श्री रुद्र स्तुतिः का संपूर्ण संस्कृत पाठ पढ़ें। भगवान रुद्र शिव की महिमा, करुणा, संहारशक्ति एवं कल्याणकारी स्वरूप का वर्णन करने वाली इस पवित्र स्तुति के श्लोक यहां उपलब्ध हैं।
श्री रुद्र स्तुतिः भगवान शिव के रुद्र स्वरूप की महिमा का गुणगान करने वाली एक दिव्य एवं प्रभावशाली स्तुति है। इसमें रुद्रदेव के कल्याणकारी, करुणामय, संहारक तथा जगत् के रक्षक स्वरूप का सुंदर वर्णन किया गया है। श्रद्धापूर्वक इसके पाठ से भक्त भगवान शिव की कृपा, भय से मुक्ति, आध्यात्मिक शक्ति तथा जीवन में मंगल की कामना करते हैं। इस लेख में श्री रुद्र स्तुतिः का संपूर्ण संस्कृत पाठ प्रस्तुत किया गया है।
श्री रुद्र स्तुतिः
नमो देवाय महते देवदेवाय शूलिने ।
त्र्यम्बकाय त्रिनेत्राय योगिनां पतये नमः ॥ १ ॥
नमोऽस्तु देवदेवाय महादेवाय वेधसे ।
शम्भवे स्थाणवे नित्यं शिवाय परमात्मने ॥ २ ॥
नमः सोमाय रुद्राय महाग्रासाय हेतवे ।
प्रपद्येहं विरूपाक्षं शरण्यं ब्रह्मचारिणम् ॥ ३ ॥
महादेवं महायोगमीशानं त्वम्बिकापतिम् ।
योगिनां योगदाकारं योगमायासमाहृतम् ॥ ४ ॥
योगिनां गुरुमाचार्यं योगगम्यं सनातनम् ।
संसारतारणं रुद्रं ब्रह्माणं ब्रह्मणोऽधिपम् ॥ ५ ॥
शाश्वतं सर्वगं शान्तं ब्रह्माणं ब्राह्मणप्रियम् ।
कपर्दिनं कलामूर्तिममूर्तिममरेश्वरम् ॥ ६ ॥
एकमूर्तिं महामूर्तिं वेदवेद्यं सतां गतिम् ।
नीलकण्ठं विश्वमूर्तिं व्यापिनं विश्वरेतसम् ॥ ७ ॥
कालाग्निं कालदहनं कामिनं कामनाशनम् ।
नमामि गिरिशं देवं चन्द्रावयवभूषणम् ॥ ८ ॥
त्रिलोचनं लेलिहानमादित्यं परमेष्ठिनम् ।
उग्रं पशुपतिं भीमं भास्करं तमसः परम् ॥ ९ ॥
इति श्रीकूर्मपुराणे व्यासोक्त रुद्रस्तुतिः ॥
इस प्रकार श्री रुद्र स्तुतिः भगवान शिव के रुद्र स्वरूप का स्मरण कराने वाला एक पवित्र स्तोत्र है। भक्ति एवं श्रद्धा के साथ इसके पाठ से मन की शुद्धि, आध्यात्मिक उन्नति, साहस तथा शिवकृपा की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।