श्री शङ्करभगवत्पादाचार्य स्तुतिः (संस्कृत) | Shri Shankar Bhagavatpadacharya Stuti Lyrics in SanskritIt takes 1 minutes... to read this article !

श्री शङ्करभगवत्पादाचार्य स्तुतिः का संपूर्ण संस्कृत पाठ पढ़ें। आदि शंकराचार्य की महिमा, ज्ञान, वैराग्य और अद्वैत वेदान्त के दिव्य उपदेशों का वर्णन करने वाली इस पवित्र स्तुति के श्लोक यहां उपलब्ध हैं।

श्री शङ्करभगवत्पादाचार्य स्तुतिः जगद्गुरु आदि शंकराचार्य को समर्पित एक पवित्र स्तुति है। आदि शंकराचार्य ने अद्वैत वेदान्त के सिद्धांतों का प्रचार कर सनातन धर्म के पुनर्जागरण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस स्तुति में उनके दिव्य ज्ञान, वैराग्य, करुणा एवं गुरु स्वरूप का सुंदर वर्णन किया गया है।

मुदा करेण पुस्तकं दधानमीशरूपिणं
तथाऽपरेण मुद्रिकां नमत्तमोविनाशिनीम् ।
कुसुम्भवाससावृतं विभूतिभासिफालकं
नताऽघनाशने रतं नमामि शङ्करं गुरुम् ॥ १

पराशरात्मजप्रियं पवित्रितक्षमातलं
पुराणसारवेदिनं सनन्दनादिसेवितम् ।
प्रसन्नवक्त्रपङ्कजं प्रपन्नलोकरक्षकं
प्रकाशिताद्वितीयतत्त्वमाश्रयामि देशिकम् ॥ २

सुधांशुशेखरार्चकं सुधीन्द्रसेव्यपादुकं
सुतादिमोहनाशकं सुशान्तिदान्तिदायकम् ।
समस्तवेदपारगं सहस्रसूर्यभासुरं
समाहिताखिलेन्द्रियं सदा भजामि शङ्करम् ॥ ३

यमीन्द्रचक्रवर्तिनं यमादियोगवेदिनं
यथार्थतत्त्वबोधकं यमान्तकात्मजार्चकम् ।
यमेव मुक्तिकाङ्क्षया समाश्रयन्ति सज्जनाः
नमाम्यहं सदा गुरुं तमेव शङ्कराभिधम् ॥ ४

स्वबाल्य एव निर्भरं य आत्मनो दयालुतां
दरिद्रविप्रमन्दिरे सुवर्णवृष्टिमानयन् ।
प्रदर्श्य विस्मयाम्बुधौ न्यमज्जयत् समाञ्जनान्
स एव शङ्करस्सदा जगद्गुरुर्गतिर्मम ॥ ५

यदीयपुण्यजन्मना प्रसिद्धिमाप कालटी
यदीयशिष्यतां व्रजन् स तोटकोऽपि पप्रथे ।
य एव सर्वदेहिनां विमुक्तिमार्गदर्शकः
नराकृतिं सदाशिवं तमाश्रयामि सद्गुरुम् ॥ ६

सनातनस्य वर्त्मनः सदैव पालनाय यः
चतुर्दिशासु सन्मठान् चकार लोकविश्रुतान् ।
विभाण्डकात्मजाश्रमादिसुस्थलेषु पावनान्
तमेव लोकशङ्करं नमामि शङ्करं गुरुम् ॥ ७

यदीयहस्तवारिजातसुप्रतिष्ठिता सती
प्रसिद्धशृङ्गभूधरे सदा प्रशान्तिभासुरे ।
स्वभक्तपालनव्रता विराजते हि शारदा
स शङ्करः कृपानिधिः करोतु मामनेनसम् ॥ ८

इमं स्तवं जगद्गुरोर्गुणानुवर्णनात्मकं
समादरेण यः पठेदनन्यभक्तिसम्युतः ।
समाप्नुयात्समीहितं मनोरथं नरोऽचिरा-
-द्दयानिधेस्स शङ्करस्य सद्गुरोः प्रसादतः ॥ ९

इति श्री शङ्करभगवत्पादाचार्य स्तुतिः ।

इस प्रकार श्री शङ्करभगवत्पादाचार्य स्तुतिः आदि शंकराचार्य की महान आध्यात्मिक परंपरा और दिव्य ज्ञान का स्मरण कराती है। श्रद्धा एवं भक्ति के साथ इसके पाठ द्वारा साधक गुरु-कृपा, ज्ञान, विवेक तथा आध्यात्मिक उन्नति की प्रार्थना करते हैं।

हमारी संपादकीय टीम अनुभवी वैदिक एवं तांत्रिक साधकों का एक समर्पित समूह है। टीम द्वारा वेद, तंत्र और प्राचीन शास्त्रों का गहन अध्ययन कर प्रामाणिक एवं शास्त्रसम्मत जानकारी तैयार की जाती है। हमारा उद्देश्य साधकों तक विश्वसनीय आध्यात्मिक ज्ञान, मंत्र, स्तोत्र एवं साधना संबंधी मार्गदर्शन सरल और प्रमाणिक रूप में पहुँचाना है।

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