श्री नृसिंह संस्तुतिः (संस्कृत) | Shri Narasimha Samstuti Lyrics in SanskritIt takes 1 minutes... to read this article !

श्री नृसिंह संस्तुतिः का संपूर्ण संस्कृत पाठ पढ़ें। भगवान नृसिंह की महिमा, शक्ति और भक्त संरक्षण का वर्णन करने वाली इस पवित्र स्तुति के श्लोक यहां उपलब्ध हैं।

श्री नृसिंह संस्तुतिः भगवान विष्णु के नृसिंह अवतार को समर्पित एक पवित्र स्तुति है। इस स्तुति में भगवान नृसिंह के दिव्य स्वरूप, अद्भुत पराक्रम, भक्तवत्सलता तथा धर्म रक्षा के गुणों का वर्णन किया गया है। इस लेख में श्री नृसिंह संस्तुतिः का संपूर्ण संस्कृत पाठ प्रस्तुत किया गया है।

श्री नृसिंह संस्तुतिः मूल पाठ

भैरवाडम्बरं बाहुदंष्ट्रायुधं
चण्डकोपं महाज्वालमेकं प्रभुम् ।
शङ्खचक्राब्जहस्तं स्मरात्सुन्दरं
ह्युग्रमत्युष्णकान्तिं भजेऽहं मुहुः ॥ १ ॥

दिव्यसिंहं महाबाहुशौर्यान्वितं
रक्तनेत्रं महादेवमाशाम्बरम् ।
रौद्रमव्यक्तरूपं च दैत्याम्बरं
वीरमादित्यभासं भजेऽहं मुहुः ॥ २ ॥

मन्दहासं महेन्द्रेन्द्रमादिस्तुतं
हर्षदं श्मश्रुवन्तं स्थिरज्ञप्तिकम् ।
विश्वपालैर्विवन्द्यं वरेण्याग्रजं
नाशिताशेषदुःखं भजेऽहं मुहुः ॥ ३ ॥

सव्यजूटं सुरेशं वनेशायिनं
घोरमर्कप्रतापं महाभद्रकम् ।
दुर्निरीक्ष्यं सहस्राक्षमुग्रप्रभं
तेजसा सञ्ज्वलन्तं भजेऽहं मुहुः ॥ ४ ॥

सिंहवक्त्रं शरीरेण लोकाकृतिं
वारणं पीडनानां समेषां गुरुम् ।
तारणं लोकसिन्धोर्नराणां परं
मुख्यमस्वप्नकानां भजेऽहं मुहुः ॥ ५ ॥

पावनं पुण्यमूर्तिं सुसेव्यं हरिं
सर्वविज्ञं भवन्तं महावक्षसम् ।
योगिनन्दं च धीरं परं विक्रमं
देवदेवं नृसिंहं भजेऽहं मुहुः ॥ ६ ॥

सर्वमन्त्रैकरूपं सुरेशं शुभं
सिद्धिदं शाश्वतं सत्त्रिलोकेश्वरम् ।
वज्रहस्तेरुहं विश्वनिर्मापकं
भीषणं भूमिपालं भजेऽहं मुहुः ॥ ७ ॥

सर्वकारुण्यमूर्तिं शरण्यं सुरं
दिव्यतेजःसमानप्रभं दैवतम् ।
स्थूलकायं महावीरमैश्वर्यदं
भद्रमाद्यन्तवासं भजेऽहं मुहुः ॥ ८ ॥

भक्तवात्सल्यपूर्णं च सङ्कर्षणं
सर्वकामेश्वरं साधुचित्तस्थितम् ।
लोकपूज्यं स्थिरं चाच्युतं चोत्तमं
मृत्युमृत्युं विशालं भजेऽहं मुहुः ॥ ९ ॥

भक्तिपूर्णां कृपाकारणां संस्तुतिं
नित्यमेकैकवारं पठन् सज्जनः ।
सर्वदाऽऽप्नोति सिद्धिं नृसिंहात् कृपां
दीर्घमायुष्यमारोग्यमप्युत्तमम् ॥ १० ॥

इति श्री नृसिंह संस्तुतिः ।

इस प्रकार श्री नृसिंह संस्तुतिः भगवान नृसिंह की भक्ति और आराधना का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। श्रद्धा एवं भक्ति के साथ इसके पाठ द्वारा भक्त भगवान की कृपा, निर्भयता, संरक्षण तथा आध्यात्मिक उन्नति की प्रार्थना करते हैं।

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