श्री सहस्रार (सुदर्शन) स्तुतिः (संस्कृत) | Shri Sahasrara (Sudarshana) Stuti Lyrics in SanskritIt takes 2 minutes... to read this article !

श्री सहस्रार (सुदर्शन) स्तुतिः का संपूर्ण संस्कृत पाठ पढ़ें। भगवान सुदर्शन चक्र की महिमा, संरक्षण और दिव्य शक्ति का वर्णन करने वाली इस पवित्र स्तुति के श्लोक यहां उपलब्ध हैं।

श्री सहस्रार (सुदर्शन) स्तुतिः भगवान विष्णु के दिव्य आयुध सुदर्शन चक्र को समर्पित एक पवित्र स्तुति है। इस स्तुति में सुदर्शन भगवान की तेजस्विता, संरक्षण शक्ति तथा भक्तों के कल्याणकारी स्वरूप का वर्णन किया गया है। इस लेख में श्री सहस्रार (सुदर्शन) स्तुतिः का संपूर्ण संस्कृत पाठ प्रस्तुत किया गया है।

श्री सहस्रार (सुदर्शन) स्तुतिः मूल पाठ

सहस्रार महाशूर रणधीर गिरा स्तुतिम् ।
षट्कोणरिपुहृद्बाण सन्त्राण करवाणि ते ॥ १ ॥

यस्त्वत्तस्तप्तसुतनुः सोऽत्ति मुक्तिफलं किल ।
नातप्ततनुरित्यस्तौत् ख्याता वाक् त्वं महौजस ॥ २ ॥

हतवक्रद्विषच्चक्र हरिचक्र नमोऽस्तु ते ।
प्रकृतिघ्नासतां विघ्न त्वमभग्नपराक्रम ॥ ३ ॥

कराग्रे भ्रमणं विष्णोर्यदा ते चक्र जायते ।
तदा द्विधाऽपि भ्रमणं दृश्यतेऽन्तर्बहिर्द्विषाम् ॥ ४ ॥

वरादवध्यदैत्यौघशिरः खण्डनचातुरी ।
हरेरायुध ते दृष्टा न दृष्टा या हरायुधे ॥ ५ ॥

अवार्यवीर्यस्य हरेः कार्येषु त्वं धुरन्धरः ।
असाध्यसाधको राट् ते त्वं चासाध्यस्य साधकः ॥ ६ ॥

ये विघ्नकन्धराश्चक्र दैतेयास्तव धारया ।
त एव चित्रमनयंस्तथाऽप्यच्छिन्नकन्धराम् ॥ ७ ॥

अरे तवाग्रे नृहरेररिः कोऽपि न जीवति ।
नेमे तवाग्रे कामाद्या नेमे जीवन्त्वहो द्विषः ॥ ८ ॥

पवित्र पविवत् त्राहि पवित्रीकुरु चाश्रितान् ।
चरण श्रीशचरणौ स्थिरीकुरु मनस्सु नः ॥ ९ ॥

यस्त्वं दुर्वाससः पृष्ठनिष्ठो दृष्टोऽखिलैः सुरैः ।
अस्तावयः स्वभर्तारं सत्वं स्तावय मद्गिरा ॥ १० ॥

भूस्थदुर्दर्शनं सर्वं धिक्कुरुष्व सुदर्शन ।
वायोः सुदर्शनं सर्वस्यायोध्यं कुरु ते नमः ॥ ११ ॥

सुष्ठु दर्शय लक्ष्मीशतत्त्वं सूर्यायुतप्रभ ।
द्वारं नः कुरु हर्याप्त्यै कृतद्वार त्वमस्यपि ॥ १२ ॥

पद्यानि निरवद्यानि वादिराजाभिधः सुधीः ।
द्वादश द्वादशारस्य चक्रस्य स्तुतयेऽकृत ॥ १३ ॥

इति श्रीवादिराजयति कृतं श्री सहस्रार स्तुतिः ।

इस प्रकार श्री सहस्रार (सुदर्शन) स्तुतिः भगवान सुदर्शन की आराधना का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। श्रद्धा एवं भक्ति के साथ इसके पाठ द्वारा भक्त दिव्य संरक्षण, बाधा निवारण और भगवान विष्णु की कृपा की प्रार्थना करते हैं।

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