श्री नारायणी स्तुति (संस्कृत) | Shri Narayani Stuti Lyrics in SanskritIt takes 2 minutes... to read this article !

श्री नारायणी स्तुति का संपूर्ण संस्कृत पाठ पढ़ें। माँ नारायणी की महिमा, शक्ति, करुणा और भक्तों की रक्षा करने वाले दिव्य स्वरूप का वर्णन करने वाली इस पवित्र स्तुति के श्लोक यहां उपलब्ध हैं।

श्री नारायणी स्तुति माँ दुर्गा के नारायणी स्वरूप की महिमा का वर्णन करने वाली एक अत्यंत पवित्र एवं प्रसिद्ध स्तुति है। यह स्तुति देवी महात्म्य (दुर्गा सप्तशती) में वर्णित है, जिसमें देवताओं द्वारा देवी की शक्ति, करुणा, संरक्षण और विश्वपालन करने वाले स्वरूप का गुणगान किया गया है। इस लेख में श्री नारायणी स्तुति का संपूर्ण संस्कृत पाठ प्रस्तुत किया गया है।

सर्वस्य बुद्धिरूपेण जनस्य हृदि संस्थिते ।
स्वर्गापवर्गदे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥ १ ॥

कलाकाष्ठादिरूपेण परिणामप्रदायिनि ।
विश्वस्योपरतौ शक्ते नारायणि नमोऽस्तु ते ॥ २ ॥

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके ।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥ ३ ॥

सृष्टिस्थितिविनाशानां शक्तिभूते सनातनि ।
गुणाश्रये गुणमये नारायणि नमोऽस्तु ते ॥ ४ ॥

शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे ।
सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥ ५ ॥

हंसयुक्तविमानस्थे ब्रह्माणीरूपधारिणि ।
कौशाम्भःक्षरिके देवि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥ ६ ॥

त्रिशूलचन्द्राहिधरे महावृषभवाहिनि ।
माहेश्वरीस्वरूपेण नारायणि नमोऽस्तुते ॥ ७ ॥

मयूरकुक्कुटवृते महाशक्तिधरेऽनघे ।
कौमारीरूपसंस्थाने नारायणि नमोऽस्तु ते ॥ ८ ॥

शङ्खचक्रगदाशार्ङ्गगृहीतपरमायुधे ।
प्रसीद वैष्णवीरूपे नारायणि नमोऽस्तु ते ॥ ९ ॥

गृहीतोग्रमहाचक्रे दम्ष्ट्रोद्धृतवसुन्धरे ।
वराहरूपिणि शिवे नारायणि नमोऽस्तु ते ॥ १० ॥

नृसिंहरूपेणोग्रेण हन्तुं दैत्यान् कृतोद्यमे ।
त्रैलोक्यत्राणसहिते नारायणि नमोऽस्तु ते ॥ ११ ॥

किरीटिनि महावज्रे सहस्रनयनोज्ज्वले ।
वृत्रप्राणहरे चैन्द्रि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥ १२ ॥

शिवदूतीस्वरूपेण हतदैत्यमहाबले ।
घोररूपे महारावे नारायणि नमोऽस्तु ते ॥ १३ ॥

दम्ष्ट्राकरालवदने शिरोमालाविभूषणे ।
चामुण्डे मुण्डमथने नारायणि नमोऽस्तु ते ॥ १४ ॥

लक्ष्मि लज्जे महाविद्ये श्रद्धे पुष्टि स्वधे ध्रुवे ।
महारात्रि महामाये नारायणि नमोऽस्तु ते ॥ १५ ॥

मेधे सरस्वति वरे भूति बाभ्रवि तामसि ।
नियते त्वं प्रसीदेशे नारायणि नमोऽस्तुते ॥ १६ ॥

इस प्रकार श्री नारायणी स्तुति आदिशक्ति की महिमा का गुणगान करने वाला एक दिव्य स्तोत्र है। श्रद्धा एवं भक्ति के साथ इसके पाठ द्वारा भक्त देवी की कृपा, संरक्षण, सुख-समृद्धि तथा आध्यात्मिक उन्नति की प्रार्थना करते हैं।

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