श्री पुरुषोत्तम स्तुतिः (प्रह्लाद कृतम्) का संपूर्ण संस्कृत पाठ पढ़ें। भक्त प्रह्लाद द्वारा भगवान पुरुषोत्तम की महिमा का वर्णन करने वाली इस पवित्र स्तुति के श्लोक यहां उपलब्ध हैं।
श्री पुरुषोत्तम स्तुतिः (प्रह्लाद कृतम्) भगवान पुरुषोत्तम (विष्णु) की महिमा का वर्णन करने वाली एक पवित्र स्तुति है, जिसे भक्त प्रह्लाद द्वारा प्रस्तुत किया गया माना जाता है। इस स्तुति में भगवान के दिव्य गुणों, करुणा और भक्तवत्सल स्वरूप का सुंदर वर्णन मिलता है। इस लेख में श्री पुरुषोत्तम स्तुतिः (प्रह्लाद कृतम्) का संपूर्ण संस्कृत पाठ प्रस्तुत किया गया है।
श्री पुरुषोत्तम स्तुतिः (प्रह्लाद कृतम्) मूल पाठ
ओं नमः परमार्थार्थ स्थूलसूक्ष्मक्षराक्षर ।
व्यक्ताव्यक्त कलातीत सकलेश निरञ्जन ॥ १ ॥
गुणाञ्जन गुणाधार निर्गुणात्मन् गुणस्थिर ।
मूर्तामूर्त महामूर्ते सूक्ष्ममूर्ते स्फुटास्फुट ॥ २ ॥
करालसौम्यरूपात्मन् विद्याविद्यालयाच्युत ।
सदसद्रूप सद्भाव सदसद्भावभावन ॥ ३ ॥
नित्यानित्यप्रपञ्चात्मन् निष्प्रपञ्चामलाश्रित ।
एकानेक नमस्तुभ्यं वासुदेवादिकारण ॥ ४ ॥
यः स्थूलसूक्ष्मः प्रकटः प्रकाशो
यः सर्वभूतो न च सर्वभूतः ।
विश्वं यतश्चैतदविश्वहेतो-
-र्नमोऽस्तु तस्मै पुरुषोत्तमाय ॥ ५ ॥
इति श्रीविष्णुपुराणे प्रथमांशे विंशोऽध्याये प्रह्लादकृत श्री पुरुषोत्तम स्तुतिः ।
इस प्रकार श्री पुरुषोत्तम स्तुतिः (प्रह्लाद कृतम्) भगवान विष्णु के प्रति भक्त प्रह्लाद की अटूट श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है। श्रद्धापूर्वक इसके पाठ द्वारा भक्त भगवान पुरुषोत्तम की कृपा, संरक्षण, भक्ति एवं आध्यात्मिक उन्नति की प्रार्थना करते हैं।