श्री महालक्ष्मी स्तुतिः का संपूर्ण संस्कृत पाठ पढ़ें। मां महालक्ष्मी की महिमा, कृपा, धन-समृद्धि और मंगलमय स्वरूप का वर्णन करने वाली इस पवित्र स्तुति के श्लोक यहां उपलब्ध हैं।
श्री महालक्ष्मी स्तुतिः मां महालक्ष्मी को समर्पित एक पवित्र स्तुति है। देवी महालक्ष्मी धन, वैभव, सौभाग्य, ऐश्वर्य और समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती हैं। इस स्तुति में देवी के दिव्य स्वरूप, करुणा और कृपा का सुंदर वर्णन किया गया है। इस लेख में श्री महालक्ष्मी स्तुतिः का संपूर्ण संस्कृत पाठ प्रस्तुत किया गया है।
श्री महालक्ष्मी स्तुतिः
आदिलक्ष्मि नमस्तेऽस्तु परब्रह्मस्वरूपिणि ।
यशो देहि धनं देहि सर्वकामांश्च देहि मे ॥ १ ॥
सन्तानलक्ष्मि नमस्तेऽस्तु पुत्रपौत्रप्रदायिनि ।
पुत्रान् देहि धनं देहि सर्वकामांश्च देहि मे ॥ २ ॥
विद्यालक्ष्मि नमस्तेऽस्तु ब्रह्मविद्यास्वरूपिणि ।
विद्यां देहि कलान् देहि सर्वकामांश्च देहि मे ॥ ३ ॥
धनलक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्वदारिद्र्यनाशिनि ।
धनं देहि श्रियं देहि सर्वकामांश्च देहि मे ॥ ४ ॥
धान्यलक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्वाभरणभूषिते ।
धान्यं देहि धनं देहि सर्वकामांश्च देहि मे ॥ ५ ॥
मेधालक्ष्मि नमस्तेऽस्तु कलिकल्मषनाशिनि ।
प्रज्ञां देहि श्रियं देहि सर्वकामांश्च देहि मे ॥ ६ ॥
गजलक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्वदेवस्वरूपिणि ।
अश्वांश्च गोकुलं देहि सर्वकामांश्च देहि मे ॥ ७ ॥
वीरलक्ष्मि नमस्तेऽस्तु पराशक्तिस्वरूपिणि ।
वीर्यं देहि बलं देहि सर्वकामांश्च देहि मे ॥ ८ ॥
जयलक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्वकार्यजयप्रदे ।
जयं देहि शुभं देहि सर्वकामांश्च देहि मे ॥ ९ ॥
भाग्यलक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सौमाङ्गल्यविवर्धिनि ।
भाग्यं देहि श्रियं देहि सर्वकामांश्च देहि मे ॥ १० ॥
कीर्तिलक्ष्मि नमस्तेऽस्तु विष्णुवक्षःस्थलस्थिते ।
कीर्तिं देहि श्रियं देहि सर्वकामांश्च देहि मे ॥ ११ ॥
आरोग्यलक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्वरोगनिवारणि ।
आयुर्देहि श्रियं देहि सर्वकामांश्च देहि मे ॥ १२ ॥
सिद्धलक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्वसिद्धिप्रदायिनि ।
सिद्धिं देहि श्रियं देहि सर्वकामांश्च देहि मे ॥ १३ ॥
सौन्दर्यलक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्वालङ्कारशोभिते ।
रूपं देहि श्रियं देहि सर्वकामांश्च देहि मे ॥ १४ ॥
साम्राज्यलक्ष्मि नमस्तेऽस्तु भुक्तिमुक्तिप्रदायिनि ।
मोक्षं देहि श्रियं देहि सर्वकामांश्च देहि मे ॥ १५ ॥
मङ्गले मङ्गलाधारे माङ्गल्ये मङ्गलप्रदे ।
मङ्गलार्थं मङ्गलेशि माङ्गल्यं देहि मे सदा ॥ १६ ॥
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके ।
शरण्ये त्र्यम्बके देवि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥ १७ ॥
शुभं भवतु कल्याणी आयुरारोग्यसम्पदाम् ।
मम शत्रुविनाशाय दीपलक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥ १८ ॥ [ज्योति]
॥ इति श्री महालक्ष्मी स्तुतिः ॥
इस प्रकार श्री महालक्ष्मी स्तुतिः देवी महालक्ष्मी की भक्ति और आराधना का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। श्रद्धा एवं भक्ति के साथ इसके पाठ द्वारा भक्त सुख, समृद्धि, सौभाग्य और देवी की कृपा प्राप्त करने की प्रार्थना करते हैं।