श्री नृसिंह नख स्तुतिः का संपूर्ण संस्कृत पाठ पढ़ें। भगवान नृसिंह के दिव्य नखों की महिमा का वर्णन करने वाली इस पवित्र स्तुति के श्लोक यहां उपलब्ध हैं।
श्री नृसिंह नख स्तुतिः भगवान नृसिंह के दिव्य नखों की महिमा का वर्णन करने वाली एक पवित्र स्तुति है। भगवान नृसिंह ने अपने नखों द्वारा हिरण्यकशिपु का वध कर धर्म और भक्ति की रक्षा की थी। इस लेख में श्री नृसिंह नख स्तुतिः का संपूर्ण संस्कृत पाठ प्रस्तुत किया गया है।
श्री नृसिंह नख स्तुतिः मूल पाठ
पान्त्वस्मान् पुरुहूतवैरिबलवन्मातङ्गमाद्यद्घटा-
-कुम्भोच्चाद्रिविपाटनाधिकपटु प्रत्येक वज्रायिताः ।
श्रीमत्कण्ठीरवास्यप्रततसुनखरा दारितारातिदूर-
-प्रध्वस्तध्वान्तशान्तप्रविततमनसा भाविता भूरिभागैः ॥ १ ॥
लक्ष्मीकान्त समन्ततोऽपि कलयन् नैवेशितुस्ते समं
पश्याम्युत्तमवस्तु दूरतरतोपास्तं रसो योऽष्टमः ।
यद्रोषोत्करदक्षनेत्रकुटिलप्रान्तोत्थिताग्नि स्फुरत्
खद्योतोपमविस्फुलिङ्गभसिता ब्रह्मेशशक्रोत्कराः ॥ २ ॥
इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्य विरचिता श्री नरसिंह नखस्तुतिः
इस प्रकार श्री नृसिंह नख स्तुतिः भगवान नृसिंह की अद्भुत शक्ति और भक्त संरक्षण का स्मरण कराती है। श्रद्धा एवं भक्ति के साथ इसके पाठ द्वारा भक्त भगवान नृसिंह की कृपा, सुरक्षा और आध्यात्मिक बल की प्रार्थना करते हैं।