श्री नटेश्वर भुजङ्ग स्तुतिः का संपूर्ण संस्कृत पाठ पढ़ें। भगवान नटराज (नटेश्वर) की महिमा, ताण्डव और दिव्य स्वरूप का वर्णन करने वाली इस पवित्र स्तुति के श्लोक यहां उपलब्ध हैं।
श्री नटेश्वर भुजङ्ग स्तुतिः भगवान शिव के नटराज स्वरूप को समर्पित एक पवित्र स्तुति है। इस स्तोत्र में भगवान नटेश्वर के दिव्य ताण्डव, ब्रह्मांडीय नृत्य और परम चेतन स्वरूप का सुंदर वर्णन किया गया है। इस लेख में श्री नटेश्वर भुजङ्ग स्तुतिः का संपूर्ण संस्कृत पाठ प्रस्तुत किया गया है।
श्री नटेश्वर भुजङ्ग स्तुतिः
लोकानाहूय सर्वान् डमरुकनिनदैर्घोरसंसारमग्नान्
दत्वाभीतिं दयालुः प्रणतभयहरं कुञ्चितं वामपादम् ।
उद्धृत्येदं विमुक्तेरयनमिति कराद्दर्शयन् प्रत्ययार्थं
बिभ्रद्वह्निं सभायां कलयति नटनं यः स पायान्नटेशः ॥ १ ॥
दिगीशादि वन्द्यं गिरीशानचापं
मुराराति बाणं पुरत्रासहासम् ।
करीन्द्रादि चर्माम्बरं वेदवेद्यं
महेशं सभेशं भजेऽहं नटेशम् ॥ २ ॥
समस्तैश्च भूतैः सदा नम्यमाद्यं
समस्तैकबन्धुं मनोदूरमेकम् ।
अपस्मारनिघ्नं परं निर्विकारं
महेशं सभेशं भजेऽहं नटेशम् ॥ ३ ॥
दयालुं वरेण्यं रमानाथवन्द्यं
महानन्दभूतं सदानन्दनृत्तम् ।
सभामध्यवासं चिदाकाशरूपं
महेशं सभेशं भजेऽहं नटेशम् ॥ ४ ॥
सभानाथमाद्यं निशानाथभूषं
शिवावामभागं पदाम्भोज लास्यम् ।
कृपापाङ्गवीक्षं ह्युमापाङ्गदृश्यं
महेशं सभेशं भजेऽहं नटेशम् ॥ ५ ॥
दिवानाथरात्रीशवैश्वानराक्षं
प्रजानाथपूज्यं सदानन्दनृत्तम् ।
चिदानन्दगात्रं परानन्दसौधं
महेशं सभेशं भजेऽहं नटेशम् ॥ ६ ॥
करेकाहलीकं पदेमौक्तिकालिं
गलेकालकूटं तलेसर्वमन्त्रम् ।
मुखे मन्दहासं भुजे नागराजं
महेशं सभेशं भजेऽहं नटेशम् ॥ ७ ॥
त्वदन्यं शरण्यं न पश्यामि शम्भो
मदन्यः प्रपन्नोस्ति किन्तेतिदीनः ।
मदर्थेह्युपेक्षा तवासीत्किमर्थं
महेशं सभेशं भजेऽहं नटेशम् ॥ ८ ॥
भवत्पादयुग्मं करेणावलम्बे
सदा नृत्तकारिन् सभामध्यदेशे ।
सदा भावये त्वां तदा दास्यसीष्टं
महेशं सभेशं भजेऽहं नटेशम् ॥ ९ ॥
भूयः स्वामिन् जनिर्मे मरणमपि तथा मास्तु भूयः सुराणां
साम्राज्यं तच्छ तावत्सुखलवरहितं दुःखदं नार्थये त्वाम् ।
सन्तापघ्नं पुरारे धुरि च तवसभा मन्दिरे सर्वदा त्व-
-न्नृत्तं पश्यन्वसेयं प्रमथगणवरैः साकमेतद्विधेहि ॥ १० ॥
इति श्री ज्ञानसम्बन्ध कृत श्री नटेश्वर भुजङ्ग स्तुतिः ।
इस प्रकार श्री नटेश्वर भुजङ्ग स्तुतिः भगवान शिव के नटराज स्वरूप की महिमा का गुणगान करने वाला एक दिव्य स्तोत्र है। श्रद्धा एवं भक्ति के साथ इसके पाठ द्वारा साधक भगवान शिव की कृपा, आध्यात्मिक जागृति और जीवन में मंगल की कामना करते हैं।