श्री द्वादशार्या सूर्य स्तुतिः (संस्कृत) | Shri Dvadasharya Surya Stuti Lyrics in SanskritIt takes 2 minutes... to read this article !

श्री द्वादशार्या सूर्य स्तुतिः का संपूर्ण संस्कृत पाठ पढ़ें। भगवान सूर्यदेव की महिमा, तेज, आरोग्यप्रद एवं जीवनदायी स्वरूप का वर्णन करने वाली इस पवित्र स्तुति के श्लोक यहां उपलब्ध हैं।

श्री द्वादशार्या सूर्य स्तुतिः भगवान सूर्यदेव की महिमा का वर्णन करने वाली एक पवित्र एवं प्रभावशाली स्तुति है। इस स्तुति में सूर्य भगवान के तेजस्वी, जीवनदायी, रोगनाशक तथा समस्त जगत् को प्रकाश प्रदान करने वाले दिव्य स्वरूप का गुणगान किया गया है। श्रद्धापूर्वक इसके पाठ से आरोग्य, ऊर्जा, आत्मबल एवं सकारात्मकता की प्राप्ति की कामना की जाती है। इस लेख में श्री द्वादशार्या सूर्य स्तुतिः का संपूर्ण संस्कृत पाठ प्रस्तुत किया गया है।

उद्यन्नद्य विवस्वानारोहन्नुत्तरां दिवं देवः ।
हृद्रोगं मम सूर्यो हरिमाणं चाऽऽशु नाशयतु ॥ १ ॥

निमिषार्धेनैकेन द्वे च शते द्वे सहस्रे द्वे ।
क्रममाण योजनानां नमोऽस्तु ते नलिननाथाय ॥ २ ॥

कर्मज्ञानखदशकं मनश्च जीव इति विश्वसर्गाय ।
द्वादशधा यो विचरति स द्वादशमूर्तिरस्तु मोदाय ॥ ३ ॥

त्वं हि यजू ऋक् सामः त्वमागमस्त्वं वषट्कारः ।
त्वं विश्वं त्वं हंसः त्वं भानो परमहंसश्च ॥ ४ ॥

शिवरूपात् ज्ञानमहं त्वत्तो मुक्तिं जनार्दनाकारात् ।
शिखिरूपादैश्वर्यं त्वत्तश्चारोग्यमिच्छामि ॥ ५ ॥

त्वचि दोषा दृशि दोषाः हृदि दोषा येऽखिलेन्द्रियजदोषाः ।
तान् पूषा हतदोषः किञ्चिद्रोषाग्निना दहतु ॥ ६ ॥

धर्मार्थकाममोक्षप्रतिरोधानुग्रतापवेगकरान् ।
बन्दीकृतेन्द्रियगणान् गदान् विखण्डयतु चण्डांशुः ॥ ७ ॥

येन विनेदं तिमिरं जगदेत्य ग्रसति चरमचरमखिलम् ।
धृतबोधं तं नलिनीभर्तारं हर्तारमापदामीडे ॥ ८ ॥

यस्य सहस्राभीशोरभीशु लेशो हिमांशुबिम्बगतः ।
भासयति नक्तमखिलं भेदयतु विपद्गणानरुणः ॥ ९ ॥

तिमिरमिव नेत्रतिमिरं पटलमिवाऽशेषरोगपटलं नः ।
काशमिवाधिनिकायं कालपिता रोगयुक्ततां हरतात् ॥ १० ॥

वाताश्मरीगदार्शस्त्वग्दोषमहोदरप्रमेहांश्च ।
ग्रहणीभगन्धराख्या महतीस्त्वं मे रुजो हंसि ॥ ११ ॥

त्वं माता त्वं शरणं त्वं धाता त्वं धनं त्वमाचार्यः ।
त्वं त्राता त्वं हर्ता विपदामर्क प्रसीद मम भानो ॥ १२ ॥

इत्यार्याद्वादशकं साम्बस्य पुरो नभः स्थलात्पतितम् ।
पठतां भाग्यसमृद्धिः समस्तरोगक्षयश्च स्यात् ॥ १३ ॥

इति श्रीसाम्बकृत श्री द्वादशार्या सूर्य स्तुतिः ।

इस प्रकार श्री द्वादशार्या सूर्य स्तुतिः सूर्यदेव की दिव्य महिमा का स्मरण कराने वाला एक श्रेष्ठ स्तोत्र है। भक्ति और श्रद्धा के साथ इसके पाठ से स्वास्थ्य, तेज, आत्मविश्वास तथा जीवन में सफलता और शुभता की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

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