

ॐ सुमत्यै नमः ।
ॐ रसायै नमः ।
ॐ शुद्धायै नमः ।
ॐ ध्वनये नमः ।
ॐ सृत्यै नमः ।
ॐ सृष्ट्यै नमः ।
ॐ विकृत्यै नमः ।
ॐ कृष्ट्यै नमः ।
ॐ प्रापण्यै नमः ।
ॐ प्राणदायै नमः ।
ॐ प्रह्वायै नमः ।
ॐ विश्वायै नमः ।
ॐ पाण्डुरवासिन्यै नमः ।
ॐ अवन्यै नमः ।
ॐ वज्रनलिकायै नमः ।
ॐ चित्रायै नमः ।
ॐ ब्रह्माण्डवासिन्यै नमः ।
ॐ अनन्तरूपायै नमः ।
ॐ अनन्तात्मने नमः ।
ॐ अनन्तस्थायै नमः । २००

ॐ अनन्तसम्भवायै नमः ।
ॐ महाशक्त्यै नमः ।
ॐ प्राणशक्त्यै नमः ।
ॐ प्राणदात्र्यै नमः ।
ॐ रतिम्भरायै नमः ।
ॐ महासमूहायै नमः ।
ॐ निखिलायै नमः ।
ॐ इच्छाधारायै नमः ।
ॐ सुखावहायै नमः ।
ॐ प्रत्यक्षलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ निष्कम्पायै नमः ।
ॐ प्ररोहायै नमः ।
ॐ बुद्धिगोचरायै नमः ।
ॐ नानादेहायै नमः ।
ॐ महावर्तायै नमः ।
ॐ बहुदेहविकासिन्यै नमः ।
ॐ सहस्राण्यै नमः ।
ॐ प्रधानायै नमः ।
ॐ न्यायवस्तुप्रकाशिकायै नमः ।
ॐ सर्वाभिलाषपूर्णायै नमः । २२०

ॐ इच्छायै नमः ।
ॐ सर्वायै नमः ।
ॐ सर्वार्थभाषिण्यै नमः ।
ॐ नानास्वरूपचिद्धात्र्यै नमः ।
ॐ शब्दपूर्वायै नमः ।
ॐ पुरातनायै नमः ।
ॐ व्यक्तायै नमः ।
ॐ अव्यक्तायै नमः ।
ॐ जीवकेशायै नमः ।
ॐ सर्वेच्छापरिपूरितायै नमः ।
ॐ सङ्कल्पसिद्धायै नमः ।
ॐ साङ्ख्येयायै नमः ।
ॐ तत्त्वगर्भायै नमः ।
ॐ धरावहायै नमः ।
ॐ भूतरूपायै नमः ।
ॐ चित्स्वरूपायै नमः ।
ॐ त्रिगुणायै नमः ।
ॐ गुणगर्वितायै नमः ।
ॐ प्रजापतीश्वर्यै नमः ।
ॐ रौद्र्यै नमः । २४०

ये भी पढ़ें:  Shri Pratyangira Sahasranamavali (श्री प्रत्यङ्गिरा सहस्रनामावली): काले जादू और शत्रुओं का सर्वनाश करने वाली महास्तुति, Lyrics in Sanskrit, सिद्ध पाठ विधि और अकल्पनीय लाभ

ॐ सर्वाधारायै नमः ।
ॐ सुखावहायै नमः ।
ॐ कल्याणवाहिकायै नमः ।
ॐ कल्यायै नमः ।
ॐ कलिकल्मषनाशिन्यै नमः ।
ॐ नीरूपायै नमः ।
ॐ उद्भिन्नसन्तानायै नमः ।
ॐ सुयन्त्रायै नमः ।
ॐ त्रिगुणालयायै नमः ।
ॐ महामायायै नमः ।
ॐ योगमायायै नमः ।
ॐ महायोगेश्वर्यै नमः ।
ॐ प्रियायै नमः ।
ॐ महास्त्रियै नमः ।
ॐ विमलायै नमः ।
ॐ कीर्त्यै नमः ।
ॐ जयायै नमः ।
ॐ लक्ष्म्यै नमः ।
ॐ निरञ्जनायै नमः ।
ॐ प्रकृत्यै नमः । २६०

ॐ भगवन्मायाशक्त्यै नमः ।
ॐ निद्रायै नमः ।
ॐ यशस्कर्यै नमः ।
ॐ चिन्तायै नमः ।
ॐ बुद्ध्यै नमः ।
ॐ यशसे नमः ।
ॐ प्रज्ञायै नमः ।
ॐ शान्त्यै नमः ।
ॐ आप्रीतिवर्धिन्यै नमः ।
ॐ प्रद्युम्नमात्रे नमः ।
ॐ साध्व्यै नमः ।
ॐ सुखसौभाग्यसिद्धिदायै नमः ।
ॐ काष्ठायै नमः ।
ॐ निष्ठायै नमः ।
ॐ प्रतिष्ठायै नमः ।
ॐ ज्येष्ठायै नमः ।
ॐ श्रेष्ठायै नमः ।
ॐ जयावहायै नमः ।
ॐ सर्वातिशायिन्यै नमः ।
ॐ प्रीत्यै नमः । २८०

ॐ विश्वशक्त्यै नमः ।
ॐ महाबलायै नमः ।
ॐ वरिष्ठायै नमः ।
ॐ विजयायै नमः ।
ॐ वीरायै नमः ।
ॐ जयन्त्यै नमः ।
ॐ विजयप्रदायै नमः ।
ॐ हृद्गृहायै नमः ।
ॐ गोपिन्यै नमः ।
ॐ गुह्यायै नमः ।
ॐ गणगन्धर्वसेवितायै नमः ।
ॐ योगीश्वर्यै नमः ।
ॐ योगमायायै नमः ।
ॐ योगिन्यै नमः ।
ॐ योगसिद्धिदायै नमः ।
ॐ महायोगेश्वरवृतायै नमः ।
ॐ योगायै नमः ।
ॐ योगेश्वरप्रियायै नमः ।
ॐ ब्रह्मेन्द्ररुद्रनमितायै नमः ।
ॐ सुरासुरवरप्रदायै नमः । ३००

ॐ त्रिवर्त्मगायै नमः ।
ॐ त्रिलोकस्थायै नमः ।
ॐ त्रिविक्रमपदोद्भवायै नमः ।
ॐ सुतारायै नमः ।
ॐ तारिण्यै नमः ।
ॐ तारायै नमः ।
ॐ दुर्गायै नमः ।
ॐ सन्तारिण्यै परायै नमः ।
ॐ सुतारिण्यै नमः ।
ॐ तारयन्त्यै नमः ।
ॐ भूरितारेश्वरप्रभायै नमः ।
ॐ गुह्यविद्यायै नमः ।
ॐ यज्ञविद्यायै नमः ।
ॐ महाविद्यायै नमः ।
ॐ सुशोभितायै नमः ।
ॐ अध्यात्मविद्यायै नमः ।
ॐ विघ्नेश्यै नमः ।
ॐ पद्मस्थायै नमः ।
ॐ परमेष्ठिन्यै नमः ।
ॐ आन्वीक्षिक्यै नमः । ३२०

ॐ त्रय्यै नमः ।
ॐ वार्तायै नमः ।
ॐ दण्डनीत्यै नमः ।
ॐ नयात्मिकायै नमः ।
ॐ गौर्यै नमः ।
ॐ वागीश्वर्यै नमः ।
ॐ गोप्त्र्यै नमः ।
ॐ गायत्र्यै नमः ।
ॐ कमलोद्भवायै नमः ।
ॐ विश्वम्भरायै नमः ।
ॐ विश्वरूपायै नमः ।
ॐ विश्वमात्रे नमः ।
ॐ वसुप्रदायै नमः ।
ॐ सिद्ध्यै नमः ।
ॐ स्वाहायै नमः ।
ॐ स्वधायै नमः ।
ॐ स्वस्त्यै नमः ।
ॐ सुधायै नमः ।
ॐ सर्वार्थसाधिन्यै नमः ।
ॐ इच्छायै नमः । ३४०

ॐ सृष्ट्यै नमः ।
ॐ द्युत्यै नमः ।
ॐ भूत्यै नमः ।
ॐ कीर्त्यै नमः ।
ॐ श्रद्धायै नमः ।
ॐ दयायै नमः ।
ॐ मत्यै नमः ।
ॐ श्रुत्यै नमः ।
ॐ मेधायै नमः ।
ॐ धृत्यै नमः ।
ॐ ह्रियै नमः ।
ॐ श्रीविद्यायै नमः ।
ॐ विबुधवन्दितायै नमः ।
ॐ अनसूयायै नमः ।
ॐ घृणायै नमः ।
ॐ नीत्यै नमः ।
ॐ निर्वृत्यै नमः ।
ॐ कामधुक्करायै नमः ।
ॐ प्रतिज्ञायै नमः ।
ॐ सन्तत्यै नमः । ३६०

ॐ भूत्यै नमः ।
ॐ दिवे नमः ।
ॐ प्रज्ञायै नमः ।
ॐ विश्वमानिन्यै नमः ।
ॐ स्मृत्यै नमः ।
ॐ वाचे नमः ।
ॐ विश्वजनन्यै नमः ।
ॐ पश्यन्त्यै नमः ।
ॐ मध्यमायै नमः ।
ॐ समायै नमः ।
ॐ सन्ध्यायै नमः ।
ॐ मेधायै नमः ।
ॐ प्रभायै नमः ।
ॐ भीमायै नमः ।
ॐ सर्वाकारायै नमः ।
ॐ सरस्वत्यै नमः ।
ॐ काङ्क्षायै नमः ।
ॐ मायायै नमः ।
ॐ महामायायै नमः ।
ॐ मोहिन्यै नमः । ३८०

ॐ माधवप्रियायै नमः ।
ॐ सौम्याभोगायै नमः ।
ॐ महाभोगायै नमः ।
ॐ भोगिन्यै नमः ।
ॐ भोगदायिन्यै नमः ।
ॐ सुधौतकनकप्रख्यायै नमः ।
ॐ सुवर्णकमलासनायै नमः ।
ॐ हिरण्यगर्भायै नमः ।
ॐ सुश्रोण्यै नमः ।
ॐ हारिण्यै नमः ।
ॐ रमण्यै नमः ।
ॐ रमायै नमः ।
ॐ चन्द्रायै नमः ।
ॐ हिरण्मय्यै नमः ।
ॐ ज्योत्स्नायै नमः ।
ॐ रम्यायै नमः ।
ॐ शोभायै नमः ।
ॐ शुभावहायै नमः ।
ॐ त्रैलोक्यमण्डनायै नमः ।
ॐ नारीनरेश्वरवरार्चितायै नमः । ४००

ॐ त्रैलोक्यसुन्दर्यै नमः ।
ॐ रामायै नमः ।
ॐ महाविभववाहिन्यै नमः ।
ॐ पद्मस्थायै नमः ।
ॐ पद्मनिलयायै नमः ।
ॐ पद्ममालाविभूषितायै नमः ।
ॐ पद्मयुग्मधरायै नमः ।
ॐ कान्तायै नमः ।
ॐ दिव्याभरणभूषितायै नमः ।
ॐ विचित्ररत्नमुकुटायै नमः ।
ॐ विचित्राम्बरभूषणायै नमः ।
ॐ विचित्रमाल्यगन्धाढ्यायै नमः ।
ॐ विचित्रायुधवाहनायै नमः ।
ॐ महानारायणी देव्यै नमः ।
ॐ वैष्णव्यै नमः ।
ॐ वीरवन्दितायै नमः ।
ॐ कालसङ्कर्षिण्यै नमः ।
ॐ घोरायै नमः ।
ॐ तत्त्वसङ्कर्षिण्यै कलायै नमः ।
ॐ जगत्सम्पूरण्यै नमः । ४२०

ॐ विश्वायै नमः ।
ॐ महाविभवभूषणायै नमः ।
ॐ वारुण्यै नमः ।
ॐ वरदायै नमः ।
ॐ व्याख्यायै नमः ।
ॐ घण्टाकर्णविराजितायै नमः ।
ॐ नृसिंह्यै नमः ।
ॐ भैरव्यै नमः ।
ॐ ब्राह्म्यै नमः ।
ॐ भास्कर्यै नमः ।
ॐ व्योमचारिण्यै नमः ।
ॐ ऐन्द्र्यै नमः ।
ॐ कामधनुः सृष्ट्यै नमः ।
ॐ कामयोन्यै नमः ।
ॐ महाप्रभायै नमः ।
ॐ दृष्टायै नमः ।
ॐ काम्यायै नमः ।
ॐ विश्वशक्त्यै नमः ।
ॐ बीजगत्यात्मदर्शनायै नमः ।
ॐ गरुडारूढहृदयायै नमः । ४४०

ॐ चान्द्र्यै श्रियै नमः ।
ॐ मधुराननायै नमः ।
ॐ महोग्ररूपायै नमः ।
ॐ वाराहीनारसिंहीहतासुरायै नमः ।
ॐ युगान्तहुतभुग्ज्वालायै नमः ।
ॐ करालायै नमः ।
ॐ पिङ्गलायै कलायै नमः ।
ॐ त्रैलोक्यभूषणायै नमः ।
ॐ भीमायै नमः ।
ॐ श्यामायै नमः ।
ॐ त्रैलोक्यमोहिन्यै नमः ।
ॐ महोत्कटायै नमः ।
ॐ महारक्तायै नमः ।
ॐ महाचण्डायै नमः ।
ॐ महासनायै नमः ।
ॐ शङ्खिन्यै नमः ।
ॐ लेखिन्यै नमः ।
ॐ स्वस्थालिखितायै नमः ।
ॐ खेचरेश्वर्यै नमः ।
ॐ भद्रकाल्यै नमः । ४६०

ॐ एकवीरायै नमः ।
ॐ कौमार्यै नमः ।
ॐ भगमालिन्यै नमः ।
ॐ कल्याण्यै नमः ।
ॐ कामधुग्ज्वालामुख्यै नमः ।
ॐ उत्पलमालिकायै नमः ।
ॐ बालिकायै नमः ।
ॐ धनदायै नमः ।
ॐ सूर्यायै नमः ।
ॐ हृदयोत्पलमालिकायै नमः ।
ॐ अजितायै नमः ।
ॐ वर्षिण्यै नमः ।
ॐ रीत्यै नमः ।
ॐ भेरुण्डायै नमः ।
ॐ गरुडासनायै नमः ।
ॐ वैश्वानरीमहामायायै नमः ।
ॐ महाकाल्यै नमः ।
ॐ विभीषणायै नमः ।
ॐ महामन्दारविभवायै नमः ।
ॐ शिवानन्दायै नमः । ४८०

ॐ रतिप्रियायै नमः ।
ॐ उद्रीत्यै नमः ।
ॐ पद्ममालायै नमः ।
ॐ धर्मवेगायै नमः ।
ॐ विभावन्यै नमः ।
ॐ सत्क्रियायै नमः ।
ॐ देवसेनायै नमः ।
ॐ हिरण्यरजताश्रयायै नमः ।
ॐ सहसावर्तमानायै नमः ।
ॐ हस्तिनादप्रबोधिन्यै नमः ।
ॐ हिरण्यपद्मवर्णायै नमः ।
ॐ हरिभद्रायै नमः ।
ॐ सुदुर्धरायै नमः ।
ॐ सूर्यायै नमः ।
ॐ हिरण्यप्रकटसदृश्यै नमः ।
ॐ हेममालिन्यै नमः ।
ॐ पद्माननायै नमः ।
ॐ नित्यपुष्टायै नमः ।
ॐ देवमात्रे नमः ।
ॐ अमृतोद्भवायै नमः । ५००

ॐ महाधनायै नमः ।
ॐ शृङ्ग्यै नमः ।
ॐ कर्दम्यै नमः ।
ॐ कम्बुकन्धरायै नमः ।
ॐ आदित्यवर्णायै नमः ।
ॐ चन्द्राभायै नमः ।
ॐ गन्धद्वारायै नमः ।
ॐ दुरासदायै नमः ।
ॐ वरार्चितायै नमः ।
ॐ वरारोहायै नमः ।
ॐ वरेण्यायै नमः ।
ॐ विष्णुवल्लभायै नमः ।
ॐ कल्याण्यै नमः ।
ॐ वरदायै नमः ।
ॐ वामायै नमः ।
ॐ वामेश्यै नमः ।
ॐ विन्ध्यवासिन्यै नमः ।
ॐ योगनिद्रायै नमः ।
ॐ योगरतायै नमः ।
ॐ देवकीकामरूपिण्यै नमः । ५२०

ॐ कंसविद्राविण्यै नमः ।
ॐ दुर्गायै नमः ।
ॐ कौमार्यै नमः ।
ॐ कौशिक्यै नमः ।
ॐ क्षमायै नमः ।
ॐ कात्यायन्यै नमः ।
ॐ कालरात्र्यै नमः ।
ॐ निशितृप्तायै नमः ।
ॐ सुदुर्जयायै नमः ।
ॐ विरूपाक्ष्यै नमः ।
ॐ विशालाक्ष्यै नमः ।
ॐ भक्तानां परिरक्षिण्यै नमः ।
ॐ बहुरूपा स्वरूपायै नमः ।
ॐ विरूपायै नमः ।
ॐ रूपवर्जितायै नमः ।
ॐ घण्टानिनादबहुलायै नमः ।
ॐ जीमूतध्वनिनिस्स्वनायै नमः ।
ॐ महादेवेन्द्रमथिन्यै नमः ।
ॐ भ्रुकुटीकुटिलाननायै नमः ।
ॐ सत्योपयाचितायै नमः । ५४०

ॐ एकायै नमः ।
ॐ कौबेर्यै नमः ।
ॐ ब्रह्मचारिण्यै नमः ।
ॐ आर्यायै नमः ।
ॐ यशोदासुतदायै नमः ।
ॐ धर्मकामार्थमोक्षदायै नमः ।
ॐ दारिद्र्यदुःखशमन्यै नमः ।
ॐ घोरदुर्गार्तिनाशिन्यै नमः ।
ॐ भक्तार्तिशमन्यै नमः ।
ॐ भव्यायै नमः ।
ॐ भवभर्गापहारिण्यै नमः ।
ॐ क्षीराब्धितनयायै नमः ।
ॐ पद्मायै नमः ।
ॐ कमलायै नमः ।
ॐ धरणीधरायै नमः ।
ॐ रुक्मिण्यै नमः ।
ॐ रोहिण्यै नमः ।
ॐ सीतायै नमः ।
ॐ सत्यभामायै नमः ।
ॐ यशस्विन्यै नमः । ५६०

ॐ प्रज्ञाधारायै नमः ।
ॐ अमितप्रज्ञायै नमः ।
ॐ वेदमात्रे नमः ।
ॐ यशोवत्यै नमः ।
ॐ समाध्यै नमः ।
ॐ भावनायै नमः ।
ॐ मैत्र्यै नमः ।
ॐ करुणायै नमः ।
ॐ भक्तवत्सलायै नमः ।
ॐ अन्तर्वेदी दक्षिणायै नमः ।
ॐ ब्रह्मचर्यपरागत्यै नमः ।
ॐ दीक्षायै नमः ।
ॐ वीक्षायै नमः ।
ॐ परीक्षायै नमः ।
ॐ समीक्षायै नमः ।
ॐ वीरवत्सलायै नमः ।
ॐ अम्बिकायै नमः ।
ॐ सुरभ्यै नमः ।
ॐ सिद्धायै नमः ।
ॐ सिद्धविद्याधरार्चितायै नमः । ५८०

ॐ सुदीप्तायै नमः ।
ॐ लेलिहानायै नमः ।
ॐ करालायै नमः ।
ॐ विश्वपूरकायै नमः ।
ॐ विश्वसंहारिण्यै नमः ।
ॐ दीप्त्यै नमः ।
ॐ तापन्यै नमः ।
ॐ ताण्डवप्रियायै नमः ।
ॐ उद्भवायै नमः ।
ॐ विरजायै नमः ।
ॐ राज्ञ्यै नमः ।
ॐ तापन्यै नमः ।
ॐ बिन्दुमालिन्यै नमः ।
ॐ क्षीरधारासुप्रभावायै नमः ।
ॐ लोकमात्रे नमः ।
ॐ सुवर्चसायै नमः ।
ॐ हव्यगर्भायै नमः ।
ॐ आज्यगर्भायै नमः ।
ॐ जुह्वतो यज्ञसम्भवायै नमः ।
ॐ आप्यायन्यै नमः । ६००

ॐ पावन्यै नमः ।
ॐ दहन्यै नमः ।
ॐ दहनाश्रयायै नमः ।
ॐ मातृकायै नमः ।
ॐ माधव्यै नमः ।
ॐ मुच्यायै नमः ।
ॐ मोक्षलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ महर्धिदायै नमः ।
ॐ सर्वकामप्रदायै नमः ।
ॐ भद्रायै नमः ।
ॐ सुभद्रायै नमः ।
ॐ सर्वमङ्गलायै नमः ।
ॐ श्वेतायै नमः ।
ॐ सुशुक्लवसनायै नमः ।
ॐ शुक्लमाल्यानुलेपनायै नमः ।
ॐ हंसायै नमः ।
ॐ हीनकर्यै नमः ।
ॐ हंस्यै नमः ।
ॐ हृद्यायै नमः ।
ॐ हृत्कमलालयायै नमः । ६२०

ॐ सितातपत्रायै नमः ।
ॐ सुश्रोण्यै नमः ।
ॐ पद्मपत्रायतेक्षणायै नमः ।
ॐ सावित्र्यै नमः ।
ॐ सत्यसङ्कल्पायै नमः ।
ॐ कामदायै नमः ।
ॐ कामकामिन्यै नमः ।
ॐ दर्शनीयायै नमः ।
ॐ दृशायै नमः ।
ॐ दृश्यायै नमः ।
ॐ स्पृश्यायै नमः ।
ॐ सेव्यायै नमः ।
ॐ वराङ्गनायै नमः ।
ॐ भोगप्रियायै नमः ।
ॐ भोगवत्यै नमः ।
ॐ भोगीन्द्रशयनासनायै नमः ।
ॐ आर्द्रायै नमः ।
ॐ पुष्करिण्यै नमः ।
ॐ पुण्यायै नमः ।
ॐ पावन्यै नमः । ६४०

ये भी पढ़ें:  Shri Sai Sahasranamavali (श्री साई सहस्रनामावली): Lyrics in Sanskrit, शिरडी वाले साईं नाथ की महास्तुति, सिद्ध पाठ विधि और अकल्पनीय लाभ

ॐ पापसूदन्यै नमः ।
ॐ श्रीमत्यै नमः ।
ॐ शुभाकारायै नमः ।
ॐ परमैश्वर्यभूतिदायै नमः ।
ॐ अचिन्त्यानन्तविभवायै नमः ।
ॐ भवभावविभावन्यै नमः ।
ॐ निश्रेण्यै नमः ।
ॐ सर्वदेहस्थायै नमः ।
ॐ सर्वभूतनमस्कृतायै नमः ।
ॐ बलायै नमः ।
ॐ बलाधिकायै देव्यै नमः ।
ॐ गौतम्यै नमः ।
ॐ गोकुलालयायै नमः ।
ॐ तोषिण्यै नमः ।
ॐ पूर्णचन्द्राभायै नमः ।
ॐ एकानन्दायै नमः ।
ॐ शताननायै नमः ।
ॐ उद्याननगरद्वारहर्म्योपवनवासिन्यै नमः ।
ॐ कूष्माण्ड्यै नमः ।
ॐ दारुणायै नमः । ६६०

ॐ चण्डायै नमः ।
ॐ किरात्यै नमः ।
ॐ नन्दनालयायै नमः ।
ॐ कालायनायै नमः ।
ॐ कालगम्यायै नमः ।
ॐ भयदायै नमः ।
ॐ भयनाशिन्यै नमः ।
ॐ सौदामिन्यै नमः ।
ॐ मेघरवायै नमः ।
ॐ दैत्यदानवमर्दिन्यै नमः ।
ॐ जगन्मात्रे नमः ।
ॐ अभयकर्यै नमः ।
ॐ भूतधात्र्यै नमः ।
ॐ सुदुर्लभायै नमः ।
ॐ काश्यप्यै नमः ।
ॐ शुभदानायै नमः ।
ॐ वनमालायै नमः ।
ॐ शुभायै नमः ।
ॐ वरायै नमः ।
ॐ धन्यायै नमः । ६८०

ॐ धन्येश्वर्यै नमः ।
ॐ धन्यायै नमः ।
ॐ रत्नदायै नमः ।
ॐ वसुवर्धिन्यै नमः ।
ॐ गान्धर्व्यै नमः ।
ॐ रेवत्यै नमः ।
ॐ गङ्गायै नमः ।
ॐ शकुन्यै नमः ।
ॐ विमलाननायै नमः ।
ॐ इडायै नमः ।
ॐ शान्तिकर्यै नमः ।
ॐ तामस्यै नमः ।
ॐ कमलालयायै नमः ।
ॐ आज्यपायै नमः ।
ॐ वज्रकौमार्यै नमः ।
ॐ सोमपायै नमः ।
ॐ कुसुमाश्रयायै नमः ।
ॐ जगत्प्रियायै नमः ।
ॐ सरथायै नमः ।
ॐ दुर्जयायै नमः । ७००

ॐ खगवाहनायै नमः ।
ॐ मनोभवायै नमः ।
ॐ कामचारायै नमः ।
ॐ सिद्धचारणसेवितायै नमः ।
ॐ व्योमलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ महालक्ष्म्यै नमः ।
ॐ तेजोलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ सुजाज्वलायै नमः ।
ॐ रसलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ जगद्योनये नमः ।
ॐ गन्धलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ वनाश्रयायै नमः ।
ॐ श्रवणायै नमः ।
ॐ श्रावणी नेत्रायै नमः ।
ॐ रसनाप्राणचारिण्यै नमः ।
ॐ विरिञ्चिमात्रे नमः ।
ॐ विभवायै नमः ।
ॐ वरवारिजवाहनायै नमः ।
ॐ वीर्यायै नमः ।
ॐ वीरेश्वर्यै नमः । ७२०

ॐ वन्द्यायै नमः ।
ॐ विशोकायै नमः ।
ॐ वसुवर्धिन्यै नमः ।
ॐ अनाहतायै नमः ।
ॐ कुण्डलिन्यै नमः ।
ॐ नलिन्यै नमः ।
ॐ वनवासिन्यै नमः ।
ॐ गान्धारिण्यै नमः ।
ॐ इन्द्रनमितायै नमः ।
ॐ सुरेन्द्रनमितायै नमः ।
ॐ सत्यै नमः ।
ॐ सर्वमङ्गल्यमाङ्गल्यायै नमः ।
ॐ सर्वकामसमृद्धिदायै नमः ।
ॐ सर्वानन्दायै नमः ।
ॐ महानन्दायै नमः ।
ॐ सत्कीर्त्यै नमः ।
ॐ सिद्धसेवितायै नमः ।
ॐ सिनीवाल्यै नमः ।
ॐ कुह्वै नमः ।
ॐ राकायै नमः । ७४०

ॐ अमायै नमः ।
ॐ अनुमत्यै नमः ।
ॐ द्युत्यै नमः ।
ॐ अरुन्धत्यै नमः ।
ॐ वसुमत्यै नमः ।
ॐ भार्गव्यै नमः ।
ॐ वास्तुदेवतायै नमः ।
ॐ मयूर्यै नमः ।
ॐ वज्रवेताल्यै नमः ।
ॐ वज्रहस्तायै नमः ।
ॐ वराननायै नमः ।
ॐ अनघायै नमः ।
ॐ धरण्यै नमः ।
ॐ धीरायै नमः ।
ॐ धमन्यै नमः ।
ॐ मणिभूषणायै नमः ।
ॐ राजश्रीरूपसहितायै नमः ।
ॐ ब्रह्मश्रियै नमः ।
ॐ ब्रह्मवन्दितायै नमः ।
ॐ जयश्रियै नमः । ७६०

जयदायै नमः ।
ॐ ज्ञेयायै नमः ।
ॐ सर्गश्रियै नमः ।
ॐ सतां स्वर्गत्यै नमः ।
ॐ सुपुष्पायै नमः ।
ॐ पुष्पनिलयायै नमः ।
ॐ फलश्रियै नमः ।
ॐ निष्कलप्रियायै नमः ।
ॐ धनुर्लक्ष्म्यै नमः ।
ॐ अमिलितायै नमः ।
ॐ परक्रोधनिवारिण्यै नमः ।
ॐ कद्र्वै नमः ।
ॐ धनायवे नमः ।
ॐ कपिलायै नमः ।
ॐ सुरसायै नमः ।
ॐ सुरमोहिन्यै नमः ।
ॐ महाश्वेतायै नमः ।
ॐ महानीलायै नमः ।
ॐ महामूर्त्यै नमः ।
ॐ विषापहायै नमः । ७८०

ॐ सुप्रभायै नमः ।
ॐ ज्वालिन्यै नमः ।
ॐ दीप्त्यै नमः ।
ॐ तृप्त्यै नमः ।
ॐ व्याप्त्यै नमः ।
ॐ प्रभाकर्यै नमः ।
ॐ तेजोवत्यै नमः ।
ॐ पद्मबोधायै नमः ।
ॐ मदलेखायै नमः ।
ॐ अरुणावत्यै नमः ।
ॐ रत्नायै नमः ।
ॐ रत्नावलीभूतायै नमः ।
ॐ शतधामायै नमः ।
ॐ शतापहायै नमः ।
ॐ त्रिगुणायै नमः ।
ॐ घोषिण्यै नमः ।
ॐ रक्ष्यायै नमः ।
ॐ नर्दिन्यै नमः ।
ॐ घोषवर्जितायै नमः ।
ॐ साध्यायै नमः । ८००

ॐ अदित्यै नमः ।
ॐ दित्यै नमः ।
ॐ देव्यै नमः ।
ॐ मृगवाहायै नमः ।
ॐ मृगाङ्कगायै नमः ।
ॐ चित्रनीलोत्पलगतायै नमः ।
ॐ वृषरत्नकराश्रयायै नमः ।
ॐ हिरण्यरजतद्वन्द्वायै नमः ।
ॐ शङ्खभद्रासनस्थितायै नमः ।
ॐ गोमूत्रगोमयक्षीरदधिसर्पिर्जलाश्रयायै नमः ।
ॐ मरीचये नमः ।
ॐ चीरवसनायै नमः ।
ॐ पूर्णचन्द्रार्कविष्टरायै नमः ।
ॐ सुसूक्ष्मायै नमः ।
ॐ निर्वृत्यै नमः ।
ॐ स्थूलायै नमः ।
ॐ निवृत्तारातये नमः ।
ॐ मरीच्यै ज्वालिन्यै नमः ।
ॐ धूम्रायै नमः ।
ॐ हव्यवाहायै नमः । ८२०

ॐ हिरण्यदायै नमः ।
ॐ दायिन्यै नमः ।
ॐ कालिन्यै नमः ।
ॐ सिद्ध्यै नमः ।
ॐ शोषिण्यै नमः ।
ॐ सम्प्रबोधिन्यै नमः ।
ॐ भास्वरायै नमः ।
ॐ संहत्यै नमः ।
ॐ तीक्ष्णायै नमः ।
ॐ प्रचण्डज्वलनोज्ज्वलायै नमः ।
ॐ साङ्गायै नमः ।
ॐ प्रचण्डायै नमः ।
ॐ दीप्तायै नमः ।
ॐ वैद्युत्यै नमः ।
ॐ सुमहाद्युत्यै नमः ।
ॐ कपिलायै नमः ।
ॐ नीलरक्तायै नमः ।
ॐ सुषुम्नायै नमः ।
ॐ विस्फुलिङ्गिन्यै नमः ।
ॐ अर्चिष्मत्यै नमः । ८४०

ॐ रिपुहरायै नमः ।
ॐ दीर्घायै नमः ।
ॐ धूमावल्यै नमः ।
ॐ जरायै नमः ।
ॐ सम्पूर्णमण्डलायै नमः ।
ॐ पूष्णे नमः ।
ॐ स्रंसिन्यै नमः ।
ॐ सुमनोहरायै नमः ।
ॐ जयायै नमः ।
ॐ पुष्टिकर्यै नमः ।
ॐ छायायै नमः ।
ॐ मानसायै नमः ।
ॐ हृदयोज्ज्वलायै नमः ।
ॐ सुवर्णकरण्यै नमः ।
ॐ श्रेष्ठायै नमः ।
ॐ रणे मृतसञ्जीवन्यै नमः ।
ॐ विशल्यकरण्यै नमः ।
ॐ शुभ्रायै नमः ।
ॐ सन्धिन्यै नमः ।
ॐ परमौषध्यै नमः । ८६०

ॐ ब्रह्मिष्ठायै नमः ।
ॐ ब्रह्मसहितायै नमः ।
ॐ ऐन्दव्यै नमः ।
ॐ रत्नसम्भवायै नमः ।
ॐ विद्युत्प्रभायै नमः ।
ॐ बिन्दुमत्यै नमः ।
ॐ त्रिस्वभावगुणायै नमः ।
ॐ अम्बिकायै नमः ।
ॐ नित्योदितायै नमः ।
ॐ नित्यदृष्टायै नमः ।
ॐ नित्यकामकरीषिण्यै नमः ।
ॐ पद्माङ्कायै नमः ।
ॐ वज्रचिह्नायै नमः ।
ॐ वक्रदण्डविभासिन्यै नमः ।
ॐ विदेहपूजितायै नमः ।
ॐ कन्यायै नमः ।
ॐ मायायै नमः ।
ॐ विजयवाहिन्यै नमः ।
ॐ मङ्गलायै मानिन्यै नमः ।
ॐ मान्यायै नमः । ८८०

ॐ मानिन्यै नमः ।
ॐ मानदायिन्यै नमः ।
ॐ विश्वेश्वर्यै नमः ।
ॐ गणवत्यै नमः ।
ॐ मण्डलायै नमः ।
ॐ मण्डलेश्वर्यै नमः ।
ॐ हरिप्रियायै नमः ।
ॐ भौमसुतायै नमः ।
ॐ मनोज्ञायै नमः ।
ॐ मतिदायिन्यै नमः ।
ॐ प्रत्यङ्गिरायै नमः ।
ॐ सोमगुप्तायै नमः ।
ॐ मनोऽभिज्ञायै नमः ।
ॐ वदन्मत्यै नमः ।
ॐ यशोधरायै नमः ।
ॐ रत्नमालायै नमः ।
ॐ कृष्णायै नमः ।
ॐ त्रैलोक्यबन्धिन्यै नमः ।
ॐ अमृतायै नमः ।
ॐ धारिण्यै नमः । ९००

ॐ हर्षायै नमः ।
ॐ विनतायै नमः ।
ॐ वल्लक्यै नमः ।
ॐ शच्यै नमः ।
ॐ सङ्कल्पायै नमः ।
ॐ भामिन्यै नमः ।
ॐ मिश्रायै नमः ।
ॐ कादम्बर्यै नमः ।
ॐ अमृतायै नमः ।
ॐ प्रभायै नमः ।
ॐ आगतायै नमः ।
ॐ निर्गतायै नमः ।
ॐ वज्रायै नमः ।
ॐ सुहितायै नमः ।
ॐ सहितायै नमः ।
ॐ अक्षतायै नमः ।
ॐ सर्वार्थसाधनकर्यै नमः ।
ॐ धातवे नमः ।
ॐ धारणिकायै नमः ।
ॐ अमलायै नमः । ९२०

ॐ करुणाधारसम्भूतायै नमः ।
ॐ कमलाक्ष्यै नमः ।
ॐ शशिप्रियायै नमः ।
ॐ सौम्यरूपायै नमः ।
ॐ महादीप्तायै नमः ।
ॐ महाज्वालायै नमः ।
ॐ विकासिन्यै नमः ।
ॐ मालायै नमः ।
ॐ काञ्चनमालायै नमः ।
ॐ सद्वज्रायै नमः ।
ॐ कनकप्रभायै नमः ।
ॐ प्रक्रियायै नमः ।
ॐ परमायै नमः ।
ॐ योक्त्र्यै नमः ।
ॐ क्षोभिकायै नमः ।
ॐ सुखोदयायै नमः ।
ॐ विजृम्भणायै नमः ।
ॐ वज्राख्यायै नमः ।
ॐ शृङ्खलायै नमः ।
ॐ कमलेक्षणायै नमः । ९४०

ॐ जयङ्कर्यै नमः ।
ॐ मधुमत्यै नमः ।
ॐ हरितायै नमः ।
ॐ शशिन्यै नमः ।
ॐ शिवायै नमः ।
ॐ मूलप्रकृत्यै नमः ।
ॐ ईशान्यै नमः ।
ॐ योगमात्रे नमः ।
ॐ मनोजवायै नमः ।
ॐ धर्मोदयायै नमः ।
ॐ भानुमत्यै नमः ।
ॐ सर्वाभासायै नमः ।
ॐ सुखावहायै नमः ।
ॐ धुरन्धरायै नमः ।
ॐ बालायै नमः ।
ॐ धर्मसेव्यायै नमः ।
ॐ तथागतायै नमः ।
ॐ सुकुमारायै नमः ।
ॐ सौम्यमुख्यै नमः ।
ॐ सौम्यसम्बोधनायै नमः । ९६०

ॐ उत्तमायै नमः ।
ॐ सुमुख्यै नमः ।
ॐ सर्वतोभद्रायै नमः ।
ॐ गुह्यशक्त्यै नमः ।
ॐ गुहालयायै नमः ।
ॐ हलायुधायै नमः ।
ॐ कावीरायै नमः ।
ॐ सर्वशास्त्रसुधारिण्यै नमः ।
ॐ व्योमशक्त्यै नमः ।
ॐ महादेहायै नमः ।
ॐ व्योमगायै नमः ।
ॐ मधुमन्मय्यै नमः ।
ॐ गङ्गायै नमः ।
ॐ वितस्तायै नमः ।
ॐ यमुनायै नमः ।
ॐ चन्द्रभागायै नमः ।
ॐ सरस्वत्यै नमः ।
ॐ तिलोत्तमायै नमः ।
ॐ ऊर्वश्यै नमः ।
ॐ रम्भायै नमः । ९८०

ॐ स्वामिन्यै नमः ।
ॐ सुरसुन्दर्यै नमः ।
ॐ बाणप्रहरणायै नमः ।
ॐ बालायै नमः ।
ॐ बिम्बोष्ठ्यै नमः ।
ॐ चारुहासिन्यै नमः ।
ॐ ककुद्मिन्यै नमः ।
ॐ चारुपृष्ठायै नमः ।
ॐ दृष्टादृष्टफलप्रदायै नमः ।
ॐ काम्यचार्यै नमः ।
ॐ काम्यायै नमः ।
ॐ कामाचारविहारिण्यै नमः ।
ॐ हिमशैलेन्द्रसङ्काशायै नमः ।
ॐ गजेन्द्रवरवाहनायै नमः ।
ॐ अशेषसुखसौभाग्यसम्पदां योनये नमः ।
ॐ उत्तमायै नमः ।
ॐ सर्वोत्कृष्टायै नमः ।
ॐ सर्वमय्यै नमः ।
ॐ सर्वायै नमः ।
ॐ सर्वेश्वरप्रियायै नमः । १०००

ॐ सर्वाङ्गयोन्यै नमः ।
ॐ अव्यक्तायै नमः ।
ॐ सम्प्रधानेश्वरेश्वर्यै नमः ।
ॐ विष्णुवक्षःस्थलगतायै नमः ।
ॐ परायै नमः ।
ॐ निर्महिमा देव्यै नमः ।
ॐ हरिवक्षःस्थलाश्रयायै नमः ।
ॐ पापहन्त्र्यै नमः । १००८

(शास्त्रों के नियमानुसार और तंत्र साधना की गोपनीयता को बनाए रखने के लिए, माता कमला के 1000 नामों का पूरा पाठ किसी गुरु के सानिध्य में या प्रामाणिक तांत्रिक ग्रंथ (जैसे- रुद्रयामल तंत्र या तोडल तंत्र) से किया जाना चाहिए। साधक ध्यान, न्यास और विनियोग के पश्चात् माता के 1000 सिद्ध नामों (जैसे- ॐ कमलायै नमः, ॐ रमायै नमः, ॐ महालक्ष्म्यै नमः…) का जाप कमल गट्टे की माला से या पुष्प अर्पित करते हुए करते हैं।)

ये भी पढ़ें:  Shri Dattatreya Sahasranamavali (श्री दत्तात्रेय सहस्रनामावली): Lyrics in Sanskrit, अचूक पाठ विधि और लाभ

साधना का मूल मंत्र (बीज मंत्र): सहस्रनामावली के पाठ से पूर्व माता कमला के जाग्रत बीज मंत्र “ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः” अथवा केवल “श्रीं” (Shreem) का जाप करना अत्यंत फलदायी होता है।

श्री कमला सहस्रनामावली पाठ के अकल्पनीय और अचूक लाभ (Benefits)

जो भी व्यक्ति घोर संकट, व्यापार में पतन, कर्जे या पारिवारिक कलह से जूझ रहा है, उसके लिए कमला सहस्रनामावली का अनुष्ठान एक संजीवनी बूटी है। इसके सिद्ध लाभ निम्नलिखित हैं:

1. दरिद्रता और कंगाली का समूल नाश (Eradication of Poverty)

यह इस पाठ का सबसे बड़ा और प्रत्यक्ष लाभ है। जो साधक विधि-विधान से कमला सहस्रनामावली का पाठ करता है, उसकी सात पीढ़ियों से चली आ रही दरिद्रता भी नष्ट हो जाती है। घर में स्थिर लक्ष्मी (जो कभी छोड़कर न जाए) का वास होता है और अचानक धन प्राप्ति के मार्ग खुलने लगते हैं।

2. व्यापार और करियर में अद्वितीय सफलता

अगर आपका व्यापार बंध गया है, बार-बार घाटा हो रहा है, या नौकरी में प्रमोशन रुका हुआ है, तो 1000 नामों के उच्चारण से उत्पन्न ऊर्जा आपके कार्यस्थल की सभी नकारात्मक शक्तियों (बुरी नज़र, तंत्र बाधा) को नष्ट कर देती है।

3. आकर्षण और असीम सौंदर्य की प्राप्ति

माता कमला सौंदर्य और कांति की देवी हैं। उनके पाठ से साधक के चेहरे पर एक अद्भुत तेज (Hypnotic Aura) आ जाता है। लोग उसकी वाणी से प्रभावित होते हैं। जो लोग कला, अभिनय, राजनीति या पब्लिक डीलिंग के क्षेत्र में हैं, उनके लिए यह पाठ किसी चमत्कार से कम नहीं है।

4. अष्टलक्ष्मी की प्राप्ति

कमला देवी के सहस्रनाम में माता के अष्ट स्वरूपों (आदि लक्ष्मी, धन लक्ष्मी, धान्य लक्ष्मी, गजलक्ष्मी, संतान लक्ष्मी, वीर लक्ष्मी, जय लक्ष्मी, और विद्या लक्ष्मी) की स्तुति होती है। अतः साधक को केवल धन ही नहीं, बल्कि उत्तम स्वास्थ्य, सुयोग्य संतान, ज्ञान और समाज में अपार यश की प्राप्ति होती है।

5. शुक्र ग्रह के दोषों की पूर्ण शांति

ज्योतिष शास्त्र में ऐश्वर्य, विलासिता और प्रेम का कारक ‘शुक्र’ (Venus) ग्रह है। जिन लोगों की कुंडली में शुक्र नीच का हो, पीड़ित हो या वैवाहिक जीवन में भारी क्लेश चल रहा हो, उनके लिए कमला सहस्रनामावली का पाठ शुक्र ग्रह को अत्यंत बलवान बना देता है। इससे दांपत्य जीवन में मधुरता और भौतिक सुखों की वर्षा होती है।

6. मोक्ष और कुंडलिनी जागरण

जैसा कि पहले बताया गया है, माता कमला ‘महाविद्या’ हैं। उनका उद्देश्य केवल भौतिक सुख देना नहीं है। सहस्रनाम का लंबे समय तक नियमित अभ्यास करने से साधक के मूलाधार से लेकर सहस्रार चक्र तक की यात्रा सुगम हो जाती है। कुंडलिनी शक्ति जाग्रत होती है और अंततः साधक जीवन-मरण के चक्र से मुक्त होकर शिव-सायुज्य (मोक्ष) को प्राप्त करता है।

श्री कमला सहस्रनामावली की प्रामाणिक पाठ विधि (Authentic Puja Vidhi)

दस महाविद्याओं की साधना कभी भी बिना नियमों के नहीं की जाती। माता कमला सौम्य रूप में भी असीम शक्तिशाली हैं, अतः इनकी उपासना में पवित्रता और सही विधि का होना अनिवार्य है:

1. उत्तम दिन, तिथि और समय

माता कमला की साधना आरंभ करने के लिए शुक्रवार, पूर्णिमा, अक्षय तृतीया, दिवाली की रात (महानिशा) या नवरात्रि (विशेषकर गुप्त नवरात्रि) के दिन सबसे उत्तम माने गए हैं। तांत्रिक साधना के लिए इसे रात्रि 9 बजे के बाद (निशीथ काल) में करना सर्वश्रेष्ठ है, जबकि सामान्य गृहस्थ इसे प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में भी कर सकते हैं।

2. आसन, दिशा और वस्त्र

स्नान कर पूर्ण रूप से शुद्ध हो जाएं। गुलाबी, लाल या पीले रंग के रेशमी वस्त्र धारण करें। आपका आसन भी गुलाबी या लाल रंग का होना चाहिए। पूजा करते समय अपना मुख पूर्व (East) या उत्तर (North) दिशा की ओर रखें। (उत्तर दिशा कुबेर की है, जो धन प्राप्ति के लिए सर्वश्रेष्ठ है)।

3. पूजन सामग्री और श्री यंत्र स्थापना

माता कमला की उपासना ‘श्री यंत्र’ (Shri Yantra) या ‘कमल गट्टे की माला’ के बिना अधूरी है। एक लकड़ी की चौकी पर लाल या गुलाबी रेशमी कपड़ा बिछाएं। उस पर माता कमला का चित्र (जिसमें हाथी उन्हें स्नान करा रहे हों) और एक सिद्ध पारद या स्फटिक का श्री यंत्र स्थापित करें।

4. संकल्प और ध्यान

हाथ में जल, अक्षत, और एक गुलाबी पुष्प लेकर संकल्प लें कि आप अपनी किस मनोकामना की पूर्ति के लिए (जैसे- कर्ज मुक्ति, व्यापार वृद्धि) माता के सहस्रनाम का पाठ कर रहे हैं। जल धरती पर छोड़ दें और आँखें बंद करके माता के स्वर्णमयी स्वरूप का ध्यान करें।

5. सहस्रनामावली का अर्पण (पुष्पांजलि या कुमकुम)

1000 नामों का पाठ केवल पढ़ने तक सीमित नहीं है। सबसे सिद्ध तरीका यह है कि आप अपने पास 1000 कमल गट्टे, गुलाब की पंखुड़ियां या कमल के फूल रखें। माता का एक नाम बोलें (जैसे- ॐ कमलायै नमः) और एक कमल गट्टा/पंखुड़ी श्री यंत्र या माता के चित्र पर अर्पित करें। 1000 नामों के साथ 1000 आहुतियां देना ‘सहस्रार्चन’ कहलाता है, जो अचूक फल देता है।

6. भोग और आरती

माता कमला को खीर, मावे की मिठाई, मिश्री, और अनार का भोग अत्यंत प्रिय है। पाठ संपन्न होने के बाद गाय के शुद्ध घी के दीपक से माता की आरती करें। अंत में क्षमा प्रार्थना अवश्य पढ़ें और प्रसाद सभी को बांट दें।

माता कमला की साधना के कठोर नियम (Rules & Precautions)

महाविद्याओं की उपासना आगम की आग के समान है; यदि सही से सेंकी जाए तो भोजन पकता है, अन्यथा हाथ जल सकता है। इन नियमों का पालन अनिवार्य है:

  • पूर्ण ब्रह्मचर्य: जब तक आपका अनुष्ठान (जैसे 11 दिन, 21 दिन या 41 दिन) चले, पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करें। मानसिक और शारीरिक पवित्रता सबसे महत्वपूर्ण है।

  • सात्विक आहार: साधना काल के दौरान लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा, और किसी भी प्रकार के तामसिक भोजन का पूर्णतया त्याग करें।

  • गोपनीयता (Secrecy): तंत्र साधना का सबसे बड़ा नियम यह है कि अपनी साधना, इष्ट और मंत्र के बारे में किसी को (अपने परिवार को भी) अनावश्यक न बताएं। जो साधना गुप्त रहती है, वही सिद्ध होती है।

  • स्त्रियों का सम्मान: माता कमला स्वयं स्त्री शक्ति का सर्वोच्च रूप हैं। जो व्यक्ति अपने घर की स्त्रियों (पत्नी, माता, बहन) का अपमान करता है, चरित्रहीन है या पराई स्त्रियों पर कुदृष्टि रखता है, उस पर माता कमला कभी कृपा नहीं करतीं; बल्कि उसका सर्वनाश हो जाता है।

  • क्रोध और अहंकार का त्याग: धन आने पर अक्सर व्यक्ति में अहंकार आ जाता है। माता की पूजा के दौरान और बाद में भी अपने व्यवहार में नम्रता रखें। क्रोध से ‘श्री’ (लक्ष्मी) तुरंत घर से बाहर चली जाती है।

माता लक्ष्मी और महाविद्या कमला में क्या अंतर है?

कई लोगों के मन में यह प्रश्न उठता है कि जब हम श्री सूक्त या कनकधारा स्तोत्र से महालक्ष्मी की पूजा कर सकते हैं, तो तांत्रिक महाविद्या कमला की उपासना क्यों?

  • महालक्ष्मी भगवान विष्णु की पत्नी हैं। वे सात्विक ऊर्जा का प्रतीक हैं। उनकी पूजा बहुत ही सौम्य तरीके से, धीरे-धीरे भौतिक सुख प्रदान करती है।

  • महाविद्या कमला साक्षात् आदि शक्ति का वह तांत्रिक और उग्र स्वरूप हैं जो ब्रह्मांड की पूरी व्यवस्था को संचालित करती हैं। इनकी उपासना से त्वरित (Quick) परिणाम मिलते हैं। जहाँ सामान्य लक्ष्मी पूजा से धन आता है, वहीं कमला महाविद्या की पूजा से ‘अधिकार’, ‘प्रभुत्व’ (Dominance), अजेय शक्ति और अंततः शिव तत्व (मोक्ष) की प्राप्ति होती है। कमला साधना शत्रुओं और तंत्र-बाधा का भी नाश करती है, जो सामान्य लक्ष्मी पूजा में नहीं होता।

Shri Kamala Sahasranamavali कोई साधारण स्तुति नहीं है; यह एक ऐसा जाग्रत तांत्रिक अस्त्र है जो मानव जीवन की हर शून्यता को भर सकता है। चाहे आप कर्जे के दलदल में धंस चुके हों, व्यापार में सब कुछ खत्म हो चुका हो, या समाज में यश और सम्मान खो चुके हों—माता कमला की शरण में जाने से आपका भाग्य रातों-रात पलट सकता है।

कमला साधना की सबसे बड़ी सुंदरता यह है कि यह हमें यह नहीं सिखाती कि ईश्वर को पाने के लिए दरिद्र होना या सब कुछ छोड़ना आवश्यक है। बल्कि, यह सिखाती है कि आप राजा की तरह ऐश्वर्य का भोग करते हुए भी आध्यात्मिक रूप से एक योगी बन सकते हैं।

आज से ही अपने जीवन में सकारात्मकता, पवित्रता और अटूट श्रद्धा लाएं। शुभ मुहूर्त देखकर माता कमला के सहस्रनाम का पाठ या अर्चन आरंभ करें। कुछ ही दिनों में आप अपने आस-पास और जीवन में होने वाले उन चमत्कारों को अनुभव करेंगे, जिनकी आपने कभी कल्पना भी नहीं की होगी। जय माता कमला! जय महालक्ष्मी!

श्री कमला सहस्रनामावली: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. क्या सामान्य गृहस्थ श्री कमला सहस्रनामावली का पाठ कर सकते हैं?

जी हाँ, बिल्कुल। माता कमला दस महाविद्याओं में सबसे सौम्य और कल्याणकारी मानी जाती हैं। गृहस्थ साधक धन-धान्य, ऐश्वर्य, पारिवारिक सुख और जीवन से दरिद्रता को दूर करने के लिए पूरी सात्विकता और पवित्रता के साथ इनके सहस्रनाम का पाठ कर सकते हैं।

2. सहस्रनामावली का पाठ करने का सबसे उत्तम समय क्या है?

माता कमला की उपासना के लिए शुक्रवार का दिन, पूर्णिमा तिथि या दिवाली की रात सबसे उत्तम मानी जाती है। पाठ के लिए प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त या फिर रात्रि 9 बजे के बाद का समय (तांत्रिक साधना के लिए) अत्यंत शुभ और शीघ्र फलदायी होता है।

3. माता कमला को प्रसन्न करने के लिए पाठ के समय क्या अर्पित करना चाहिए?

माता कमला को कमल का फूल अत्यंत प्रिय है। सहस्रनाम का पाठ करते समय प्रत्येक नाम के साथ एक ‘कमल गट्टा’ (Lotus Seed) या गुलाब की पंखुड़ी श्री यंत्र या माता के चित्र पर अर्पित करना ‘सहस्रार्चन’ कहलाता है, जो बहुत शक्तिशाली अनुष्ठान है।

4. क्या कमला महाविद्या की साधना के लिए गुरु दीक्षा अनिवार्य है?

यदि आप माता कमला की तंत्रोक्त ‘महाविद्या’ के रूप में उग्र साधना, सकाम अनुष्ठान या किसी विशेष सिद्धि के लिए मंत्र जाप कर रहे हैं, तो एक योग्य गुरु से दीक्षा लेना अनिवार्य है। परंतु, यदि आप केवल भक्ति भाव और सामान्य सुख-समृद्धि के लिए सहस्रनामावली का साधारण पाठ कर रहे हैं, तो गुरु दीक्षा के बिना भी इसे किया जा सकता है।

5. कमला सहस्रनाम का पाठ करते समय किन नियमों का विशेष ध्यान रखना चाहिए?

इस पाठ को करते समय पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन, मांस-मदिरा और तामसिक भोजन (लहसुन-प्याज) का त्याग, साफ-सफाई, और स्त्रियों का सम्मान करना सबसे महत्वपूर्ण नियम हैं। क्रोध और अहंकार करने से माता रुष्ट हो जाती हैं।

"नमस्कार! मैं अमित तिवारी हूँ, और आप मुझे एक 'साधक' के रूप में जान सकते हैं। बचपन से ही सनातन धर्म, तंत्र-मंत्र और आध्यात्मिक साधनाओं ने मुझे अपनी ओर गहराई से आकर्षित किया है। वर्षों के निरंतर अध्ययन, गुरु-कृपा और अपने व्यक्तिगत साधना-अनुभवों से मैंने जो कुछ भी सीखा है, उसे मैं sadhnas.in के माध्यम से आपके साथ साझा कर रहा हूँ। मेरा मुख्य उद्देश्य इंटरनेट पर फैले भ्रम को दूर करके प्रामाणिक, सत्य और शास्त्र-सम्मत जानकारी को बेहद सरल भाषा में आप तक पहुँचाना है। मैं कोई गुरु या उपदेशक नहीं हूँ, बल्कि आप ही की तरह ईश्वर की खोज में निकला एक राही हूँ। मेरी यही कोशिश है कि मेरे अनुभवों और लेखनी से आपकी आध्यात्मिक यात्रा और भी सुगम व सफल हो सके।"

error: Content is protected !!