श्री चण्डिका दल स्तुतिः (संस्कृत) | Shri Chandika Dala Stuti Lyrics in SanskritIt takes 2 minutes... to read this article !

श्री चण्डिका दल स्तुतिः का संपूर्ण संस्कृत पाठ पढ़ें। मां चण्डिका की महिमा, शक्ति और कृपा का वर्णन करने वाली इस पवित्र स्तुति के श्लोक यहां उपलब्ध हैं।

श्री चण्डिका दल स्तुतिः मां चण्डिका को समर्पित एक पवित्र स्तुति है। देवी चण्डिका को आदिशक्ति, दुर्गा और चामुण्डा के उग्र एवं दिव्य स्वरूप के रूप में पूजा जाता है। इस लेख में श्री चण्डिका दल स्तुतिः का संपूर्ण संस्कृत पाठ प्रस्तुत किया गया है।

श्री चण्डिका दल स्तुतिः मूल पाठ

ओं नमो भगवति जय जय चामुण्डिके, चण्डेश्वरि, चण्डायुधे, चण्डरूपे, ताण्डवप्रिये, कुण्डलीभूतदिङ्नागमण्डित गण्डस्थले, समस्त जगदण्ड संहारकारिणि, परे, अनन्तानन्दरूपे, शिवे, नरशिरोमालालङ्कृतवक्षःस्थले, महाकपाल मालोज्ज्वल मणिमकुट चूडाबद्ध चन्द्रखण्डे, महाभीषणि, देवि, परमेश्वरि, ग्रहायुः किल महामाये, षोडशकलापरिवृतोल्लासिते, महादेवासुर समरनिहतरुधिरार्द्रीकृत लम्भित तनुकमलोद्भासिताकार सम्पूर्ण रुधिरशोभित महाकपाल चन्द्रांसि निहिता बद्ध्यमान रोमराजी सहित मोहकाञ्ची दामोज्ज्वलीकृत नव सारुणी कृत नूपुरप्रज्वलित महीमण्डले, महाशम्भुरूपे, महाव्याघ्रचर्माम्बरधरे, महासर्पयज्ञोपवीतिनि, महाश्मशान भस्मावधूलित सर्वगात्रे, कालि, महाकालि, कालाग्नि रुद्रकालि, कालसङ्कर्षिणि, कालनाशिनि, कालरात्रि, रात्रिसञ्चारिणि, शवभक्षिणि, नानाभूत प्रेत पिशाचादि गण सहस्र सञ्चारिणि, धगद्धगेत्या भासित मांसखण्डे, गात्रविक्षेप कलकल समान कङ्काल रूपधारिणि, नानाव्याधि प्रशमनि, सर्वदुष्टशमनि, सर्वदारिद्र्यनाशिनि, मधुमांस रुधिरावसिक्त विलासिनि, सकलसुरासुर गन्धर्व यक्ष विद्याधर किन्नर किम्पुरुषादिभिः स्तूयमानचरिते, सकलमन्त्रतन्त्रादि भूताधिकारिणि, सर्वशक्ति प्रधाने, सकललोकभाविनि, सकल दुरित प्रक्षालिनि, सकललोकैक जननि, ब्रह्माणि माहेश्वरि कौमारि वैष्णवि शङ्खिनि वाराहि इन्द्राणि चामुण्डि महालक्ष्मी रूपे, महाविद्ये, योगिनि, योगेश्वरि, चण्डिके, महामाये, विश्वेश्वररूपिणि, सर्वाभरणभूषिते, अतल वितल नितल सुतल रसातल तलातल पाताल भूलोक भुवर्लोक सुवर्लोक महर्लोक जनोलोक तपोलोक सत्यलोक चतुर्दश भुवनैक नायिके, ओं नमः पितामहाय ओं नमो नारायणाय ओं नमः शिवायेति सकललोकजाजप्यमाने, ब्रह्म विष्णु शिव दण्ड कमण्डलु कुण्डल शङ्ख चक्र गदा परशु शूल पिनाक टङ्कधारिणि, सरस्वति, पद्मालये, पार्वती, सकल जगत्स्वरूपिणि, महाक्रूरे, प्रसन्नरूपधारिणि, सावित्रि, सर्वमङ्गलप्रदे, महिषासुरमर्दिनि, कात्यायनि, दुर्गे, निद्रारूपिणि, शर चाप शूल कपाल करवाल खड्ग डमरुकाङ्कुश गदा परशु शक्ति भिण्डिवाल तोमर भुशुण्डि मुसल मुद्गर प्रास परिघ दण्डायुध दोर्दण्ड सहस्रे, इन्द्राग्नि यम निर्‍ऋति वरुण वायु कुबेरेशान प्रधानशक्ति हेतुभूते, चन्द्रार्कवह्निनयने, सप्तद्वीप समुद्रोपर्युपरि व्याप्ते, ईश्वरि, महासचराचर प्रपञ्चान्तरुधिरे, महाप्रभावे, महाकैलास पर्वतोद्यान वनक्षेत्र नदीतीर्थ देवताद्यायतनालङ्कृत मेदिनी नायिके, वसिष्ठ वामदेवादि सकल मुनिगण वन्द्यमान चरणारविन्दे, द्विचत्वारिंशद्वर्ण माहात्म्ये, पर्याप्त वेदवेदाङ्गाद्यनेक शास्त्राधारभूते, शब्द ब्रह्ममये, लिपि देवते, मातृकादेवि, चिरं मां रक्ष रक्ष, मम शत्रून् हुङ्कारेण नाशय नाशय, मम भूत प्रेत पिशाचादीनुच्चाटय उच्चाटय, स्तम्भय स्तम्भय, समस्त ग्रहान्वशीकुरु वशीकुरु, स्तोभय स्तोभय, उन्मादयोन्मादय, सङ्क्रामय सङ्क्रामय, विध्वंसय विध्वंसय, विमर्दय विमर्दय, विराधय विराधय विद्रावय विद्रावय, सकलारातीन्मूर्ध्नि स्फोटय स्फोटय, मम शत्रून् शीघ्रं मारय मारय, जाग्रत्स्वप्न सुषुप्त्यवस्थास्वस्माञ्छत्रुमृत्यु ज्वरादि नाना रोगेभ्यो नानाभिचारेभ्यः परकर्म परमन्त्र परयन्त्र परतन्त्र परमन्त्रौषध शल्यशून्य क्षुद्रेभ्यः सम्यग्रक्ष रक्ष, ओं श्रीं ह्रीं, मम सर्वशत्रु प्राणसंहार कारिणि हुं फट् स्वाहा ।

॥ इति श्री चण्डिका दल स्तुतिः ॥

इस प्रकार श्री चण्डिका दल स्तुतिः देवी चण्डिका की आराधना और स्तुति का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। श्रद्धा एवं भक्ति के साथ इसके पाठ द्वारा भक्त देवी की कृपा, शक्ति, संरक्षण और आध्यात्मिक उन्नति की प्रार्थना करते हैं।

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