श्री नृसिंह स्तुतिः (शुक्राचार्य कृतम्) का संपूर्ण संस्कृत पाठ पढ़ें। शुक्राचार्य द्वारा रचित भगवान नृसिंह की इस पवित्र स्तुति के श्लोक यहां शुद्ध एवं सरल रूप में उपलब्ध हैं।
श्री नृसिंह स्तुतिः (शुक्राचार्य कृतम्) भगवान नृसिंह की महिमा, तेज, करुणा और भक्त संरक्षण का वर्णन करने वाली एक पवित्र स्तुति है। यह स्तुति शुक्राचार्य द्वारा रचित मानी जाती है और भगवान नृसिंह की दिव्य शक्ति का सुंदर गुणगान करती है। इस लेख में श्री नृसिंह स्तुतिः (शुक्राचार्य कृतम्) का संपूर्ण संस्कृत पाठ प्रस्तुत किया गया है।
श्री नृसिंह स्तुतिः (शुक्राचार्य कृतम्) मूल पाठ
शुक्र उवाच ।
नमामि देवं विश्वेशं वामनं विष्णुरूपिणम् ।
बलिदर्पहरं शान्तं शाश्वतं पुरुषोत्तमम् ॥ १ ॥
धीरं शूरं महादेवं शङ्खचक्रगदाधरम् ।
विशुद्धं ज्ञानसम्पन्नं नमामि हरिमच्युतम् ॥ २ ॥
सर्वशक्तिमयं देवं सर्वगं सर्वभावनम् ।
अनादिमजरं नित्यं नमामि गरुडध्वजम् ॥ ३ ॥
सुरासुरैर्भक्तिमद्भिः स्तुतो नारायणः सदा ।
पूजितं च हृषीकेशं तं नमामि जगद्गुरुम् ॥ ४ ॥
हृदि सङ्कल्प्य यद्रूपं ध्यायन्ति यतयः सदा ।
ज्योतीरूपमनौपम्यं नरसिंहं नमाम्यहम् ॥ ५ ॥
न जानन्ति परं रूपं ब्रह्माद्या देवतागणाः ।
यस्यावताररूपाणि समर्चन्ति नमामि तम् ॥ ६ ॥
एतत् समस्तं येनादौ सृष्टं दुष्टवधात्पुनः ।
त्रातं यत्र जगल्लीनं तं नमामि जनार्दनम् ॥ ७ ॥
भक्तैरभ्यर्चितो यस्तु नित्यं भक्तप्रियो हि यः ।
तं देवममलं दिव्यं प्रणमामि जगत्पतिम् ॥ ८ ॥
दुर्लभं चापि भक्तानां यः प्रयच्छति तोषितः ।
तं सर्वसाक्षिणं विष्णुं प्रणमामि सनातनम् ॥ ९ ॥
इति श्रीनरसिंहपुराणे पञ्चपञ्चाशोऽध्याये शुक्राचार्य कृत श्री नरसिंह स्तुतिः ॥
इस प्रकार श्री नृसिंह स्तुतिः (शुक्राचार्य कृतम्) भगवान नृसिंह की भक्ति और आराधना का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। श्रद्धा एवं भक्ति के साथ इसके पाठ द्वारा भक्त भगवान नृसिंह की कृपा, संरक्षण, निर्भयता तथा आध्यात्मिक उन्नति की प्रार्थना करते हैं।